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🚨सिर्फ Gen Z नेहा बोरा ही नहीं - CIA फंडेड एवं इसकी एजेंट है और जिसे डीप स्टेट कंट्रोल करती है!👇👇ये सभी शामिल है इस खेल मे शामिल है 👇👇
🚨CIA और डीप स्टेट ने भात मे Gen Z का कार्यप्रणाली नरेंद्र मोदी, राहुल गाँधी, अन्य पार्टी एवं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका, ध्रुव राठी, नेहा बोरा और तमाम ऐसे लाखों Gen Z को कार्य मे लगा दिया गया है... न्यू वर्ल्ड ऑर्डर और एजेंडा 2030 को जल्द से जल्द स्थापित करने मे!
🚨CIA और डीप स्टेट ने भात मे Gen Z का कार्यप्रणाली नरेंद्र मोदी, राहुल गाँधी, अन्य पार्टी एवं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका, ध्रुव राठी, नेहा बोरा और तमाम ऐसे लाखों Gen Z को कार्य मे लगा दिया गया है... न्यू वर्ल्ड ऑर्डर और एजेंडा 2030 को जल्द से जल्द स्थापित करने मे!
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'ये Democratic देश नहीं, ये Dictatorship..' - ध्रुव राठी
यही बोलने आया था..भारत को "Dictatorship" का लाइसेंस देने आया था - बर्लिन, जर्मनी से 👆👆- ध्रुव राठी दल्ला ( CIA एजेंट)
ये वैक्सीन, न्यू वर्ल्ड ऑर्डर और एजेंडा 2030 पे क्यों नहीं बोलता - डीप स्टेट का दल्ला है!💯%
यही बोलने आया था..भारत को "Dictatorship" का लाइसेंस देने आया था - बर्लिन, जर्मनी से 👆👆- ध्रुव राठी दल्ला ( CIA एजेंट)
ये वैक्सीन, न्यू वर्ल्ड ऑर्डर और एजेंडा 2030 पे क्यों नहीं बोलता - डीप स्टेट का दल्ला है!💯%
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👆In 2002, an IIT Kanpur civil engineer working as an IES officer wrote to Prime Minister Vajpayee, exposing corruption in the $10 billion Golden Quadrilateral Corridor - India's biggest highway project.
Designed to construct 14,000 km of 4-lane expressways connecting Delhi, Mumbai, Chennai, and Kolkata, it stands as the modern bedrock of Indian infrastructure.
He left his letter to the Prime Minister's Office (PMO) unsigned. Knowing the deadly stakes, Dubey attached his credentials on a separate sheet with an explicit instruction:
"Before moving the file, please remove the attachment containing my particulars to ensure secrecy."
But the PMO did not redact that information. It forwarded his complaint down the ministry chain with his identity attached. His name reached the very people he had exposed.
One year later, on his 31st birthday, Satyendra Dubey was shot dead outside Gaya railway station by the mafia.
They called it armed robbery. His family never believed it. The men who ran the murder racket were never touched, even after a CBI probe.
His death led to the Whistleblowers Protection Act in 2014. It was never brought into force, and it still doesn't protect a whistleblower's identity to this day.
His father, a poor sugar mill clerk with 7 kids, spent his entire life’s savings to raise an honest son who went to
@IITKanpur and then joined the IES to serve the nation.
On November 27, 2003, instead of celebrating Satyendra’s 31st birthday, that old man received his son’s bullet-riddled body in a wooden box, forced to weep over the casket of a hero he spent a lifetime raising for a country that wasn't brave enough to keep him alive.
[Shared post]
Designed to construct 14,000 km of 4-lane expressways connecting Delhi, Mumbai, Chennai, and Kolkata, it stands as the modern bedrock of Indian infrastructure.
He left his letter to the Prime Minister's Office (PMO) unsigned. Knowing the deadly stakes, Dubey attached his credentials on a separate sheet with an explicit instruction:
"Before moving the file, please remove the attachment containing my particulars to ensure secrecy."
But the PMO did not redact that information. It forwarded his complaint down the ministry chain with his identity attached. His name reached the very people he had exposed.
One year later, on his 31st birthday, Satyendra Dubey was shot dead outside Gaya railway station by the mafia.
They called it armed robbery. His family never believed it. The men who ran the murder racket were never touched, even after a CBI probe.
His death led to the Whistleblowers Protection Act in 2014. It was never brought into force, and it still doesn't protect a whistleblower's identity to this day.
His father, a poor sugar mill clerk with 7 kids, spent his entire life’s savings to raise an honest son who went to
@IITKanpur and then joined the IES to serve the nation.
On November 27, 2003, instead of celebrating Satyendra’s 31st birthday, that old man received his son’s bullet-riddled body in a wooden box, forced to weep over the casket of a hero he spent a lifetime raising for a country that wasn't brave enough to keep him alive.
[Shared post]
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👆फार्मा दलाल,मेडिकल माफिया कभी नहीं चाहते कि हम और आप स्वस्थ रहें।
एक तरफ ये लोग शैतानी एनजीओ की मदद से जागरूकता के नाम पर अभियान चलाते है तो दूसरी तरफ अधिक से अधिक लोगों को नई नई बीमारियों का ग्राहक बना देते है।।
हालिया महीने अक्टूबर को विश्व स्तन कैंसर जागरूकता माह कहा जाता है,लेकिन इसके पीछे एक बेहद ही डरावना सच छुपा है।
ज़्यादातर लोग यह मानते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ (BCAM) की शुरुआत अच्छे इरादे वाले डॉक्टरों और बचे हुए (survivors) लोगों द्वारा एक बदलाव लाने के लिए की गई थी। यह बात सुनने में भले ही अच्छी लगे, लेकिन सच यह है कि BCAM को 1985 में 'इंपीरियल केमिकल इंडस्ट्रीज' (ICI) द्वारा मास्टरमाइंड किया गया था। ICI का फार्मास्यूटिकल विंग बाद में 'जेनेका' (Zeneca) के रूप में अलग हुआ, जिसका बाद में एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) में विलय हो गया।
ICI अपने कारोबार के एक हिस्से में कैंसर पैदा करने वाले रसायन बनाती थी, और दूसरी तरफ उसका फार्मास्यूटिकल विंग ब्रेस्ट कैंसर की सबसे ज़्यादा बिकने वाली दवा—टैमोक्सीफेन (Tamoxifen)—से भारी मुनाफा कमाता था।
जो कंपनी ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ बनाने में मदद कर रही थी, वही कंपनी कैंसर पैदा करने और उसके इलाज दोनों से पैसे कमा रही थी। लोमड़ी ने केवल मुर्गी के बाड़े की रखवाली नहीं की थी, बल्कि उसने बाड़ा खुद बनाया था, मुर्गियों को बेचा था, और उन्हें खाए जाने का तमाशा देखने के लिए लोगों से टिकट के पैसे वसूले थे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC), और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरनमेंटल हेल्थ साइंसेज टैमोक्सीफेन को "ग्रुप 1 ज्ञात मानव कार्सिनोजन" (कैंसर पैदा करने वाला पदार्थ) के रूप में वर्गीकृत करते हैं। हाँ, आपने सही पढ़ा। ब्रेस्ट कैंसर का इलाज ही एक कार्सिनोजन है।
अध्ययनों के अनुसार, टैमोक्सीफेन ब्रेस्ट ट्यूमर कोशिकाओं से हॉर्मोन को ब्लॉक करके काम करता है, जिससे वे मजबूर होकर अन्य अंगों (जैसे बच्चेदानी की परत) में चले जाते हैं, जहाँ वे एंडोमेट्रियल कैंसर को बढ़ावा दे सकते हैं। IARC ने कहा है: "इंसानों में टैमोक्सीफेन की कार्सिनोजेनिसिटी के पर्याप्त प्रमाण हैं जो एंडोमेट्रियल कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।"
यहाँ एक ऐसी दवा है जो आपको पहले कैंसर के इलाज के दौरान एक दूसरा कैंसर दे सकती है। महिलाओं में बीमारी का पता लगाओ, फिर उन्हें एक ऐसी कार्सिनोजेनिक दवा दो जो कैंसर को फैला सकती है, जिससे जीवनभर का ग्राहक चक्र (customer cycle) सुनिश्चित हो सके।
फर्जी पॉजिटिव रिपोर्ट्स \rightarrow बायोप्सी \rightarrow बाद के स्कैन \rightarrow चिंता \rightarrow उपचार का यह चक्र एक बेहतरीन ढंग से काम करने वाला सिस्टम है।
सुसान जी कोमेन (Susan G. Komen) दुनिया की सबसे बड़ी और मान्यता प्राप्त ब्रेस्ट कैंसर संस्था है। इसकी वार्षिक आय 100 मिलियन डॉलर से अधिक है। तो सारा पैसा कहाँ जाता है?
टैमोक्सीफेन बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) शुरुआत से ही ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के पीछे एक बड़ी ताकत रही है। "हितों के टकराव" (conflict of interest) से ज़्यादा स्पष्ट उदाहरण और क्या हो सकता है कि कैंसर के इलाज से मुनाफा कमाने वाली फार्मा कंपनी, ऐसी चैरिटी को फंड दे रही है जो ज़्यादा स्क्रीनिंग और इलाज को बढ़ावा देती है।
जनरल इलेक्ट्रिक (GE), जो मैमोग्राम मशीनों के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक है, ने कोमेन को प्रतिवर्ष 1 मिलियन डॉलर से अधिक का दान दिया है।
BCAM का संदेश इस बात पर चर्चा करने से पूरी तरह बचता है कि आखिर कैंसर के मामले लगातार क्यों बढ़ रहे हैं। इसके बजाय, वे आपको आक्रामक इलाजों की ओर धकेलते हैं जो आसानी से बिग फार्मा की जेब भरते हैं।
बाकी थम समझदार हो ही।।
जपनाम
एक तरफ ये लोग शैतानी एनजीओ की मदद से जागरूकता के नाम पर अभियान चलाते है तो दूसरी तरफ अधिक से अधिक लोगों को नई नई बीमारियों का ग्राहक बना देते है।।
हालिया महीने अक्टूबर को विश्व स्तन कैंसर जागरूकता माह कहा जाता है,लेकिन इसके पीछे एक बेहद ही डरावना सच छुपा है।
ज़्यादातर लोग यह मानते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ (BCAM) की शुरुआत अच्छे इरादे वाले डॉक्टरों और बचे हुए (survivors) लोगों द्वारा एक बदलाव लाने के लिए की गई थी। यह बात सुनने में भले ही अच्छी लगे, लेकिन सच यह है कि BCAM को 1985 में 'इंपीरियल केमिकल इंडस्ट्रीज' (ICI) द्वारा मास्टरमाइंड किया गया था। ICI का फार्मास्यूटिकल विंग बाद में 'जेनेका' (Zeneca) के रूप में अलग हुआ, जिसका बाद में एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) में विलय हो गया।
ICI अपने कारोबार के एक हिस्से में कैंसर पैदा करने वाले रसायन बनाती थी, और दूसरी तरफ उसका फार्मास्यूटिकल विंग ब्रेस्ट कैंसर की सबसे ज़्यादा बिकने वाली दवा—टैमोक्सीफेन (Tamoxifen)—से भारी मुनाफा कमाता था।
जो कंपनी ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ बनाने में मदद कर रही थी, वही कंपनी कैंसर पैदा करने और उसके इलाज दोनों से पैसे कमा रही थी। लोमड़ी ने केवल मुर्गी के बाड़े की रखवाली नहीं की थी, बल्कि उसने बाड़ा खुद बनाया था, मुर्गियों को बेचा था, और उन्हें खाए जाने का तमाशा देखने के लिए लोगों से टिकट के पैसे वसूले थे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC), और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरनमेंटल हेल्थ साइंसेज टैमोक्सीफेन को "ग्रुप 1 ज्ञात मानव कार्सिनोजन" (कैंसर पैदा करने वाला पदार्थ) के रूप में वर्गीकृत करते हैं। हाँ, आपने सही पढ़ा। ब्रेस्ट कैंसर का इलाज ही एक कार्सिनोजन है।
अध्ययनों के अनुसार, टैमोक्सीफेन ब्रेस्ट ट्यूमर कोशिकाओं से हॉर्मोन को ब्लॉक करके काम करता है, जिससे वे मजबूर होकर अन्य अंगों (जैसे बच्चेदानी की परत) में चले जाते हैं, जहाँ वे एंडोमेट्रियल कैंसर को बढ़ावा दे सकते हैं। IARC ने कहा है: "इंसानों में टैमोक्सीफेन की कार्सिनोजेनिसिटी के पर्याप्त प्रमाण हैं जो एंडोमेट्रियल कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।"
यहाँ एक ऐसी दवा है जो आपको पहले कैंसर के इलाज के दौरान एक दूसरा कैंसर दे सकती है। महिलाओं में बीमारी का पता लगाओ, फिर उन्हें एक ऐसी कार्सिनोजेनिक दवा दो जो कैंसर को फैला सकती है, जिससे जीवनभर का ग्राहक चक्र (customer cycle) सुनिश्चित हो सके।
फर्जी पॉजिटिव रिपोर्ट्स \rightarrow बायोप्सी \rightarrow बाद के स्कैन \rightarrow चिंता \rightarrow उपचार का यह चक्र एक बेहतरीन ढंग से काम करने वाला सिस्टम है।
सुसान जी कोमेन (Susan G. Komen) दुनिया की सबसे बड़ी और मान्यता प्राप्त ब्रेस्ट कैंसर संस्था है। इसकी वार्षिक आय 100 मिलियन डॉलर से अधिक है। तो सारा पैसा कहाँ जाता है?
टैमोक्सीफेन बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) शुरुआत से ही ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के पीछे एक बड़ी ताकत रही है। "हितों के टकराव" (conflict of interest) से ज़्यादा स्पष्ट उदाहरण और क्या हो सकता है कि कैंसर के इलाज से मुनाफा कमाने वाली फार्मा कंपनी, ऐसी चैरिटी को फंड दे रही है जो ज़्यादा स्क्रीनिंग और इलाज को बढ़ावा देती है।
जनरल इलेक्ट्रिक (GE), जो मैमोग्राम मशीनों के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक है, ने कोमेन को प्रतिवर्ष 1 मिलियन डॉलर से अधिक का दान दिया है।
BCAM का संदेश इस बात पर चर्चा करने से पूरी तरह बचता है कि आखिर कैंसर के मामले लगातार क्यों बढ़ रहे हैं। इसके बजाय, वे आपको आक्रामक इलाजों की ओर धकेलते हैं जो आसानी से बिग फार्मा की जेब भरते हैं।
बाकी थम समझदार हो ही।।
जपनाम
राजस्थान के भरतपुर जिले में क्रेशर प्लांट को लेकर चल रहा विवाद रविवार शाम खूनी संघर्ष में बदल गया.बयाना के पूर्व विधायक और बीजेपी नेता अतर सिंह भड़ाना की लाठी-पत्थरों से कथित हमले में मौत हो गई. आरोप है कि वैर थाना क्षेत्र के भौंड़ा गांव में क्रेशर प्लांट पर मौजूद भड़ाना और उनके सहयोगियों पर 70 से 80 लोगों ने हमला कर दिया.
पूरी खबर का लिंक कमेंट बॉक्स में
#Rajasthan #MobLynching #BJP #TV9Card
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From the top the Statesman Building Barakhambha Road Delhi
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सूरत मे CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर जबरदस्त प्रदर्शन
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Delhi air pollution is linked to rising gastrointestinal cancer cases among teenagers, with experts at Sir Ganga Ram Hospital urging India-specific research into PM2.5 and ground-level ozone risks. https://ebx.sh/4OiisO
पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर एक बार फिर भीषण हिंसा और आगजनी की चपेट में आ गया है। नगा और कुकी समुदायों के बीच हुए ताजा हिंसक टकराव में पिछले 24 घंटों के भीतर 9 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दंगाइयों ने 14 घरों को आग के हवाले कर दिया है।
इस भयानक घटना के बाद इलाके में भारी दहशत का माहौल है। कुकी और नगा समुदायों के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। बिगड़ते हालात और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कांगपोकपी ज़िले में पूरी तरह से शटडाउन कर दिया गया है। लंबे समय से अशांति का सामना कर रहे मणिपुर में शांति बहाल करना प्रशासन और सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।
#ManipurViolence #ManipurNews #Kangpokpi #Kuki #Naga #PeaceInManipur #BreakingNewsIndia #HindiNews #NortheastIndia #currentaffairstamil
इस भयानक घटना के बाद इलाके में भारी दहशत का माहौल है। कुकी और नगा समुदायों के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। बिगड़ते हालात और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कांगपोकपी ज़िले में पूरी तरह से शटडाउन कर दिया गया है। लंबे समय से अशांति का सामना कर रहे मणिपुर में शांति बहाल करना प्रशासन और सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।
#ManipurViolence #ManipurNews #Kangpokpi #Kuki #Naga #PeaceInManipur #BreakingNewsIndia #HindiNews #NortheastIndia #currentaffairstamil
A 22 year old IT professional has shared an emotional account on Reddit about struggling after losing a job that reportedly paid him around ₹95,000 per month. According to his post, he was dismissed after working for six months and had been without an income for two months when his relationship with his parents allegedly deteriorated. He claimed they began treating him as a burden, took away his room cooler and even removed food from his plate while telling him, “Galti kardi tujhe paida karke.” He also described struggling to afford petrol and food while trying to prepare for interviews and find another source of income. His post has prompted discussions about financial security, the pressure young professionals face after losing jobs and the importance of emotional support during difficult periods. Since the account was shared anonymously online, the details have not been independently verified.
#JobLoss #ITJobs #RedditIndia #MentalHealthAwareness #FamilyRelationships #CareerStruggles
#JobLoss #ITJobs #RedditIndia #MentalHealthAwareness #FamilyRelationships #CareerStruggles
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✦ ༺ 124 अफसरों की हुंकार — बहुत हुआ झूठ का शोर, अब सबूत लाओ ༻ ✦
☠️ जब जंतर-मंतर पर भीड़ चुनाव आयोग को गाली दे रही थी, तब दिल्ली के शोर के बीच एक और आवाज उठी... खामोश, पर सबसे भारी।
👁️ 124 पूर्व IAS-IFS और Allied Services के अधिकारियों ने भारत के नागरिकों के नाम खुला पत्र लिखा है।
लिखा क्या है?
⛓️ चुनाव आयोग और SIR के समर्थन में उतरे 124 पूर्व अफसरों ने सीधे कहा — "सिस्टम तब तक ईमानदार नहीं हो सकता जब तक तुम जीत रहे हो, और हारते ही धांधली वाला हो जाए।"
⚠️ 2025 में बिहार में 1951 के बाद सबसे ज्यादा मतदान हुआ, एक भी बूथ पर दोबारा मतदान नहीं हुआ। उसी आयोग के तहत भाजपा हिमाचल हारी, कर्नाटक हारी, तो क्या तब भी धांधली थी?
🔥 पत्र में सबसे करारा वार यही है — "शक सबूत नहीं होता।" बिना ठोस प्रमाण के चुनाव को चोरी का कहना... लोकतंत्र की जड़ों पर एसिड डालने जैसा है।
📜 इन 124 अधिकारियों ने याद दिलाया — पहले बूथ कैप्चरिंग, बैलेट बॉक्स चोरी, फर्जी वोटिंग आम थी। 1989 में बूथ कैप्चरिंग को अपराध बनाया गया, EVM आया, VVPAT आया, कई लेयर की सुरक्षा बनी। आज की व्यवस्था को 1971 की कहानियों से जज नहीं कर सकते।
💀 और सबसे बड़ा सवाल — जब विदेश से 22,000 करोड़ के फंड वाले NGO और डार्क वेब की टूलकिट से भीड़ बुलाई जा रही है, तो लोकतंत्र को बदनाम करने का ये खेल किसके इशारे पर?
✦ 124 अफसर कोई पार्टी नहीं हैं। ये वो लोग हैं जिन्होंने 30-35 साल तक इसी सिस्टम को चलाया है। जब वो कह रहे हैं कि SIR जरूरी है, मृत वोटर, डुप्लीकेट वोटर, घुसपैठियों के नाम हटाना जरूरी है... तो ये सुधार है, साजिश नहीं।
👉 आंदोलन वाले नारे लगा रहे हैं... और 124 अफसरों ने संविधान की तरफ उंगली उठाकर पूछा है — आरोप लगाने वाले, सबूत कहां है?
☠️ जब जंतर-मंतर पर भीड़ चुनाव आयोग को गाली दे रही थी, तब दिल्ली के शोर के बीच एक और आवाज उठी... खामोश, पर सबसे भारी।
👁️ 124 पूर्व IAS-IFS और Allied Services के अधिकारियों ने भारत के नागरिकों के नाम खुला पत्र लिखा है।
लिखा क्या है?
⛓️ चुनाव आयोग और SIR के समर्थन में उतरे 124 पूर्व अफसरों ने सीधे कहा — "सिस्टम तब तक ईमानदार नहीं हो सकता जब तक तुम जीत रहे हो, और हारते ही धांधली वाला हो जाए।"
⚠️ 2025 में बिहार में 1951 के बाद सबसे ज्यादा मतदान हुआ, एक भी बूथ पर दोबारा मतदान नहीं हुआ। उसी आयोग के तहत भाजपा हिमाचल हारी, कर्नाटक हारी, तो क्या तब भी धांधली थी?
🔥 पत्र में सबसे करारा वार यही है — "शक सबूत नहीं होता।" बिना ठोस प्रमाण के चुनाव को चोरी का कहना... लोकतंत्र की जड़ों पर एसिड डालने जैसा है।
📜 इन 124 अधिकारियों ने याद दिलाया — पहले बूथ कैप्चरिंग, बैलेट बॉक्स चोरी, फर्जी वोटिंग आम थी। 1989 में बूथ कैप्चरिंग को अपराध बनाया गया, EVM आया, VVPAT आया, कई लेयर की सुरक्षा बनी। आज की व्यवस्था को 1971 की कहानियों से जज नहीं कर सकते।
💀 और सबसे बड़ा सवाल — जब विदेश से 22,000 करोड़ के फंड वाले NGO और डार्क वेब की टूलकिट से भीड़ बुलाई जा रही है, तो लोकतंत्र को बदनाम करने का ये खेल किसके इशारे पर?
✦ 124 अफसर कोई पार्टी नहीं हैं। ये वो लोग हैं जिन्होंने 30-35 साल तक इसी सिस्टम को चलाया है। जब वो कह रहे हैं कि SIR जरूरी है, मृत वोटर, डुप्लीकेट वोटर, घुसपैठियों के नाम हटाना जरूरी है... तो ये सुधार है, साजिश नहीं।
👉 आंदोलन वाले नारे लगा रहे हैं... और 124 अफसरों ने संविधान की तरफ उंगली उठाकर पूछा है — आरोप लगाने वाले, सबूत कहां है?
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⚠️━━━━━━━━━━━━━━━━⚠️
📡 डार्क वेब की लीक हुई चैट की फोटो भी है।
☠️ जिसे चाहिए, वह ले सकता है।
⚠️━━━━━━━━━━━━━━━━⚠️
✦ ༺ जंतर-मंतर 2.0 - पर्दे के पीछे की विस्तृत योजना ༻ ✦
☠️ डार्क वेब पर लीक हुई ग्रुप चैट ने वो परत खोल दी है, जिसे सामने से आंदोलन कहा जा रहा था।
👁️ चैट के मुताबिक प्लान साफ है —
🔥 हिंसा भड़काओ, जान-माल का नुकसान करवाओ, और फिर कैमरे के सामने सरकार को कसूरवार ठहरा दो।
⛓️ भेष बदलने की रणनीति —
लीक में साफ लिखा है — भगवा पहनो, माथे पर टीका लगाओ, ताकि कैमरे में भीड़ भाजपा / आरएसएस की दिखे। असली कार्यकर्ता बदनाम हों, नकली भीड़ दंगे को अंजाम दे। यह विचारधारा की लड़ाई नहीं, पहचान को हथियार बनाने की चाल है।
💸 बांग्लादेश कनेक्शन —
पैसे का लालच देकर सीमा पार से लोगों को बुलाने की बात सामने आई है। यहां तक कि उन्हें अपनी जान जोखिम में डालने के लिए उकसाया जा रहा है। मकसद एक ही — अराजकता फैले, दिल्ली जले तो पूरा देश जलता दिखे, और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत की छवि पर वार हो।
⚠️ सबसे निचला स्तर —
जब वोट से नहीं हरा सकते, तो देश को ही दांव पर लगा दो। अपने ही युवाओं को ब्रेनवाश करके, उन्हें ढाल बनाकर, अपने ही राजनीतिक एजेंडे के लिए उन्हें संभावित आतंक की राह पर धकेलना — यही इस पूरी स्क्रिप्ट का सबसे काला हिस्सा है।
🕸️ इसे आंदोलन मत समझो। यह डेविल सोप और स्किन के नाम पर युवाओं को मोहरा बनाने का खेल है। तुम्हें लग रहा है तुम सिस्टम से लड़ रहे हो, हकीकत में तुम अपने ही देश की जड़ें खोदने के लिए इस्तेमाल हो रहे हो।
✦ सोचो —
कौन है जो चाहता है कि तुम भगवा पहनकर आग लगाओ?
कौन है जो चाहता है कि लाशें गिरें ताकि उसकी राजनीति चमके?
कौन है जो बांग्लादेश से भीड़ बुलाकर भारत को ही बदनाम करना चाहता है?
👁️ यह लड़ाई सरकार बनाम विपक्ष की नहीं रही...
यह लड़ाई भारत बनाम भारत को जलाने की साजिश बन चुकी है।
युवा... आँखें खोलो, इससे पहले कि तुम्हारे हाथों से ही तुम्हारा घर जलवा दिया जाए।
📡 डार्क वेब की लीक हुई चैट की फोटो भी है।
☠️ जिसे चाहिए, वह ले सकता है।
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✦ ༺ जंतर-मंतर 2.0 - पर्दे के पीछे की विस्तृत योजना ༻ ✦
☠️ डार्क वेब पर लीक हुई ग्रुप चैट ने वो परत खोल दी है, जिसे सामने से आंदोलन कहा जा रहा था।
👁️ चैट के मुताबिक प्लान साफ है —
🔥 हिंसा भड़काओ, जान-माल का नुकसान करवाओ, और फिर कैमरे के सामने सरकार को कसूरवार ठहरा दो।
⛓️ भेष बदलने की रणनीति —
लीक में साफ लिखा है — भगवा पहनो, माथे पर टीका लगाओ, ताकि कैमरे में भीड़ भाजपा / आरएसएस की दिखे। असली कार्यकर्ता बदनाम हों, नकली भीड़ दंगे को अंजाम दे। यह विचारधारा की लड़ाई नहीं, पहचान को हथियार बनाने की चाल है।
💸 बांग्लादेश कनेक्शन —
पैसे का लालच देकर सीमा पार से लोगों को बुलाने की बात सामने आई है। यहां तक कि उन्हें अपनी जान जोखिम में डालने के लिए उकसाया जा रहा है। मकसद एक ही — अराजकता फैले, दिल्ली जले तो पूरा देश जलता दिखे, और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत की छवि पर वार हो।
⚠️ सबसे निचला स्तर —
जब वोट से नहीं हरा सकते, तो देश को ही दांव पर लगा दो। अपने ही युवाओं को ब्रेनवाश करके, उन्हें ढाल बनाकर, अपने ही राजनीतिक एजेंडे के लिए उन्हें संभावित आतंक की राह पर धकेलना — यही इस पूरी स्क्रिप्ट का सबसे काला हिस्सा है।
🕸️ इसे आंदोलन मत समझो। यह डेविल सोप और स्किन के नाम पर युवाओं को मोहरा बनाने का खेल है। तुम्हें लग रहा है तुम सिस्टम से लड़ रहे हो, हकीकत में तुम अपने ही देश की जड़ें खोदने के लिए इस्तेमाल हो रहे हो।
✦ सोचो —
कौन है जो चाहता है कि तुम भगवा पहनकर आग लगाओ?
कौन है जो चाहता है कि लाशें गिरें ताकि उसकी राजनीति चमके?
कौन है जो बांग्लादेश से भीड़ बुलाकर भारत को ही बदनाम करना चाहता है?
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यह लड़ाई भारत बनाम भारत को जलाने की साजिश बन चुकी है।
युवा... आँखें खोलो, इससे पहले कि तुम्हारे हाथों से ही तुम्हारा घर जलवा दिया जाए।
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