Finally India TV Walo Ne is Video ko phir se Public Kar diya hai!! SAWAL YEH UTHTA HAI K INHONE 3 SAAL SE PEHLE VIDEO PRIVATE KYU KAR DIYA THA??
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"मैं Ex Muslim हूं", शो में देखिए इस्लाम छोड़ चुके लोगों की मौलानाओं के साथ बहस| Conversion In Islam
सदाकत कुरैशी क्यों बना समीर ? समीर ने क्यों छोड़ा इस्लाम ? क्या Islam नहीं दे पा रहा था समीर के सवालों का जवाब? जानिए इन सारे सवालों का जवाब "मैं Ex Muslim हूँ" शो में
#IslamConversion #IslmaContradiction #IslamInIndia
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Reality Check of Islam - Kerala Story 2 - ExMuslim suhail deshbhakt part 2
Reality check of islam - keral story 2 - Love Jihad - Exmuslim Suhail deshbhakt
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Rasulullah urinated and died || रसूलुल्लाह मूते और मर गए @indianexmuslimscommunity #exmuslim
Rasul Moote Aur Maar Gaye 😭😭😭
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Insaaniyat vs sajae shariyat - Exmuslim deshbhakt
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Rasulullah urinated and died || रसूलुल्लाह मूते और मर गए - Part -2 @exmuslimdebatereview6835 #islam
Rasulullah Moote Aur Maar Gaye
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मैं एक्स-मुस्लिम सोफिया
ये है मेरी कहानी
कहते थे सब
दुनिया की ज़िंदगी तो है बस धोखा और फ़ानी।
पढ़ो क़ुरआन, सीखो दीन,
यही आएगा आख़िरत में काम।
किया शुरू सीखना दीन,
लेकर अल्लाह का नाम।
पढ़कर मैं हो गई हैरान,
धरती है चपटी,
पर्वत हैं गाड़े हुए ज़मीन में,
तारे बनाए शैतान को मारने के लिए,
सोचने के लिए अल्लाह ने दिल दिए,
और बिना पिलर के खड़ा है आसमान।
पिलाता है दूध मवेशियों के पेट से,
गिरते हैं ओले आसमान में बुलंद पहाड़ों से
जो दावा करता है कायनात बनाने का
वो कैसे हो सकता है उसकी संरचना से अनजान?
जहाँ पाओ, क़त्ल-ए-आम करो,
जब तक काफ़िर न अपना ले इस्लाम।
लूटो उनके घर और माल,
करके उनका सर क़लम,
बना लो उनके बच्चों, बीवी, बहन, बेटी को अपना ग़ुलाम।
उनकी औरतें हैं तुम्हारी मिल्कियत,
कर सकते हो उनका बलात्कार,
बेच सकते हो उनको बाज़ारों में, हथियारों के दाम।
सुना था अल्लाह करता है सत्तर माँओं से ज़्यादा प्यार
पढ़ा तो जाना करता है वो भेदभाव बेटा और बेटी में
औरतें हैं उसकी नज़रों में कम
अक़्ल , बेवक़ूफ़, नादान।
निकाह कोई पवित्र बंधन में बंधने की रीति नहीं,
है औरत को ख़रीदने का रिवाज़,
मेहर है उसके जिस्म की कीमत,
और औरत बस है मर्दों के मनोरंजन का मात्र एक सामान।
पढ़कर मेरा दिल फट आया उस किताब को,
जिसे मैं बचपन से सुनती आई थी अल्लाह का कलाम।
सुनती आई थी बचपन से
हमारे नबी हैं नबियों में आला,
भेजती रहती थी उन पर हज़ारों सलाम।
टूटा भ्रम जब पढ़ी उनकी सीरत,
समझती आई थी जिन्हें इंसानों में सबसे बेहतर इंसान
वो तो निकला राक्षसों का भी राक्षस,
शैतानों का भी शैतान।
अब थी मेरी सबसे बड़ी आज़माइश
इंसानियत चुनूँ छोड़ कर इस्लाम या
माँ-बहन और ख़ानदान।
कैसे बोलूँ उनको
जिसे तुम समझते आए हो बचपन से दीन-ए-हक़,
वो है बस अरब क़बीले की संस्कृति
और दूसरे मज़हबों की नक़ल
जिसे मानते आए हो वहीद है एक ख़ुदा अल्लाह,
वो है नक़ली ईश्वर और भगवान।
कोशिश की बताने की, पर लगता था डर,
कहीं ले न लें वो मेरी जान।
फिर भी डरते-डरते कुछ-कुछ बताया
पर नहीं दिया उन्होंने मेरी बातों पर ध्यान।
बोले एक तुम ही हो ज्ञानी,समझदार,
जिसने पढ़ा है क़ुरआन,
बाक़ी करोड़ों बेवक़ूफ़ हैं मुसलमान।
बोली अपना लो जो है अच्छा,
कर के बुराइयों को अनदेखा।
मत बनो सच की देवी, क्रांतिकारी।
सभी धर्मों में हैं कुछ कमियाँ,
सभी धर्मों में हैं अच्छे-बुरे इंसान।
छोड़ दिया उनको उनके हाल पर,
समझकर ये कभी नहीं छोड़ेंगे इस जाहिल मज़हब को,
क्योंकि ये सब हैं स्वार्थी और मानसिक ग़ुलाम।
न गवारा हुआ मेरे ज़मीर को
बनकर रहूँ नक़ली मुस्लिम,
कटते देखूँ मासूम जानवरों को, पकाऊँ उनका पकवान।
मुस्लिम बनकर रहना था नामुमकिन
लेकिन माँ का आँचल छोड़ना भी नहीं था इतना आसान।
कदम बढ़ते गए, दिल वहीं ठहर गया
रखकर पत्थर सीने पर छोड़ दिया
मेरी माँ, मेरी दुनिया,
मेरी पहली मोहब्बत, मेरी जन्नत को
पला था बचपन जिन गलियों में
छोड़ दिया वो जहान।
END_OF_PARTIMG_20260127_00303796_1_gallery.jpgEND_OF_PART
ये है मेरी कहानी
कहते थे सब
दुनिया की ज़िंदगी तो है बस धोखा और फ़ानी।
पढ़ो क़ुरआन, सीखो दीन,
यही आएगा आख़िरत में काम।
किया शुरू सीखना दीन,
लेकर अल्लाह का नाम।
पढ़कर मैं हो गई हैरान,
धरती है चपटी,
पर्वत हैं गाड़े हुए ज़मीन में,
तारे बनाए शैतान को मारने के लिए,
सोचने के लिए अल्लाह ने दिल दिए,
और बिना पिलर के खड़ा है आसमान।
पिलाता है दूध मवेशियों के पेट से,
गिरते हैं ओले आसमान में बुलंद पहाड़ों से
जो दावा करता है कायनात बनाने का
वो कैसे हो सकता है उसकी संरचना से अनजान?
जहाँ पाओ, क़त्ल-ए-आम करो,
जब तक काफ़िर न अपना ले इस्लाम।
लूटो उनके घर और माल,
करके उनका सर क़लम,
बना लो उनके बच्चों, बीवी, बहन, बेटी को अपना ग़ुलाम।
उनकी औरतें हैं तुम्हारी मिल्कियत,
कर सकते हो उनका बलात्कार,
बेच सकते हो उनको बाज़ारों में, हथियारों के दाम।
सुना था अल्लाह करता है सत्तर माँओं से ज़्यादा प्यार
पढ़ा तो जाना करता है वो भेदभाव बेटा और बेटी में
औरतें हैं उसकी नज़रों में कम
अक़्ल , बेवक़ूफ़, नादान।
निकाह कोई पवित्र बंधन में बंधने की रीति नहीं,
है औरत को ख़रीदने का रिवाज़,
मेहर है उसके जिस्म की कीमत,
और औरत बस है मर्दों के मनोरंजन का मात्र एक सामान।
पढ़कर मेरा दिल फट आया उस किताब को,
जिसे मैं बचपन से सुनती आई थी अल्लाह का कलाम।
सुनती आई थी बचपन से
हमारे नबी हैं नबियों में आला,
भेजती रहती थी उन पर हज़ारों सलाम।
टूटा भ्रम जब पढ़ी उनकी सीरत,
समझती आई थी जिन्हें इंसानों में सबसे बेहतर इंसान
वो तो निकला राक्षसों का भी राक्षस,
शैतानों का भी शैतान।
अब थी मेरी सबसे बड़ी आज़माइश
इंसानियत चुनूँ छोड़ कर इस्लाम या
माँ-बहन और ख़ानदान।
कैसे बोलूँ उनको
जिसे तुम समझते आए हो बचपन से दीन-ए-हक़,
वो है बस अरब क़बीले की संस्कृति
और दूसरे मज़हबों की नक़ल
जिसे मानते आए हो वहीद है एक ख़ुदा अल्लाह,
वो है नक़ली ईश्वर और भगवान।
कोशिश की बताने की, पर लगता था डर,
कहीं ले न लें वो मेरी जान।
फिर भी डरते-डरते कुछ-कुछ बताया
पर नहीं दिया उन्होंने मेरी बातों पर ध्यान।
बोले एक तुम ही हो ज्ञानी,समझदार,
जिसने पढ़ा है क़ुरआन,
बाक़ी करोड़ों बेवक़ूफ़ हैं मुसलमान।
बोली अपना लो जो है अच्छा,
कर के बुराइयों को अनदेखा।
मत बनो सच की देवी, क्रांतिकारी।
सभी धर्मों में हैं कुछ कमियाँ,
सभी धर्मों में हैं अच्छे-बुरे इंसान।
छोड़ दिया उनको उनके हाल पर,
समझकर ये कभी नहीं छोड़ेंगे इस जाहिल मज़हब को,
क्योंकि ये सब हैं स्वार्थी और मानसिक ग़ुलाम।
न गवारा हुआ मेरे ज़मीर को
बनकर रहूँ नक़ली मुस्लिम,
कटते देखूँ मासूम जानवरों को, पकाऊँ उनका पकवान।
मुस्लिम बनकर रहना था नामुमकिन
लेकिन माँ का आँचल छोड़ना भी नहीं था इतना आसान।
कदम बढ़ते गए, दिल वहीं ठहर गया
रखकर पत्थर सीने पर छोड़ दिया
मेरी माँ, मेरी दुनिया,
मेरी पहली मोहब्बत, मेरी जन्नत को
पला था बचपन जिन गलियों में
छोड़ दिया वो जहान।
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फिर आया मेरी जिंदगी में एक इंसान
थे जिसके आदर्श राम भगवान।
पोछे मेरी आंखों से आंसू बना वो मेरे जीने की वजह
मेरी जिंदगी की खुशी मेरे चेहरे की मुस्कान।
सात जन्मों के वचन के साथ बना कर मुझे अर्धांगिनी दिया देवियों सा सम्मान।
जान कर मैं हो गई धन्य अपने भारत की संस्कृति
लिया है मैंने ऐसे देश में जनम
जहां प्रकृति की सेवा को कहते है पूजा और करते है उनकी सेवा जो है असहाय बेजुबान।
जनम से है सबकी मानव जाति
है सबके अंदर एक ही चेतना
नहीं है कोई काफ़िर
नहीं है जनम से कोई किसी से तुच्छ कोई किसी से महान
रीति-रिवाज, तीज-त्योहार,परम्पराएं नहीं है कोई धर्म
धर्म तो है बस कर्तव्यों का पालन मानवता की सेवा
नैतिकता और अच्छे काम
भारत सिर्फ भूमि का टुकड़ा नहीं है उनकी मां ऐसी रखते है वो आस्था, पत्नी के बिना यज्ञ सम्भव नहीं और महिलाओं का है पुरुषों से ऊंचा स्थान
थे जिसके आदर्श राम भगवान।
पोछे मेरी आंखों से आंसू बना वो मेरे जीने की वजह
मेरी जिंदगी की खुशी मेरे चेहरे की मुस्कान।
सात जन्मों के वचन के साथ बना कर मुझे अर्धांगिनी दिया देवियों सा सम्मान।
जान कर मैं हो गई धन्य अपने भारत की संस्कृति
लिया है मैंने ऐसे देश में जनम
जहां प्रकृति की सेवा को कहते है पूजा और करते है उनकी सेवा जो है असहाय बेजुबान।
जनम से है सबकी मानव जाति
है सबके अंदर एक ही चेतना
नहीं है कोई काफ़िर
नहीं है जनम से कोई किसी से तुच्छ कोई किसी से महान
रीति-रिवाज, तीज-त्योहार,परम्पराएं नहीं है कोई धर्म
धर्म तो है बस कर्तव्यों का पालन मानवता की सेवा
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भारत सिर्फ भूमि का टुकड़ा नहीं है उनकी मां ऐसी रखते है वो आस्था, पत्नी के बिना यज्ञ सम्भव नहीं और महिलाओं का है पुरुषों से ऊंचा स्थान
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Kya waqai mein science quran se kuch dena hai - Exmuslim Suhail deshbhakt
Kya aatankwad ku quran aur hadith se lena dena hai - Exmuslim Suhail(deshbhakt)
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