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🔰 “पत्थर की लकीर होना” मुहावरे का सही अर्थ निम्न में से क्या होगा ?
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3%
[A] 🔷 मूर्ख होना
27%
[B] 🔷 कठोर होना
71%
[C] 🔷 बात पक्की होना
~समानार्थक प्रतीत होने वाले भिन्नार्थक शब्द
अभिमान – अपने को दूसरों से बड़ा समझने का घमण्ड।
अहंकार – झूठा घमण्ड।
गर्व – आत्म सम्मान सहित अभिमान।
अनभिज्ञ – जो किसी एक बात को नहीं जानता।
अज्ञ – जो कुछ नहीं जानता।
अज्ञेय – जो न जाना जा सके।
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प्रेम – छोटे-बड़े, हमउम्र सबके प्रति स्निग्ध भाव।
स्नेह – छोटों के प्रति स्निग्ध भाव।
आसक्ति – मोहजनित लगाव।
प्रणय – विपरीत लिंगों में एक दूसरे के प्रति उत्पन्न स्निग्ध भाव।
वात्सल्य – माता-पिता का बच्चों के प्रति प्रेम।
आज्ञा – इज़ाज़त भी, आदेश भी ।
अनुमति – इज़ाज़त।
अनुरोध – विनय पूर्वक किया गया आग्रह।
आग्रह – विनय के साथ-साथ अधिकार भाव से की गई प्रार्थना।
अनुकंपा – दूसरों के प्रति संवेदनशील होना/सहानुभूति पूर्ण कृपा।
अन्वेषण – अज्ञात पदार्थ स्थानादि का पता लगाना।
अनुसंधान – छानबीन, जाँचपड़ताल।
आविष्कार – किसी नवीन सिद्धान्त की खोज करना
इच्छा – सामान्य वस्तु को पाने की साधारण चाह।
अनुभव – कर्मेन्द्रियों द्वारा प्राप्त होने वाला ज्ञान।
अनुभूति – ज्ञनेंद्रियों द्वारा तात्कालिक प्राप्त होने वाला आन्तरिक ज्ञान।
अध्यक्ष – किसी सुसंगठित विधायी संस्था का प्रधान।
सभापति – आयोजित सभा का प्रधान।
अधिवेशन – किसी संस्था का बड़ा सम्मेलन।
बैठक – किसी संस्था की किसी समिति की थोड़े समय के लिए सभा।
आधि – मानसिक रोग/पीड़ा।
व्याधि – शारीरिक रोग/पीड़ा।
अनुमोदन – किसी कार्यवाही या कथन पर सहमति देना।
समर्थन – किसी प्रस्ताव या विचार पर सहमति देना।
अन्याय – न्याय के विरुद्ध काम।
अपराध – कानून का उल्लंघन।
विचित्र – नियमित से भिन्न।
विलक्षण – विरल लक्षण वाला
अवस्था – वर्तमान समय की उम्र की गणना।
आयु – सम्पूर्ण जीवन की उम्र की गणना।
अस्त्र – फेंककर चलाया जाने वाला हथियार।
शस्त्र – हाथ में थामकर चलाया जाने वाला हथियार।
https://t.me/aaftabaafridi1
अनुपम – जिसकी तुलना नहीं हो सकती।
अद्वितीय – जिसके समान कोई दूसरा न हो।
अपयश – स्थाई बदनामी।
कलंक – चरित्र पर अस्थाई दोष।
अध्ययन – सामान्य पठन-पाठन।
अनुशीलन – चिंतन-मनन सहित अध्ययन।
अनबन – दो व्यक्तियों की आपस में न बनना।
खटपट – दो पक्षों के बीच झगड़ा।
अर्पण – अपने से बड़ों के लिए।
प्रदान – बड़ों की ओर से छोटों के लिए।
आदि – एक-दो उदाहरणों के बाद।
इत्यादि – कई उदाहरणों के बाद
अर्चना – पुष्प, नैवेद्य आदि से देवता की पूजा।
पूजा – वस्तुओं के बिना, भाव से ईश्वर की प्रार्थना।
आराधना – मनोकांक्षा की पूर्ति हेतु इष्ट की पूजा।
उपासना – इष्टदेव की प्रार्थना।
अधिक – सीमा से ज्यादा।
काफी – निर्धारित सीमा के अनुरूप।
अनुमान – बौद्धिक तर्क द्वारा लिया गया निर्णय।
प्राक्कलन – भविष्य में होने वाले व्यय के बारे में गणना के सहारे किया गया अनुमान।
अपमान – किसी की प्रतिष्ठा को जानबूझकर ठेस पहुँचाना।
अवमानना – अनायास किसी की प्रतिष्ठा की हानि।
अमूल्य – जिसका मूल्य निर्धारण करना संभव न हो।
बहुमूल्य – जिसका मूल्य बहुत अधिक हो।
अभिनन्दन – किसी उपलब्धि पर सम्मान देना।
स्वागत – आये हुये व्यक्ति का सत्कार करना।
आपत्ति – जिस संकट का निवारण हो सके/अचानक आया संकट।
विपत्ति – जिस संकट का निवारण न हो सके।
आशा – अच्छे कार्य की उम्मीद।
आशंका – अनिष्ट होने का खटका।
शंका – होने न होने का संदेह।
आचरण – व्यक्ति का चरित्र।
व्यवहार – दूसरों के साथ किया जाने वाला क्रिया-व्यापार।
आकार – लम्बाई, चौड़ाई, ऊँचाई का नाप-जोख।
रूप – सौन्दर्य का नाप-जोख।
आदरणीय – अपने से बड़ो के लिए सामान्य रूप से प्रयुक्त सम्मान सूचक शब्द।
पूजनीय – माता-पिता, गुरुजन, महापुरुषों के लिए प्रयुक्त सम्मान सूचक शब्द।
अनुच्छेद – गद्यांश या अवतरण।
परिच्छेद – अध्याय
अन्तःकरण – विवेकादि का केन्द्र।
मन – सोच-विचार का केन्द्र।
चित्त – स्मरण केन्द्र।
आतंक – बल के आधार पर किया गया अत्याचार
त्रास – व्याकुलता सहित भय।
अधर – केवल नीचे का ओंठ।
ओष्ठ – ऊपर और नीचे के ओंठ।
आलोचना – गुण-दोषों का सम्यक् विवेचन।
निंदा – केवल दोषों का बखान
आनन्द – शारीरिक और आत्मिक सुख।
हर्ष – तत्कालीन सुख
उल्लास – उत्साहयुक्त क्षणिक प्रसन्नता
आलोचना – किसी एक पक्ष का विवेचन
समालोचना – सम्पूर्ण पक्षों का विवेचन
आमंत्रण – किसी समारोह में सम्मिलित होने के लिए सामान्य बुलावा।
निमंत्रण – भोजनादि के लिए विशेष बुलावा
उन्नति – यथास्थिति से ऊपर उठना
प्रगति – पिछड़ेपन की स्थिति से आगे बढ़ना।
उपहार – छोटे और वयस्कों को सप्रेम कुछ देना।
भेंट – बड़ों को आदर सहित कुछ देना।
उत्साह – किसी कार्य को करने की उमंग।
साहस – कठिन कार्य करने की हिम्मत।
उपस्थिति – व्यक्ति का होना।
विद्यमानता – वस्तु का होना
अभिमान – अपने को दूसरों से बड़ा समझने का घमण्ड।
अहंकार – झूठा घमण्ड।
गर्व – आत्म सम्मान सहित अभिमान।
अनभिज्ञ – जो किसी एक बात को नहीं जानता।
अज्ञ – जो कुछ नहीं जानता।
अज्ञेय – जो न जाना जा सके।
https://t.me/aaftabaafridi1
प्रेम – छोटे-बड़े, हमउम्र सबके प्रति स्निग्ध भाव।
स्नेह – छोटों के प्रति स्निग्ध भाव।
आसक्ति – मोहजनित लगाव।
प्रणय – विपरीत लिंगों में एक दूसरे के प्रति उत्पन्न स्निग्ध भाव।
वात्सल्य – माता-पिता का बच्चों के प्रति प्रेम।
आज्ञा – इज़ाज़त भी, आदेश भी ।
अनुमति – इज़ाज़त।
अनुरोध – विनय पूर्वक किया गया आग्रह।
आग्रह – विनय के साथ-साथ अधिकार भाव से की गई प्रार्थना।
अनुकंपा – दूसरों के प्रति संवेदनशील होना/सहानुभूति पूर्ण कृपा।
अन्वेषण – अज्ञात पदार्थ स्थानादि का पता लगाना।
अनुसंधान – छानबीन, जाँचपड़ताल।
आविष्कार – किसी नवीन सिद्धान्त की खोज करना
इच्छा – सामान्य वस्तु को पाने की साधारण चाह।
अनुभव – कर्मेन्द्रियों द्वारा प्राप्त होने वाला ज्ञान।
अनुभूति – ज्ञनेंद्रियों द्वारा तात्कालिक प्राप्त होने वाला आन्तरिक ज्ञान।
अध्यक्ष – किसी सुसंगठित विधायी संस्था का प्रधान।
सभापति – आयोजित सभा का प्रधान।
अधिवेशन – किसी संस्था का बड़ा सम्मेलन।
बैठक – किसी संस्था की किसी समिति की थोड़े समय के लिए सभा।
आधि – मानसिक रोग/पीड़ा।
व्याधि – शारीरिक रोग/पीड़ा।
अनुमोदन – किसी कार्यवाही या कथन पर सहमति देना।
समर्थन – किसी प्रस्ताव या विचार पर सहमति देना।
अन्याय – न्याय के विरुद्ध काम।
अपराध – कानून का उल्लंघन।
विचित्र – नियमित से भिन्न।
विलक्षण – विरल लक्षण वाला
अवस्था – वर्तमान समय की उम्र की गणना।
आयु – सम्पूर्ण जीवन की उम्र की गणना।
अस्त्र – फेंककर चलाया जाने वाला हथियार।
शस्त्र – हाथ में थामकर चलाया जाने वाला हथियार।
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अनुपम – जिसकी तुलना नहीं हो सकती।
अद्वितीय – जिसके समान कोई दूसरा न हो।
अपयश – स्थाई बदनामी।
कलंक – चरित्र पर अस्थाई दोष।
अध्ययन – सामान्य पठन-पाठन।
अनुशीलन – चिंतन-मनन सहित अध्ययन।
अनबन – दो व्यक्तियों की आपस में न बनना।
खटपट – दो पक्षों के बीच झगड़ा।
अर्पण – अपने से बड़ों के लिए।
प्रदान – बड़ों की ओर से छोटों के लिए।
आदि – एक-दो उदाहरणों के बाद।
इत्यादि – कई उदाहरणों के बाद
अर्चना – पुष्प, नैवेद्य आदि से देवता की पूजा।
पूजा – वस्तुओं के बिना, भाव से ईश्वर की प्रार्थना।
आराधना – मनोकांक्षा की पूर्ति हेतु इष्ट की पूजा।
उपासना – इष्टदेव की प्रार्थना।
अधिक – सीमा से ज्यादा।
काफी – निर्धारित सीमा के अनुरूप।
अनुमान – बौद्धिक तर्क द्वारा लिया गया निर्णय।
प्राक्कलन – भविष्य में होने वाले व्यय के बारे में गणना के सहारे किया गया अनुमान।
अपमान – किसी की प्रतिष्ठा को जानबूझकर ठेस पहुँचाना।
अवमानना – अनायास किसी की प्रतिष्ठा की हानि।
अमूल्य – जिसका मूल्य निर्धारण करना संभव न हो।
बहुमूल्य – जिसका मूल्य बहुत अधिक हो।
अभिनन्दन – किसी उपलब्धि पर सम्मान देना।
स्वागत – आये हुये व्यक्ति का सत्कार करना।
आपत्ति – जिस संकट का निवारण हो सके/अचानक आया संकट।
विपत्ति – जिस संकट का निवारण न हो सके।
आशा – अच्छे कार्य की उम्मीद।
आशंका – अनिष्ट होने का खटका।
शंका – होने न होने का संदेह।
आचरण – व्यक्ति का चरित्र।
व्यवहार – दूसरों के साथ किया जाने वाला क्रिया-व्यापार।
आकार – लम्बाई, चौड़ाई, ऊँचाई का नाप-जोख।
रूप – सौन्दर्य का नाप-जोख।
आदरणीय – अपने से बड़ो के लिए सामान्य रूप से प्रयुक्त सम्मान सूचक शब्द।
पूजनीय – माता-पिता, गुरुजन, महापुरुषों के लिए प्रयुक्त सम्मान सूचक शब्द।
अनुच्छेद – गद्यांश या अवतरण।
परिच्छेद – अध्याय
अन्तःकरण – विवेकादि का केन्द्र।
मन – सोच-विचार का केन्द्र।
चित्त – स्मरण केन्द्र।
आतंक – बल के आधार पर किया गया अत्याचार
त्रास – व्याकुलता सहित भय।
अधर – केवल नीचे का ओंठ।
ओष्ठ – ऊपर और नीचे के ओंठ।
आलोचना – गुण-दोषों का सम्यक् विवेचन।
निंदा – केवल दोषों का बखान
आनन्द – शारीरिक और आत्मिक सुख।
हर्ष – तत्कालीन सुख
उल्लास – उत्साहयुक्त क्षणिक प्रसन्नता
आलोचना – किसी एक पक्ष का विवेचन
समालोचना – सम्पूर्ण पक्षों का विवेचन
आमंत्रण – किसी समारोह में सम्मिलित होने के लिए सामान्य बुलावा।
निमंत्रण – भोजनादि के लिए विशेष बुलावा
उन्नति – यथास्थिति से ऊपर उठना
प्रगति – पिछड़ेपन की स्थिति से आगे बढ़ना।
उपहार – छोटे और वयस्कों को सप्रेम कुछ देना।
भेंट – बड़ों को आदर सहित कुछ देना।
उत्साह – किसी कार्य को करने की उमंग।
साहस – कठिन कार्य करने की हिम्मत।
उपस्थिति – व्यक्ति का होना।
विद्यमानता – वस्तु का होना
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यहां सभी एग्जाम के लिए हिंदी की समस्त टॉपिक वाइज क्विज है
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हिंदी व्याकरण - लोकोक्तियां 01
लोकोक्तियाँ
अक्ल बड़ी या भैंस- शारीरिक शक्ति की अपेक्षा बुद्धि का महत्व अधिक होता है |
अक्ल के पीछे लट्ठ लिए फिरना- सदा मूर्खतापूर्ण बातें या काम करते रहना।
अधजल गगरी छलकत जाए- थोड़ा होने पर अधिक दिखावा करना।
अपना हाथ जगन्नाथ- स्वतंत्र व्यक्ति जिसके काम में कोई दखल न दें ।
अपने पांव पर आप कुल्हाड़ी मारना- अपना अहित स्वयं करना।
अपनी अपनी डफली,अपना अपना राग- विचारो का बेमेल होना|
अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत- समय गुज़रने पर पछतावा करने से कोई लाभ नहीं होता।
अशर्फ़ियाँ लुटाकर कोयलों पर मोहर लगाना- मूल्यवान वस्तु भले ही जाए, पर तुच्छ चीज़ों को बचाना।
आसमान से गिरा खजूर में अटका- एक विपत्ति से निकलकर दूसरी में उलझना |
आप भला सो जग भला- स्वयं सही हो तो सारा संसार ठीक लगता है |
आगे कुआँ पीछे खाई- हर तरफ परेशानी होना; विपत्ति से बचाव का कोई मार्ग न होना |
आगे नाथ न पीछे पगहा- कोई भी जिम्मेदारी न होना; पूर्णत: बंधनरहित होना |
आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास- इच्छितकार्य न कर पाने पर कोई अन्य कार्य कर लेना|
आटे के साथ घुन भी पिसता है- अपराधी के साथ निरपराधी भी दण्ड पा जाताहै |
अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा- जहाँ मुखिया ही मूर्ख हो, वहाँ अन्याय ही होता है।
अंधों में काना राजा- मूर्खों में थोड़ा सा ज्ञानी।
अंधी पीसे कुत्ता खाये- परिश्रमी व्यक्ति के असावधानी पर अन्य व्यक्ति का उपभोग करना|
आम के आम गुठलियों के दाम- दुहरा लाभ होना |
आँख का अँधा, नाम नैनसुख- गुण न होने पर भी गुण का दिखावा करना।
ओखली मे सिर दिया तो मूसल से क्या डर- कठिन कार्यो में उलझ कर विपत्तियों से क्या घबराना |
एक अनार सौ बीमार- समान कम चाहने वाले बहुत ।
एक और एक ग्यारह- एकता मे शक्ति होती है |
एक पंथ दो काज- एक प्रयत्न से दोहरा लाभ।
एक तो चोरी ऊपर से सीनाज़ोरी- गलती करने पर भी उसे स्वीकार न करके विवाद करना|
एक हाथ से ताली नही बजती- झगड़ा एक ओर से नही होता |
एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा- अवगुणी में और अवगुणों का आ जाना |
एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकती- एक स्थान पर दो विचारधारायें नहीं रह सकतीं हैं|
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अक्ल बड़ी या भैंस- शारीरिक शक्ति की अपेक्षा बुद्धि का महत्व अधिक होता है |
अक्ल के पीछे लट्ठ लिए फिरना- सदा मूर्खतापूर्ण बातें या काम करते रहना।
अधजल गगरी छलकत जाए- थोड़ा होने पर अधिक दिखावा करना।
अपना हाथ जगन्नाथ- स्वतंत्र व्यक्ति जिसके काम में कोई दखल न दें ।
अपने पांव पर आप कुल्हाड़ी मारना- अपना अहित स्वयं करना।
अपनी अपनी डफली,अपना अपना राग- विचारो का बेमेल होना|
अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत- समय गुज़रने पर पछतावा करने से कोई लाभ नहीं होता।
अशर्फ़ियाँ लुटाकर कोयलों पर मोहर लगाना- मूल्यवान वस्तु भले ही जाए, पर तुच्छ चीज़ों को बचाना।
आसमान से गिरा खजूर में अटका- एक विपत्ति से निकलकर दूसरी में उलझना |
आप भला सो जग भला- स्वयं सही हो तो सारा संसार ठीक लगता है |
आगे कुआँ पीछे खाई- हर तरफ परेशानी होना; विपत्ति से बचाव का कोई मार्ग न होना |
आगे नाथ न पीछे पगहा- कोई भी जिम्मेदारी न होना; पूर्णत: बंधनरहित होना |
आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास- इच्छितकार्य न कर पाने पर कोई अन्य कार्य कर लेना|
आटे के साथ घुन भी पिसता है- अपराधी के साथ निरपराधी भी दण्ड पा जाताहै |
अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा- जहाँ मुखिया ही मूर्ख हो, वहाँ अन्याय ही होता है।
अंधों में काना राजा- मूर्खों में थोड़ा सा ज्ञानी।
अंधी पीसे कुत्ता खाये- परिश्रमी व्यक्ति के असावधानी पर अन्य व्यक्ति का उपभोग करना|
आम के आम गुठलियों के दाम- दुहरा लाभ होना |
आँख का अँधा, नाम नैनसुख- गुण न होने पर भी गुण का दिखावा करना।
ओखली मे सिर दिया तो मूसल से क्या डर- कठिन कार्यो में उलझ कर विपत्तियों से क्या घबराना |
एक अनार सौ बीमार- समान कम चाहने वाले बहुत ।
एक और एक ग्यारह- एकता मे शक्ति होती है |
एक पंथ दो काज- एक प्रयत्न से दोहरा लाभ।
एक तो चोरी ऊपर से सीनाज़ोरी- गलती करने पर भी उसे स्वीकार न करके विवाद करना|
एक हाथ से ताली नही बजती- झगड़ा एक ओर से नही होता |
एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा- अवगुणी में और अवगुणों का आ जाना |
एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकती- एक स्थान पर दो विचारधारायें नहीं रह सकतीं हैं|
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📖 हिंदी व्याकरण - मुहावरे 02
कान भरना- किसी के ख़िलाफ़ किसी के मन में कोई बात बैठाना।
कूच करना- जाना; प्रस्थान करना; चले जाना।
ख़ून पसीना एक करना- कड़ी मेहनत करना।
घोड़े बेचकर सोना- हर ज़िम्मेदारी से मुक्त हो जाना; बिल्कुल निश्चिंत हो जाना; किसी प्रकार की चिन्ता न करना।
घी के दिये जलाना- अत्यधिक प्रसन्न होना; खुशियाँ मनाना; प्रसन्नता ज़ाहिर करना।
चार चाँद लगाना- किसी सुन्दर वस्तु को और सुन्दर बनाना; किसी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाना; किसी को ज़्यादा मान-सम्मान देना।
चैन की सांस लेना- काम निपटाकर निश्चिन्त होना; कार्य पूर्ण होने पर शान्ति महसूस करना।
चोली-दामन का साथ होना- गहरी मित्रता होना; अत्यधिक घनिष्ठता होना; बहुत मधुर सम्बन्ध होना।
चिकना घड़ा होना- बेशर्म होना; किसी बात का प्रभाव न पड़ना; अपमान होने पर भी अपमानित महसूस न करना; किसी की लिहाज़ न करना।
चुल्लू भर पानी में डूबना- लज्जित होना; अपमानित होना।
छक्के छुड़ाना- बुरी तरह हराना; अपने से बलवान पर विजय प्राप्त करना।
छाती पर मूँग दलना- पास रहकर कष्ट देना।
जान में जान आना- मुसीबत से निकलने पर निश्चिंत होना।
जले/ घाव पर नमक छिड़कना- दुःखी को और अधिक दुःखी करना; किसी का काम खराब होने पर हंसी उड़ाना।
दाहिना हाथ होना- बहुत बड़ा सहायक होना।
दाँत खट्टे करना- प्रतिद्वंद्विता या लड़ाई में पछाड़ना।
दुम हिलाना- दीनतापूर्वक प्रसन्नता प्रकट करना।
नील का टीका लगाना- कलंक लगाना, कलंकित करना।
सिर ओखली में देना- व्यर्थ ही जान-बूझकर जोख़िम में पड़ना।
टोपी पहनाना- बेवकूफ़ बनाना; झाँसा देना।
हवा में गाँठ लगाना- बड़े-बड़े दावे करना; असम्भव कार्य को करने का दम भरना।
हाथ-खड़े कर देना- असमर्थता जताना; वक्त पर मदद से इन्कार करना।
हाथ धोना- गँवा देना।
हाथ पाँव मारना- प्रयास करना।
पानी देना- सींचना, तर्पण करना।
पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर- पास में रहकर ख़तरनाक व्यक्ति से दुश्मनी रखना।
पासा पलटना- अच्छा से बुरा या बुरा से अच्छा भाग्य होना; भाग्य का अनुकूल से प्रतिकूल या प्रतिकूल से अनुकूल होना।
पीठ दिखाना- कायरता दिखाना, भाग जाना, विमुख होना।
पैर पसारना- फैलाना, आराम से लेटना।
टोपी उछालना- अपमानित करना।
ठगा-सा रह जाना- बहुत छोटा महसूस करना, अपमानित महसूस करना।
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कान भरना- किसी के ख़िलाफ़ किसी के मन में कोई बात बैठाना।
कूच करना- जाना; प्रस्थान करना; चले जाना।
ख़ून पसीना एक करना- कड़ी मेहनत करना।
घोड़े बेचकर सोना- हर ज़िम्मेदारी से मुक्त हो जाना; बिल्कुल निश्चिंत हो जाना; किसी प्रकार की चिन्ता न करना।
घी के दिये जलाना- अत्यधिक प्रसन्न होना; खुशियाँ मनाना; प्रसन्नता ज़ाहिर करना।
चार चाँद लगाना- किसी सुन्दर वस्तु को और सुन्दर बनाना; किसी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाना; किसी को ज़्यादा मान-सम्मान देना।
चैन की सांस लेना- काम निपटाकर निश्चिन्त होना; कार्य पूर्ण होने पर शान्ति महसूस करना।
चोली-दामन का साथ होना- गहरी मित्रता होना; अत्यधिक घनिष्ठता होना; बहुत मधुर सम्बन्ध होना।
चिकना घड़ा होना- बेशर्म होना; किसी बात का प्रभाव न पड़ना; अपमान होने पर भी अपमानित महसूस न करना; किसी की लिहाज़ न करना।
चुल्लू भर पानी में डूबना- लज्जित होना; अपमानित होना।
छक्के छुड़ाना- बुरी तरह हराना; अपने से बलवान पर विजय प्राप्त करना।
छाती पर मूँग दलना- पास रहकर कष्ट देना।
जान में जान आना- मुसीबत से निकलने पर निश्चिंत होना।
जले/ घाव पर नमक छिड़कना- दुःखी को और अधिक दुःखी करना; किसी का काम खराब होने पर हंसी उड़ाना।
दाहिना हाथ होना- बहुत बड़ा सहायक होना।
दाँत खट्टे करना- प्रतिद्वंद्विता या लड़ाई में पछाड़ना।
दुम हिलाना- दीनतापूर्वक प्रसन्नता प्रकट करना।
नील का टीका लगाना- कलंक लगाना, कलंकित करना।
सिर ओखली में देना- व्यर्थ ही जान-बूझकर जोख़िम में पड़ना।
टोपी पहनाना- बेवकूफ़ बनाना; झाँसा देना।
हवा में गाँठ लगाना- बड़े-बड़े दावे करना; असम्भव कार्य को करने का दम भरना।
हाथ-खड़े कर देना- असमर्थता जताना; वक्त पर मदद से इन्कार करना।
हाथ धोना- गँवा देना।
हाथ पाँव मारना- प्रयास करना।
पानी देना- सींचना, तर्पण करना।
पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर- पास में रहकर ख़तरनाक व्यक्ति से दुश्मनी रखना।
पासा पलटना- अच्छा से बुरा या बुरा से अच्छा भाग्य होना; भाग्य का अनुकूल से प्रतिकूल या प्रतिकूल से अनुकूल होना।
पीठ दिखाना- कायरता दिखाना, भाग जाना, विमुख होना।
पैर पसारना- फैलाना, आराम से लेटना।
टोपी उछालना- अपमानित करना।
ठगा-सा रह जाना- बहुत छोटा महसूस करना, अपमानित महसूस करना।
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किस विकल्प में सभी शब्द ’सरस्वती’ के पर्यायवाची नहीं है ?
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गिरा, हंसवाहिनी
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वागीश्वरी, वाङ्मयी
26%
सुरभि, वीणापाणि
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शारदा, भारती
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इनमें से किस विकल्प के सभी शब्द परस्पर पर्यायवाची नहीं है ?
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दुकूल, वसन
26%
कच, कुंतल
32%
गगन, शून्य
27%
तट, मंदार
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निम्नलिखित में से किस विकल्प के सभी शब्दों में ’अनु’ उपसर्ग नहीं है ?
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39%
अनुदात्त, अनुर्वर
25%
अन्वेषण, अनुभव
25%
अन्वय, अनुशासन
10%
अनुराग, अनुचर
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