जैसलमेर : पंच गौरव कार्यक्रम
➤ जैसलमेर दुर्ग पीले बलुआ पत्थरों से निर्मित है, जो सूर्य की किरणों में सोने की तरह चमकता है। इसी कारण इसे ‘सोनार किला’ कहा जाता है।यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त है।
➤ जैसलमेर का पीला बलुआ पत्थर अपनी सुंदर चमक, मजबूती और नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। इसे ‘गोल्डन स्टोन’ भी कहा जाता है।
पर्यटन स्थल: जैसलमेर दुर्ग
उपज: खजूर (फीनिक्स डेक्टिलिफेरा)
वनस्पति प्रजाति: जाल (साल्वाडोरा ओलियोइड्स)
उत्पाद: पीला स्टोन उत्पाद
खेल: जिम्नास्टिक
➤ जैसलमेर दुर्ग पीले बलुआ पत्थरों से निर्मित है, जो सूर्य की किरणों में सोने की तरह चमकता है। इसी कारण इसे ‘सोनार किला’ कहा जाता है।यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त है।
➤ जैसलमेर का पीला बलुआ पत्थर अपनी सुंदर चमक, मजबूती और नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। इसे ‘गोल्डन स्टोन’ भी कहा जाता है।
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❖ आमेर शासक पृथ्वीराज कछवाह के समय रामानुज संप्रदाय के अनुयायी कृष्णदास पयहारी (अनंतानंद के शिष्य) ने कापालिक संप्रदाय के योगी चतुरनाथ को शास्त्रार्थ में पराजित किया।
❖ इसके बाद उन्होंने 1503 ई. में गलताजी (जयपुर) में रामानन्दी संप्रदाय की प्रधान पीठ स्थापित की। विशिष्टाद्वैत की प्रमुख पीठ होने के कारण इसे उत्तरतोत्रादि पीठ, गलता को गालव ऋषि की♥️👍
❖ इसके बाद उन्होंने 1503 ई. में गलताजी (जयपुर) में रामानन्दी संप्रदाय की प्रधान पीठ स्थापित की। विशिष्टाद्वैत की प्रमुख पीठ होने के कारण इसे उत्तरतोत्रादि पीठ, गलता को गालव ऋषि की♥️👍