Forwarded from Vidya Updates
इन चंद कागज़ के टुकड़ों (डिग्रियों) को हासिल करने के लिए न जाने कितने दीर्घ उत्तरीय, लघु उत्तरीय और बहुविकल्पीय प्रश्नों से गुजरना पड़ता है।
कितने साल हॉस्टल का बेस्वाद खाना खाना पड़ता है, कितनी बार रोटियाँ बनाते हुए हाथ जलाने पड़ते हैं, कितनी ट्रेनों में धक्के खाने पड़ते हैं और कितनी रातें रेलवे स्टेशनों पर मच्छरों के बीच गुजारनी पड़ती हैं।
अपने सपनों के लिए न जाने कितनी इच्छाओं का त्याग करना पड़ता है। परिवार से दूर रहकर अकेले संघर्ष करना पड़ता है।
और फिर भी अगर सरकारी नौकरी नहीं मिलती, तो समाज ताना मारता है—
👉 "इतना पढ़-लिखकर आखिर क्या उखाड़ लिया?"
लेकिन याद रखना, सरकारी नौकरी न मिलना तुम्हारी शिक्षा और मेहनत की हार नहीं है।
तुम्हारी डिग्री सिर्फ नौकरी का कागज़ नहीं, बल्कि तुम्हारे वर्षों के संघर्ष, त्याग और मेहनत की पहचान है।
समाज के तानों से टूटना मत, अपने सपनों के लिए लड़ते रहना। ❤️
कितने साल हॉस्टल का बेस्वाद खाना खाना पड़ता है, कितनी बार रोटियाँ बनाते हुए हाथ जलाने पड़ते हैं, कितनी ट्रेनों में धक्के खाने पड़ते हैं और कितनी रातें रेलवे स्टेशनों पर मच्छरों के बीच गुजारनी पड़ती हैं।
अपने सपनों के लिए न जाने कितनी इच्छाओं का त्याग करना पड़ता है। परिवार से दूर रहकर अकेले संघर्ष करना पड़ता है।
और फिर भी अगर सरकारी नौकरी नहीं मिलती, तो समाज ताना मारता है—
👉 "इतना पढ़-लिखकर आखिर क्या उखाड़ लिया?"
लेकिन याद रखना, सरकारी नौकरी न मिलना तुम्हारी शिक्षा और मेहनत की हार नहीं है।
तुम्हारी डिग्री सिर्फ नौकरी का कागज़ नहीं, बल्कि तुम्हारे वर्षों के संघर्ष, त्याग और मेहनत की पहचान है।
समाज के तानों से टूटना मत, अपने सपनों के लिए लड़ते रहना। ❤️
❤22👍2👏1🤔1🙏1