एक अमेरिकन कम्पनी है ब्लैक रॉक. नाम से ही लगता है कि कम्पनी का नाम रखने में मेहनत नहीं की गई. एक सामान्य मिडिल क्लास व्यक्ति लैरी फिंक ने यह कम्पनी 1988 में आरंभ की. यह कंपनी ऐसेट मैनेजमेंट अर्थात् दूसरों के पैसे मैनेज करती है. बस तीस बत्तीस साल में आज यह कंपनी दस ट्रिलियन डॉलर मैनेज कर रही है. ऐसी कहानियाँ अमेरिका में अनगिनत हैं.
अब आते हैं मूल विषय पर भारत का वार्षिक बजट हॉफ़ ट्रिलियन है. यह कंपनी दस ट्रिलियन अपने क्लाइंट के मैनेज करती है, 20% रिटर्न भी दिये तो भारत जैसे विशाल देश के बजट का चार गुना यह फ़ायदा कैश में कमवाती है अपने क्लाइंट्स को एशिया में यह चाइना में ज़्यादा फोकस्ड है पर भारत में भी शायद ही कोई कंपनी हो जिसमे डायरेक्ट या इनडायरेक्ट इनकी ओनरशिप न हो.
इसके मालिक की वेल्थ भले ही एक बिलियन डालर मानी जाती हो क्योंकि यह दूसरों का पैसा लगाते हैं उन्हें रिटर्न देते हैं बदले में एक दो प्रतिशत फ़ायदा लेते हैं, पर इनकी ताक़त आप समझ सकते हैं. किसी भी बड़े से बड़े उद्योगपति से सौ गुना इनकी ताक़त है क्योंकि इनडायरेक्टली यह अम्बानी की कंपनियाँ भी ओन करते हैं अदानी भी और पेटीएम भी और बाइजू भी.
इस लेवल पर यह अपनी पर आ जायें तो किसी भी देश की सरकार बना गिरा सकते हैं. करते ही हैं. दसियों देशों की सरकारें इनडायरेक्टली यह चलाते हैं. पैसा ही नहीं पॉवर भी है. कल्पना कीजिये नेता जी थाईलैण्ड होटल में गये गर्लफ्रेंड के साथ. होटल के इनडायरेक्ट मालिक भी यही हैं और होटल में जो बाथरूम हैं उसके शावर से बल्ब की कंपनी के मालिक भी यही हैं. नेता जी ने जिस स्विस कार्ड से पेमेंट की वह बैंक भी यही हैं. अपनी पर आ जायें तो नेता जी इनके ग़ुलाम हो जाएँगे.
ऐसे ही एक फण्ड मैनेजर हैं जॉर्ज सोरोस. इनकी निगाह भारत में अपनी सरकार बनाने पर है. आपने देखा होगा अभी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान इनके employees राहुल गांधी के साथ दौड़ रहे थे. ऐसा नहीं कि यह राहुल गांधी के इसारे पर कार्य कर रहे हों. हक़ीक़त उल्टी है, राहुल गांधी इनके इसारे पर काम कर रहे हैं।
इनसे टक्कर लेना इतना आसान नहीं होता क्योंकि इनकी ताक़त असीमित है. कोई ठिकाना ही नहीं आपके पक्ष के भी कई लोग इनडायरेक्टली इन्हीं को रिपोर्ट करते हों.
पर अच्छी बात यह है कि मोदी का शत्रु हंता योग सबसे प्रबल है. इतिहास में कोई ऐसा न रहा जिसने मोदी से पंगा लिया हो और समय के साथ वह बर्बाद न हुआ हो. एक भी न बच पायेंगे.
अब तेरा क्या होगा जार्ज!
अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चंडाल का,
काल उसका क्या करे जो भक्त महाकाल का।🙏
ॐ नमः शिवाय। 🕉
@Hindu
अब आते हैं मूल विषय पर भारत का वार्षिक बजट हॉफ़ ट्रिलियन है. यह कंपनी दस ट्रिलियन अपने क्लाइंट के मैनेज करती है, 20% रिटर्न भी दिये तो भारत जैसे विशाल देश के बजट का चार गुना यह फ़ायदा कैश में कमवाती है अपने क्लाइंट्स को एशिया में यह चाइना में ज़्यादा फोकस्ड है पर भारत में भी शायद ही कोई कंपनी हो जिसमे डायरेक्ट या इनडायरेक्ट इनकी ओनरशिप न हो.
इसके मालिक की वेल्थ भले ही एक बिलियन डालर मानी जाती हो क्योंकि यह दूसरों का पैसा लगाते हैं उन्हें रिटर्न देते हैं बदले में एक दो प्रतिशत फ़ायदा लेते हैं, पर इनकी ताक़त आप समझ सकते हैं. किसी भी बड़े से बड़े उद्योगपति से सौ गुना इनकी ताक़त है क्योंकि इनडायरेक्टली यह अम्बानी की कंपनियाँ भी ओन करते हैं अदानी भी और पेटीएम भी और बाइजू भी.
इस लेवल पर यह अपनी पर आ जायें तो किसी भी देश की सरकार बना गिरा सकते हैं. करते ही हैं. दसियों देशों की सरकारें इनडायरेक्टली यह चलाते हैं. पैसा ही नहीं पॉवर भी है. कल्पना कीजिये नेता जी थाईलैण्ड होटल में गये गर्लफ्रेंड के साथ. होटल के इनडायरेक्ट मालिक भी यही हैं और होटल में जो बाथरूम हैं उसके शावर से बल्ब की कंपनी के मालिक भी यही हैं. नेता जी ने जिस स्विस कार्ड से पेमेंट की वह बैंक भी यही हैं. अपनी पर आ जायें तो नेता जी इनके ग़ुलाम हो जाएँगे.
ऐसे ही एक फण्ड मैनेजर हैं जॉर्ज सोरोस. इनकी निगाह भारत में अपनी सरकार बनाने पर है. आपने देखा होगा अभी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान इनके employees राहुल गांधी के साथ दौड़ रहे थे. ऐसा नहीं कि यह राहुल गांधी के इसारे पर कार्य कर रहे हों. हक़ीक़त उल्टी है, राहुल गांधी इनके इसारे पर काम कर रहे हैं।
इनसे टक्कर लेना इतना आसान नहीं होता क्योंकि इनकी ताक़त असीमित है. कोई ठिकाना ही नहीं आपके पक्ष के भी कई लोग इनडायरेक्टली इन्हीं को रिपोर्ट करते हों.
पर अच्छी बात यह है कि मोदी का शत्रु हंता योग सबसे प्रबल है. इतिहास में कोई ऐसा न रहा जिसने मोदी से पंगा लिया हो और समय के साथ वह बर्बाद न हुआ हो. एक भी न बच पायेंगे.
अब तेरा क्या होगा जार्ज!
अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चंडाल का,
काल उसका क्या करे जो भक्त महाकाल का।🙏
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धर्म चक्र सक्रिय
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धर्म चक्र सक्रिय निश्चित पाप निष्क्रीय
प्राण से भी है प्रिय सम्मान हिन्दू धर्म की
ये देश राम बुद्ध की कुरूक्षेत्र युद्ध की
माँ गंगा ने जो शुद्ध की वो राष्ट्र भारत वर्ष है
जय महाबली हनुमान की समय है रक्त स्नान की
जो वीर लङ के प्राण दी वो शेर धर्म हिन्दू हेै
माँ चण्डी का तू भक्त है ये युद्ध का ही वक्त है
वो शेष तक जो रक्त है अधर्मियो का प्राण लो
जहां माँ दुर्गा पूजा हो वहाँ न धर्म दूजा हो
जो बोले शिव से ऊँचा हो वो सर ही धङ से काट दो
हिमालय के शिखर से समुद्र की वो लहरें तक
हरी भरी वो गांव से इमारतों के शहर तक
जो चेहरे हैं वो हिन्दू है हम एक है तू याद रख
तू भूल मत शिवाजी को थे शेर-ए हिन्दू याद कर
सब हिन्दू घर की लक्ष्मी को तू शस्त्र दे के झांसी कर
माँ काली से तू खड्ग ले तू काट दे वो हर गले
तू बाँट दे ये जिंदगी जो राम नाम से जले
जला जला के राख कर दया क्षमा को त्याग कर
वीभत्स ऐसी मौत हो कि बच ना पाए भाग करे
चेतावनी दे चीख के न समझे तो ये सीख दे
के पूजे वो ये भूमि को सर पे हिन्दू लिख के
...
@Hindu
प्राण से भी है प्रिय सम्मान हिन्दू धर्म की
ये देश राम बुद्ध की कुरूक्षेत्र युद्ध की
माँ गंगा ने जो शुद्ध की वो राष्ट्र भारत वर्ष है
जय महाबली हनुमान की समय है रक्त स्नान की
जो वीर लङ के प्राण दी वो शेर धर्म हिन्दू हेै
माँ चण्डी का तू भक्त है ये युद्ध का ही वक्त है
वो शेष तक जो रक्त है अधर्मियो का प्राण लो
जहां माँ दुर्गा पूजा हो वहाँ न धर्म दूजा हो
जो बोले शिव से ऊँचा हो वो सर ही धङ से काट दो
हिमालय के शिखर से समुद्र की वो लहरें तक
हरी भरी वो गांव से इमारतों के शहर तक
जो चेहरे हैं वो हिन्दू है हम एक है तू याद रख
तू भूल मत शिवाजी को थे शेर-ए हिन्दू याद कर
सब हिन्दू घर की लक्ष्मी को तू शस्त्र दे के झांसी कर
माँ काली से तू खड्ग ले तू काट दे वो हर गले
तू बाँट दे ये जिंदगी जो राम नाम से जले
जला जला के राख कर दया क्षमा को त्याग कर
वीभत्स ऐसी मौत हो कि बच ना पाए भाग करे
चेतावनी दे चीख के न समझे तो ये सीख दे
के पूजे वो ये भूमि को सर पे हिन्दू लिख के
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स्वयं अब जागकर हमको
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स्वयं अब जागकर हमको,जगाना देश है अपना
जगाना देश है अपना, जगाना देश है अपना
हमारे देश की मिट्टी हमें प्राणों से प्यारी है
यहीं के अन्न जल वायु परम श्रद्धा हमारी है
स्वभाषा है हमें प्यारी ओ प्यारा देश है अपना
समय है अब नहीं कोई गहन निद्रा में सोने का
समय है एक होने का न मतभेदों में खोने का
बढ़े बल राष्ट्र का जिससे वो करना मेल है अपना
जतन हो संगठित हिंदू सक्रिय भाव भरने का
जगाने राष्ट्र की भक्ति उत्तम कार्य करने का
समुन्नत राष्ट्र हो भारत यही उद्देश्य है अपना
#hindi #prerana
@Geet_Ganga
जगाना देश है अपना, जगाना देश है अपना
हमारे देश की मिट्टी हमें प्राणों से प्यारी है
यहीं के अन्न जल वायु परम श्रद्धा हमारी है
स्वभाषा है हमें प्यारी ओ प्यारा देश है अपना
समय है अब नहीं कोई गहन निद्रा में सोने का
समय है एक होने का न मतभेदों में खोने का
बढ़े बल राष्ट्र का जिससे वो करना मेल है अपना
जतन हो संगठित हिंदू सक्रिय भाव भरने का
जगाने राष्ट्र की भक्ति उत्तम कार्य करने का
समुन्नत राष्ट्र हो भारत यही उद्देश्य है अपना
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मेरा भोला है भंडारी
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जब घर रंगे जाते हैं, तो दीपावली...
ओर जब घरवाले रंगे जाते हैं, तो होली ।
जब घर में दीपक जलाए जाते हैं, तो दीपावली...
और जब बाहर चौक में अग्नि जलाई जाती है, तो होली ।
एक में केवल अग्नि (प्रकाश) है,
तो दूसरे में अग्नि के बाद जल भी है ।
दीपावली भगवान का त्यौहार है,
तो होली भक्त का त्यौहार है ।
जब बाहर रोशनी हो, तो दीपावली ।
और जब अन्तर्मन में रोशनी हो, तो होली ।
अब होली आज खेलो या कल खेलो पर खूब धूम धाम से खेलो... जरूर खेलें.. गुलाल से, रंग से, पानी से खेलें...
अपने अंदर का इंसान जिंदा रखें, अपना बचपना जिंदा रखें..
आपको रंगोत्सव होली की हार्दिक शुभकामनायें...
@Hindu
ओर जब घरवाले रंगे जाते हैं, तो होली ।
जब घर में दीपक जलाए जाते हैं, तो दीपावली...
और जब बाहर चौक में अग्नि जलाई जाती है, तो होली ।
एक में केवल अग्नि (प्रकाश) है,
तो दूसरे में अग्नि के बाद जल भी है ।
दीपावली भगवान का त्यौहार है,
तो होली भक्त का त्यौहार है ।
जब बाहर रोशनी हो, तो दीपावली ।
और जब अन्तर्मन में रोशनी हो, तो होली ।
अब होली आज खेलो या कल खेलो पर खूब धूम धाम से खेलो... जरूर खेलें.. गुलाल से, रंग से, पानी से खेलें...
अपने अंदर का इंसान जिंदा रखें, अपना बचपना जिंदा रखें..
आपको रंगोत्सव होली की हार्दिक शुभकामनायें...
@Hindu
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पिछले 5-7 सालों में एक बात अच्छी हुई है..... हम फिर से अपने त्यौहार मनाने लग गए हैं... और जोर शोर से मनाने लग गए हैं.
वरना पिछले 2 दशकों से चल रहे गुप चुप प्रोपेगंडा के कारण हम अपने त्यौहारो को भुला ही चुके थे.... टीवी फ़िल्में और अखबारो में बताई बातों को सुनते देखते यह सब त्यौहार हमें बेमानी से लगने लगे थे.
चाहे शिवरात्रि पर जल या दूध चढ़ाने को बुरा बताना हो... होली पर रंग गुलाल और पानी से खेलने को बुरा बताना हो..... दिवाली पर पटाखे से होने वाले प्रदूषण या जानवरो की तकलीफ हो...... रक्षाबंधन पर Equality Patriarchy का concept हो... चाहे करवाचौथ को कुरीति या महिला अधिकार विरोधी बताना हो...... एक वर्ग विशेष ने Media फिल्मों नाटकों आदि का सहारा ले कर इन सभी त्यौहारो की छवि को बिगाड़ने का काम किया.
याद कीजिए जब कोई भी त्यौहार आता था.. एकाएक मिलावटी मावा मिलने की ख़बरों से अखबार भर जाया करते थे...... लोगों के मन में यह Plant किया गया कि मावा तो नकली होता है... मीठा खाना है तो चॉकलेट खाइये.
मैं खबरों पर निगाह रखता हूँ.... दावे से कह सकता हूँ कि पिछले कुछ सालों से मिलावटी मावे की खबरे आना बहुत कम हो गई हैं....लेकिन इसी बीच चॉकलेट ने त्यौहार पर मिठाई का एक बड़ा market कब्ज़ा लिया है.
त्यौहारो पर भीड़ भाड़ के इलाकों में चेतावनी मिला करती थी.... बम विस्फोट हुआ करते थे... लोगों ने त्यौहारो के समय बाहर जाना, समारोहो में जाना बंद कर दिया था.
एक प्रोपेगंडा चला कर समाज में Guilt की भावना बैठा दी गई.... कि आप पानी से खेलेंगे तो कितना नुकसान होगा... आप पठाखे चलाएंगे तो वातावरण खराब होगा.... पत्नी से व्रत करवाएंगे तो महिला विरोधी कहलाएंगे.... बहन को रक्षा का वचन दे कर उसे दोयम दर्जे का होने का अहसास करायेंगे...... शिवरात्रि पर दूध चढ़ा कर आप ना जाने कौन सा पाप कर रहे हैं.
और धीरे धीरे यही guilt आपको त्यौहारो से दूर ले जाती गई...... यह प्रवृति और भी बढ़ती... लेकिन तभी आता है Social Media.... एक ऐसा माध्यम जिसमें हर इंसान की भागीदारी होती है... जो One-Way ना हो कर एक Hybrid model है.. जहाँ कोई भी अपने विचार रख सकता है...
लोगों ने त्यौहारो के पीछे छुपे विज्ञान और धार्मिक मान्यताओं को सामने रखना शुरू किया... तथ्यों को रखना शुरू किया... इससे जो प्रोपेगंडा चल रहा था, वह धीरे धीरे टूटना शुरू हुआ.... लोगों को समझ आया कि हम तो बेवजह Guilt में जी रहे थे.... और यही कारण है कि अब लोगों ने बढ़ चढ़ कर त्यौहारो और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया है.
आज शहरों में हर सोसाइटी में त्यौहार मनाये जाते हैं.... बाकायदा Planning होती है.. पैसा इकठ्ठा किया जाता है... पूरे जोरशोर से किया जाता है... और सबसे अच्छी बात है कि हमारा 10 साल से लेकर 45 साल तक का जो वर्ग है.. उसका Participation बहुत ज्यादा होता है इन गतिविधियों में.
और यह सिर्फ त्यौहारो तक ही सीमित नहीं है....26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व भी कहीं अधिक जोर शोर से मनाये जाने लगे हैं... वहीं छठ, नवरात्री, लोहड़ी, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी जैसे पर्व अब कहीं ज्यादा व्यापक स्तर पर मनाये जाते हैं.... और इसका प्रभाव अब टीवी सीरियल, OTT पर भी दिखता है... जहाँ इन त्यौहारो के समय स्पेशल एपिसोड बनाये जाते हैं... और उसमे इन त्यौहारो को अच्छे तरीके से चित्रित भी किया जाता है.
आपको जानकार अच्छा लगेगा कि राम जन्म भूमि के लिए चंदा जमा करने जैसे काम में सबसे ज्यादा भाग लिया था IT, Banking, Marketing, Education और private sector के लोगों ने.... बड़ी बड़ी कंपनियों में Director, GM, VP जैसे लोग भी इन गतिविधियों में खुल कर भाग ले रहे थे.
कुल मिलाकर बात यही है कि जो लोग हमारे त्यौहारो का विरोध किया करते थे... उनकी चाल उलटी पड़ चुकी है... और एक आम इंसान अब अपने धर्म और संस्कृती से कहीं ज्यादा जुड़ रहा है.... जो एक अच्छा trend है.
इस बड़े लेख का सारांश यही है... कि अपने त्यौहारो को पूरे मन से मनाएं.. कोई Guilt ना रखें.... उनके पीछे के Logic और विज्ञान को समझें... और अपने बड़े बूढ़े और बच्चों के साथ मिलकर इन्हे मनाएं.
@Hindu
वरना पिछले 2 दशकों से चल रहे गुप चुप प्रोपेगंडा के कारण हम अपने त्यौहारो को भुला ही चुके थे.... टीवी फ़िल्में और अखबारो में बताई बातों को सुनते देखते यह सब त्यौहार हमें बेमानी से लगने लगे थे.
चाहे शिवरात्रि पर जल या दूध चढ़ाने को बुरा बताना हो... होली पर रंग गुलाल और पानी से खेलने को बुरा बताना हो..... दिवाली पर पटाखे से होने वाले प्रदूषण या जानवरो की तकलीफ हो...... रक्षाबंधन पर Equality Patriarchy का concept हो... चाहे करवाचौथ को कुरीति या महिला अधिकार विरोधी बताना हो...... एक वर्ग विशेष ने Media फिल्मों नाटकों आदि का सहारा ले कर इन सभी त्यौहारो की छवि को बिगाड़ने का काम किया.
याद कीजिए जब कोई भी त्यौहार आता था.. एकाएक मिलावटी मावा मिलने की ख़बरों से अखबार भर जाया करते थे...... लोगों के मन में यह Plant किया गया कि मावा तो नकली होता है... मीठा खाना है तो चॉकलेट खाइये.
मैं खबरों पर निगाह रखता हूँ.... दावे से कह सकता हूँ कि पिछले कुछ सालों से मिलावटी मावे की खबरे आना बहुत कम हो गई हैं....लेकिन इसी बीच चॉकलेट ने त्यौहार पर मिठाई का एक बड़ा market कब्ज़ा लिया है.
त्यौहारो पर भीड़ भाड़ के इलाकों में चेतावनी मिला करती थी.... बम विस्फोट हुआ करते थे... लोगों ने त्यौहारो के समय बाहर जाना, समारोहो में जाना बंद कर दिया था.
एक प्रोपेगंडा चला कर समाज में Guilt की भावना बैठा दी गई.... कि आप पानी से खेलेंगे तो कितना नुकसान होगा... आप पठाखे चलाएंगे तो वातावरण खराब होगा.... पत्नी से व्रत करवाएंगे तो महिला विरोधी कहलाएंगे.... बहन को रक्षा का वचन दे कर उसे दोयम दर्जे का होने का अहसास करायेंगे...... शिवरात्रि पर दूध चढ़ा कर आप ना जाने कौन सा पाप कर रहे हैं.
और धीरे धीरे यही guilt आपको त्यौहारो से दूर ले जाती गई...... यह प्रवृति और भी बढ़ती... लेकिन तभी आता है Social Media.... एक ऐसा माध्यम जिसमें हर इंसान की भागीदारी होती है... जो One-Way ना हो कर एक Hybrid model है.. जहाँ कोई भी अपने विचार रख सकता है...
लोगों ने त्यौहारो के पीछे छुपे विज्ञान और धार्मिक मान्यताओं को सामने रखना शुरू किया... तथ्यों को रखना शुरू किया... इससे जो प्रोपेगंडा चल रहा था, वह धीरे धीरे टूटना शुरू हुआ.... लोगों को समझ आया कि हम तो बेवजह Guilt में जी रहे थे.... और यही कारण है कि अब लोगों ने बढ़ चढ़ कर त्यौहारो और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया है.
आज शहरों में हर सोसाइटी में त्यौहार मनाये जाते हैं.... बाकायदा Planning होती है.. पैसा इकठ्ठा किया जाता है... पूरे जोरशोर से किया जाता है... और सबसे अच्छी बात है कि हमारा 10 साल से लेकर 45 साल तक का जो वर्ग है.. उसका Participation बहुत ज्यादा होता है इन गतिविधियों में.
और यह सिर्फ त्यौहारो तक ही सीमित नहीं है....26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व भी कहीं अधिक जोर शोर से मनाये जाने लगे हैं... वहीं छठ, नवरात्री, लोहड़ी, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी जैसे पर्व अब कहीं ज्यादा व्यापक स्तर पर मनाये जाते हैं.... और इसका प्रभाव अब टीवी सीरियल, OTT पर भी दिखता है... जहाँ इन त्यौहारो के समय स्पेशल एपिसोड बनाये जाते हैं... और उसमे इन त्यौहारो को अच्छे तरीके से चित्रित भी किया जाता है.
आपको जानकार अच्छा लगेगा कि राम जन्म भूमि के लिए चंदा जमा करने जैसे काम में सबसे ज्यादा भाग लिया था IT, Banking, Marketing, Education और private sector के लोगों ने.... बड़ी बड़ी कंपनियों में Director, GM, VP जैसे लोग भी इन गतिविधियों में खुल कर भाग ले रहे थे.
कुल मिलाकर बात यही है कि जो लोग हमारे त्यौहारो का विरोध किया करते थे... उनकी चाल उलटी पड़ चुकी है... और एक आम इंसान अब अपने धर्म और संस्कृती से कहीं ज्यादा जुड़ रहा है.... जो एक अच्छा trend है.
इस बड़े लेख का सारांश यही है... कि अपने त्यौहारो को पूरे मन से मनाएं.. कोई Guilt ना रखें.... उनके पीछे के Logic और विज्ञान को समझें... और अपने बड़े बूढ़े और बच्चों के साथ मिलकर इन्हे मनाएं.
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सूर्य संवेदना पुष्पे, दीप्ति कारुण्यगंधने ।
लब्ध्वा शुभं नववर्षेऽस्मिन कुर्यात्सर्वस्य मंगलम् ॥
भावार्थ : जिस तरह सूर्य प्रकाश देता है, संवेदना करुणा को जन्म देती है, पुष्प सदैव महकता रहता है, उसी तरह आने वाला यह नया साल आपके लिए हर दिन, हर पल के लिए मंगलमय हो ।
नववर्ष : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (22 March 2023)
@Hindu
लब्ध्वा शुभं नववर्षेऽस्मिन कुर्यात्सर्वस्य मंगलम् ॥
नववर्ष : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (22 March 2023)
@Hindu
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शिव शम्भो शम्भो
t.me/Geet_Ganga
ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ… നരനായിങ്ങനെ ജനിച്ചു ഭൂമിയില് നരകവാരിധി നടുവില് ഞാന് നരകത്തില് നിന്നും കരകേറ്റീടേണം തിരുവൈക്കം വാഴും ശിവശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ… മരണകാലത്തെ ഭയത്തെ ചിന്തിച്ചാല് മതിമറന്നുപോം മനമെല്ലാം മനതാരില് വന്നു വിളയാടീടേണം തിരുവൈക്കം വാഴും ശിവശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ… ശിവശിവാ ഒന്നും പറയാവതല്ല മഹമായ തന്റെ വികൃതികള് മഹമായ നീക്കീട്ടരുളേണം നാഥാ തിരുവൈക്കം വാഴും ശിവശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ… വലിയൊരു കാട്ടിലകപ്പെട്ടു ഞാനും വഴിയും കാണാതെ ഉഴലുമ്പോള് വഴിയില് നേര്വഴി അരുളേണം നാഥാ തിരുവൈക്കം വാഴും ശിവശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ… യെളുപ്പമായുള്ള വഴിയെ ചെല്ലുമ്പോള് ഇടയ്ക്കിടെയാറു പടിയുണ്ട് പടിയാറും കടന്നവിടെചെല്ലുമ്പോള് ശിവനെ കാണാകും ശിവ ശംഭോ! ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ ശംഭോ ശിവശംഭോ
#malayalam #mahadev
@Geet_Ganga
#malayalam #mahadev
@Geet_Ganga
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