Hindi Quiz
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217 . निशा – यामिनी, रात्रि, रजनी, क्षपा, शर्वरी, रैन, निशि, विभावरी, निशीथ, तमस्विनी।

218 . नर्क – यमलोक, यमपुर, यमालय, जहन्नुम, दोजख, रौरव, दुर्गति।

219 . नमस्कार – प्रणाम, नमस्ते, अभिवादन, सलाम।

220 . निर्मल – विमल, पवित्र, पावन, अमल, स्वच्छ, निष्कलुष।

221 . नीति – रीति, राजविद्या, नय।

222 . नैसर्गिक – स्वाभाविक, प्राकृतिक, कुदरती।

223 . नियति – भावी, होनी, प्रारब्ध, भाग्य, देव।

224 . नाव – नौका, पतंग, तरणी, नैया, तरी, जलयान, नौ, बेड़ी, डौंगी, तरी।

225 . नारद – देवर्षि, ब्रह्मपुत्र, ब्रह्मर्षि।

226 . नाश – नष्ट, विनाश, क्षय, ध्वंस, अवसान, प्रलय, हानि।

227 . निंदा – दोषारोपण, फटकार, बुराई, भर्त्सना।

228 . नेता – प्रमुख, सरदार, अगुआ, प्रधान, नायक, अग्रणी।

प – से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

229 . पति – वल्लभ, भर्ता, स्वामी, नाथ, प्राणनाथ, साजन, सैंया, कांत, ईश, खाविंद, शौहर, भरतार, घरवाला, बालम।

230 . पत्नी – भार्या, दारा, वामा, परिणीता, गृहिणी, वल्लभा, कुलांगना, कलत्र, अर्धांगिनी, बहू, बधू।

231 . पाला – हिम, प्रालेय, नीहार, तुहिन, तुषार।

232 . प्रेम – राग, लगाव, प्रीति, स्नेह, अनुरक्ति, प्यार।

233 . प्रातःकाल – सुबह, सवेरा, भोर, प्रभात, विहान, उषाकाल।

234 . पराग – रज, पुष्परज, पुष्पधूलि, कुसुमरज।

235 . पिशाच – भूत, प्रेत, राक्षस।

236 . पृथ्वी – भू, भूमि, अचला, अनन्ता, रसा, विश्वंभरा, स्थिरा, धरा, धरित्री, धरणी, क्षोणि, ज्या, काश्यपि, क्षिति, सर्वंसहा, वसुमति, वसुधा, वसुन्धरा, गोत्रा, कुः, पृथिवी, अवनि, मेदिनी, मही, विपुला, गह्वरी, धात्री, गो, ईला, कुम्भिनी, भूतधात्री, रत्नगर्भा, जगती, सागर, अम्बरा, धरती, उवि।

237 . परिवार – घराना, वंश, कुल, कुटुंब, खानदान, कुनबा।

238 . पशु – मवेशी, चौपाया, जानवर, चतुष्पद, जंतु।

239 . पत्र – पत्ता, दल, पल्लव, पर्ण, किसलय, कोंपल, पात।

240 . पथ – मार्ग, राह, पंथ, रास्ता, डगर, बाट।

241 . पत्थर – अश्म, पाषाण, प्रस्तर, उपल, शिला, पाहन, ग्रावा।

242 . पर्वत – पहाड़, गिरि, शैल, अचल, नग, भूधर, महिधर, धराधर, अद्रि, भूभृत।

243 . पार्वती – गौरी, गिरिजा, उमा, शैलसुता, ईश्वरी, शिवा, भवानी, अपर्णा, दुर्गा, आर्या, अम्बिका, रूद्राणी, हेमवती, मैनसुता।

244 . पिता – जनक, तात, पितृ, बाप, अब्बा।

245 . पंडित – प्राज्ञ, कोविद, मनीषी, विद्वान, सुधी, विचक्षण, धीर, बुध, बुद्धिमान, विज्ञ।

246 . पुत्र – सुत, बेटा, तनय, आत्मज, तनुज, नन्दन, अपत्य, पूत।

247 . पुत्री – बेटी, सुता, तनया, आत्मजा, तनुजा, नन्दिनी, दुहिता।

248 . पवन – वायु, वात, हवा, समीर, बयार, अनिल, पवमान, मारूत।

249 . पुष्प – फूल, कुसुम, सुमन, प्रसून, पुहुप, फुल्ल, गुल।

250 . पुरुष – आदमी, जन, नर; मर्द, मनुज, मनुष्य, मानव, मानुष।

251 . पेड़ – तरू, द्रुम, वृक्ष, पादप, रूँख, विटप, गाछ, शाखी।

ब – से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

252 . बुद्धि – धी, मनीषा, प्रज्ञा, मति, समझ, अक्ल, जेहन, मेधा, धिषणा, सुजान।

253 . बंदर – कपि, मर्कट, कीश, वार, हरि, शाखामृग, वानर, केलिप्रिय, पिंगल, दर्भ।

254 . बहिन – सहोदरा, बांधवी, भगिनि, सहगर्भिणी, दीदी, जीजी।

255 . बाल – कच, केश, चिकुर, चूल, कुंतल, जटा, शिरोरूह, मेचक, काकुल, पश्म, गेसू, अलक, जुल्फ।

256 . बादल – जलद, जलधर, नीरद, पयोद, मेघ, वारिद, वारिधर, धन, पयोधर, अभ्र, बलाहक, अब्द, अंबुद, वारिवाह।

257 . बैल – हलधर, वृषभ, गोसुत, अनड्वान्।

258 . बर्तन – पात्र, बासन, भाँडा।

259 . बलराम – बलभद्र, हलायुध, मूसली, रेवतीरमण, बलदेव, बलवीर, हली, रोहिणीनन्दन, हलधर।

260 . बहुत – अनेक, अतीव, अति बहुल, प्रचुर, अपरिमित, प्रभूत अपार, अमित, अत्यन्त, असंख्य, विपुल।

261 . ब्राहमण – द्विज, भूदेव, विप्र, महीदेव, भूमिसुर, भूमिदेव, भूसुर, अग्रजन्मा।

262 . बिजली – चपला, चंचला, विद्युत, दामिनी, तड़ित, क्षणप्रभा, बिजुरी, घनवल्ली, सौदामिनी, घनदाम, शमा।

भ – से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द
263 . भय – भीति, डर, विभीषिका, आतंक, त्रास।

264 . भूखा – भुवखड़, क्षुधार्त्त, बुभुक्षित, क्षुधातुर, क्षुधालु।

265 . भाई – तात, भ्राता, भ्रातृ, सहोदर, बंधु, भैया, सजाता, सगर्भा।

266 . भेंट – नजराना, उपहार, सौगात, इनाम, पुरस्कार।

म – से शुरू होने वाले पर्यायवाची शब्द

267 . महेश – त्रिपुरारि, कैलाशपति, मदनारि, शिव शंकर, भूतनाथ, चन्द्रशेखर, चन्द्रमौलि, भोले, रूद्र, त्रिलोचन, त्रिनेत्र, आशुतोष, पशुपति


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'श्रावण' का सही संधि विच्छेद है -
Anonymous Quiz
18%
श्रौ + अण
18%
श्राव + अन
14%
श्राव + अण्
50%
श्रौ + अन
'सत्याग्रह' का सही संधि विच्छेद है -
Anonymous Quiz
2%
सत्या + ग्रह
20%
सत + आग्रह
4%
सत्य + ग्रह
73%
सत्य + आग्रह
'निरुत्तर' शब्द का शुद्ध संधि विच्छेद है -
Anonymous Quiz
2%
नि + उत्तर
30%
निः + उतर
18%
निर + उत्तर
50%
निः + उत्तर
❤1
'ज्ञानोदय' में प्रयुक्त संधि का नाम है -
Anonymous Quiz
61%
स्वर संधि
20%
व्यंजन संधि
17%
विसर्ग संधि
2%
इनमें से कोई नहीं
👍1
'निराधार' में प्रीत संधि का नाम है -
Anonymous Quiz
50%
स्वर संधि
23%
व्यंजन संधि
27%
विसर्ग संधि
1%
इनमें से कोई नहीं
निम्नलिखित शब्दों में से किसमें विसर्ग संधि है ?
Anonymous Quiz
65%
अतएव
14%
नरेन्द्र
14%
सज्जन
6%
सदैव
निम्नलिखित शब्दों में से किसमें व्यंजन संधि है ?
Anonymous Quiz
17%
सप्तऋषि
16%
निराधार
61%
सत्कार
5%
हिमालय
👍1
'अ + इ = ए' स्वर संधि के किस भेद को व्यक्त करता है ?
Anonymous Quiz
13%
दीर्घ संधि
67%
गुण संधि
12%
वृद्धि संधि
6%
यण संधि
3%
अयादि संधि
❤1
सत् + चरित्र = सच्चरित्र किस संधि का उदाहरण है ?
Anonymous Quiz
6%
स्वर संधि
84%
व्यंजन संधि
10%
विसर्ग संधि
0%
इनमें से कोई नहीं
❤1
अधः + गति = अधोगति किस संधि का उदाहरण है ?
Anonymous Quiz
4%
स्वर संधि
14%
व्यंजन संधि
78%
विसर्ग संधि
4%
गुण संधि
❤1
उत् + हार के योग से कौन -सा शब्द बनेगा ?
Anonymous Quiz
3%
उतार
8%
आहार
17%
उदार
72%
उद्धार
'दृगंचल' का सही संधि विच्छेद है -
Anonymous Quiz
13%
दृग + अंचल
11%
दृगं + अचल
75%
दृक् + अंचल
1%
दृग + चल
❤1
'पर्यावरण' शब्द का संधि विच्छेद कौन -सा है -
Anonymous Quiz
4%
पर्या + वरण
94%
परि + आवरण
1%
परिध + आवरण
0%
परिधि + आवरण
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संधि

सन्धि का शाब्दिक अर्थ होता है जुड़ना अर्थात् दो वर्णों के मेल से उत्पन्न विकार सन्धि कहलाता है । हमारी हिंदी भाषा में संधि के द्वारा पुरे शब्दों को लिखने की परम्परा नहीं है। लेकिन संस्कृत में संधि के बिना कोई काम नहीं चलता। संस्कृत की व्याकरण की परम्परा बहुत पुरानी है। संस्कृत भाषा को अच्छी तरह जानने के लिए व्याकरण को पढना जरूरी है। शब्द रचना में भी संधियाँ काम करती हैं।

Note :-संधि और समास में केवल इतना अंतर है संधि में दो वर्णों का मेल होता है और समास में दो पदों का ।

जब दो शब्द मिलते हैं तो पहले शब्द की अंतिम ध्वनि और दूसरे शब्द की पहली ध्वनि आपस में मिलकर जो परिवर्तन लाती हैं उसे संधि कहते हैं।

उदहारण :-
हिमालय = हिम + आलय
सत् + आनंद =सदानंद।

संधि तीन प्रकार की होती हैं :-
1 ) स्वर संधि
2 ) व्यंजन संधि
3 ) विसर्ग संधि
1. स्वर संधि क्या होती है :- जब स्वर के साथ स्वर का मेल होता है तब जो परिवर्तन होता है उसे स्वर संधि कहते हैं। हिंदी में स्वरों की संख्या ग्यारह होती है। बाकी के अक्षर व्यंजन होते हैं। जब दो स्वर मिलते हैं जब उससे जो तीसरा स्वर बनता है उसे स्वर संधि कहते हैं।
उदहारण :-

विद्या + आलय = विद्यालय
गिरि + ईश = गिरीश
भोजन + आलय = भोजनालय

1) स्वर संधि पांच प्रकार की होती हैं :-
(क) दीर्घ संधि

(ख) गुण संधि

(ग) वृद्धि संधि

(घ) यण संधि

(ड)अयादि संधि

(क) दीर्घ संधि का होती है :- स्वर संधि का वह भेद जिसमें दो सजातीय स्वरों के मिलने से हमेशा दीर्घ स्वर बनता है उसे स्वर संधि की दीर्घ संधि कहते हैं। इसे ह्रस्व संधि भी कहते हैं।
नियम :- अ + अ = आ
इ + इ = ई
उ + उ = ऊ
ऋ + ऋ = ॠ

उदहारण :-

धर्म + अर्थ = धर्मार्थ (ऋ + ऋ = ॠ )
पुस्तक + आलय = पुस्तकालय (अ + आ = आ )
विद्या + अर्थी = विद्यार्थी (आ + अ = आ )
रवि + इंद्र = रविन्द्र (इ + इ = ई )
गिरी +ईश = गिरीश (ई + इ = ई )
मुनि + ईश = मुनीश (इ + ई = ई )
मुनि +इंद्र = मुनींद्र (इ + इ = ई )
भानु + उदय = भानूदय (उ + उ = ऊ )
वधू + ऊर्जा = वधूर्जा (ऊ + ऊ = ऊ )
विधु + उदय = विधूदय (उ + उ = ऊ )
भू + उर्जित = भूर्जित (ऊ + उ = ऊ ) ।

2. गुण संधि क्या होती है :- जब ( अ , आ ) के साथ ( इ , ई ) हो तो ‘ ए ‘ बनता है , जब ( अ , आ )के साथ ( उ , ऊ ) हो तो ‘ ओ ‘बनता है , जब ( अ , आ ) के साथ ( ऋ ) हो तो ‘ अर ‘ बनता है। उसे गुण संधि कहते हैं।
उदहारण :-

नर + इंद्र + नरेंद्र (अ + इ = ए )
सुर + इन्द्र = सुरेन्द्र (अ + इ = ए )
ज्ञान + उपदेश = ज्ञानोपदेश (अ + उ = ओ )
भारत + इंदु = भारतेन्दु (अ + इ = ए )
देव + ऋषि = देवर्षि (अ + ऋ = अर् )
सर्व + ईक्षण = सर्वेक्षण (अ + ई = ए )

3. वृद्धि संधि क्या होती है :- जब ( अ , आ ) के साथ ( ए , ऐ ) हो तो ‘ ऐ ‘ बनता है और जब ( अ , आ ) के साथ ( ओ , औ )हो तो ‘ औ ‘ बनता है। उसे वृधि संधि कहते हैं।
उदहारण :-

मत+एकता = मतैकता (अ + ए = ऐ )
एक +एक =एकैक (अ + ए = ऐ )
धन + एषणा = धनैषणा (अ + ए = ऐ )
सदा + एव = सदैव (आ + ए = ऐ )
महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य (आ + ऐ = ऐ )
महा + ओज = महौज (आ + ओ = औ )
परम + ओज = परमौज (अ + ओ = औ )
वन + औषध = वनौधष (अ + औ = औ )

4. यण संधि क्या होती है :- जब ( इ , ई ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘ य ‘ बन जाता है , जब ( उ , ऊ ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘ व् ‘ बन जाता है , जब ( ऋ ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘ र ‘ बन जाता है। यण संधि के तीन प्रकार के संधि युक्त्त पद होते हैं।
5. 1. य से पूर्व आधा व्यंजन होना चाहिए।
6. 2. व् से पूर्व आधा व्यंजन होना चाहिए।
7. 3. शब्द में त्र होना चाहिए।
यण स्वर संधि में एक शर्त भी दी गयी है कि य और त्र में स्वर होना चाहिए और उसी से बने हुए शुद्ध व् सार्थक स्वर को + के बाद लिखें। उसे यण संधि कहते हैं।

उदहारण :-

इति + आदि = इत्यादि (इ + आ = या )
परी + आवरण = पर्यावरण (ई + आ = या )
अनु + अय = अन्वय (उ + अ = व )
अति + अधिक = अत्यधिक (इ + अ = य )
इति + आदि = इत्यादि (इ + आ = या )
नि + ऊन = न्यून (इ + ऊ = यू )
सु + आगत = स्वागत (उ + आ = वा )
अभी + आगत = अभ्यागत (ई + आ = या )
पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा (ऋ + आ = रा )
मातृ + आज्ञा = मात्राज्ञा (ऋ + आ = रा )

5. अयादि संधि क्या होती है :- जब ( ए , ऐ , ओ , औ ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘ ए – अय ‘ में , ‘ ऐ – आय ‘ में , ‘ ओ – अव ‘ में, ‘ औ – आव ‘ ण जाता है। य , व् से पहले व्यंजन पर अ , आ की मात्रा हो तो अयादि संधि हो सकती है लेकिन अगर और कोई विच्छेद न निकलता हो तो + के बाद वाले भाग को वैसा का वैसा लिखना होगा। उसे अयादि संधि कहते हैं।
उदहारण :-
❤1🙏1
ने + अन = नयन (ए + अ = अय )
नै + अक = नायक (ऐ + अ = आय)
नौ + इक = नाविक (औ + इ = आवि )
भो + अन = भवन ।ओ + अ = अव )
पो + इत्र = पवित्र (ओ + इ = अवि )
नै + इका = नायिका (ऐ + इ = आयि )
श्रो + अन = श्रवण (ओ + अ = अव )
पो + इत्र = पवित्र (ओ + इ = अवि )

2)व्यंजन संधि
व्यंजन संधि क्या होती है :- जब व्यंजन को व्यंजन या स्वर के साथ मिलाने से जो परिवर्तन होता है , उसे व्यंजन संधि कहते हैं।

कुछ नियम इस प्रकार हैं-

(1) यदि 'म्' के बाद कोई व्यंजन वर्ण आये तो 'म्' का अनुस्वार हो जाता है या वह बादवाले वर्ग के पंचम वर्ण में भी बदल सकता है। जैसे-
अहम् + कार =अहंकार
पम् + चम =पंचम
सम् + गम =संगम

(2) यदि 'त्-द्' के बाद 'ल' रहे तो 'त्-द्' 'ल्' में बदल जाते है और 'न्' के बाद 'ल' रहे तो 'न्' का अनुनासिक के बाद 'ल्' हो जाता है। जैसे-
उत् + लास =उल्लास
महान् + लाभ =महांल्लाभ
तत् + लीन = तल्लीन
उत् + लेख = उल्लेख
सरत् + लास = सरल्लास


(3) यदि 'क्', 'च्', 'ट्', 'त्', 'प', के बाद किसी वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आये, या, य, र, ल, व, या कोई स्वर आये, तो 'क्', 'च्', 'ट्', 'त्', 'प',के स्थान में अपने ही वर्ग का तीसरा वर्ण हो जाता है। जैसे-

दिक् + गज = दिग्गज
सत् + वाणी = सदवाणी
अच + अन्त = अजन्त
षट + दर्शन = षड्दर्शन
वाक् + जाल = वगजाल
अप् + इन्धन = अबिन्धन
तत् + रूप = तद्रूप
जगत् + आनन्द = जगदानन्द
दिक् + भ्रम = दिगभ्रम
उत् + नति = उन्नति
सत् + मार्ग = सन्मार्ग
अप् + मय = अम्मय

(4) यदि 'क्', 'च्', 'ट्', 'त्', 'प', के बाद 'न' या 'म' आये, तो क्, च्, ट्, त्, प, अपने वर्ग के पंचम वर्ण में बदल जाते हैं। जैसे-

वाक् + मय = वाड्मय
अप् + मय = अम्मय
षट् + मार्ग = षणमार्ग
जगत् + नाथ = जगत्राथ
उत् + नति = उत्रति
षट् + मास = षण्मास

(5)सकार और तवर्ग का शकार और चवर्ग के योग में शकार और चवर्ग तथा षकार और टवर्ग के योग में षकार और टवर्ग हो जाता है। जैसे-

स् + श

रामस् + शेते = रामश्शेते

त् + श

उत् + श्वास = उच्छवास
उत् + शिष्ठ = उच्छिष्ठ
तत् + शिव = तच्छिव

त् + च

सत् + चित = सच्चित
सत् + चरित्र = सच्चरित्र

त् + छ

महत् + छात्र = महच्छत्र
जगत् + छाया = जगच्छाया
उत् + छलन = उच्छलन

त् + ण

महत् +णकार = महण्णकार

ष् + त

द्रष् + ता = द्रष्टा

त् + ट

बृहत् + टिट्टिभ = बृहटिट्टिभ

(6)यदि वर्गों के अन्तिम वर्णों को छोड़ शेष वर्णों के बाद 'ह' आये, तो 'ह' पूर्ववर्ण के वर्ग का चतुर्थ वर्ण हो जाता है और 'ह्' के पूर्ववाला वर्ण अपने वर्ग का तृतीय वर्ण। जैसे-

उत् + हत = उद्धत
उत् + हार = उद्धार
वाक् + हरि = वाग्घरि
पत् + हति = पद्धति
तत् + हित = तद्धित

(7) हस्व स्वर के बाद 'छ' हो, तो 'छ' के पहले 'च्' जुड़ जाता है। दीर्घ स्वर के बाद 'छ' होने पर यह विकल्प से होता है। जैसे-

परि + छेद = परिच्छेद
शाला + छादन = शालाच्छादन

3) विसर्ग संधि
विसर्ग संधि क्या होती है :- विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन मेल से जो विकार होता है, उसे 'विसर्ग संधि' कहते है।
दूसरे शब्दों में-स्वर और व्यंजन के मेल से विसर्ग में जो परिवर्तन होता है, उसे 'विसर्ग संधि' कहते है।
कुछ नियम इस प्रकार हैं-

(1) यदि विसर्ग के पहले 'अ' आये और उसके बाद वर्ग का तृतीय, चतुर्थ या पंचम वर्ण आये या य, र, ल, व, ह रहे तो विसर्ग का 'उ' हो जाता है और यह 'उ' पूर्ववर्ती 'अ' से मिलकर गुणसन्धि द्वारा 'ओ' हो जाता है। जैसे-

मनः + रथ = मनोरथ
सरः + ज = सरोज
मनः + भाव = मनोभाव
पयः + द = पयोद
मनः + विकार = मनोविकार
पयः+ धर = पयोधर
मनः + हर = मनोहर
वयः + वृद्ध = वयोवृद्ध
यशः + धरा = यशोधरा
सरः + वर = सरोवर
तेजः + मय = तेजोमय
यशः + दा = यशोदा
पुरः + हित = पुरोहित
मनः + योग = मनोयोग

(2) यदि विसर्ग के पहले इकार या उकार आये और विसर्ग के बाद का वर्ण क, ख, प, फ हो, तो विसर्ग का ष् हो जाता है। जैसे-

निः + कपट = निष्कपट
निः + फल = निष्फल
निः + पाप = निष्पाप
दुः + कर = दुष्कर

(3) यदि विसर्ग के पहले 'अ' हो और परे क, ख, प, फ मे से कोइ वर्ण हो, तो विसर्ग ज्यों-का-त्यों रहता है। जैसे-

प्रातः + काल = प्रातःकाल
पयः + पान = पयःपान

(4) यदि 'इ' - 'उ' के बाद विसर्ग हो और इसके बाद 'र' आये, तो 'इ' - 'उ' का 'ई' - 'ऊ' हो जाता है और विसर्ग लुप्त हो जाता है। जैसे-

निः + रव = नीरव
निः + रस = नीरस
निः + रोग = नीरोग दुः+राज =दूराज

(5) यदि विसर्ग के पहले 'अ' और 'आ' को छोड़कर कोई दूसरा स्वर आये और विसर्ग के बाद कोई स्वर हो या किसी वर्ग का तृतीय, चतुर्थ या पंचम वर्ण हो या य, र, ल, व, ह हो, तो विसर्ग के स्थान में 'र्' हो जाता है। जैसे-
❤2