Hindi Quiz
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'आविर्भूत' का सही विलोम शब्द है-
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16%
तिरोभाव
53%
तिरोभूत
26%
अनाभूत
6%
अनभूत
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👍2
🎲 Quiz 'हिंदी के महत्वपूर्ण सवाल Creat. By @aaftab8890'
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किस शब्द में एरा प्रत्यय नहीं है
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18%
घनेरा
21%
सपेरा
40%
सवेरा
21%
ममेरा
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पैतृक शब्द में इक प्रत्यय के साथ मूल शब्द है
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17%
पिता
62%
पितृ
9%
पितर
12%
पैत्र
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🎲 Quiz 'संधी क्रिया उपसर्ग प्रत्यय विलोम शब्द पर्यायवाची शब्द शब्द शुद्धि वाक्य शुद्धि तत्सम तद्भव'
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Q."अचल " का पर्यावाची शब्द है.?
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43%
A. स्थिर
18%
B. जड़
23%
C. गतिहीन
16%
D. जंगम
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Q.इनमें से “बाल” शब्द का पर्यायवाची नहीं है-
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16%
A. कच
36%
B. शिखी
24%
C. कुंतल
24%
D. अलक
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🎲 Quiz 'चतुर्थ श्रेणी मॉडल पेपर'
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🎲 Quiz 'चतुर्थ श्रेणी हिंदी मॉडल पेपर'
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*📚20 पर्यायवाची शब्द*

*1. कर्म* – कार्य, कृत्य, काम, दायित्व

*2. धर्म* – आस्था, नीति, कर्तव्य, सदाचार

*3. धनुष* – चाप, कोदंड, सारंग, कर्ण्य

*4. अन्न* – भोजन, धान्य, आहार, खाद्य

*5. संसार* – जगत, विश्व, लोक, भू-मंडल

*6. देश* – राष्ट्र, मातृभूमि, वतन, भूभाग

*7. नगर* – शहर, पुरी, राजधानी, महानगर

*8. पुस्तक* – किताब, ग्रंथ, ग्रंथिका, पोथी

*9. शक्ति* – बल, सामर्थ्य, ताकत, सामर्थ्यशाली

*10. संगीत* – गीत, राग, स्वर, गायन

*11. युद्ध* – संग्राम, रण, जंग, संघर्ष

*12. शांति* – अमन, विश्राम, निस्तब्धता, समाधान

*13. आशा* – उम्मीद, अभिलाषा, अभिप्सा, अभिलाषित भाव

*14. भय* – डर, त्रास, आशंका, संकोच

*15. राज्य* – प्रदेश, साम्राज्य, जनपद, भूमि

*16. लोक* – जनता, प्रजा, जन, आमजन

*17. संपत्ति* – धन, पूँजी, ऐश्वर्य, धरोहर

*18. सूरजमुखी* – सूर्यमुखी, सूर्यमुख, भानुमुखी, दिनकरमुखी

*19. वृक्ष* – पेड़, तरु, द्रुम, पादप

*20. शक्ति* – सामर्थ्य, ताकत, बल, सामर्थ्यवान

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हाई कोर्ट 4th ग्रेड भर्ती की परीक्षा दिसंबर तक होने की संभावना है।
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हाई कोर्ट 4th ग्रेड भर्ती की परीक्षा दिसंबर तक होने की संभावना है।
सबसे ज्यादा हिंदी ही है इसमें तो लेफ्ट होने वालो को सलाम है 😂
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एकार्थक शब्द
हाईकोर्ट चतुर्थ श्रेणी टॉपिक

एकार्थक शब्द की परिभाषा

बहुत से शब्द ऐसे हैँ, जिनका अर्थ देखने और सुनने मेँ एक-सा लगता है, परन्तु वे समानार्थी नहीँ होते हैँ। ध्यान से देखने पर पता चलता है कि उनमेँ कुछ अन्तर भी है। इनके प्रयोग मेँ भूल न हो इसके लिए इनकी अर्थ-भिन्नता को जानना आवश्यक है।

एकार्थक शब्द के उदाहरण
समानार्थी प्रतीत होने वाले भिन्नार्थी शब्द:

अगम – जहाँ न पहुँचा जा सके।

दुर्गम – जहाँ पहुँचना कठिन हो।

अलौकिक – जो सामान्यतः लोक या दुनिया मेँ न पाया जाये।

अस्वाभाविक – जो प्रकृति के नियमोँ के विरुद्ध हो।

असाधारण – सांसारिक होकर भी अधिकता से न मिले, विशेष।
अनुज – छोटा भाई।

अग्रज – बड़ा भाई।

भाई – छोटे बड़े दोनों के लिए।.

अनुभव – व्यवहार या अभ्यास से प्राप्त ज्ञान।

अनुभूति – चिन्तन या मनन से प्राप्त आंतरिक ज्ञान।

अनुरूप – समानता या उपयुक्तता का बोध होता है।

अनुकूल – पक्ष या अनुसार का भाव प्रकट होता है।

अस्त्र – फेँककर चलाए जाने वाले हथियार।

शस्त्र – हाथ मेँ पकड़कर चलाए जाने वाले हथियार।

अवस्था – जीवन का बीता हुआ भाग।

आयु – सम्पूर्ण जीवन काल।

अपराध – कानून के विरुद्ध कार्य करना।

पाप – सामाजिक तथा धार्मिक नियमोँ के विरुद्ध आचरण।

अनुरोध – आग्रह (हठ) पूर्वक की गई प्रार्थना।

आग्रह – हठ।

अभिनन्दन – सराहना करना, बधाई।

अभिवन्दन – प्रणाम, नमस्कार करना।

स्वागत – किसी के आगमन पर प्रकट की जाने वाली प्रसन्नता।

अणु – पदार्थ की सबसे छोटी इकाई।

परमाणु – तत्त्व की सबसे छोटी इकाई।

अधिक – आवश्यकता से बढ़कर।

अति – आवश्यकता से बहुत अधिक।

पर्याप्त – जितनी आवश्यकता हो।

अर्चना – मात्र बाह्य सत्कार।

पूजा – आन्तरिक एवं बाह्य दोनोँ सत्कार

अर्पण – छोटोँ द्वारा बड़ोँ को दिया जाना।

प्रदान – बड़ोँ द्वारा छोटोँ को दिया जाना।

अमूल्य – जिस वस्तु का कोई मूल्य ही न आँका जा सके।

बहुमूल्य – अधिक मूल्यवान वस्तु।

अशुद्धि – भाषा सम्बन्धी लिखने बोलने की गलती।

भूल – सामान्य गलती।

त्रुटि – बड़ी गलती।

असफल – व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है।

निष्फल – कार्य के लिए प्रयुक्त होता है।

अहंकार – घमण्ड, स्वयं को अत्यधिक समझना।

अभिमान – गौरव, दूसरोँ से श्रेष्ठ समझना।

आचार – सामान्य व्यवहार, चाल चलन।
व्यवहार – व्यक्ति विशेष के प्रति

परिस्थिति विशेष मेँ किया गया आचरण।

आनंद – खुशी का स्थायी और गंभीर भाव।

आह्लाद – क्षणिक एवं तीव्र आनंद।

उल्लास – सुख प्राप्ति की अल्पकालिक क्रिया, उमंग।

प्रसन्नता – साधारण आनंद का भाव।

आधि – मानसिक कष्ट।

व्याधि – शारीरिक कष्ट।

आवेदन – अधिकारी से की जाने वाली प्रार्थना।

निवेदन – विनयपूर्वक की जाने वाली प्रार्थना।

आशंका – अनिष्ट की कल्पना से उत्पन्न भय।

शंका – सन्देह।

आविष्कार – नवीन वस्तु का निर्माण करना।

अनुसंधान – रहस्य की खोज करना।

अन्वेषण – अज्ञात स्थान की खोज करना।

आज्ञा – बड़ोँ द्वारा छोटे को किसी कार्य को करने हेतु कहना।

अनुमति – स्वीकृति।

आवश्यक – किसी कार्य को करना जरूरी।

अनिवार्य – कार्य जिसे निश्चित रूप से करना हो।

आरम्भ – बहुत ही साधारण और सामान्य शुरुआत।

प्रारम्भ – ऐसी शुरुआत जिसमेँ औपचारिकता, महत्ता और साहित्यता हो।

ईर्ष्या – दूसरे की उन्नति पर जलना।

द्वेष – अकारण शत्रुता।

स्पर्धा – एक दूसरे से आगे बढ़ने की भावना।

उत्साह – निर्भीक होकर कार्य करना।

साहस – भय की उपस्थिति मेँ कार्य करना।

उत्तेजना – आवेग।

प्रोत्साहन – बढ़ावा।

उद्यम – परिश्रम, प्रवास।

उद्योग – उपाय, प्रयत्न।

उपकरण – साधन।

उपादान – सामग्री।

कष्ट – मुख्यतः शारीरिक पीड़ा।

क्लेश – मानसिक पीड़ा।

दुःख – सभी प्रकार से सामान्य दुःख को प्रकट करने वाला शब्द।

कन्या – वह अविवाहित लड़की जो रजस्वला न हुई हो।

लड़की – सामान्य अविवाहित या विवाहित किसी की लड़की।

पुत्री – अपनी बेटी।

कृपा – किसी का दुःख दूर करने का प्रयास।

दया – किसी के दुःख से प्रभावित होना।
संवेदना – अनुभूति जताना
।
सहानुभूति – किसी के दुःख से प्रभावित होकर अपनी अनुभूति जताना।

कृतज्ञ – उपकार मानने वाला।

आभारी – उपकार करने वाले के प्रति मन के भाव प्रकट करने वाला।

खेद – सामान्य दुःख।

शोक – स्वजनोँ के अनिष्ट से होने वाला दुःख।

विषाद – निराशापूर्ण दुःख।

तन्द्रा – हल्की नीँद।

निन्द्रा – गहरी नीँद।

नक्षत्र – स्वयं के प्रकाश से प्रकाशित आकाशीय पिण्ड।

ग्रह – सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित आकाशीय पिण्ड।

नमस्कार – बराबर वाले के प्रति नम्रता प्रकट करने हेतु।

प्रणाम – अपने से बड़ोँ को अभिवादन या उनके प्रति नम्रता प्रकट करने के लिए प्रणाम का प्रयोग शब्द का प्रयोग किया जाता है।

नमस्ते – यह छोटे एवं बड़े सभी के लिए अभिवादन का प्रचलित शब्द है।
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प्रलाप – व्यर्थ की बात।

विलाप – दुःख मेँ रोना।

परिणाम – किसी वस्तु का धीरे धीरे दूसरा रूप धारण करना।

फल – किसी स्थिति के कारण उत्पन्न होने वाला लाभ।

परिश्रम – सभी प्रकार की मेहनत को व्यक्त करने वाला शब्द।

श्रम – मात्र शारीरिक मेहनत।

परामर्श – सलाह मशविरा सूचक शब्द।

मंत्रणा – गोपनीय सलाह मशविरा।

प्रसिद्धि – बड़ाई।

ख्याति – विशेष प्रसिद्धि।

पीड़ा – शारीरिक कष्ट।

वेदना – सामान्य अल्पकालिक हार्दिक दुःख।

व्यथा – गंभीर दीर्घकालिक मानसिक दुःख।

पीछे – क्रम को सूचित करने वाला शब्द।
बाद मेँ – समय का भाव सूचित करने वारा शब्द।

बहुत – ज्यादा (बिना तुलना के)।

अधिक – ज्यादा (तुलना मेँ)।

भय – अनिष्ट के कारण मन मेँ उठा विचार (डर)।

आतंक – शारीरिक और मन मेँ उठा भय।

त्रास – भयवश होने वाला कष्ट।

यातना – दूसरोँ के द्वारा दिया गया कष्ट।

भवदीय – आपका, तुम्हारा।

प्रार्थी – प्रार्थना करने वाला।

भ्रम – किसी बात के लिए विषय गलत समझते हुए गलत धारणा बना लेना।

सन्देह – किसी के विषय मेँ निश्चय हो जाना।

भागना – भयवश दौड़ना।

दौड़ना – सामान्यतः तेज चलना।

भाषण – सामान्य व्याखान।

प्रवचन – धार्मिक विषय पर व्याख्यान।

मनुष्य – मानव जाति के स्त्री पुरुष दोनोँ का बोध कराने वाला शब्द।

पुरुष – मानव पुल्लिँग।

मंत्री – परामर्श देने वाला।

सचिव – मंत्री के आदेश को प्रचारित करने वाला।

मन – इन्द्रियोँ, विषयोँ का ज्ञान कराने वाला।

चित्त – चेतना का प्रतीक।
अन्तःकरण – सत् असत्, उचित अनुचित का ज्ञान कराने वाला।

महाशय – इस शब्द का प्रयोग प्रायः साधारण लोगोँ के लिए किया जाता है।

महोदय/मान्यवर – इस शब्द का प्रयोग बड़े लोगोँ के लिए किया जाता है।

मित्र – समवयस्क, जो अपने प्रति प्यार रखता हो।

सखा – साथ रहने वाला समवयस्क।

सगा – आत्मीयता रखने वाला।

सुहृदय – सुंदर हृदय वाला, जिसका व्यवहार अच्छा हो।

लड़का – बाल मानव।

पुत्र – अपना लड़का।

लज्जा – दूसरे के द्वारा अपने बारे मेँ गलत सोचने का अनुमान।

ग्लानि – अपनी गलती पर होने वाला पश्चाताप।

संकोच – किसी कार्य को करने मेँ होने वाली झिझक।

यथेष्ट – अपेक्षित या जितना वांछनीय हो।

पर्याप्त – पूरी तरह से प्राप्त।

व्यापार – किसी काम मेँ लगे रहना।

व्यवसाय – थोड़ी मात्रा मेँ खरीदने और बेचने का कार्य।

वाणिज्य – क्रय विक्रय और लेन देन।

व्याख्यान – मौखिक भाषण।

अभिभाषण – लिखित व्याख्यान।

विनय – अनुशासन एवं शिष्टतापूर्ण निवेदन।
अनुनय – किसी बात पर सहमत होनेकी प्रार्थना।

आवेदन – योग्यतानुसार किसी पद केलिए कथन द्वारा प्रस्तुत होना।
प्रार्थना – किसी कार्य सिद्धि के लिए विनम्रतापूर्ण कथन।

श्रद्धा – महानजनोँ के प्रति आदर भाव।

भक्ति – देवताओँ के प्रति आदर भाव।
श्रीयुत् – इस शब्द का प्रयोग आदर के लिए किया जाता है। हमारे यहाँ इसका प्रयोग बहुत कम होता है।

श्रीमान् – इस शब्द का प्रयोग भी आदर के लिए किया जाता है। हमारे यहाँ इसका प्रयोग अधिक होता है। श्रीयुत् और श्रीमान् का अर्थ समान सा ही है।

स्त्री – कोई भी नारी।

पत्नी – किसी की विवाहिता स्त्री।

स्नेह – बड़ोँ का छोटोँ के प्रति प्रेम।
प्रेम – प्यार

प्रणय – पति पत्नी, प्रेमी प्रेमिका का प्रेम।

सभ्यता – भौतिक विकास।

संस्कृति – कलात्मक एवं आध्यात्मिक विकास।

सुंदर – आकर्षक वस्तु।

चारु – पवित्र और सुंदर वस्तु।

रुचिर – सुरुचि जाग्रत करने वाली सुंदर वस्तु।

मनोहर – मन को लुभाने वाली वस्तु।
हेतु – अभिप्राय।

कारण – कार्य की पृष्ठभूमि।

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