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अनुभव की जानकारी बहुत काम की होती है चौथी स्टेज का कैंसर भी हार गया
👍34❤9🔥3👏1
☯️ *Samvaayi Foundation / Samvaayi Acupressure Noida द्वारा ऑनलाइन Basic to Semester-1 Course* 📚 :
🔺 *Chinese Acupressure*
🔺 *Ayurvedic Acupressure*
🔺 *Basics of Human Body*
के लिए क्लास शुरू होने की सूचना :- 📢
📆 *दिनांक -* 1 दिसंबर से 30 दिसम्बर तक
🕰️ *समय -* रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक
🆓 *फीस -* एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर, नेचुरोपैथी चिकित्सा हेतु निष्ठा,प्रतिबद्धता । चिकित्सा में दया भावना का मिश्रण।
👩🏻🎓 *प्रमाण पत्र -* डिजिटल प्रमाण पत्र के साथ पूरे क्लास की वीडियो रिकॉर्डिंग 🎥 भी प्रदान की जाएगी ।
👨🏻🏫 *फैकल्टी -:*
🪶 श्रीमती सुषमा ओझा
प्रोफेसर ASPEUS , प्रयागराज,
संरक्षक समवायी फाउन्डेशन, नोएडा ।
एक्यूप्रेशर का 22 वर्ष का अनुभव ।
🪶 श्री अरविन्द श्रीवास्तव
अध्यक्ष समवायी फाउन्डेशन, नोएडा ।
एक्यूप्रेशर का 5.5 वर्ष का अनुभव ।
🪶 श्री निरंजन कुमार गुप्ता
प्रमोटर समवायी फाउन्डेशन, नोएडा ।
एक्यूप्रेशर का 5.5 वर्ष का अनुभव ।
🪶 डॉ दिव्या
प्रमोटर समवायी फाउन्डेशन, नोएडा ।
एक्यूपंक्चर का 2 वर्ष का अनुभव ।
🪶 डॉ कोमल बालवानी
प्रमोटर समवायी फाउन्डेशन, नोएडा ।
नैचुरोपैथी का 20 वर्ष का अनुभव ।
🪶 अन्य थेरेपिस्ट /प्रमोटर समवायी फाउंडेशन नोएडा जिन्हें 2 वर्ष से अधिक का एक्यूप्रेशर का अनुभव प्राप्त है ।
ℹ️ *प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएं*
🔅अपने घर पर रहकर एक्यूप्रेशर सीखें । 🖥️
🔅किसी भी उम्र का व्यक्ति इसे सीख सकता है। 👴🏼🧓🏼👨🏻👩🏻🦱
🔅स्वयं का और परिवार का उपचार कर सकते हैं। 🩺
🔅एक्यूप्रेशर के मूलभूत सिद्धांत और चिकित्सा की अवधारणा के विषय में बताया जाएगा। 👨🏻🏫🔠
🔅दबाव, बीज, रंग और मैग्नेट के माध्यम से प्रैक्टिकल सिखाया जाएगा। 🫛🫘
🔅एक्यू उपकरणों का उपयोग, NATURO मेडीसिन का उपयोग बताया जाएगा। 🧘🏻
🔅एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर चिकित्सा में कोई साइड इफेक्ट नहीं, कोई दर्द नहीं, कोई दवा नहीं। 💊❎
🔅थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों के विषय में जानकारी दी जाएगी। 📒
📩 Send following details to join the course:
*Candidate Name*-
*Father's Name* -
*Mother's Name*-
*Age* -
*WhatsApp Mobile No* -
*City Name* -
*Full Address with pin code-* -
*Education qualification*
Contact:
👤 श्री अरविंद श्रीवास्तव
📞 +91 9910229503
👤 श्री निरंजन कुमार गुप्ता
📞 +91 8084909448
👤 श्रीमती सुषमा ओझा
📞 +91 9140885902
*For any enquiry, please Text or WhatsApp on the phone numbers given above🙏
🎗️ *द्वारा आयोजित*-
समवायी फाउन्डेशन, नोएडा
🔺 *Chinese Acupressure*
🔺 *Ayurvedic Acupressure*
🔺 *Basics of Human Body*
के लिए क्लास शुरू होने की सूचना :- 📢
📆 *दिनांक -* 1 दिसंबर से 30 दिसम्बर तक
🕰️ *समय -* रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक
🆓 *फीस -* एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर, नेचुरोपैथी चिकित्सा हेतु निष्ठा,प्रतिबद्धता । चिकित्सा में दया भावना का मिश्रण।
👩🏻🎓 *प्रमाण पत्र -* डिजिटल प्रमाण पत्र के साथ पूरे क्लास की वीडियो रिकॉर्डिंग 🎥 भी प्रदान की जाएगी ।
👨🏻🏫 *फैकल्टी -:*
🪶 श्रीमती सुषमा ओझा
प्रोफेसर ASPEUS , प्रयागराज,
संरक्षक समवायी फाउन्डेशन, नोएडा ।
एक्यूप्रेशर का 22 वर्ष का अनुभव ।
🪶 श्री अरविन्द श्रीवास्तव
अध्यक्ष समवायी फाउन्डेशन, नोएडा ।
एक्यूप्रेशर का 5.5 वर्ष का अनुभव ।
🪶 श्री निरंजन कुमार गुप्ता
प्रमोटर समवायी फाउन्डेशन, नोएडा ।
एक्यूप्रेशर का 5.5 वर्ष का अनुभव ।
🪶 डॉ दिव्या
प्रमोटर समवायी फाउन्डेशन, नोएडा ।
एक्यूपंक्चर का 2 वर्ष का अनुभव ।
🪶 डॉ कोमल बालवानी
प्रमोटर समवायी फाउन्डेशन, नोएडा ।
नैचुरोपैथी का 20 वर्ष का अनुभव ।
🪶 अन्य थेरेपिस्ट /प्रमोटर समवायी फाउंडेशन नोएडा जिन्हें 2 वर्ष से अधिक का एक्यूप्रेशर का अनुभव प्राप्त है ।
ℹ️ *प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएं*
🔅अपने घर पर रहकर एक्यूप्रेशर सीखें । 🖥️
🔅किसी भी उम्र का व्यक्ति इसे सीख सकता है। 👴🏼🧓🏼👨🏻👩🏻🦱
🔅स्वयं का और परिवार का उपचार कर सकते हैं। 🩺
🔅एक्यूप्रेशर के मूलभूत सिद्धांत और चिकित्सा की अवधारणा के विषय में बताया जाएगा। 👨🏻🏫🔠
🔅दबाव, बीज, रंग और मैग्नेट के माध्यम से प्रैक्टिकल सिखाया जाएगा। 🫛🫘
🔅एक्यू उपकरणों का उपयोग, NATURO मेडीसिन का उपयोग बताया जाएगा। 🧘🏻
🔅एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर चिकित्सा में कोई साइड इफेक्ट नहीं, कोई दर्द नहीं, कोई दवा नहीं। 💊❎
🔅थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों के विषय में जानकारी दी जाएगी। 📒
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🚩दयानंद सा इस दुनिया में वेदों का विद्वान नहीं🚩
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ये जानकारी तो पता होनी चाहिए सबको
https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/vegetable-insects-reached-the-brain-of-40-children-group-of-eggs-seen-in-ct-scan-201734915148559.html
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Livehindustan
सब्जियों वाले कीड़े 40 बच्चों के दिमाग में पहुंचे, सीटी स्कैन में दिखा अण्डों का समूह
मिर्गी के दौरे पड़ने पर 10 साल के एक बच्चे को उनके पिता लेकर आए थे। 15 दिन उपचार के बाद भी उसकी समस्या कम नहीं हुई तो उसका सिटी स्कैन कराया गया। रिपोर्ट में एनसीसी पाया गया। इसका मतलब था कि बच्चे के दिमाग में सूक्ष्म कीड़े व उनके अण्डों का समूह दिमाग के टेम्पोरल…
😱5
वेद हो या उपनिषद या योगदर्शन सभी स्थानों पर ओ३म् महिमा ही बताई गई है, फिर इस ईश्वर के मुख्य नाम को क्यों त्यागा हुआ है
ईश्वर, आत्मा, प्रकृति
ईश्वर चेतन आत्मा चेतन किंतु प्रकृति जड़
तभी उपनिषदों में या योगियों के वचनों में यही बताया गया है कि यम नियम का पालन करते हुए धारणा ह्रदय प्रदेश (दोनों फेफड़ों के नीचे की तरफ बीच में जो गड्ढा है) में लगाकर ओ३म् का जाप करना चाहिए
जब धारणा सही बन जाती है तो सांस भिन प्रकार से चलती है , यानी खुद ही प्राणायाम होने लगता है, तभी तो 1 घंटा ध्यान करने के बाद शरीर ऊर्जावान लगता है,
अनिद्रा, तनाव, अतिक्रोध, आदि आदि समस्याएं दूर होती जाती हैं
ओर ध्यान करने वाला अपने पूर्वजों को अपमानित करने से भी बचता है जानते हो कैसे?
मैंने सड़क किनारे कई भगवानों के चित्र पड़े देखें है, उनके साथ क्या क्या होता है मैं क्या ही लिखूं
आप कभी अपने दादा अपने बाप के चित्र को कूडे में नहीं फेंकते किंतु जिन्हें आप ईश्वर मानकर पूजते हो बादमें उन्हें कूड़े में फेंक देते ही या नदियों में डाल कर नदियों को प्रदूषित करते हो
केवल ईश्वर का ध्यान ही उन्नति का मार्ग है बाकी सब पतन का मार्ग है
जो भाई भूत प्रेत को मानते हैं , जब आप ध्यान करेंगे तो भूत प्रेत की समस्या आपको नहीं होगी क्योंकि दिमाग आपका ठीक रहेगा और साथ ही सांसों का महत्व भी समझ आने लगेगा (सांसों का महत्व यानी स्वर विज्ञान)
आप कभी भी देखलेना जो लोग वास्तव में ध्यान करने वाले होते हैं वो कभी डिप्रेशन तनाव जो भी आप बोलते हो इन सब का शिकार नहीं होता ध्यानी व्यक्ति जबकि इसकी तुलना में जड़ को पूजने वाला डिप्रेशन की दवाएं खाता है
इस लेख का मकसद घृणा नहीं है केवल थोड़ा सा जगाना मात्र है, बाकी तो जिसका जैसा विवेक होगा करेगा ही
ईश्वर, आत्मा, प्रकृति
ईश्वर चेतन आत्मा चेतन किंतु प्रकृति जड़
तभी उपनिषदों में या योगियों के वचनों में यही बताया गया है कि यम नियम का पालन करते हुए धारणा ह्रदय प्रदेश (दोनों फेफड़ों के नीचे की तरफ बीच में जो गड्ढा है) में लगाकर ओ३म् का जाप करना चाहिए
जब धारणा सही बन जाती है तो सांस भिन प्रकार से चलती है , यानी खुद ही प्राणायाम होने लगता है, तभी तो 1 घंटा ध्यान करने के बाद शरीर ऊर्जावान लगता है,
अनिद्रा, तनाव, अतिक्रोध, आदि आदि समस्याएं दूर होती जाती हैं
ओर ध्यान करने वाला अपने पूर्वजों को अपमानित करने से भी बचता है जानते हो कैसे?
मैंने सड़क किनारे कई भगवानों के चित्र पड़े देखें है, उनके साथ क्या क्या होता है मैं क्या ही लिखूं
आप कभी अपने दादा अपने बाप के चित्र को कूडे में नहीं फेंकते किंतु जिन्हें आप ईश्वर मानकर पूजते हो बादमें उन्हें कूड़े में फेंक देते ही या नदियों में डाल कर नदियों को प्रदूषित करते हो
केवल ईश्वर का ध्यान ही उन्नति का मार्ग है बाकी सब पतन का मार्ग है
जो भाई भूत प्रेत को मानते हैं , जब आप ध्यान करेंगे तो भूत प्रेत की समस्या आपको नहीं होगी क्योंकि दिमाग आपका ठीक रहेगा और साथ ही सांसों का महत्व भी समझ आने लगेगा (सांसों का महत्व यानी स्वर विज्ञान)
आप कभी भी देखलेना जो लोग वास्तव में ध्यान करने वाले होते हैं वो कभी डिप्रेशन तनाव जो भी आप बोलते हो इन सब का शिकार नहीं होता ध्यानी व्यक्ति जबकि इसकी तुलना में जड़ को पूजने वाला डिप्रेशन की दवाएं खाता है
इस लेख का मकसद घृणा नहीं है केवल थोड़ा सा जगाना मात्र है, बाकी तो जिसका जैसा विवेक होगा करेगा ही
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आधुनिक काल के माहान क्रन्तिकारी श्री राजीव दीक्षित भाई के व्याख्यान में से
राजीव दीक्षित जी ने नेहरु चिंदम्बरम मनमोहन आदि सबको अच्छे से एक्सपोज किया था
मनमोहन सिंह जब पहली बार प्रधानमन्त्री बने तो ऑक्सफ़ोर्ड गए वहां पर एक सम्मान समारोह हुआ मनमोहन सिंह का
समारोह में मनमोहन ने 40 मिनट का भाषण दिया
उसमे उन्होंने बोला की भारत हजारों साल से गरीब देश है ये तो अंग्रेज थे जो भारत आए और भारत को सभ्य बनाया हम अंग्रेजो के बहुत आभारी हैं
जिन्होंने आकर भारत को तकनिकी सिखाई हम अंग्रेजो के बहोत आभारी हैं जिन्होंने भारत मे विज्ञानं लाया , हम अंग्रेजो के बहुत आभारी हैं जिन्होंने भारत में उद्योग लाए , 40 मिनट तक वो यही सब बोलते रहे
अगले दिन ये भाषण इंग्लेंड के अखबारों में छपा तो कई अखबारों ने हेडिंग लगाया
"लगता है भारत अभी भी अंग्रेजो की गुलामी में ही है क्योकि भारत का प्रधानमन्त्री जो गान गा रहा है यहाँ आकर वो एक सवतंत्र देश के स्वाभिमानी प्रधानमन्त्री का गान नहीं हो सकता ये तो गुलाम देश के
गुलाम प्रधानमन्त्री का गाना है "
ये व्याख्यान राजिव भाई की वीडयो में मिल जाएगा , और मनमोहन के उस भाषण की वीडयो सालो पहले मेने देखि थी शायद इंटरनेट पर खोजने से अब भी मिल जाए
अब एक जानकारी और
जब मनमोहन प्रधानमन्त्री बने तो इन्होने भारतीयों के टैक्स के पैसे से पकिस्तान के अपने गाँव में सड़क बनवाई लाईट लगवाई और भी बहुत कुछ किया एक पकिसतनी चेनल पर ये सब बताया जारहा था मेने इसकी वीडयो देखि है
🚩जय हो निर्भीक क्रांतिकारी श्री राजीव दीक्षित जी की🚩
राजीव दीक्षित जी ने नेहरु चिंदम्बरम मनमोहन आदि सबको अच्छे से एक्सपोज किया था
मनमोहन सिंह जब पहली बार प्रधानमन्त्री बने तो ऑक्सफ़ोर्ड गए वहां पर एक सम्मान समारोह हुआ मनमोहन सिंह का
समारोह में मनमोहन ने 40 मिनट का भाषण दिया
उसमे उन्होंने बोला की भारत हजारों साल से गरीब देश है ये तो अंग्रेज थे जो भारत आए और भारत को सभ्य बनाया हम अंग्रेजो के बहुत आभारी हैं
जिन्होंने आकर भारत को तकनिकी सिखाई हम अंग्रेजो के बहोत आभारी हैं जिन्होंने भारत मे विज्ञानं लाया , हम अंग्रेजो के बहुत आभारी हैं जिन्होंने भारत में उद्योग लाए , 40 मिनट तक वो यही सब बोलते रहे
अगले दिन ये भाषण इंग्लेंड के अखबारों में छपा तो कई अखबारों ने हेडिंग लगाया
"लगता है भारत अभी भी अंग्रेजो की गुलामी में ही है क्योकि भारत का प्रधानमन्त्री जो गान गा रहा है यहाँ आकर वो एक सवतंत्र देश के स्वाभिमानी प्रधानमन्त्री का गान नहीं हो सकता ये तो गुलाम देश के
गुलाम प्रधानमन्त्री का गाना है "
ये व्याख्यान राजिव भाई की वीडयो में मिल जाएगा , और मनमोहन के उस भाषण की वीडयो सालो पहले मेने देखि थी शायद इंटरनेट पर खोजने से अब भी मिल जाए
अब एक जानकारी और
जब मनमोहन प्रधानमन्त्री बने तो इन्होने भारतीयों के टैक्स के पैसे से पकिस्तान के अपने गाँव में सड़क बनवाई लाईट लगवाई और भी बहुत कुछ किया एक पकिसतनी चेनल पर ये सब बताया जारहा था मेने इसकी वीडयो देखि है
🚩जय हो निर्भीक क्रांतिकारी श्री राजीव दीक्षित जी की🚩
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महत्वपूर्ण जानकारी एक नई आईडी बनाई जा रही है apaar id , ध्यान दें ये स्वैच्छिक है यदि आप नहीं बनवाना चाहते तो कोई स्कूल आप पर दबाव नहीं डाल सकता
ये नम्बर सरकार की वेबसाइट से यहां दे रहा हूं आप खुद बात कर सकते हो, कोई स्कूल आप पर दबाव बनाए तो यहां फोन करके स्कूल वालो की बात करवा सकते हो,
apaar हेल्पलाइन फोन नंबर ये है
👉 18008893511
ओर नीचे rti का चित्र भी है तो डरने का नहीं किसी से
ये नम्बर सरकार की वेबसाइट से यहां दे रहा हूं आप खुद बात कर सकते हो, कोई स्कूल आप पर दबाव बनाए तो यहां फोन करके स्कूल वालो की बात करवा सकते हो,
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👉 18008893511
ओर नीचे rti का चित्र भी है तो डरने का नहीं किसी से
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बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना? नहीं बेगानी शादी में हिंदू दीवाना ? वास्तव में कहावत तो अधिकतर हिंदुओ पर सही बैठती है
1 जनवरी खतना दिवस पर पागल होने वालो
ईसा के जन्म की हमे क्यों खुशी मनानी चाहिए? ईसाईकरण कितनी बड़ी समस्या है क्या तुम नहीं जानते?
अंग्रेजो ने अप्रैल में नया साल मनाने वालो को मूर्ख घोषित करने के लिए 1 अप्रैल को मूर्खता दिवस घोषित किया, जबकि मार्च अप्रैल में प्रकृति में सब नया होने लगता है पतझड़ से हरियाली छाने लगती है
जबकि 1 जनवरी पर पतझड़ का मौसम बना रहता है ठंड बनी रहती है प्रकृति में कोई बदलाव यानी नयापन देखने को नहीं मिलता, वास्तव में 1 जनवरी ही मूर्खता दिवस है
क्या ईसाई बहुल देश भगवान राम कृष्ण के जनम की खुशियां मनाते हैं? जो भारत के अधिकतर हिंदू 25 दिसम्बर हो या 1 जनवरी खुशी के मारे बावला हुआ जाता है?
सोशल मीडिया पर देश भक्ति की बाते करने वाले भी 1 जनवरी खतना दिवस को पागल हुए जाते हैं
बाते करते हैं ये सनातन धर्म की किंतु अपने बालकों के जन्मदिवस पर सनातन का मुख्य कर्तव्य हवन नहीं करते, अपने त्योहारों पर हवन नहीं करते , अपनी प्राचीन परम्पराओं का त्यागने वाला अधिकतर हिंदू समाज क्या हिंदू राष्ट्र बना पाएगा ?
भारत का ईसाईकरण सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है, ईसाई मिशनरियां हिंदुओ को ईसाई बनाकर भारत के नए गद्दारों को जनम दे रही हैं,
हिंदुओ ने अपने विनाश से भी कुछ नहीं सिखा देखो मणिपुर में दो मुख्य विचार धाराएं हैं एक जो सनातन धर्म को मानते हैं दूसरे जो पहले हिंदू थे अब ईसाई मत को मानते हैं , जब सनातन धर्म से विपरीत दूसरी विचारधाराएं ज्यादा होगी तो आपको लूटपाट हत्याएं देश के टुकड़े मारकाट विनाश होते नजर आएंगे
वास्तविकता यही है कि ये बाते ज्यादातर हिंदू सोचता नहीं है , कथनी और करनी में अंतर है , घमंड तो पूरा है किंतु स्वाभिमान जरा सा भी नहीं बचा
अमित आर्य
1 जनवरी खतना दिवस पर पागल होने वालो
ईसा के जन्म की हमे क्यों खुशी मनानी चाहिए? ईसाईकरण कितनी बड़ी समस्या है क्या तुम नहीं जानते?
अंग्रेजो ने अप्रैल में नया साल मनाने वालो को मूर्ख घोषित करने के लिए 1 अप्रैल को मूर्खता दिवस घोषित किया, जबकि मार्च अप्रैल में प्रकृति में सब नया होने लगता है पतझड़ से हरियाली छाने लगती है
जबकि 1 जनवरी पर पतझड़ का मौसम बना रहता है ठंड बनी रहती है प्रकृति में कोई बदलाव यानी नयापन देखने को नहीं मिलता, वास्तव में 1 जनवरी ही मूर्खता दिवस है
क्या ईसाई बहुल देश भगवान राम कृष्ण के जनम की खुशियां मनाते हैं? जो भारत के अधिकतर हिंदू 25 दिसम्बर हो या 1 जनवरी खुशी के मारे बावला हुआ जाता है?
सोशल मीडिया पर देश भक्ति की बाते करने वाले भी 1 जनवरी खतना दिवस को पागल हुए जाते हैं
बाते करते हैं ये सनातन धर्म की किंतु अपने बालकों के जन्मदिवस पर सनातन का मुख्य कर्तव्य हवन नहीं करते, अपने त्योहारों पर हवन नहीं करते , अपनी प्राचीन परम्पराओं का त्यागने वाला अधिकतर हिंदू समाज क्या हिंदू राष्ट्र बना पाएगा ?
भारत का ईसाईकरण सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है, ईसाई मिशनरियां हिंदुओ को ईसाई बनाकर भारत के नए गद्दारों को जनम दे रही हैं,
हिंदुओ ने अपने विनाश से भी कुछ नहीं सिखा देखो मणिपुर में दो मुख्य विचार धाराएं हैं एक जो सनातन धर्म को मानते हैं दूसरे जो पहले हिंदू थे अब ईसाई मत को मानते हैं , जब सनातन धर्म से विपरीत दूसरी विचारधाराएं ज्यादा होगी तो आपको लूटपाट हत्याएं देश के टुकड़े मारकाट विनाश होते नजर आएंगे
वास्तविकता यही है कि ये बाते ज्यादातर हिंदू सोचता नहीं है , कथनी और करनी में अंतर है , घमंड तो पूरा है किंतु स्वाभिमान जरा सा भी नहीं बचा
अमित आर्य
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*सनसनीखेज खुलासा!!*
*टी वी पर चर्चारत इन दोनों का न तो कांग्रेस* से ना ही *BJP* से कुछ लेना देना है। *इस वीडियो में आप को बेहद डरावनी जानकारी मिलेगी। बोले गए एक-एक शब्द को सुन कर सभी भारतीयों को यह एहसास होगा कि हमारा देश कितने बड़े संकट से बाहर आ गया है।*
कृपया इसे एक बार सुनें और समझने का प्रयास करें...!! 15 मिनट का वीडियो है, जरूर देखें जिस सच्चाई से अभी तक आप और हम अनभिज्ञ थे, निवेदन है एक बार जरूर देखे
*टी वी पर चर्चारत इन दोनों का न तो कांग्रेस* से ना ही *BJP* से कुछ लेना देना है। *इस वीडियो में आप को बेहद डरावनी जानकारी मिलेगी। बोले गए एक-एक शब्द को सुन कर सभी भारतीयों को यह एहसास होगा कि हमारा देश कितने बड़े संकट से बाहर आ गया है।*
कृपया इसे एक बार सुनें और समझने का प्रयास करें...!! 15 मिनट का वीडियो है, जरूर देखें जिस सच्चाई से अभी तक आप और हम अनभिज्ञ थे, निवेदन है एक बार जरूर देखे
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समाज सुधार का कार्य बड़ा ही कठिन कार्य है
ऋषि दयानंद जी की जीवनी पढ़ रहा हूं तो मालूम चल रहा है कि कितना कठिन जीवन था ऋषि का कितनी करुणा थी ऋषि में,
ऋषि दयानंद हमेशा धर्म के मार्ग पर ही चले समाज की सभी कुरीतियों का विरोध किया कन्याओं को भी समान अधिकार दिलवाए जातपात को खत्म करने का प्रयास किया
ऋषि पर कोई पत्थर फेंकता कोई विष देता कोई तलवार लेकर मारने आता कोई अपशब्द बोलता , किंतु इन अखंड ब्रह्मचारी के सामने आते ही सभी परास्त हो जाते
यदि पौराणिक समाज ने ऋषि दयानंद जी की मानी होती तो आज जातिवाद भारत से समाप्त हुए 100 वर्ष से भी ज्यादा का समय हो जाता , ना तो भारत के टुकड़े होते ओर ना ही नेहरू प्रधानमंत्री होता , ओर ना ही आंबेडकर अपना मत बदल कर राष्ट्र को कमजोर करते ओर ना ही गांधी किसी को ब्लैकमेल कर पाता
क्योंकि जब देश का बहुसंख्यक समाज कमजोर होगा पाखंड में डूबा होगा अनेकता में एकता जैसे झूठी बातों को मानेगा, अपने बच्चों को गर्भ काल से ही धर्म की शिक्षा नहीं देगा, तब तक देश विरोधी ताकते हावी होंगी ही
मुझे तो केवल एक ही मार्ग दिखता है सभी आर्यसमाजी विद्वान एक मत होकर अपनी एक राजनीतिक पार्टी बनाएं तो हम भारत को बचा सकते हैं
किंतु ऐसा होगा ये केवल कल्पना मात्र ही है, पता नहीं मैं सही हूं या गलत किंतु मुझे लगता है कि आजका आर्यसमाज ऋषि वाला आर्यसमाज नहीं रहा
🙏ओ३म्🙏
ऋषि दयानंद जी की जीवनी पढ़ रहा हूं तो मालूम चल रहा है कि कितना कठिन जीवन था ऋषि का कितनी करुणा थी ऋषि में,
ऋषि दयानंद हमेशा धर्म के मार्ग पर ही चले समाज की सभी कुरीतियों का विरोध किया कन्याओं को भी समान अधिकार दिलवाए जातपात को खत्म करने का प्रयास किया
ऋषि पर कोई पत्थर फेंकता कोई विष देता कोई तलवार लेकर मारने आता कोई अपशब्द बोलता , किंतु इन अखंड ब्रह्मचारी के सामने आते ही सभी परास्त हो जाते
यदि पौराणिक समाज ने ऋषि दयानंद जी की मानी होती तो आज जातिवाद भारत से समाप्त हुए 100 वर्ष से भी ज्यादा का समय हो जाता , ना तो भारत के टुकड़े होते ओर ना ही नेहरू प्रधानमंत्री होता , ओर ना ही आंबेडकर अपना मत बदल कर राष्ट्र को कमजोर करते ओर ना ही गांधी किसी को ब्लैकमेल कर पाता
क्योंकि जब देश का बहुसंख्यक समाज कमजोर होगा पाखंड में डूबा होगा अनेकता में एकता जैसे झूठी बातों को मानेगा, अपने बच्चों को गर्भ काल से ही धर्म की शिक्षा नहीं देगा, तब तक देश विरोधी ताकते हावी होंगी ही
मुझे तो केवल एक ही मार्ग दिखता है सभी आर्यसमाजी विद्वान एक मत होकर अपनी एक राजनीतिक पार्टी बनाएं तो हम भारत को बचा सकते हैं
किंतु ऐसा होगा ये केवल कल्पना मात्र ही है, पता नहीं मैं सही हूं या गलत किंतु मुझे लगता है कि आजका आर्यसमाज ऋषि वाला आर्यसमाज नहीं रहा
🙏ओ३म्🙏
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कितनी ही बार सुनो मन नहीं भरता , https://www.youtube.com/watch?v=0qFpVaI5JtU&t=479s
YouTube
Maharshi Dayanand Saraswati Rishi Gatha by Kavi Pradeep
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स्वामी जी के लिए धर्म प्रचार का कार्य करना कितना कठिन था, किंतु एक समाधिस्थ योगी ईश्वर से बल साहस प्राप्त करता है और अपने कार्यों को पूरा करता ही है
शाहबाजपुर में स्वामी जी की हत्या करने की विफल चेष्टा-
वहां हमने यह भी सुना था कि गंगा नदी के पार से दो वैरागी स्वामी जी को मारने के लिए आये थे और शाहबाजपुर के एक ठाकुर को एक वैरागी ने अपना मित्र समझ कर कहा कि तुम अपनी तलवार हमें दो,
हम इस गप्पाष्टक को मार देंगे।
उस ठाकुर ने कहा कि उनकी तो मैंने कई दिन वार्ता यहीं सुनी है, वह बड़े महात्मा हैं। दुष्टो ! यदि फिर यह बात मुख से निकाली तो तुमको मार डालूंगा, जाओ मेरे सामने से दूर हो जाओ !
फिर वह ठाकुर दो-चार सशस्त्र मनुष्यों के साथ स्वामी जी के पास आया और कहा कि महाराज ! आपके मारने की यह दुष्ट लोग सम्मति कर रहे थे, मैं उनको धमका कर यहां आया हूं। स्वामी जी ने कहा कि उनकी क्या सामर्थ्य है कि हमको मारें ! परन्तु वह ठाकुर न माना और रात भर पहरा देता रहा जिस पर वह दुष्ट किसी प्रकार का कोई आक्रमण न कर सके ।
🚩🧘♀️🚩
शाहबाजपुर में स्वामी जी की हत्या करने की विफल चेष्टा-
वहां हमने यह भी सुना था कि गंगा नदी के पार से दो वैरागी स्वामी जी को मारने के लिए आये थे और शाहबाजपुर के एक ठाकुर को एक वैरागी ने अपना मित्र समझ कर कहा कि तुम अपनी तलवार हमें दो,
हम इस गप्पाष्टक को मार देंगे।
उस ठाकुर ने कहा कि उनकी तो मैंने कई दिन वार्ता यहीं सुनी है, वह बड़े महात्मा हैं। दुष्टो ! यदि फिर यह बात मुख से निकाली तो तुमको मार डालूंगा, जाओ मेरे सामने से दूर हो जाओ !
फिर वह ठाकुर दो-चार सशस्त्र मनुष्यों के साथ स्वामी जी के पास आया और कहा कि महाराज ! आपके मारने की यह दुष्ट लोग सम्मति कर रहे थे, मैं उनको धमका कर यहां आया हूं। स्वामी जी ने कहा कि उनकी क्या सामर्थ्य है कि हमको मारें ! परन्तु वह ठाकुर न माना और रात भर पहरा देता रहा जिस पर वह दुष्ट किसी प्रकार का कोई आक्रमण न कर सके ।
🚩🧘♀️🚩
👍16👏4❤3🎉1
कौन-सा अन्न भ्रष्ट होता है? -
एकबार सुखवासीलाल साध कढ़ी और भात स्वामी जी के लिए ले आया।
स्वामी जी ने उसे खाया। यहां के ब्राह्मणों ने कहा कि तुम भ्रष्ट हो गये, साध की खा ली। स्वामी जी ने कहा कि रोटी दो प्रकार से भ्रष्ट होती है, एक तो दुःख देकर प्राप्त किया हुआ धन उससे जो अन्न लावे वह भ्रष्ट है दूसरे कोई मलिन वस्तु उस पर या उसमें पड़ी हो तब भी भ्रष्ट है। जिस पर सब मौन हो गये ।
इस घटना से ओर एसी ही ओर भी घटनाएं हैं जिनसे हमें ज्ञात होता है कि स्वामी जी ने कभी भी मनुष्य मनुष्य में भेद नहीं किया वे जात पात को नहीं मानते थे, ओर सभी को मिल जुलकर प्रेम से रहने का संदेश देते थे
एकबार सुखवासीलाल साध कढ़ी और भात स्वामी जी के लिए ले आया।
स्वामी जी ने उसे खाया। यहां के ब्राह्मणों ने कहा कि तुम भ्रष्ट हो गये, साध की खा ली। स्वामी जी ने कहा कि रोटी दो प्रकार से भ्रष्ट होती है, एक तो दुःख देकर प्राप्त किया हुआ धन उससे जो अन्न लावे वह भ्रष्ट है दूसरे कोई मलिन वस्तु उस पर या उसमें पड़ी हो तब भी भ्रष्ट है। जिस पर सब मौन हो गये ।
इस घटना से ओर एसी ही ओर भी घटनाएं हैं जिनसे हमें ज्ञात होता है कि स्वामी जी ने कभी भी मनुष्य मनुष्य में भेद नहीं किया वे जात पात को नहीं मानते थे, ओर सभी को मिल जुलकर प्रेम से रहने का संदेश देते थे
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यह कहानी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल जी से जुड़ी है। इसमें बिस्मिल जी के बलिदान, और उनके परिवार की पीड़ा को उजागर किया गया है। विशेष रूप से बिस्मिल की मां के संघर्ष और कष्टों का विवरण दिया गया है, जिन्होंने अपने बेटे के बलिदान और परिवार की दुरावस्था के बावजूद साहस और धैर्य दिखाया।
मां के पास किसी प्रकार की सहायता नहीं थी, और उनके ऊपर समाज ने तमाम आरोप लगाए। बिस्मिल की मां, जो अपने बेटे के बलिदान के बाद अकेली और गरीब हो गईं, मां ने अपनी ज़िंदगी की दुखभरी यादों और संघर्षों को साझा किया। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि स्वतंत्रता संग्राम के नायक केवल अपने लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार और समाज के लिए भी बलिदान देते हैं।
https://www.youtube.com/watch?v=LfvN2-ECkNM
🙏नमस्ते जी🙏
यह कहानी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल जी से जुड़ी है। इसमें बिस्मिल जी के बलिदान, और उनके परिवार की पीड़ा को उजागर किया गया है। विशेष रूप से बिस्मिल की मां के संघर्ष और कष्टों का विवरण दिया गया है, जिन्होंने अपने बेटे के बलिदान और परिवार की दुरावस्था के बावजूद साहस और धैर्य दिखाया।
मां के पास किसी प्रकार की सहायता नहीं थी, और उनके ऊपर समाज ने तमाम आरोप लगाए। बिस्मिल की मां, जो अपने बेटे के बलिदान के बाद अकेली और गरीब हो गईं, मां ने अपनी ज़िंदगी की दुखभरी यादों और संघर्षों को साझा किया। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि स्वतंत्रता संग्राम के नायक केवल अपने लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार और समाज के लिए भी बलिदान देते हैं।
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