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NTPC Limited के पास औसतन 5 से 7 दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है...ये एक बड़ा खेल खेला जा रहा है कोयला खत्म नहो हो रही है बल्कि..बिजली क्राइसेस दिखाया जा रहा है...बिजली आप को आने वाले वक़्त मे बहुत महंगी मिलने वाली है वो भी CBDC, सोशल क्रेडिट स्कोर सिस्टम और कार्बन क्रेडिट सिस्टम मे👆👆
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17 Sustainable Development Goals - सतत विकास में एनर्जी क्राइसिस भी इनके 2030 एजेंडा का एक पार्ट है!
संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में लक्ष्य नंबर 7 (Goal 7) ऊर्जा (Energy) से संबंधित है।
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17 Sustainable Development Goals - सतत विकास में एनर्जी क्राइसिस भी इनके 2030 एजेंडा का एक पार्ट है!
संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में लक्ष्य नंबर 7 (Goal 7) ऊर्जा (Energy) से संबंधित है।
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अखंड भारत 🇮🇳🇮🇳
NTPC Limited के पास औसतन 5 से 7 दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है...ये एक बड़ा खेल खेला जा रहा है कोयला खत्म नहो हो रही है बल्कि..बिजली क्राइसेस दिखाया जा रहा है...बिजली आप को आने वाले वक़्त मे बहुत महंगी मिलने वाली है वो भी CBDC, सोशल क्रेडिट स्कोर सिस्टम और कार्बन…
अक्टूबर 2026 की शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी NTPC Limited के पास औसतन 5 से 7 दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है। बिजली की भारी मांग के कारण NTPC के पास कोयले का स्टॉक घटकर करीब 5.2 मिलियन टन रह गया है, जो सामान्य जरूरत के मुकाबले काफी कम है।
स्थिति इतनी नाजुक क्यों हुई?
बिजली की बढ़ती मांग: जुलाई से सितंबर के दौरान NTPC ने पिछले साल के मुकाबले करीब 13% अधिक बिजली का उत्पादन किया है, जिससे कोयले की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है।
कई प्लांट 'क्रिटिकल' कैटेगरी में: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के नियमों के मुताबिक, जब किसी प्लांट में निर्धारित कोटे का 25% से कम कोयला बचता है, तो उसे गंभीर (Critical) माना जाता है। NTPC के करीब 10 प्लांट इस वक्त इसी श्रेणी में हैं।
पूरे देश का हाल: केवल NTPC ही नहीं, बल्कि देश के 191 थर्मल पावर प्लांटों में से लगभग 81 से 90 प्लांट इस समय कोयले की भारी कमी से जूझ रहे हैं।
सरकार और NTPC के बचाव उपाय
भले ही स्टॉक सिर्फ 6 दिनों का बचा हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तुरंत बिजली गुल (Blackout) हो जाएगी, क्योंकि कोयले की रोजाना सप्लाई भी जारी है। स्थिति को संभालने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
प्राइवेट और कमर्शियल माइंस से खरीदारी: NTPC ने कोल इंडिया (CIL) के अलावा पहली बार बड़े पैमाने पर निजी और कमर्शियल खदानों से करीब 10 मिलियन टन अतिरिक्त कोयला खरीदने का फैसला किया है।
खुद की खदानों में उत्पादन बढ़ाना: कंपनी अपनी कैप्टिव (स्वामित्व वाली) खदानों से भी कोयला निकालने की रफ्तार को तेज कर रही है।
कोल इंडिया का दावा: दूसरी ओर, देश की सबसे बड़ी कोयला प्रदाता कंपनी कोल इंडिया (CIL) का कहना है कि उन्होंने NTPC को सप्लाई में कोई कमी नहीं की है और पिछले साल के मुकाबले 5% ज्यादा कोयला भेजा है।
स्थिति इतनी नाजुक क्यों हुई?
बिजली की बढ़ती मांग: जुलाई से सितंबर के दौरान NTPC ने पिछले साल के मुकाबले करीब 13% अधिक बिजली का उत्पादन किया है, जिससे कोयले की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है।
कई प्लांट 'क्रिटिकल' कैटेगरी में: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के नियमों के मुताबिक, जब किसी प्लांट में निर्धारित कोटे का 25% से कम कोयला बचता है, तो उसे गंभीर (Critical) माना जाता है। NTPC के करीब 10 प्लांट इस वक्त इसी श्रेणी में हैं।
पूरे देश का हाल: केवल NTPC ही नहीं, बल्कि देश के 191 थर्मल पावर प्लांटों में से लगभग 81 से 90 प्लांट इस समय कोयले की भारी कमी से जूझ रहे हैं।
सरकार और NTPC के बचाव उपाय
भले ही स्टॉक सिर्फ 6 दिनों का बचा हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तुरंत बिजली गुल (Blackout) हो जाएगी, क्योंकि कोयले की रोजाना सप्लाई भी जारी है। स्थिति को संभालने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
प्राइवेट और कमर्शियल माइंस से खरीदारी: NTPC ने कोल इंडिया (CIL) के अलावा पहली बार बड़े पैमाने पर निजी और कमर्शियल खदानों से करीब 10 मिलियन टन अतिरिक्त कोयला खरीदने का फैसला किया है।
खुद की खदानों में उत्पादन बढ़ाना: कंपनी अपनी कैप्टिव (स्वामित्व वाली) खदानों से भी कोयला निकालने की रफ्तार को तेज कर रही है।
कोल इंडिया का दावा: दूसरी ओर, देश की सबसे बड़ी कोयला प्रदाता कंपनी कोल इंडिया (CIL) का कहना है कि उन्होंने NTPC को सप्लाई में कोई कमी नहीं की है और पिछले साल के मुकाबले 5% ज्यादा कोयला भेजा है।
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ध्रुव राठी पासपोर्ट दिखाते हुए बोले, "मैं भारतीय नागरिक हूं, था और रहूंगा..." ।👇👇
ध्रुव राठी से मेरा सवाल 👇👇
ध्रुव राठी को क्या ये नहीं पता की विदेश मंत्रालय ने जारी किया है की अब पासपोर्ट को भारत की नागरिकता का सबूत नहीं माना जाएगा , तो ध्रुव राठी जी अपना पासपोर्ट कचड़े के ढ़ेर मे अब फेक दीजिये!
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
🪪 आधार कार्ड
🆔 वोटर ID (EPIC)
📕 पासपोर्ट
🚘 ड्राइविंग लाइसेंस
👤 PAN कार्ड
👶 जन्म प्रमाण पत्र
🏠 निवास प्रमाण पत्र
📄 राशन कार्ड
🏫 शैक्षणिक प्रमाण पत्र
ये सभी सरकारी दस्तावेज़ भी नागरिकता के प्रमाण अब नहीं माने जाएंगे ❓
ध्रुव राठी से मेरा सवाल 👇👇
ध्रुव राठी को क्या ये नहीं पता की विदेश मंत्रालय ने जारी किया है की अब पासपोर्ट को भारत की नागरिकता का सबूत नहीं माना जाएगा , तो ध्रुव राठी जी अपना पासपोर्ट कचड़े के ढ़ेर मे अब फेक दीजिये!
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🪪 आधार कार्ड
🆔 वोटर ID (EPIC)
📕 पासपोर्ट
🚘 ड्राइविंग लाइसेंस
👤 PAN कार्ड
👶 जन्म प्रमाण पत्र
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📄 राशन कार्ड
🏫 शैक्षणिक प्रमाण पत्र
ये सभी सरकारी दस्तावेज़ भी नागरिकता के प्रमाण अब नहीं माने जाएंगे ❓
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ध्रुव राठी लग्जरी और मस्त अय्याशी की जिंदगी जी रहा है ये सभी यूनाइटेड नेशन CIA और डीप स्टेट के एजेंट है! 💯%
ध्रुव राठी जी आप के साथ हुआ तो आप इतना कहानी सुना रहे हो... और भारत की जनता इतने सालों से दुःख, पीड़ा, अत्याचार और गुलामी झेल रही है तो उस माँ, पिता, बेटा, बेटी और परिवार का दुःख और आंसू को कौन पोछेगा... 👆👆
ध्रुव राठी जी आप के साथ हुआ तो आप इतना कहानी सुना रहे हो... और भारत की जनता इतने सालों से दुःख, पीड़ा, अत्याचार और गुलामी झेल रही है तो उस माँ, पिता, बेटा, बेटी और परिवार का दुःख और आंसू को कौन पोछेगा... 👆👆
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एनटीपीसी ने कोयले की खरीद बढ़ा दी है क्योंकि शेयर बाजार 5-6 दिनों के स्तर पर आ गए हैं।
https://www.financialexpress.com/business/news-ntpc-ramps-up-coal-buys-as-stocks-fall-to-5-6-days-playback-4355099/
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APAAR ID को समझने के लिए अभी तक की सबसे अच्छी वीडियो है ये... कम समय मे पूरी जानकारी 💯%👆👆
आधार और APAAR ID पर क़ानूनी सिस्टम से कैसे लड़े 👇👇पूरी जानकारी 👇👇
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अखंड भारत 🇮🇳🇮🇳
APAAR ID को समझने के लिए अभी तक की सबसे अच्छी वीडियो है ये... कम समय मे पूरी जानकारी 💯%👆👆 आधार और APAAR ID पर क़ानूनी सिस्टम से कैसे लड़े 👇👇पूरी जानकारी 👇👇
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के लिए 'ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री' (APAAR ID) बनवाना पूरी तरह स्वैच्छिक (ऐच्छिक) है। स्कूल या शिक्षण संस्थान छात्रों या उनके माता-पिता को इसे बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। किसी भी बच्चे को अपार आईडी न होने के कारण शिक्षा या एडमिशन से वंचित नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश
कोर्ट ने केंद्र सरकार और CBSE को निर्देश दिया है कि अपार सहमति फॉर्म (Consent Form) में 'ऑप्ट-आउट' (मना करने) का स्पष्ट विकल्प जोड़ा जाए।
छात्रों का व्यक्तिगत और शैक्षणिक डेटा किसी भी निजी कंपनी या तीसरे पक्ष (Third-Party) के साथ साझा नहीं किया जा सकता है।
सारा डेटा डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के नियमों के तहत ही सुरक्षित रखा जाएगा।
अपार आईडी (APAAR ID) बनाना पूरी तरह से स्वैच्छिक (वैकल्पिक) है। अदालत और एनसीईआरटी (NCERT) के स्पष्ट आदेश के अनुसार इसे छात्रों या अभिभावकों पर अनिवार्य नहीं किया जा सकता। इसके न होने पर किसी भी छात्र को स्कूल में प्रवेश या परीक्षा देने से नहीं रोका जा सकता।
मुख्य बातें:
मरजी पर निर्भर: अपार आईडी बनवाना या न बनवाना छात्र और उनके माता-पिता की इच्छा पर है।
प्रवेश और परीक्षा: आईडी न होने पर भी दाखिला और फॉर्म भरे जा सकते हैं।
दबाव नहीं: कोई भी स्कूल इसे जबरन बनाने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
याद कीजिये सरकार ने आप को NEP 2020 यानि राष्ट्रीय ( नई ) शिक्षा नीति 2020 लागू कर दी है... जिसके तहत आप के बच्चें की APAAR ID बनाई गई है... जिसमे हर बच्चें यानि स्टूडेंट्स का DG लॉकर होगा... और और वहां भविष्य में आपके व्यवहार, सोच, कार्य के ऊपर एक टूल बनाए गए है जिसे सोशल क्रेडिट स्कोर के नाम से हम जानते है... आपके व्यवहार के ऊपर में क्रेडिट स्कोर मिलेंगे अगर वह क्रेडिट स्कोर DOWN यानि कम रहा तो फिर आपके सारे अधिकार खत्म और आप सरकार के कोई भी लाभ नहीं ले सकते हैं... यहां तक की आपको कोई प्राइवेट जॉब या सरकारी जॉब भी नहीं मिलेगी!... इसे हम न्यू वर्ल्ड ऑर्डर एजेंडा 2030 कहते हैं टोटल कंट्रोल (गुलाम भारत)
मनोज कुमार
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश
कोर्ट ने केंद्र सरकार और CBSE को निर्देश दिया है कि अपार सहमति फॉर्म (Consent Form) में 'ऑप्ट-आउट' (मना करने) का स्पष्ट विकल्प जोड़ा जाए।
छात्रों का व्यक्तिगत और शैक्षणिक डेटा किसी भी निजी कंपनी या तीसरे पक्ष (Third-Party) के साथ साझा नहीं किया जा सकता है।
सारा डेटा डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के नियमों के तहत ही सुरक्षित रखा जाएगा।
अपार आईडी (APAAR ID) बनाना पूरी तरह से स्वैच्छिक (वैकल्पिक) है। अदालत और एनसीईआरटी (NCERT) के स्पष्ट आदेश के अनुसार इसे छात्रों या अभिभावकों पर अनिवार्य नहीं किया जा सकता। इसके न होने पर किसी भी छात्र को स्कूल में प्रवेश या परीक्षा देने से नहीं रोका जा सकता।
मुख्य बातें:
मरजी पर निर्भर: अपार आईडी बनवाना या न बनवाना छात्र और उनके माता-पिता की इच्छा पर है।
प्रवेश और परीक्षा: आईडी न होने पर भी दाखिला और फॉर्म भरे जा सकते हैं।
दबाव नहीं: कोई भी स्कूल इसे जबरन बनाने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
याद कीजिये सरकार ने आप को NEP 2020 यानि राष्ट्रीय ( नई ) शिक्षा नीति 2020 लागू कर दी है... जिसके तहत आप के बच्चें की APAAR ID बनाई गई है... जिसमे हर बच्चें यानि स्टूडेंट्स का DG लॉकर होगा... और और वहां भविष्य में आपके व्यवहार, सोच, कार्य के ऊपर एक टूल बनाए गए है जिसे सोशल क्रेडिट स्कोर के नाम से हम जानते है... आपके व्यवहार के ऊपर में क्रेडिट स्कोर मिलेंगे अगर वह क्रेडिट स्कोर DOWN यानि कम रहा तो फिर आपके सारे अधिकार खत्म और आप सरकार के कोई भी लाभ नहीं ले सकते हैं... यहां तक की आपको कोई प्राइवेट जॉब या सरकारी जॉब भी नहीं मिलेगी!... इसे हम न्यू वर्ल्ड ऑर्डर एजेंडा 2030 कहते हैं टोटल कंट्रोल (गुलाम भारत)
मनोज कुमार
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अखंड भारत 🇮🇳🇮🇳
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के लिए 'ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री' (APAAR ID) बनवाना पूरी तरह स्वैच्छिक (ऐच्छिक) है। स्कूल या शिक्षण संस्थान छात्रों या उनके माता-पिता को इसे बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। किसी भी बच्चे को अपार…
पुट्टास्वामी मामला (2017): सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस के.एस. पुट्टास्वामी भारतीय नागरिक की निजता के अधिकार पे सर्वसम्मति से फैसला सुनाया
24 अगस्त 2017 को, सुप्रीम कोर्ट की 9-जजों की बेंच ने ऐतिहासिक जस्टिस के.एस. पुट्टास्वामी (सेवानिवृत्त) बनाम भारत संघ (Union of India) मामले में सर्वसम्मति से फैसला सुनाया कि निजता का अधिकार (Right to Privacy) भारत के संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है। यह अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक अभिन्न हिस्सा है।
पुट्टास्वामी मामले (2017) की मुख्य बातें:
मूल मुद्दा: आधार (Aadhaar) कार्ड योजना की संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि यह नागरिकों की निजता का उल्लंघन करती है।
ऐतिहासिक फैसला: न्यायालय ने स्थापित किया कि निजता संविधान के भाग III के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) के तहत संरक्षित एक मौलिक अधिकार है।
पुराने फैसले पलटे: कोर्ट ने एमपी शर्मा (1954) और खड़क सिंह (1962) के पुराने निर्णयों को खारिज कर दिया, जिनमें निजता को मौलिक अधिकार नहीं माना गया था।
परिभाषा: निजता को गरिमा, स्वायत्तता (autonomy), और व्यक्तिगत चयन के एक आवश्यक पहलू के रूप में मान्यता दी गई, जिसमें यौन अभिविन्यास भी शामिल है।
प्रभाव: यह निर्णय राज्य द्वारा निगरानी, डेटा सुरक्षा, और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों में सरकार की शक्तियों को सीमित करता है।
यह निर्णय भारत में डिजिटल युग में डेटा गोपनीयता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर माना जाता है।
24 अगस्त 2017 को, सुप्रीम कोर्ट की 9-जजों की बेंच ने ऐतिहासिक जस्टिस के.एस. पुट्टास्वामी (सेवानिवृत्त) बनाम भारत संघ (Union of India) मामले में सर्वसम्मति से फैसला सुनाया कि निजता का अधिकार (Right to Privacy) भारत के संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है। यह अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक अभिन्न हिस्सा है।
पुट्टास्वामी मामले (2017) की मुख्य बातें:
मूल मुद्दा: आधार (Aadhaar) कार्ड योजना की संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि यह नागरिकों की निजता का उल्लंघन करती है।
ऐतिहासिक फैसला: न्यायालय ने स्थापित किया कि निजता संविधान के भाग III के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) के तहत संरक्षित एक मौलिक अधिकार है।
पुराने फैसले पलटे: कोर्ट ने एमपी शर्मा (1954) और खड़क सिंह (1962) के पुराने निर्णयों को खारिज कर दिया, जिनमें निजता को मौलिक अधिकार नहीं माना गया था।
परिभाषा: निजता को गरिमा, स्वायत्तता (autonomy), और व्यक्तिगत चयन के एक आवश्यक पहलू के रूप में मान्यता दी गई, जिसमें यौन अभिविन्यास भी शामिल है।
प्रभाव: यह निर्णय राज्य द्वारा निगरानी, डेटा सुरक्षा, और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों में सरकार की शक्तियों को सीमित करता है।
यह निर्णय भारत में डिजिटल युग में डेटा गोपनीयता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर माना जाता है।
मणिपुर के कामजोंग और उखरुल में शनिवार को हथियारबंद गुटों के बीच हुई झड़पों में एक महिला समेत पांच लोगों की मौत हो गई। हालांकि पूर्व सीएम बीरेन सिंह का दावा है कि 7 लोग मारे गए हैं, वहीं एक पुलिस स्टेशन जला दिया गया है।
#Manipur #ManipurViolence #SalaamTV
#Manipur #ManipurViolence #SalaamTV
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नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस डिटेन करते हुए 👆👆
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हम आज भी आए थे और कल भी आ रहे है हमें कोई नहीं रोक सकता - नेहा बोरा SIR वापस करो...ज्ञानेश कुमार स्तीफा दो!
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अभिनेता नाना पाटेकर की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई सामने, कार्डियक अरेस्ट से मौत की वजह का हुआ खुलासा; CAD से पीड़ित थे एक्टर
https://www.jagran.com/entertainment/bollywood-nana-patekar-post-mortem-report-reveals-cause-of-death-actor-was-suffering-from-coronary-artery-disease-40401419.html
https://www.jagran.com/entertainment/bollywood-nana-patekar-post-mortem-report-reveals-cause-of-death-actor-was-suffering-from-coronary-artery-disease-40401419.html
लो आ गई अभिनेता नाना पाटेकर की मौत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट 👆👆
टीवी 9 भारतवर्ष के अनुसार, एक्टर को कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) था। बताया जा रहा है कि दिल की मुख्य धमनियों (arteries) में से एक में खून का थक्का जमने से दिल के एक बड़े हिस्से में खून का बहाव रुक गया, जिससे उन्हें जबरदस्त हार्ट अटैक आया।
हम लोग तो यही बात लगातार 6 सालों से यही बोल रहे है की mRNA कोविड वैक्सीन मे बहुत से केमिकल और जहर ऐसी मिलाई गई है जिससे इतनी मौते हो रही है..जिसमे से एक सबसे ख़तरनाक ग्राफिन ऑक्साइड और स्पाइक प्रोटीन मिलकर लोगो के गर्म खून के थक्के को जमाकर हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और ब्रेन हेमरेज ला रहे है।👆👆
https://www.jagran.com/entertainment/bollywood-nana-patekar-post-mortem-report-reveals-cause-of-death-actor-was-suffering-from-coronary-artery-disease-40401419.html
टीवी 9 भारतवर्ष के अनुसार, एक्टर को कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) था। बताया जा रहा है कि दिल की मुख्य धमनियों (arteries) में से एक में खून का थक्का जमने से दिल के एक बड़े हिस्से में खून का बहाव रुक गया, जिससे उन्हें जबरदस्त हार्ट अटैक आया।
हम लोग तो यही बात लगातार 6 सालों से यही बोल रहे है की mRNA कोविड वैक्सीन मे बहुत से केमिकल और जहर ऐसी मिलाई गई है जिससे इतनी मौते हो रही है..जिसमे से एक सबसे ख़तरनाक ग्राफिन ऑक्साइड और स्पाइक प्रोटीन मिलकर लोगो के गर्म खून के थक्के को जमाकर हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और ब्रेन हेमरेज ला रहे है।👆👆
https://www.jagran.com/entertainment/bollywood-nana-patekar-post-mortem-report-reveals-cause-of-death-actor-was-suffering-from-coronary-artery-disease-40401419.html
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The Vaccine 💉💉War - नाना पाटेकर |राजू चौधरी
नाना पाटेकर ने की थी कोविड वैक्सीन 💉💉की दलाली.... तो 100% है की इन्होने कोविड वैक्सीन 💉💉लगाई ही होगी!
नाना पाटेकर फिट था, हट्टा-कट्टा, उम्र चाहे 75 थी लेकिन एकदम फिट..
फ़िर कार्डियक अरेस्ट ?
कुछ समय पहले एक मोदी गैंग द्वारा प्रायोजित एक फ़िल्म आई थी, वैक्सीन वाॅर, उसमें नाना पाटेकर वैज्ञानिक बना हुआ था और वैक्सीन की पैरोकार बना हुआ था...
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लो आ गई अभिनेता नाना पाटेकर की मौत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट 👆👆
टीवी 9 भारतवर्ष के अनुसार, एक्टर को कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) था। बताया जा रहा है कि दिल की मुख्य धमनियों (arteries) में से एक में खून का थक्का जमने से दिल के एक बड़े हिस्से में खून का बहाव रुक गया, जिससे उन्हें जबरदस्त हार्ट अटैक आया।
हम लोग तो यही बात लगातार 6 सालों से यही बोल रहे है की mRNA कोविड वैक्सीन मे बहुत से केमिकल और जहर ऐसी मिलाई गई है जिससे इतनी मौते हो रही है..जिसमे से एक सबसे ख़तरनाक ग्राफिन ऑक्साइड और स्पाइक प्रोटीन मिलकर लोगो के गर्म खून के थक्के को जमाकर हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और ब्रेन हेमरेज ला रहे है।👆👆
नाना पाटेकर ने की थी कोविड वैक्सीन 💉💉की दलाली.... तो 100% है की इन्होने कोविड वैक्सीन 💉💉लगाई ही होगी!
नाना पाटेकर फिट था, हट्टा-कट्टा, उम्र चाहे 75 थी लेकिन एकदम फिट..
फ़िर कार्डियक अरेस्ट ?
कुछ समय पहले एक मोदी गैंग द्वारा प्रायोजित एक फ़िल्म आई थी, वैक्सीन वाॅर, उसमें नाना पाटेकर वैज्ञानिक बना हुआ था और वैक्सीन की पैरोकार बना हुआ था...
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लो आ गई अभिनेता नाना पाटेकर की मौत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट 👆👆
टीवी 9 भारतवर्ष के अनुसार, एक्टर को कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) था। बताया जा रहा है कि दिल की मुख्य धमनियों (arteries) में से एक में खून का थक्का जमने से दिल के एक बड़े हिस्से में खून का बहाव रुक गया, जिससे उन्हें जबरदस्त हार्ट अटैक आया।
हम लोग तो यही बात लगातार 6 सालों से यही बोल रहे है की mRNA कोविड वैक्सीन मे बहुत से केमिकल और जहर ऐसी मिलाई गई है जिससे इतनी मौते हो रही है..जिसमे से एक सबसे ख़तरनाक ग्राफिन ऑक्साइड और स्पाइक प्रोटीन मिलकर लोगो के गर्म खून के थक्के को जमाकर हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और ब्रेन हेमरेज ला रहे है।👆👆
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लड़कियों की टांगे चीर दी जानवरों ने👆👆
बेटियों बहनों और बच्चियों के साथ जानवर जैसा सलूक करवाती CIA की एजेंट और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम् की दलाल मोदी सरकार 👆👆
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दिल्ली प्रोटेस्ट कवर कर रहे पत्रकारों को ऐसे रोक रही है पुलिस (BBC Hindi)
भारत मे लोकतंत्र कब की खत्म हो चुकि है... भारत मे न्यू वर्ल्ड ऑर्डर लागू हो चुकि है... भारत मे मीडिया की स्वतंत्रता कब की खत्म हो चुकि है!
इस प्रोटेस्ट का असल मकसद सच्चे पत्रकारों और मीडिया को टार्गेट करके डराना और डिटेन करना था!
भारत मे लोकतंत्र कब की खत्म हो चुकि है... भारत मे न्यू वर्ल्ड ऑर्डर लागू हो चुकि है... भारत मे मीडिया की स्वतंत्रता कब की खत्म हो चुकि है!
इस प्रोटेस्ट का असल मकसद सच्चे पत्रकारों और मीडिया को टार्गेट करके डराना और डिटेन करना था!
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इस वीडियो को देखने के बाद आप को सच मे लगेगा की हम भारत के असली लोकतंत्र मे रहते है और हम गर्व से कहेँगे की हम आज़ाद भारत मे रहते है...क्यूंकि हम आज़ाद है!👆👆🫡
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डिटेन होते वक्त एक भारतीय महिला जो वकील है..दिल्ली पुलिस की इस काली करतूत और अत्याचार से एक भारत की नागरिक होने के नाते महिला की चीख - चीख कर पुकार कहाँ गई संविधान और सुप्रीम कोर्ट की वो कानूनी और नागरिक की अधिकार अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 की आज़ादी ➥
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 नागरिकों को दिए गए सबसे महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार हैं। ये दोनों अधिकार देश के नागरिकों को स्वतंत्रता और गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करते हैं।
क्या सच मे हम भारत के नागरिको को
ये अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 के सारे अधिकार और स्वतंत्रता प्राप्त है 👇👇
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 नागरिकों को दिए गए सबसे महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार हैं। ये दोनों अधिकार देश के नागरिकों को स्वतंत्रता और गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करते हैं।
क्या सच मे हम भारत के नागरिको को
ये अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 के सारे अधिकार और स्वतंत्रता प्राप्त है 👇👇
अखंड भारत 🇮🇳🇮🇳
डिटेन होते वक्त एक भारतीय महिला जो वकील है..दिल्ली पुलिस की इस काली करतूत और अत्याचार से एक भारत की नागरिक होने के नाते महिला की चीख - चीख कर पुकार कहाँ गई संविधान और सुप्रीम कोर्ट की वो कानूनी और नागरिक की अधिकार अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 की आज़ादी ➥ भारतीय…
अनुच्छेद 19: छह स्वतंत्रताओं का अधिकार (Freedom of Speech and Expression etc.)
अनुच्छेद 19(1) भारतीय नागरिकों को
6 प्रकार की स्वतंत्रताओं की गारंटी देता है:
1. बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Article 19(1)(a)): इसमें अपने विचार रखने, बोलने, मीडिया/प्रेस की स्वतंत्रता, और शांतिपूर्वक विरोध या मौन रहने का अधिकार शामिल है। (नोट: इसमें प्रेस की स्वतंत्रता भी शामिल है)।
2. शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के इकट्ठा होने की स्वतंत्रता (Article 19(1)(b)): सभा या जुलूस निकालने का अधिकार।
3. संघ, संगठन या सहकारी समितियां बनाने की स्वतंत्रता (Article 19(1)(c)): राजनीतिक दल, कंपनी, या क्लब बनाने का अधिकार।
4. भारत के पूरे भूभाग में स्वतंत्र रूप से घूमने की स्वतंत्रता (Article 19(1)(d)): देश के किसी भी राज्य में बिना रोक-टोक यात्रा करने का अधिकार।
5. भारत के किसी भी हिस्से में निवास करने और बसने की स्वतंत्रता (Article 19(1)(e)): देश में कहीं भी घर बनाकर या स्थायी रूप से बसने का अधिकार।
6. कोई भी पेशा, व्यापार, व्यवसाय या धंधा करने की स्वतंत्रता (Article 19(1)(g)): अपनी पसंद की आजीविका चुनने का अधिकार।
अनुच्छेद 19 पर प्रतिबंध (Reasonable Restrictions):
यह अधिकार असीमित नहीं हैं। देश की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था (Public Order), सदाचार, न्यायालय की अवमानना, मानहानि या अपराध के उद्दीपन के आधार पर सरकार इन पर उचित प्रतिबंध लगा सकती है।
अनुच्छेद 19(1) भारतीय नागरिकों को
6 प्रकार की स्वतंत्रताओं की गारंटी देता है:
1. बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Article 19(1)(a)): इसमें अपने विचार रखने, बोलने, मीडिया/प्रेस की स्वतंत्रता, और शांतिपूर्वक विरोध या मौन रहने का अधिकार शामिल है। (नोट: इसमें प्रेस की स्वतंत्रता भी शामिल है)।
2. शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के इकट्ठा होने की स्वतंत्रता (Article 19(1)(b)): सभा या जुलूस निकालने का अधिकार।
3. संघ, संगठन या सहकारी समितियां बनाने की स्वतंत्रता (Article 19(1)(c)): राजनीतिक दल, कंपनी, या क्लब बनाने का अधिकार।
4. भारत के पूरे भूभाग में स्वतंत्र रूप से घूमने की स्वतंत्रता (Article 19(1)(d)): देश के किसी भी राज्य में बिना रोक-टोक यात्रा करने का अधिकार।
5. भारत के किसी भी हिस्से में निवास करने और बसने की स्वतंत्रता (Article 19(1)(e)): देश में कहीं भी घर बनाकर या स्थायी रूप से बसने का अधिकार।
6. कोई भी पेशा, व्यापार, व्यवसाय या धंधा करने की स्वतंत्रता (Article 19(1)(g)): अपनी पसंद की आजीविका चुनने का अधिकार।
अनुच्छेद 19 पर प्रतिबंध (Reasonable Restrictions):
यह अधिकार असीमित नहीं हैं। देश की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था (Public Order), सदाचार, न्यायालय की अवमानना, मानहानि या अपराध के उद्दीपन के आधार पर सरकार इन पर उचित प्रतिबंध लगा सकती है।