अखंड भारत 🇮🇳🇮🇳
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इस चैनल का उद्देश्य देशभर में जागरूकता फैलाकर अंतरराष्ट्रीय साजिश से भारत को गुलाम बनने से बचाना है।
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ये बात सच है....रिपोर्टों और केमिस्ट एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार नवरात्रि और गरबा के दौरान गुजरात और कुछ अन्य शहरी क्षेत्रों में कंडोम की बिक्री में लगभग 15% से 40% (और कुछ खास दुकानों पर 50% से 60%) तक की वृद्धि देखने को मिलती है।

इस ट्रेंड से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

बिक्री में वृद्धि: विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और दवा विक्रेताओं के अनुसार, सामान्य दिनों की तुलना में नवरात्रि के दौरान कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों की मांग बढ़ जाती है।

स्थान: यह ट्रेंड मुख्य रूप से गुजरात (जैसे अहमदाबाद, वडोदरा) और उत्तर व पश्चिम भारत के कुछ बड़े शहरों में अधिक देखा जाता है जहां बड़े स्तर पर गरबा और डांडिया नाइट्स का आयोजन होता है।

मुख्य कारण: देर रात तक चलने वाले गरबा कार्यक्रमों, युवाओं के मेल-जोल, सामाजिक मेल-जोल में वृद्धि और कई बार ब्रांड्स द्वारा विशेष स्कीम या प्रमोशन को इसका कारण माना जाता है।
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भारत देश मे गुजरात गरबा एवं नवरात्रि के दौरान कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों की मांग बढ़ जाती है।
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*धर्म का असली मतलब हम भूल गए हैं -*

हमने धर्म को दिखावे की आस्था बना दिया है, जहाँ त्याग होना था, वहाँ अश्लीलता और मांसाहारी पार्टी हो रही है।

हमने धर्म को संस्कार नहीं, शोर बना दिया, भक्ति को भोग और बाजार का छोर बना दिया। जहाँ मंत्र और भजन गूंजने थे, वहाँ DJ का शोर है,जहाँ आत्मा जगनी थी, वहाँ वासना का जोर है।
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गरवा (या 'गरबा') शब्द का मूल अर्थ संस्कृत के 'गर्भ' शब्द से जुड़ा है, जिसे अक्सर सम्मान, सृजन और जीवन के गौरव (गर्व) के रूप में भी देखा जाता है। यह पारंपरिक नृत्य केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह सर्कल ऑफ टाइमलाइन (Timeline of Circle) यानी जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म के शाश्वत ब्रह्मांडीय चक्र का एक जीवंत प्रतीक है।

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गरवा (या 'गरबा') शब्द का मूल अर्थ संस्कृत के 'गर्भ' शब्द से जुड़ा है, जिसे अक्सर सम्मान, सृजन और जीवन के गौरव (गर्व) के रूप में भी देखा जाता है। यह पारंपरिक नृत्य केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह सर्कल ऑफ टाइमलाइन (Timeline of Circle) यानी जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म…
इस चक्र और इसके गहरे अर्थ को हम निम्नलिखित चरणों में समझ सकते हैं:

1. केंद्र में दीप (गर्भदीप) – 'जन्म' का प्रतीक 🪔

गरबा नृत्य के केंद्र में मिट्टी का एक छिद्रित घड़ा रखा जाता है, जिसके अंदर एक दीपक जलता है। इसे 'गर्भदीप' कहा जाता है।
यह दीपक माँ के गर्भ में पल रहे 'जन्म' (Life/Creativity) और जीव की चेतना का प्रतीक है।

यह हमें याद दिलाता है कि ब्रह्मांड की शुरुआत एक सूक्ष्म ऊर्जा (Point of Origin) से होती है।

2. गोलाकार नृत्य (सर्कल ऑफ टाइमलाइन) – 'जीवन और मृत्यु' का चक्र 🔄

गरबा हमेशा एक बड़े घेरे (सर्कल) में घूमते हुए खेला जाता है। इस वृत्त का न तो कोई आदि (शुरुआत) है और न ही कोई अंत।

समय की यह टाइमलाइन रैखिक (Linear) नहीं बल्कि गोलाकार (Cyclic) है।

जैसे-जैसे डांडिया या तालियों की थाप पर लोग आगे बढ़ते हैं, वे जीवन के सफर को दर्शाते हैं। इसमें एक कदम आगे बढ़ना जन्म और जीवन के अनुभवों को दिखाता है, और चक्र का निरंतर घूमना समय के बीतने व 'मृत्यु' की अनिवार्यता को दर्शाता है। यह दिखाता है कि इस संसार में कुछ भी स्थिर नहीं है, सब कुछ परिवर्तनशील है।

3. निरंतर घूमता चक्र – 'नया जन्म' (पुनर्जन्म) 🌟

जब नृत्य करने वाले लोग पूरा चक्कर काटकर वापस उसी स्थान पर आते हैं, तो यह 'नए जन्म' (Rebirth) को प्रदर्शित करता है।

हिंदू दर्शन के अनुसार, आत्मा कभी मरती नहीं है; वह केवल शरीर बदलती है (जैसे नृत्य में लोग अपनी जगह बदलते रहते हैं)। मृत्यु अंत नहीं, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत है।

4. केंद्र की स्थिरता – परमात्मा (परम सत्य) 🕉️

चक्र में घूमते समय सभी डांसर लगातार अपनी जगह बदलते रहते हैं, लेकिन केंद्र में रखा 'गर्भदीप' और देवी की मूर्ति हमेशा स्थिर रहती है।

यह इस बात का गौरव (गर्व) है कि संसार में जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म का चक्र चाहे जितना भी बदले, ईश्वर (परम चेतना) हमेशा स्थिर और अपरिवर्तनीय रहता है।
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अहमदाबाद में युवा और यंग जनरेशन गरबा खेलने के लिए और अपने जोश और एनर्जी बढ़ाने के लिए ( IV (Intravenous) ड्रिप थेरेपी ले रहे हैं। IV ड्रिप एक नस (Vein) के जरिए विटामिन, मिनरल्स और लिक्विड शरीर में पहुंचाने की प्रक्रिया है।

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अहमदाबाद में युवा और यंग जनरेशन गरबा खेलने के लिए और अपने जोश और एनर्जी बढ़ाने के लिए ( IV (Intravenous) ड्रिप थेरेपी ले रहे हैं। IV ड्रिप एक नस (Vein) के जरिए विटामिन, मिनरल्स और लिक्विड शरीर में पहुंचाने की प्रक्रिया है। 👇👇विस्तार से जाने👇👇
अहमदाबाद में क्या ट्रेंड चल रहा है?

नवरात्रि और गरबा की तैयारी: अहमदाबाद में युवा (Gen Z) नवरात्रि में लगातार 9 रातों तक बिना थके गरबा खेलने, इंस्टेंट एनर्जी (जोश) पाने और चेहरे पर फेस्टिव ग्लो (चमक) के लिए यह ड्रिप लगवा रहे हैं।

भारी खर्च: इस एक ड्रिप (जिसमें विटामिन C, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और हाइड्रेशन फ्लूइड का 'कॉकटेल' होता है) के 3 सेशंस के लिए युवा ₹12,000 से ₹15,000 तक खर्च कर रहे हैं।

फुल बुकिंग: त्योहार के सीजन में अहमदाबाद के कई स्किन और वैलनेस क्लीनिक इस थेरेपी के लिए पूरी तरह बुक चल रहे हैं।

डॉक्टरों और विशेषज्ञों की चेतावनी:
चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार आगाह किया है कि बिना किसी मेडिकल जरूरत के सिर्फ शौक या ट्रेंड के लिए IV ड्रिप लगवाना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है:

बिना जांच के हाई-डोज विटामिन नस में डालने से किडनी स्टोन और गंभीर एलर्जी (Anaphylactic Reaction) का खतरा रहता है।

दिल की बीमारी (Heart failure), किडनी सम्बंधित बीमारी या किसी विशेष मेडिकल कंडीशन वाले लोगों के लिए यह जानलेवा भी हो सकता है।

स्वस्थ लोगों के लिए फल, फ्रूट्स,जूस एवं नारियल पानी और घर का अच्छा खाना, पर्याप्त पानी और भरपूर नींद लेना इस महंगी ड्रिप से कहीं ज्यादा सुरक्षित और असरदार है।

मनोज कुमार
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एक कचौड़ी दो समोसा इन मर्दो का क्या भरोसा के बाद.... सभी नारी एवं सभी महिलाओ के लिए ये गाने 🙏🙏

बिना पुरुष और महिला के यह संसार मानव जाति के अस्तित्व के लिहाज से समाप्त हो जाएगा... दोनों ही इस सृष्टि के लिए महत्वपूर्ण है... दोनों के बिना यह सृष्टि अधूरा है!🙏🙏
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मर्दो का क्या भरोसा सुनके जाना 👆👆

बिना पुरुष और महिला के यह संसार मानव जाति के अस्तित्व के लिहाज से समाप्त हो जाएगा... दोनों ही इस सृष्टि के लिए महत्वपूर्ण है... दोनों के बिना यह सृष्टि अधूरा है!🙏🙏
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स्वतंत्रता (Freedom/Liberty) और स्वच्छंदता (Licentiousness/Unrestrained behavior) दो ऐसे शब्द हैं जो सुनने में एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन इनके अर्थ, प्रभाव और सामाजिक निहितार्थ में जमीन-आसमान का अंतर है। किसी भी पुरुष और महिला के विकास, सम्मान और अधिकारों के लिए स्वतंत्रता अत्यंत आवश्यक है, जबकि स्वच्छंदता एक नकारात्मक व्यवहार है जो समाज और स्वयं उस महिला के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

इन दोनों के बीच का अंतर और एक महिला के जीवन में इनकी आवश्यकता को नीचे दिए गए बिंदुओं से समझा जा सकता है:

1. स्वतंत्रता (Freedom/Liberty) — 'अनिवार्य आवश्यकता'

स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है। यह किसी महिला को अपनी मच्छा के अनुसार जीने, निर्णय लेने और आगे बढ़ने का हौसला देती है।

निर्णय लेने का अधिकार: महिला को यह चुनने की आजादी होना कि उसे क्या पढ़ाई करनी है, कौन सा करियर चुनना है, कब और किससे शादी करनी है (या नहीं करनी है)।

आर्थिक आत्मनिर्भरता: अपने पैरों पर खड़े होने, कमाने और अपने पैसों को अपनी मर्जी से खर्च या निवेश करने की स्वतंत्रता।

सम्मान और समानता: समाज, परिवार और कार्यस्थल पर बिना किसी भेदभाव के पुरुषों के समान अधिकार और सम्मान पाना।

अभिव्यक्ति की आजादी: अपने विचारों, भावनाओं और विरोध को बिना किसी डर के खुलकर सामने रखने की स्वतंत्रता।

2. स्वच्छंदता (Licentiousness/Unrestrained behavior) — 'भ्रामक और नुकसानदेह'

स्वच्छंदता का अर्थ होता है—"बिना किसी नियम, जिम्मेदारी या नैतिक मूल्यों के, जो मन में आए वही करना।" जब स्वतंत्रता में से जिम्मेदारी और विवेक गायब हो जाते हैं, तो वह स्वच्छंदता बन जाती है।

जिम्मेदारी का अभाव: अपनी मर्जी के नाम पर दूसरों की भावनाओं, अधिकारों या सामाजिक मर्यादाओं को ठेस पहुंचाना।

आत्म-नुकसान: ऐसा व्यवहार (जैसे पुरुष का नशा करना, महिलाओ का अर्धनंग कपड़े पहनना, नारी अपने खुद की अंग को दिखाना, गलत संगति या अनैतिक कार्य) जो महिला और पुरुष के अपने स्वास्थ्य, करियर और भविष्य को बर्बाद कर दे।

अधिकारों का दुरुपयोग: स्वतंत्रता के नाम पर कानून या समाज के नियमों का उल्लंघन करना।


अंतिम विचार

एक महिला और पुरुष के लिए स्वतंत्रता लक्ष्मण की रेखा है जो की उतनी ही जरूरी है जितनी जीवित रहने के लिए हवा। लेकिन सच्ची स्वतंत्रता हमेशा जिम्मेदारी (Responsibility) के साथ आती है। जब एक महिला और पुरुष स्वतंत्र होतें है, तो वह पूरे परिवार और समाज को आगे बढ़ातe है। वहीं, स्वच्छंदता वो होती है जो हमारी स्वतंत्रता यानि लक्ष्मण रेखा को लाँघ कर सिर्फ अपने मुताबिक कोई भी निर्णय लेना होता है जो की का एक विकृत रूप है, जिसकी आवश्यकता किसी को भी नहीं होनी चाहिए।
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न्यू वर्ल्ड ऑर्डर - एजेंडा 2030 की खौफनाक डिजिटल जेल क्यों यह साल मानवता की आजादी का आखिरी दिन साबित हो सकता है ➥
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2026 खत्म होने में और 2. महीने बचे हुए हैं, 2027 से स्थिति धीरे-धीरे और खराब होने लगेगी!

2008 और 2018 से भी बड़ा इकोनॉमिक क्राइसेस हम जल्द देखेंगे 👆👆


*जो बात अखंड भारत में हम सभी इतने दिनों से बता रहे हैं यहि बात अब ये लोग बता रहे है 👆👆 की*

*कागज का रुपया एक फ्रॉड है...बैंको मै मोटे पैसे ना रखें अपने पैसे को सोने और चांदी मे बदल ले क्यूंकि आगे इसकी कीमत आसमान छूएगी.....मगर अफसोस की बाते तब होगी कि उस समय आपको CBDC नई प्रोग्रामिंग करेंसी सें सोने - चाँदी नहीं खरीदने दिए जाएंगे, इसलिए कोई भी
साथी लालच के चक्कर में अपने घरों के सोने - चांदी को बिल्कुल भी ना बेचें,👆👆

*"आपके पास कुछ भी नहीं होगा, और आप खुश रहेंगे" 2016 विश्व आर्थिक मंच (WEF - डब्ल्यूईएफ) का एक उत्तेजक वाक्यांश है*

*किसी भी हालत में अपने घर के सोने चांदी को बिल्कुल भी ना बेचें, अपने घरों के सोने चांदी को बिल्कुल भी घर से ना निकाले... चाहे सोना चांदी कितना भी महंगा हो कितना भी 10 गुणा तक आपको प्रॉफिट दे रहा हो.... लेकिन सोने चांदी को घर से नहीं निकालना है.... बुरे वक्त में यही सोने - चांदी आपके काम आएंगे 🙏🙏
*



*मनोज कुमार* 🙏🙏
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🚨आरबीआई की बड़ी वॉर्निंग !🚨

🚨आर्थिक संकट किसी भी रात खड़ा हो सकता है!

नींद में मत रहो! ये कोई अफवाह नहीं, देश के सबसे बड़े बैंक की चेतावनी है!

* आपकी गाढ़ी कमाई की बचत एक झटके में आधी हो सकती है!

बैंक के लॉकर में रखा सोना भी कागज बन सकता है!

| शेयर बाजार ऐसा गिरेगा कि संभलने का मौका तक नहीं मिलेगा !

आरबीआई कह रहा है- अगर ये तूफान आया तो इससे निकलने में पूरे 10 साल लग जाएंगे ! 10 साल ! सोचो... 10 साल तक महंगाई, बेरोजगारी और भूखमरी का ऐसा सैलाब आएगा कि घर-घर में हाहाकार मच जाएगा ! A

नौकरी है तो आज है, कल का कोई भरोसा नहीं!

जेब में पैसा है तो आज है, कल कागज के टुकड़े से ज्यादा कीमत नहीं !

ये वो अंधेरा है जो बिना दस्तक दिए आएगा! रात के 12 बजे जब आप सो रहे होंगे, तब आपकी किस्मत लुट चुकी होगी !

इसलिए अभी जागो !

नकद को मत पकड़ो, संपत्ति बनाओ !

जमीन, सोना और हुनर - यही बचाएगा !

ये चेतावनी है... आखिरी चेतावनी !
मध्य प्रदेश में पतंजलि के घी में 5 गुना ज्यादा सीसा मिला, बिक्री पर बैन

पतंजलि बोली- लैब जांच करने में सक्षम नहीं
- लाला रामदेव
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शैतान इल्लुमिनाति 👁️ एवं वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम् और CIA के दलाल ने सिग्नल दे दिया है - हम रुकने वाले नहीं हैं, हम End Goal तक जाएंगे।"- नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी
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दिल्ली मे आंदोलन करने के लिए अब आप के जेब मे 1.5 लाख रूपये /दिन की होनी चाहिए!
सिमरिया गांव की रहने वाली हल्की बहू अपने बीमार बेटे का इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंची थीं. महिला के मुताबिक, उसके बेटे को लूज मोशन यानी दस्त की शिकायत थी. वह अपने बेटे के इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल आई थी लेकिन यहां उसके साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसने अस्पताल की व्यवस्था को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया. आरोप है कि अस्पताल के फर्श पर गंदगी फैलने के बाद महिला को ही उसे साफ करने के लिए कह दिया गया. वीडियो में महिला अस्पताल के फर्श पर पोछा लगाती हुए नजर आ रही है. जब महिला से पूछा गया कि वह अस्पताल का फर्श क्यों साफ कर रही है, तो उसने बताया कि ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने उसे फर्श पर फैली गंदगी साफ करने के लिए कहा है.

#damoh | #mpnews | #HospitalNegligence #VistaarNews
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