Puduthurai Shiva temple: Puduthurai is a small village located near Thirunagari on Seerkazhi-Sattanadhapuram route in Seerkazhi dt, TN.
Here lies a 11th century large Shiva temple in highly dilapidated state
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महाकालेश्वर मंदिर
महाकालेश्वर मंदिर भारत के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित है। पुराणों और महाभारत में इस मंदिर का वर्णन मिलता है। स्वयंभू और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव की अत्यन्त पुण्यदायी महत्ता है। इसके दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है, ऐसी मान्यता है। महाकवि कालिदास ने मेघदूत में उज्जयिनी की चर्चा करते हुए इस मंदिर की प्रशंसा की है। सन्१२३५ के बाद से यहां जो भी शासक रहे, उन्होंने इस मंदिर के जीर्णोद्धार और सौन्दर्यीकरण की ओर ध्यान दिया, इसीलिए मंदिर अपने वर्तमान स्वरूप को प्राप्त कर सका है। प्रतिवर्ष और सिंहस्थ के पूर्व इस मंदिर को सुसज्जित किया जाता है।
उज्जैन में सन् ११०७ से १७२८ तक यवनों के शासनकाल में ४५०० वर्षों प्राचीन परंपराएं नष्ट हो चुकी थी, लेकिन २९ नवंबर १७२८ को मराठा शासकों ने मालवा क्षेत्र में अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया। इसके बाद उज्जैन का गौरव पुनः लौटा और सन् १७३१ से १८०९ तक यह नगरी मालवा की राजधानी बनी रही। मराठों ने अपने शासनकाल में महाकालेश्वर मंदिर का पुनिर्नर्माण किया और सिंहस्थ पर्व स्नान की स्थापना की थी।
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महाकालेश्वर मंदिर भारत के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित है। पुराणों और महाभारत में इस मंदिर का वर्णन मिलता है। स्वयंभू और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव की अत्यन्त पुण्यदायी महत्ता है। इसके दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है, ऐसी मान्यता है। महाकवि कालिदास ने मेघदूत में उज्जयिनी की चर्चा करते हुए इस मंदिर की प्रशंसा की है। सन्१२३५ के बाद से यहां जो भी शासक रहे, उन्होंने इस मंदिर के जीर्णोद्धार और सौन्दर्यीकरण की ओर ध्यान दिया, इसीलिए मंदिर अपने वर्तमान स्वरूप को प्राप्त कर सका है। प्रतिवर्ष और सिंहस्थ के पूर्व इस मंदिर को सुसज्जित किया जाता है।
उज्जैन में सन् ११०७ से १७२८ तक यवनों के शासनकाल में ४५०० वर्षों प्राचीन परंपराएं नष्ट हो चुकी थी, लेकिन २९ नवंबर १७२८ को मराठा शासकों ने मालवा क्षेत्र में अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया। इसके बाद उज्जैन का गौरव पुनः लौटा और सन् १७३१ से १८०९ तक यह नगरी मालवा की राजधानी बनी रही। मराठों ने अपने शासनकाल में महाकालेश्वर मंदिर का पुनिर्नर्माण किया और सिंहस्थ पर्व स्नान की स्थापना की थी।
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प्रसिद्ध विट्ठल मंदिर 15 वीं शताब्दी का है। यह विजयनगर साम्राज्य के शासकों में से एक, राजा देवराय द्वितीय (1422 - 1446 ए डी) के शासनकाल के दौरान बनाया गया था। कृष्णदेवराय के शासनकाल के दौरान मंदिर के कई हिस्सों का विस्तार और विस्तार किया गया (1509 - 1529 A.D.), एक विजयनगर राजवंश के सबसे प्रसिद्ध शासक।
विटला मंदिर आंशिक रूप से खंडहर अवस्था में है। मंदिर के आंतरिक गर्भगृह में एक बार भगवान विट्ठल की मूर्ति थी। हालाँकि, अब गर्भगृह किसी भी मूर्ति से रहित है। मंदिर का केंद्रीय पश्चिमी हॉल मुगलों के हमले के दौरान बहुत पहले बर्बाद हो गया था, जिसके कारण 1565 में विजयनगर साम्राज्य का पतन हुआ था।
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विटला मंदिर आंशिक रूप से खंडहर अवस्था में है। मंदिर के आंतरिक गर्भगृह में एक बार भगवान विट्ठल की मूर्ति थी। हालाँकि, अब गर्भगृह किसी भी मूर्ति से रहित है। मंदिर का केंद्रीय पश्चिमी हॉल मुगलों के हमले के दौरान बहुत पहले बर्बाद हो गया था, जिसके कारण 1565 में विजयनगर साम्राज्य का पतन हुआ था।
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Revival of Kottappadam Srirama temple destroyed by Tipu Sultan:
The temple compound is being cleared and brought above the water logging levels.
Some more work is remaining.
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The temple compound is being cleared and brought above the water logging levels.
Some more work is remaining.
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गंगेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह गुजरात के पास दीव से सिर्फ 3 किमी दूर फुदम गांव के समुद्र के किनारे स्थित है। मंदिर का दृश्य अरब सागर पर अद्वितीय है। यह मूल रूप से समुद्र के किनारे चट्टानों के बीच स्थित एक गुफा मंदिर है।
तीर्थयात्री समुद्र के पानी के बीच में विभिन्न आकारों में दिखाई देने वाले पांच शिवलिंगों को देख सकते हैं, यह # गणेश्वरमहादेवटेम्पल की बहुत महत्वपूर्ण विशेषता है और चट्टान के ऊपर शिव लिंग की तलाश के लिए शिव लिंग शेषनाग की नक्काशी की गई थी।
ये लिंग आमतौर पर उच्च ज्वार के दौरान समुद्र में डूबे होते हैं और केवल निम्न ज्वार के दौरान, वे दिखाई देते हैं। यह मंदिर 5000 वर्ष पुराना है, मंदिर की स्थापना और समुद्र तट की चट्टानी सतह पर 5 लिंगों की स्थापना पांच पांडव भाइयों द्वारा की गई थी जब वे निर्वासन में थे।
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तीर्थयात्री समुद्र के पानी के बीच में विभिन्न आकारों में दिखाई देने वाले पांच शिवलिंगों को देख सकते हैं, यह # गणेश्वरमहादेवटेम्पल की बहुत महत्वपूर्ण विशेषता है और चट्टान के ऊपर शिव लिंग की तलाश के लिए शिव लिंग शेषनाग की नक्काशी की गई थी।
ये लिंग आमतौर पर उच्च ज्वार के दौरान समुद्र में डूबे होते हैं और केवल निम्न ज्वार के दौरान, वे दिखाई देते हैं। यह मंदिर 5000 वर्ष पुराना है, मंदिर की स्थापना और समुद्र तट की चट्टानी सतह पर 5 लिंगों की स्थापना पांच पांडव भाइयों द्वारा की गई थी जब वे निर्वासन में थे।
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Another spectacular #Chola Architecture!
This is the #Varadharaja Perumal Temple, in Puducherry dedicated to #Narayan Bhagwan and #Laxmi mata.
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This is the #Varadharaja Perumal Temple, in Puducherry dedicated to #Narayan Bhagwan and #Laxmi mata.
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सोमनाथ मंदिर
सोमनाथ मंदिर भूमंडल में दक्षिण एशिया स्थित भारतवर्ष के पश्चिमी छोर पर गुजरात राज्य में स्थित, अत्यन्त प्राचीन व ऐतिहासिक सूर्य मन्दिर का नाम है। यह भारतीय इतिहास तथा हिन्दुओं के महत्वपूर्ण मन्दिरों में से एक है। इसे आज भी भारत के १२ ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना व जाना जाता है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में स्पष्ट है।
यह मंदिर हिंदू धर्म के उत्थान-पतन के इतिहास का प्रतीक रहा है। अत्यंत वैभवशाली होने के कारण इतिहास में कई बार यह मंदिर तोड़ा तथा पुनर्निर्मित किया गया। वर्तमान भवन के पुनर्निर्माण का आरंभ भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने करवाया और पहली दिसंबर 1955 को भारत के राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद जी ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। सोमनाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटन स्थल है। लोककथाओं के अनुसार यहीं श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया था। इस कारण इस क्षेत्र का और भी महत्व बढ़ गया।
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सोमनाथ मंदिर भूमंडल में दक्षिण एशिया स्थित भारतवर्ष के पश्चिमी छोर पर गुजरात राज्य में स्थित, अत्यन्त प्राचीन व ऐतिहासिक सूर्य मन्दिर का नाम है। यह भारतीय इतिहास तथा हिन्दुओं के महत्वपूर्ण मन्दिरों में से एक है। इसे आज भी भारत के १२ ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना व जाना जाता है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में स्पष्ट है।
यह मंदिर हिंदू धर्म के उत्थान-पतन के इतिहास का प्रतीक रहा है। अत्यंत वैभवशाली होने के कारण इतिहास में कई बार यह मंदिर तोड़ा तथा पुनर्निर्मित किया गया। वर्तमान भवन के पुनर्निर्माण का आरंभ भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने करवाया और पहली दिसंबर 1955 को भारत के राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद जी ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। सोमनाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटन स्थल है। लोककथाओं के अनुसार यहीं श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया था। इस कारण इस क्षेत्र का और भी महत्व बढ़ गया।
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The #Badami cave #temples are a complex of #Hindu and #Jain cave temples located in Badami, a town in the #Bagalkot district in northern part of #Karnataka, India. The caves are considered as exquisite examples of Indian rock-cut architecture, especially Badami #Chalukya architecture, which dates from the 6th century and was the capital of the #Chalukyan dynasty.
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The Badami cave temples represent some of the earliest known examples of Hindu temples in the #Deccan region. They along with the temples in Aihole transformed the #Malaprabha River valley into a cradle of temple architecture that influenced the components of later Hindu temples elsewhere in India.
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The Badami cave temples represent some of the earliest known examples of Hindu temples in the #Deccan region. They along with the temples in Aihole transformed the #Malaprabha River valley into a cradle of temple architecture that influenced the components of later Hindu temples elsewhere in India.
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Damaged yet so perfect !!
It was built in all architectural splendour during the reign of #Saluva dynasty of the Vijayanagara kingdom.
Just imagine how beautiful it was, if this is the view after plundering of the temple by the Invaders.
The Bugga #Ramalingeswara Swamy #temple in #Tadipatri, Anantapur district of Andhra Pradesh.
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It was built in all architectural splendour during the reign of #Saluva dynasty of the Vijayanagara kingdom.
Just imagine how beautiful it was, if this is the view after plundering of the temple by the Invaders.
The Bugga #Ramalingeswara Swamy #temple in #Tadipatri, Anantapur district of Andhra Pradesh.
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