अमित आर्यावर्त (भारत योगी)
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वैदिक धर्म का प्रचार ही हमारा मकसद होना चाहिए वैदिक धर्म बचेगा तभी देश बचेगा

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EVM का रोना रोने वालों के लिए चुनाव आयोग की दर्द भरी शायरी।
एक बारी में सबको ढेर कर दिया😄🚩
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योगी जेसा तो ओर कोई हो नही सकता 🚩❤️🚩
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तड़पते चीन को पता होना चाहिए
सामने अब नेहरू नहीं मोदी है,
सेला सुरंग और दिव्यास्त्र का
साफ़ संदेश समझो - “पंगा मत लो”

आज समाचार था कि शनिवार 9 मार्च को हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अरुणाचल प्रदेश के दौरे से जिनपिंग का चीन भड़क रहा है और विरोध जताते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा है कि “जेंगनान (अरुणाचल प्रदेश) चीन का क्षेत्र है, भारत वहां की स्तिथि में बदलाव न करे, इससे सीमा का मसला और ज्यादा जटिल हो जाएगा”

जिनपिंग अपने साथ MOU साइन की हुई कांग्रेस के साथ मिलकर जितना मर्जी षड़यंत्र रच ले लेकिन उसे एक बात समझ लेनी चाहिए कि सामने अब न नेहरू है और न तुमसे खौफ खाने वाली मनमोहन सिंह की सरकार है बल्कि तुमसे आंख में आंख डाल कर बात करने वाला मोदी है - अरुणाचल प्रदेश किसी के बाप की जागीर नहीं है जो हलवा समझ कर खा लोगे -

कांग्रेस समय के रक्षा मंत्री ए के अंटोनी ने संसद में कहा था कि हम चीन की सीमा पर सड़कें जानबूझकर नहीं बनाते क्योंकि उससे डर है कि चीनी सेना उन सड़कों से ही भारत में घुस सकती है, यह बेवजह का खौफ नहीं था बल्कि लगता है CPC - Congress के बीच 2008 में साइन हुए MOU की शर्त रही होगी कि चीन की सीमा पर भारत कोई Infrastructure का निर्माण  नहीं करेगा -

लेकिन पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार ने चीन की सीमा पर सड़कों का जाल बिछा दिया और हर क्षेत्र को भारतीय सेना की पहुंच में खड़ा कर दिया गया, किसी भी क्षेत्र में सेना की रसद भेजी जा सकती है, संवेदनशील क्षेत्रों में जिनमे गलवान भी शामिल है हर तरह सेना को मजबूत किया गया है जिसकी वजह से चीन आज आंख उठाने की हिम्मत नहीं करता -

जिस अरुणाचल प्रदेश को जेंगनान कह कर चीन अपना क्षेत्र बताता है, उसी अरुणाचल में भारत द्वारा चीन की सीमा से लगते हुए इलाके में13000 फ़ीट ऊंचाई पर 825 करोड़ की लागत से बनाई गई “सेला सुरंग” को प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया है जबकि कांग्रेस सरकार एक सड़क भी नहीं बनाती थी -

यह सेला टनल असम के तेजपुर जिले को अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी कामेंग जिले से जोड़ती है जिससे पूरे वर्ष आवागमन जारी रहेगा और सेना की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) तक पहुंच कायम रहेगी - यह चीन के लिए एक बड़ी चेतावनी है और शायद इसलिए कांग्रेस ने इस टनल बनने पर सरकार को बधाई नहीं दी है -

अभी 3 दिन पहले भारत ने चीन की छाती पर टनल बना कर शंखनाद किया था और कल DRDO ने अग्नि - 5 का सफल परीक्षण कर चीन समेत दुनिया के सभी शक्तिशाली देशों को अपनी क्षमताओं का परिचय दे दिया - इस मिसाइल का नाम ही “दिव्यास्त्र” रखा गया है जिसका मतलब समझ आने से ही चीन को चेतावनी मिल जाएगी -

इस मिसाइल के सफल परीक्षण से भारत अब अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और रूस जैसे देशों के बाद छठा देश बन गया जिसके पास एमआईआरवी तकनीक (मल्टीपल इंडेपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) पर आधारित मिसाइल सिस्टम है - इस मिसाइल से दुश्मन के कई ठिकानों को एक साथ निशाना बनाया जा सकता है - यूरोप के कुछ देशों समेत पूरा एशिया अग्नि-5 की जद में होगा यानी पूरा चीन भी - यह मिसाइल बड़ी बड़ी एंटी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम को भी चकमा दे सकती है -

ये मोदी के 10 वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है जो चीन और पाकिस्तान जैसे शत्रु देशों के लिए खतरे की घंटी है
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अब समझ आया इसका ड्रामा , सारे विरोधी बिलबिला रहे हैं तुम सनातनियों को जितनी गाली दोगे हमारी शक्ति उतनी ही बढ़ती जाएगी
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कोई नही रोक सकता भारत को जल्द ही भारत तीसरी अर्थव्यवस्था होगा , आज भारत में पहली बार हमारे तपस्वी वैज्ञानिकों ने तपस्वी कारीगरों ने भारी संख्या में खुद हथियार बनाने शुरू कर दिए हैं नई नई तकनीक भारत बना रहा है दुनिया में भारत की बात को गंभीरता से लिया जाता है, युद्ध काल में भी दुनिया बोलती है की भारत के मोदी शांति करवा सकते हैं,

आजका भारत अपने दुश्मनों को पाकिस्तान कनेडा अमेरिका में ठोक रहा है

अमेरिका ने खूब षड्यंत्र किए भारत कभी आत्मनिर्भर ना बने खासकर हथियारों के क्षेत्र में, 2030 तक भारत जो शक्तिशाली होगा इसके बारे में भारत में बेठे गद्दार ओर बाहर बेठे इनके आका सोच भी नही सकते

चीन ने पिछली सरकारों के साथ मिलकर खूब षड्यंत्र किए की भारत सीमाओं पर निर्माण ना करे

2030 तक भारत अलग ही होगा 🤣 ओर तुम विरोधी जन रोते रहोगे,

देश के अंदर ओर देश के बाहर के सभी सूअर दिन रात मोदी को गालियां देने में हिंदुओ को गालियां देने में अपनी खूब ऊर्जा लगा रहे हैं,

ये समय हिंदुओ का हैं तुम नही रोकपाओगे

🚩हर हर महादेव🚩
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हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे मनोहर लाल ने करनाल में किराए पर लिया घर।

इस घर को अपने चुनाव कार्यालय सह आवास के रूप में उपयोग करेंगे खट्टर।

9.5 साल से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उनके पास अपना कोई आवास या जमीन नहीं है।

उन्होंने अपनी जमीन लाइब्रेरी के लिए दान कर दी थी।
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ओ३म्
*वासन्तीय नवसस्येष्टि पर्व (होली) की हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई।*

वैदिकानि पर्वाणि होली : क्या, क्यों, कैसे
• होली एक वैदिक पर्व है;

वैदिक पर्व किसी व्यक्ति के जन्म,
मरण या स्मरण में नहीं मनाये जाते;
नई फ़सल और नई ऋतु के समय
यज्ञ-समारोह-पूर्वक मनाये जाते हैं।

होली क्या है
• होली फाल्गुन पूर्णिमा पर
की जाने वाली नवसस्येष्टि है;
[नव=नया;सस्यम्=अन्न;इष्टि=यज्ञ]
=नये अन्न से किया जाने वाला यज्ञ।

• इस समय नई फ़सल में गेहूँ, चना,
जौ आदि का आगमन होता है।
तृणाग्निभ्रष्टार्द्धपक्वशमीधान्यं होलक:
[तिनकों की अग्नि में भुने, फली वाले
अधपके अन्न को ‘होलक’ कहते हैं];
इसी से ‘होलिकोत्सव’ शब्द बना है।

• होली का प्रह्लाद की बुआ होलिका से
सम्बन्ध नहीं है; उसकी कथा प्रसिद्ध है
किन्तु वह उत्सव का कारण नहीं है।

होली क्यों
• जन-समूह के सुख एवं उल्लास हेतु
सर्वत्र अनेकानेक पर्व मनाये जाते हैं;
हम नई फ़सल एवम् ऋतु में मनाते हैं।

• साथ-साथ रहते, काम करते हुए
मनो-मालिन्य होना सम्भव है; पर्व पर
उसे चित्त से निकाल देना चाहिए।

होली कैसे मनाएँ
• सब अपने घरों की सफ़ाई करें;
इससे कीटाणु एवं रोग दूर भागेंगे।

• स्थान-स्थान पर बड़े हवन करें;
इससे प्रदूषण हटेगा, पर्यावरण शुद्ध
होगा और आरोग्य की वृद्धि होगी।

• स्वजनों के साथ स्नेह-मिलन करें
और मनो-मालिन्य दूर करें।

• रंग डालना और गुलाल लगाना
आधुनिक युग के चलन हैं;
यह पर्व का मूल स्वरूप नहीं है;
इनको करना अनिवार्य नहीं है;
चाहे कीजिए, चाहे न कीजिए।

• यज्ञ और मेल-मिलाप के लाभ हैं;
निष्क्रियता में उल्लास नहीं होता।

• यद्यपि समय विषयक विचार दो हैं,
तथापि होली-पर्व अवश्य मनाइए;
यह नवसस्येष्टि सबको शुभ हो!
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एक चारा चोर एक शराब चोर?😄😂
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भीख मांगना भी अब हुआ आसान 😄😊 डिजिटल भारत,
वैसे ज्यादातर भिखारी हमारी सोच से भी ज्यादा धन कमाते हैं
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गई भैंस पानी में 😄

केजरीवाल ने जेल से कैसे दिया आदेश, जबकि उनका न किसी से संपर्क है, न ही उनके पास कोई साधन।

ED अब इस मामले की भी जांच करेगी।

आतिशी से ED करेगी पूछताछ, कैसे आतिशी तक पहुंचा केजरीवाल का आदेश।
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भारत ने बनाया रिकॉर्ड, हिल गए चीन, अमेरिका और यूरोप !

पहली बार भारत का रिकॉर्ड 21 हजार करोड़ का रक्षा निर्यात।

रूस, इजरायल समेत 84 देशों को बेचे रक्षा उत्पाद।

सिर्फ एक वित्त वर्ष में 32.5 प्रतिशत का उछाल आया है।

इस सफलता को अंजाम तक पहुंचाने में करीब 50 भारतीय कंपनियों ने अहम योगदान दिया।
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अमित आर्यावर्त (भारत योगी)
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क्या डियो लगाने से लड़की मिलती है ?

क्या एनर्जी ड्रिंक्स पीने से बच्चे मजबूत होते हैं ?

क्या शाहरूख गुटखा खाता है तभी वह हीरो है ?

क्या रिफाइंड तेल खाना हार्ट के लिए अच्छा है ?

क्या आलिया और करीना लक्स से नहा कर चमकने लगती है ?

क्या 'फेयर एन्ड हैंडसम' क्रीम से कोई साँवला व्यक्ति गोरा हो सकता है या सामान्य व्यक्ति हृतिक रोशन जैसा दिख सकता है?

क्या 'मसल ब्लेज' टेबलेट्स खाने से मसल्स बन जाते हैं, मसल्स चमकने लगते हैं?

विज्ञापन सिर्फ बाबा रामदेव और पतंजलि ने ही दिए? और कोई नहीं देता? क्या कारण है कि अब कॉलगेट भी खुद को 'हर्बल' लिखने लगा है? क्या कारण है कि एलोपैथिक कंपनियाँ तुलसी का इस्तेमाल कर रही हैं कफ-सिरप में? अगर योग और आयुर्वेद भ्रामक है तो फिर गारंटी कौन देता है?

कौन सी कंपनी भ्रामक विज्ञापन नहीं देती. एक कंपनी का नाम बताइए जो अपने प्रोडक्ट के बारे में झूठ नहीं बोलती. विज्ञापन का पूरा कोरोबार झूठ और अतिरेक पर टिका है.

बात सिर्फ इतनी है कि एक सनातनी सन्यासी ने बिजनेस कैसे कर लिया. पच नहीं रहा है वामपंथियों को

ये बात केवल विज्ञापन की नही है यदि केवल विज्ञापन की ही होती तो शोशल मीडिया टीवी आदि पर सभी कंपनियों के विज्ञापन बंद हो चुके होते

बात है नेहरू के द्वारा बनाए गए उस कानून की जिसके रहते आप आयुर्वेद का खुल कर प्रचार नही कर सकते

समय समय की बात आयुर्वेद नही झुकेगा तुम वामपंथियों के आगे

बात सिर्फ इतनी है कि एक सनातनी सन्यासी ने बिजनेस कैसे कर लिया. पच नहीं रहा है वामपंथियों को

वामपंथियों तुम्हारी ये खुशी ज्यादा दिन की नही है

जय भारतवर्ष🚩 जय आर्यवर्त🚩 हर हर महादेव🚩
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कांग्रेसी और इसकी सहयोगी पार्टियां, भीम वादी, नास्तिक, मुस्लमान, ईसाई, वामपंथी आदि

ये सभी दिन रात वीर सावरकर जी को गालियां देते हैं

वास्तव में इन्हे वीर सावरकर जी से समस्या नही है इन्हे समस्या है हर उस व्यक्ति से जो हिंदू और हिंदुत्व की बात करेगा या सनातन धर्म की बात करेगा

ज्यादातर व्यक्तियों को नहीं पता होगा की भगत सिंह जी के आदरणीय पुरुष थे वीर सावरकर जी, अब बताओ क्या तुम भगत सिंह से भी बड़े देश भक्त हो? जो वीर सावरकर जी को बिना पढ़े उन्हे गलत बोलते हो

ये पढ़ो https://amitaryavart.com/veer-savarkar-swatantra-veer-savarkar-in-hindi/

जय आर्यावर्त🚩 जय भारतवर्ष🚩
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वीर सावरकर की जीवनी भाग1

नोट :- मित्रो इस लेख के कई भाग आएँगे अभी ये भाग एक है क्योंकि एक ही लेख में विरसावरकर जी का पूरा जीवन देना सम्भव नही है यदि एसा किया तो लेख बहुत ही बडा हो जायेगा मैं जल्दी जल्दी सारे लेख डाल दूंगा । वैसे आपको सारे लेख मेरी वेबसाइट
www.amitaryavart.com पर मिल जाएंगे

जन्म 28 मई 1883 ग्राम भागुर, जिला नासिक बंबई भारत

पिता का नाम दामोदर पन्त सावरकर

भाई बहन गणेश पनत बाला सावरकर , विनायक सावरकर , मैता बाई , नारायणराव सावरकर

शिक्षा कला स्नातक, फर्ग्युसन कॉलिज, पुणे बार एट ला लन्दन

जीवनसाथी यमुनाबाई

बच्चे पुत्री: प्रभात चिपलूणकर

पुत्र: प्रभाकर (अल्पायु में मृत्यु)
एवं विश्वास सावरकर,
राष्ट्रीयता भारतीय
मृत्यु 26 फ़रवरी , 1966 (उम्र 82) बम्बई, भारत

प्रसिद्ध पुस्तक मोपला अर्थात मुझे इससे क्या

महाराष्ट्र में नासिक जिले के भगुर ग्राम में एक चितपावन ब्राह्मण ग्रहस्थ दामोदर पन्त सावरकर रहते थे उनके चार संतान थी प्रथम गणेश पनत वा बाला सावरकर, द्वितीय विनायक सावरकर, तृतीय कन्या मैता बाई और चतुर्थ नारायणराव सावरकर थे।

गणेश पंत वीर सावरकर से 4 वर्ष बड़े और डॉक्टर नारायण उनसे 5 वर्ष छोटे थे। विनायक का जन्म 1883 ईस्वी में हुआ था। यही वह दिव्य बालक था जो आगे चलकर “क्रांतिकारियों का राजकुमार” बना जिसे विदेशी लोगों ने भी हुतात्मा की पदवी दी और जिसे यूरोपीय राजनीतिज्ञों ने मेजनी गेरी वाल्डी क्रोपाट किनू बुलफ्टोंन ओर एमटे कह कर उसकी खूब प्रशंसा की।

और जिसे हिंदुओं ने हिंदू राष्ट्रपति छत्रपति शिवा के रूप में मान्यता दी। आगे चलकर यह तीन भाई सावरकर बंधु नाम से विख्यात हुए। और महाराष्ट्र और इंग्लैंड में क्रांतिकारियों के बड़े नेता श्री विनायक सावरकर के होने के कारण वह काल सावरकर युग ही कहलाया।

सावरकर के पिता दामोदर पंत सावरकर अच्छे विद्वान ही नहीं किंतु साथ ही बहुत अच्छे कवि भी थे। वे अपनी संतान में उच्च भावनाएं भरने के लिए रामायण, महाभारत, की शिक्षाप्रद कथाएं शिवाजी, महाराणा प्रताप, भाऊ बाजीराव प्रथम आदि देशभक्त वीरों के जीवन तथा गीत सुनाया करते थे।

वे अपनी संतान में काव्य रस से प्रेम उत्पन्न करने के लिए महाराष्ट्र के प्रसिद्ध कवि वामन मोरोपंत और संत तुकाराम की कविताएं सुनाया करते थे। इसी कारण विनायक की बुद्धि का विकास बाल्यकाल में ही हो गया था।

वह 8 वर्ष की आयु में ही कविता करने लगे थे जब इनकी आयु 10 वर्ष की थी तभी इनकी बनाई हुई कविताएं मराठी के प्रसिद्ध पत्र जगद्वीतेछु आदि में बड़ी उत्सुकता से छापी जाती थी।

किंतु संपादक महोदय को यह ज्ञात नहीं था कि इन कविताओं का रचयिता 10 12 वर्ष की आयु का बालक है। विनायक को छत्रपति शिवाजी के चरित्र से अत्यंत प्रेम था। यह केसरी आदि पत्रिकाएं महाभारत तथा अन्य मराठा वीरों की विजय यात्राओं को बड़ी श्रद्धा से पढ़ते थे और अपने साथियों को भी पढ़ने की प्रेरणा करते थे।

उनके आमोद प्रमोद ने भी महाराष्ट्र और राजस्थान के वीरों की कथाओं का रूप धारण कर लिया था। वह अल्पायु में ही अपने मित्रों में विद्वान देशभक्त और ओजस्वी वक्ता के रूप में पूज्य भाव में देखे जाते थे। सन 1893 से लेकर 1895 तक सारे भारतवर्ष में धर्मांधता के कारण हिंदू मुस्लिम झगड़े हुए। महाराष्ट्र भी इनसे कैसे बच सकता था।

पुणे आदि नगरों में भी यह अग्नि भड़की । उस समय मुसलमानों के अत्याचार का बदला लेने के लिए इस वीर बालक विनायक ने अपने ग्राम भगुर में अपनी बाल टोली को लेकर ग्राम से बाहर एक मस्जिद पर चढ़ाई कर दी। शत्रु कोई सम्मुख ना आया, थोड़ी सी देर में ही इन 12 मराठा बालकों ने जिनकी आयु 15 वर्ष से अधिक ना थी। मस्जिद के मीनार की भित्तियां तोड़फोड़ कर उसे भूमिसात कर दिया और अपना कार्य करके अपने इस नेता की आज्ञा से बालक चलते बने।

आगे की जानकारी भाग 2 में

🚩जय आर्यावर्त🚩ओ३म्🚩जय भारतवर्ष🚩
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वीर सावरकर की जीवनी भाग2

स्कूल में मुसलमान लड़कों से इनकी टोली का कई बार झगड़ा हुआ टोली वीरता से लड़ती थी और विजय इनके पक्ष की होती थी। एक मुसलमान अरब लड़के ने विनायक के मुख में मछली का मांस डालकर इन्हें बलपूर्वक मुसलमान बनाने की धमकी दी। किंतु वीर विनायक इन थोती धमकियों से कहां डरने वाले थे इन्होंने अपने सैनिकों को सैनिक शिक्षा देने के लिए सैनिक शाला खोली और इनमें भावना भरने लगे। अनुशासन और सैनिक शिक्षणआर्थ परस्पर नकली युद्ध की रचना रच कर अभ्यास कराते थे।

इसी प्रकार उन्हें महाराष्ट्र के ऐतिहासिक दुर्ग में ले जाकर अपने प्राचीन वीर पुरुषों की वीर भावनाएं भरते थे कभी अपने साथियों को सिंह गढ़ के दुर्ग में ले जाकर वहां विजय सेनापति तानाजी मालुसरे की वीरता की कथा सुनाकर ईश्वर से प्रार्थना करते थे कि हम में भी ऐसी शक्ति का संचार हो कि जिससे हम अपनी जाति और देश को स्वतंत्र करने के लिए अपना कर्तव्य पालन करें।

इसी प्रकार वे साथियों को राष्ट्र सेवार्थ तैयार करते थे अपने पिताजी के साथ वे पूजा वंदना में भी पर्याप्त समय देते थे वे घंटों देव पूजा में लगा देते और सदैव देश जाति को दुखों से छुड़ाने की प्रार्थना करते थे। जब यह 10 वर्ष के ही थे इनकी माता का देहांत हो गया फिर पालन पोषण का भार पिताजी पर ही पड़ गया इनके पिताजी ने माता के समान ही अपनी संतान का पालन पोषण किया इनके पिता जी इनकी शिक्षा का भी बड़ा ध्यान रखते थे।

विनायक सावरकर ने राजनीतिक कार्य करते हुए भी अपने अध्ययन की कभी उपेक्षा नहीं की और ना अपने साथियों को करने दी। वे कभी भी किसी परीक्षा में अनुत्तीर्ण नहीं हुए। 1901 में उन्होंने अधिकारी परीक्षा उत्तीर्ण कर पुणे में पहुंच फाग्युर्सन कॉलेज में प्रवेश किया। उससे जाते समय इनके मित्रों और प्रतिष्ठित लोगों ने विनायक को बड़े समारोह से विदा किया।

स्कूल कॉलेज में पढ़ते समय उन्होंने अपना राजनीतिक कार्य भी खूब उत्साह से किया चारों वर्ष कॉलेज में देशभक्ति और राष्ट्रीयता के अपने सिद्धांतों का खूब प्रचार करते रहे पढ़ते समय भी इनकी इतिहास में स्वाभाविक रूचि थी संसार की सभी क्रांतियों का इतिहास इन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन में ही पढ़ लिया था।

इनको पढ़ने में इतनी रुचि थी कि इनके सहपाठी इन्हें “किताबी कीड़ा” कहा करते थे वह और उनके साथी अपने कार्य में तत्पर रहते थे वह सब एक समान वस्त्र धारण करते थे। सरलता का जीवन बिताते कठोर परिश्रम अध्ययनार्थ करते , नियम पूर्वक सब परीक्षाओं में उत्तीर्ण होते थे।

शारीरिक व्यायाम करते थे विद्यार्थी जीवन में इनकी राजनीतिक हलचलें भी इतिहास की अमर कथाएं हैं।

समाचार पत्रों और राजनीतिक ग्रंथों के स्वाध्याय से वीर विनायक अपनी राजनीति के ज्ञान और योग्यता का संपादन अपने स्कूल के अध्ययन के साथ-साथ कर रहे थे उस समय विदेशी वस्त्र बहिष्कार की अनेक कविताएं भी समाचार पत्रों में छपी थी। 1 दिन समाचार पत्रों में उन्होंने पढ़ा कि चाफेकर बंधुओं ने अत्याचारी अंग्रेज रेंड प्लेस कमिश्नर और उसके एक साथी गोरे को गोली से समाप्त कर दिया।

तीनों चाफेकर बंधुओं और उनके साथियों को फांसी का दंड दिया लोकमान्य तिलक को जेल भेज दिया, नातुबनधू, निर्वासित हुए। विनायक के बाल हृदय पर इस घटना का बहुत प्रभाव पड़ा उन्होंने आंसू भरी आंखों से फांसी आदि के दुखद समाचार पढ़ें वीर सावरकर आप ही आप बोलने लगे।

चाफेकर उठती जवानी में चले गए, उन्होंने अपनी मातृ भूमि के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया तो क्या मुझे खा पीकर मौज उड़ाना ही शोभा देता है? उनका कार्य अधूरा पड़ा है, उनकी इच्छाएं अपूर्ण खड़ी है। क्यों ना मैं प्रतिज्ञा करूं कि उनके कार्य को पूरा करने में अपने प्राण तक दे डालूं मैं उसे पूर्ण करूंगा अन्यथा उसके पर्यतन में जीवन दे डालूंगा।”

तत्पश्चात वे दुर्गा के सम्मुख उपस्थित होकर शिवा की भांति अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रार्थना कर शक्ति मांगने लगे और फिर शांत खड़े होकर उन्होंने प्रतिज्ञा की “मैं भारत माता की बेड़ियां तोड़ने के लिए अपना जीवन अर्पण करूंगा, मैं गुप्त संस्थाएं खोलूंगा, शस्त्र बनाऊंगा और समय आने पर हाथ में शस्त्र लेकर स्वतंत्रता के लिए लड़ता लड़ता मरूंगा”।

http://www.amitaryavart.com

आगे की जानकारी भाग 3 में

🚩जय आर्यावर्त🚩ओ३म्🚩जय भारतवर्ष🚩🚩जय वीर सावरकर🚩 🚩जय हो नाथूराम गोडसे की🚩
❤19🔥4👍3🥰1
🕉️🙏ओ३म् सादर नमस्ते जी 🙏🕉️
🌷🍃 आपका दिन शुभ हो 🍃🌷

दिनांक - - ०९ अप्रैल २०२४ ईस्वी
दिन - - मंगलवार

🌒 तिथि - प्रतिपदा ( २०:३० तक तत्पश्चात द्वितीया ) वैदिक नव संवत्सर आरम्भ

🪐 नक्षत्र - - रेवती ( ७:३२ तक तत्पश्चात अश्वनी [ २९:०६ से भरणी ]

पक्ष - - शुक्ल
मास - - चैत्र
ऋतु - - बसंत
सूर्य - - उत्तरायण

🌞 सूर्योदय - - प्रातः ६:०२ पर दिल्ली में
🌞 सूर्यास्त - - सायं १८:४४ पर
🌒 चन्द्रोदय -- ६:१४ पर
🌒 चन्द्रास्त - - १९:२४ पर

सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२५
कलयुगाब्द - - ५१२४
विक्रम संवत् - - २०८१
शक संवत् - - १९४६
दयानंदाब्द - - २००

🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁

🚩‼️ओ३म् ‼️🚩

🚩🇮🇳🚩आप सब को परिवार व इष्ट मित्रों सहित वैदिक नव सृष्टि संवत्सर - १,९६,०८,५३,१२५
कलयुगाब्द - ५१२५
शक संवत् १९४६
विक्रम संवत २०८१,चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की हार्दि बधाई व शुभकामनाएं!!!
==============

🚩🇮🇳हमारा भारतीय वैदिक नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
१,९६,०८,५३,१२५ सृष्टि संवत, २०८१ विक्रमी संवत
तदनुसार ०९ अप्रैल २०२४ को आरम्भ:-

१:- सृष्टि का प्रथम दिन
२:- मानव का जन्मोत्सव
३:- मर्यादा पुरुषोत्तम रामचंद्र जी का राज्याभिषेक
४:- सम्राट युधिष्ठिर जी का राज्याभिषेक
५:- युधिष्ठिर संवत का प्रारंभ
६:- सम्राट विक्रमादित्य जी द्वारा दुष्टों का दमन, शक, हूणौ का समूल नाश कर विक्रमी संवत का प्रारंभ

७:- आर्य समाज का स्थापना दिवस
तो आइए हम सभी मिलकर इस वैदिक नव संवत्सर को मनाएं।
सभी अपने इष्टमित्र एवं परिवारजनों को शुभकामनाएं प्रेषित करें एवं सभी अपने घरों में वैदिक यज्ञ और शुद्ध गोघृत से दीप प्रज्ज्वलित कर सकल विश्व के कल्याण की कामना करें
इस पावन पर्व के महत्व के विषय में तुलनात्मक रूप से बताएं

🚩आपको आपके समस्त परिवार को और आपके ईष्ट मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं। नव वर्ष आप सभी के परिवार के लिए मंगलमय हो। आप सभी को परमात्मा दीर्घायु,अच्छा स्वास्थ्य,धन ऐश्वर्य प्रदान करें। आप हर क्षेत्र में उन्नति करें।

🚩आज ही के दिन युग प्रवर्तक महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन दिवस पर सन १८७५ को आर्य समाज की स्थापना करते हुए संपूर्ण विश्व में व्याप्त अज्ञान अंधकार मिथ्या अंधविश्वास व पाखंड को समाप्त करने का पावन संकल्प लिया था आर्य समाज की स्थापना हो जाने पर यूरोप के समाचार पत्रों में छपा था हमें एक अग्नि प्रज्वलित होती हुई दिखाई दे रही है उस अग्नि को शांत करने के लिए बहुत से व्यक्ति अपने अपने हाथों में पानी का कलश लेकर दौड़ रहे हैं किंतु आग बुझाने का जितना प्रयत्न किया जा रहा है यह अग्नि उतनी ही प्रबल होती जा रही है और ऐसा प्रतीत होता है कि संसार का संपूर्ण पाखंड अज्ञान अंधविश्वास इस पवित्र अग्नि में जलकर भस्म हो जाएगा यह अग्नि प्रज्वलित हुई है महर्षि दयानंद सरस्वती के ह्रदय में आज के दिन महर्षि की उद्घोषणा को हम स्मरण करें मैं कोई नया संप्रदाय चलाने नहीं आया अपितु ब्रह्मा से लेकर जैमिनी मुनि पर्यंत ऋषियों ने जो कहा था वही बताने आया हूं।

🚩हम सभी को आज के पावन पर्व पर महर्षि दयानंद सरस्वती जी के बताए मार्ग चलने की प्रतिज्ञा करनी होगी।

🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀

🕉️🚩 राष्ट्रीय प्रार्थना 🕉️🚩
================

🌷ओ३म् आ ब्रह्मन् ब्राह्मणों ब्रह्मवर्चसी जायतामाराष्ट्रे राजन्यः शूरऽइषव्योऽतिव्याधी महारथो जायतां दोग्ध्री धेनुर्वोढ़ाऽनड्वानाशुः सप्तिः पुरन्धिर्योषा जिष्णू रथेष्ठाः सभेयो युवास्य यजमानस्य वीरो जायतां निकामे-निकामे नः पर्जन्यो वर्षतु फलवत्यो नऽओषधयः पच्यन्तां योगक्षेमो नः कल्पताम् ॥ -- यजुर्वेद २२, मन्त्र २२

💐अर्थ-
--------
ब्रह्मन् ! स्वराष्ट्र में हों, द्विज ब्रह्म तेजधारी ।
क्षत्रिय महारथी हों, अरिदल विनाशकारी ॥
होवें दुधारू गौएँ, पशु अश्व आशुवाही ।
आधार राष्ट्र की हों, नारी सुभग सदा ही ॥
बलवान सभ्य योद्धा, यजमान पुत्र होवें ।
इच्छानुसार वर्षें, पर्जन्य ताप धोवें ॥
फल-फूल से लदी हों, औषध अमोघ सारी ।
हों योग-क्षेमकारी, स्वाधीनता हमारी ॥

🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀

🔥विश्व के एकमात्र वैदिक पञ्चाङ्ग के अनुसार👇
===============

🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ 🕉🚩🙏

(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त) 🔮🚨💧🚨 🔮

ओ३म् तत्सत् श्रीब्रह्मणो द्वितीये प्रहरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- पञ्चर्विंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२५ ) सृष्ट्यब्दे】【 एकाशीत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०८१) वैक्रमाब्दे 】 【 द्विशतीतमे ( २००) दयानन्दाब्दे, पिंगल-संवत्सरे, रवि- उत्तरायणे , बंसत -ऋतौ, चैत्र - मासे, शुक्ल पक्षे , प्रतिपदायां
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तिथौ, रेवति/ अश्विनी
नक्षत्रे, मंगलवासरे
तद्नुसार ०९ अप्रैल , २०२४ ईस्वी , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे, आर्यावर्तान्तर गते, भारतवर्षे भरतखंडे...प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ, आत्मकल्याणार्थ,रोग,शोक,निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे

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सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद को धमकी दी है कि "We will rip you apart" अर्थात "हम तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर देंगे"।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की याचिका और जजों की उग्र टिप्पणी के पीछे के कारणों को समझें। देखें यह वीडियोः

https://youtu.be/XgYsC4KhIJ8?si=ZFccrYpMdFCqjDSM
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वीर सावरकर की जीवनी भाग2

स्कूल में मुसलमान लड़कों से इनकी टोली का कई बार झगड़ा हुआ टोली वीरता से लड़ती थी और विजय इनके पक्ष की होती थी। एक मुसलमान अरब लड़के ने विनायक के मुख में मछली का मांस डालकर इन्हें बलपूर्वक मुसलमान बनाने की धमकी दी। किंतु वीर विनायक इन थोती धमकियों से कहां डरने वाले थे इन्होंने अपने सैनिकों को सैनिक शिक्षा देने के लिए सैनिक शाला खोली और इनमें भावना भरने लगे। अनुशासन और सैनिक शिक्षणआर्थ परस्पर नकली युद्ध की रचना रच कर अभ्यास कराते थे।

इसी प्रकार उन्हें महाराष्ट्र के ऐतिहासिक दुर्ग में ले जाकर अपने प्राचीन वीर पुरुषों की वीर भावनाएं भरते थे कभी अपने साथियों को सिंह गढ़ के दुर्ग में ले जाकर वहां विजय सेनापति तानाजी मालुसरे की वीरता की कथा सुनाकर ईश्वर से प्रार्थना करते थे कि हम में भी ऐसी शक्ति का संचार हो कि जिससे हम अपनी जाति और देश को स्वतंत्र करने के लिए अपना कर्तव्य पालन करें।

इसी प्रकार वे साथियों को राष्ट्र सेवार्थ तैयार करते थे अपने पिताजी के साथ वे पूजा वंदना में भी पर्याप्त समय देते थे वे घंटों देव पूजा में लगा देते और सदैव देश जाति को दुखों से छुड़ाने की प्रार्थना करते थे। जब यह 10 वर्ष के ही थे इनकी माता का देहांत हो गया फिर पालन पोषण का भार पिताजी पर ही पड़ गया इनके पिताजी ने माता के समान ही अपनी संतान का पालन पोषण किया इनके पिता जी इनकी शिक्षा का भी बड़ा ध्यान रखते थे।

विनायक सावरकर ने राजनीतिक कार्य करते हुए भी अपने अध्ययन की कभी उपेक्षा नहीं की और ना अपने साथियों को करने दी। वे कभी भी किसी परीक्षा में अनुत्तीर्ण नहीं हुए। 1901 में उन्होंने अधिकारी परीक्षा उत्तीर्ण कर पुणे में पहुंच फाग्युर्सन कॉलेज में प्रवेश किया। उससे जाते समय इनके मित्रों और प्रतिष्ठित लोगों ने विनायक को बड़े समारोह से विदा किया।

स्कूल कॉलेज में पढ़ते समय उन्होंने अपना राजनीतिक कार्य भी खूब उत्साह से किया चारों वर्ष कॉलेज में देशभक्ति और राष्ट्रीयता के अपने सिद्धांतों का खूब प्रचार करते रहे पढ़ते समय भी इनकी इतिहास में स्वाभाविक रूचि थी संसार की सभी क्रांतियों का इतिहास इन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन में ही पढ़ लिया था।

इनको पढ़ने में इतनी रुचि थी कि इनके सहपाठी इन्हें “किताबी कीड़ा” कहा करते थे वह और उनके साथी अपने कार्य में तत्पर रहते थे वह सब एक समान वस्त्र धारण करते थे। सरलता का जीवन बिताते कठोर परिश्रम अध्ययनार्थ करते , नियम पूर्वक सब परीक्षाओं में उत्तीर्ण होते थे।

शारीरिक व्यायाम करते थे विद्यार्थी जीवन में इनकी राजनीतिक हलचलें भी इतिहास की अमर कथाएं हैं।

समाचार पत्रों और राजनीतिक ग्रंथों के स्वाध्याय से वीर विनायक अपनी राजनीति के ज्ञान और योग्यता का संपादन अपने स्कूल के अध्ययन के साथ-साथ कर रहे थे उस समय विदेशी वस्त्र बहिष्कार की अनेक कविताएं भी समाचार पत्रों में छपी थी। 1 दिन समाचार पत्रों में उन्होंने पढ़ा कि चाफेकर बंधुओं ने अत्याचारी अंग्रेज रेंड प्लेस कमिश्नर और उसके एक साथी गोरे को गोली से समाप्त कर दिया।

तीनों चाफेकर बंधुओं और उनके साथियों को फांसी का दंड दिया लोकमान्य तिलक को जेल भेज दिया, नातुबनधू, निर्वासित हुए। विनायक के बाल हृदय पर इस घटना का बहुत प्रभाव पड़ा उन्होंने आंसू भरी आंखों से फांसी आदि के दुखद समाचार पढ़ें वीर सावरकर आप ही आप बोलने लगे।

चाफेकर उठती जवानी में चले गए, उन्होंने अपनी मातृ भूमि के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया तो क्या मुझे खा पीकर मौज उड़ाना ही शोभा देता है? उनका कार्य अधूरा पड़ा है, उनकी इच्छाएं अपूर्ण खड़ी है। क्यों ना मैं प्रतिज्ञा करूं कि उनके कार्य को पूरा करने में अपने प्राण तक दे डालूं मैं उसे पूर्ण करूंगा अन्यथा उसके पर्यतन में जीवन दे डालूंगा।”

तत्पश्चात वे दुर्गा के सम्मुख उपस्थित होकर शिवा की भांति अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रार्थना कर शक्ति मांगने लगे और फिर शांत खड़े होकर उन्होंने प्रतिज्ञा की “मैं भारत माता की बेड़ियां तोड़ने के लिए अपना जीवन अर्पण करूंगा, मैं गुप्त संस्थाएं खोलूंगा, शस्त्र बनाऊंगा और समय आने पर हाथ में शस्त्र लेकर स्वतंत्रता के लिए लड़ता लड़ता मरूंगा”।

आगे की जानकारी भाग 3 में

🚩जय आर्यावर्त🚩ओ३म्🚩जय भारतवर्ष🚩🚩जय वीर सावरकर🚩 🚩जय हो नाथूराम गोडसे की🚩
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