अमित आर्यावर्त (भारत योगी)
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वैदिक धर्म का प्रचार ही हमारा मकसद होना चाहिए वैदिक धर्म बचेगा तभी देश बचेगा

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ईसाई बन चुके पंडित को हुआ पश्चाताप

पंडित लोग १० बजे के लगभग आये। वह स्वामी जी के भोजन करने का समय था। पंडितों को आसन देकर बिठाया गया। स्वामी जी ने भोजन करके कुछ समय विश्राम किया, फिर दिन के एक बजे से बातचीत आरम्भ हुई।

वे पंडित न्यायशास्त्र में बोलते थे और स्वामी जी उनका उत्तर देते थे। पांच बजे तक उनसे बातचीत होती रही। फिर पंडित लोग चले गये और कह गये कि हम प्रातः राजा साहब को भी आपके दर्शनार्थ लावेंगे।

पंडितों ने यहां से राजा साहब के पास लौटकर स्वामी जी की बहुत स्तुति की और उन्होंने दृढ़ निश्चय किया कि ४ बजे सायंकाल को हम अवश्य चलेंगे। उस दिन प्रातःकाल ही से ३०-४० यूरोपियन तथा स्वदेशी पादरी लोग आ गये और कुछ मुसलमान मौलवी भी।

स्वामी जी उनसे भी संस्कृत में बोलते रहे। वह भी यथाशक्ति समझते रहे। स्वामी जी का उपदेश सुनकर एक बंगाली ब्राह्मण जो ईसाई हो गया था, बहुत रोने लगा और दुःख प्रकट किया कि यदि आप जैसे पंडित लोग हमको पहले मिलते तो हम ईसाई न होते; क्योंकि जब हम स्कूल से पढ़कर और वहां के पादरियों के आक्षेप सुनकर घर जाकर पंडितों से पूछते तो कोई भी इन प्रश्नों के सन्तोषजनक उत्तर न देता था। यदि हमको उत्तर मिलता तो हम ईसाई न होते ।

ये घटना भागलपुर की है, स्त्रोत– पंडित लेखराम कृत महर्षि दयानन्द सरस्वती का जीवन चरित्र
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ये भगवा रंग तो अत्यंत प्रिय है हम सभी सनातन धर्मियों को, आने वाले ओर 50 सालों तक सनातनी बीजेपी को जिताता रहे तो भारत अत्यंत शक्तिशाली बन जाएगा, ओर सभी सनातनियों को रोज सुबह प्राणायाम ध्यान व्यायाम जरूर करना चाहिए समय पर ये शरीर और बुद्धि ही काम आएगी

🚩जय श्री राम🚩
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सुख दुख का कारण क्या?

मनुष्य के सुख-दुःख का कारण उसका प्रारब्ध कर्म है, ईश्वर नहीं; वेद स्वतः प्रमाण हैं-स्वामी जी कहते थे कि किसी के अच्छा बुरा होने पर लोग ईश्वर को दोष देते हैं, यह लोगों की भूल है, उनका ऐसा कहना ठीक नहीं । सुख दुख तो सब मनुष्यों के प्रारब्ध कर्म का फल है।' बातचीत के समय किसी व्यक्ति ने प्रश्न किया स्वामी जी ने श्रुति का प्रमाण दिया। उसने फिर प्रश्न किया श्रुति (के सत्यत्व) का क्या प्रमाण है? तो स्वामी जी ने कहा कि वह स्वतः प्रमाण है, जैसे सूर्य के प्रकाश के लिए दीपक की आवश्यकता नहीं, ऐसे ही स्वतः प्रमाण वेद के लिए और प्रमाण नहीं हो सकता।

यहां का कोई पण्डित उनका सामना करने का साहस न कर सका और न किसी का मुख उनके विरोध में खुला। बनारसी लोग बहुत सी झूठी बातें उड़ाते रहे कि यह कोई जर्मन ईसाई है परन्तु ये सब आरोप व्यर्थ थे। हम प्रायः जाया करते थे, परंतु जब जाते उनको अकेला न पाते थे, लोगों का जमघट लगा रहता था। करते थे।

स्त्रोत– पंडित लेखराम कृत महर्षि दयानन्द सरस्वती का जीवन चरित्र पेज नंबर 226
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राहुल गांधी हिंदुओ के पीछे क्यों पड़ा है, हिंदुओ की जाती जनगणना करवाने के पीछे इसका असली लक्ष्य केवल हिंदुओ का विनाश है, बिहार ओर तेलंगाना जैसे राज्यों में जाती जनगणना हो चुकी है

जातियां तो मुस्लिमों में भी है फ़िरकों के रूप में ओर ये तो एक दूसरे फिरके के खून के प्यासे भी हैं, पाकिस्तान में देख लो एक मुस्लिम फिरका दूसरे फिरके की हत्याएं करता है

देखिए मुस्लिमों में कितनी सारी जातियां (फिरके) हैं,
सुन्नी, शिया, सूफ़ी, अहमदिया, इस्ना अशरी, ज़ैदिया, इस्माइली, दाऊदी बोहरा, खोजा, नुसैरी.कादियानी, खारजी, कुर्द, बहाई, द्रुज, जाफ़री, इशना, अशरी, अहले हदीस, सलफ़ी. आदि आदि अनेकों अनेक, ओर सभी एक दूसरे से अत्यधिक नफरत करते हैं

राहुल गांधी मुस्लिमों की जनगणना पर कभी विचार नहीं करेगा क्योंकि लक्ष्य तो हिंदुओ के पतन का है

क्योंकि कांग्रेस की स्थापना ही अंग्रेजो ने ए ओ ह्यूम
से इसलिए करवाई ताकि भारतीयों को स्वतंत्रता के नाम पर भ्रमित किया जा सके, ये तो शुरू में कांग्रेस में आर्यसमाजी नेता जुड़ गए इसी कारण शुरू में अंग्रेज भारतीयों को मूर्ख ना बना सके फिर आर्यसमाजियों ने धीरे धीरे कांग्रेस छोड़ दी क्योंकि यहां गांधी जैसे अपनी मनमानी करवाते थे,

योगी जी का वो नारा हमेशा याद रखने योग्य है बटोगे तो कटोगे

एक रहो मजबूत रहो सनातनियों वरना भारत को ये लोग इस्लामिक देश बना डालेंगे,

ओर सभी सनातनियों को रोज प्राणायाम ध्यान बल बढ़ाने वाले धीमे राममूर्ति व्यायाम जरूर करने चाहिए यही शरीर बल बुद्धि अंत में काम आएंगे

🚩हर हर महादेव🚩
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नमस्ते मित्रो जय श्री राम जय आर्यावर्त , आर्यावर्त की भूमि पर अनेकों देवियां हुई है जैसे माता सीता, माता द्रोपदी, माता रुक्मणि आदि आदि आइए आज आपको एक ओर देवी के बारे में बताता हूं जो सिद्धार्थ गौतम की पत्नी यशोधरा थी।

सिद्धार्थ गौतम की पत्नी यशोधरा के गुण एसे गुण एक भारतीय नारी में ही देखने को मिलते हैं पुरे संसार में और कहीं नहीं

यशोधरा के गुण भगवान से अज्ञात नहीं थे। अतः वे स्वयं उसके निवास स्थान पर गये। महाराज सुद्धोदन भी उनका भिक्षापात्र लिए साथ गये। सारिपुत्त और मोग्गल्लान भी साथ गये। भगवान ने अपने दोनों प्रमुख शिष्यों से कहा कि यशोधरा चाहे जिस प्रकार उनका वंदन करे, उसे मत रोकना ।

कोई नारी एक गृहत्यागी श्रमण के शरीर का स्पर्श नहीं कर सकती। पांव का भी नहीं। यह तो साधारण श्रमण ही नहीं, अरहंत हैं, सम्यक-संबुद्ध हैं। कोई नारी, भले उनकी पूर्वपत्नी ही क्यों न हो, उनके शरीर का स्पर्श कैसे कर सकती है? परंतु महाकारुणिक भगवान के मानस में असीम मैत्री का उत्स (स्रोत) फूट पड़ा। देवी यशोधरा आयी और उन्होंने भगवान के सम्मुख बैठ कर उनके पांव पकड़ कर मनचाही वंदना की किसी ने कोई रुकावट उत्पन्न नहीं की।

इस पर महाराज सुद्धोदन ने देवी यशोधरा के गुणों का संक्षेप में वर्णन

जब आपने घर-गृहस्थी त्याग और लौटने की कोई संभावना नहीं रही, तब राजवंश के अनेक राजकुमारों ने इस परित्यक्ता युवती के साथ संबंध जोड़ना चाहा। परंतु मेरी बेटी ने उनकी ओर नजर उठा कर भी नहीं देखा।

मेरी बेटी ने जब सुना कि आपने श्रमण वेश धारण करते हुये मुंडन कर लिया, तब से इसने भी अपने सिर का मुंडन करवा लिया।
जब से सुना कि आपने सभी गेरुए वस्त्र धारण कर लिए हैं, तब से इसने भी मुलायम राजसी वस्त्रालंकार त्याग कर, रूखे गेरुए वस्त्र धारण कर लिए।

जब से सुना कि आप एक वक्त ही भोजन ग्रहण करते हैं, तब से यह भी एकाहारी हो गयी।

जब से सुना कि आपने ऊंचे आरामदेह पलंग पर लेटना त्याग दिया है, तब से यह भी नीचे मंच पर सोने लगी।

जब से सुना कि आपने माला, गंध, विलेपन धारण करना त्याग दिया है, तब से इसने भी उन्हें छुआ तक नहीं।

जब से सुना कि आपने नृत्य, गीत, वादन आदि आमोद-प्रमोद त्याग दिये हैं, तब से इसने भी इनसे मुख मोड़ लिया।

पुस्तक :- राहुल की माता यशोधरा


आज की महिला को विशेष रूप से प्राचीन भारतवर्ष की श्रेष्ठ महिलाओं से कुछ सीखना चाहिए, आज भारत में स्त्री जाती ने अपनी मर्यादाएं भंग की हुई हैं , ना जाने कितने ही कमजोर आत्मबल के पुरुष इन महिलाओं के अत्याचार से दुखी होकर आत्महत्या कर चुके हैं , ना जाने कितने ही परिवार कानूनी रूप से प्रताड़ित हो चुके हैं,

हमारे इतिहास में महिलाओं को सबसे ऊंचा स्थान प्राप्त था सभी महापुरुष माता के नाम से ही जाने जाते हैं किंतु आज सारी मर्यादाएं भंग हो चुकी है जिसका परिणाम भारतीय परिवारों का विनाश विनाश हो रहा है
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यूट्यूबर प्रशांत ने युटुब पर एड चला चला कर अपना काफी बड़ा गिरोह त्यार कर लिया है , लोग कुछ बोल दें इस यूट्यूबर के बारे में तो गैंग के सदस्यों की कमेंट में बाढ आजाती है,

सुना है कुंभ में इसकी गैंग को वहां के साधुओं ने खूब कूटा है,

धंधा है पद प्रतिष्ठा का सब चलवाता है
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ऋषि दयानंद के विचारों की हत्या हमने ही की है वेदों की आज्ञा का पालन हमने नहीं किया आज यही श्रेष्ठ आर्यों की संतानों के दुख का कारण है

भगदड में कितने ही लोग मर जाएं किंतु लोगों की फिर भी बुद्धि नहीं जागेगी, कुंभ में भगदड़ में मरे अब दिल्ली रेलवेस्टेशन पर मरे कीड़े मकोड़ों की तरह मर रहे श्रेष्ठ आर्यों के वंशज, केवल किसलिए जल में डुबकी लगाने के लिए

ये लोग खुद तो मरते ही हैं साथ में अपने मासूम बच्चों को भी मरवा देते हैं,

भीड़ में ओर अंजान पानी में नहीं उतरना चाहिए भीड़ जहां दिखे इसका ये अर्थ नहीं कि धर्म भी वही हैं

जो समाज के शिक्षक बने बैठे हैं यानी खुद को ब्राह्मण और आचार्य बोलते हैं जो ये बोलते हैं कि उन्होंने धर्म ग्रंथ पढ़े हैं जैसे ये शंकराचार्य कथावाचक आदि ये सभी इन भोले लोगों की मृत्यु के दोषी हैं, इन्हें दंड ईश्वर ही देगा आप ओर हम या वर्तमान की न्यायव्यवस्था इन्हें दंड नहीं सकती, क्योंकि ये लोग सत्य बोलेंगे तो इनकी धन आमदनी के साधन बंद हो जाएंगे इसीलिए सत्य जानते हुए भी नहीं बोलते भोले भले लोगों को पागल बनाए रहते हैं

आज भारत को फिर से ऋषि दयानंद जैसे अखंड ब्रह्मचारी वेदों के विद्वान महापुरुष की जरूरत है

मैं कई बार सोचता हूं की बाबा रामदेव यदि 100% ऋषि दयानंद जी के बताए मार्ग पर ही चलते तो ये बहुत बड़ा कार्य कर सकते थे, वास्तव में ऋषि दयानंद के विचारों की हत्या प्रसिद्ध आर्यसमाजी ही कर रहे हैं, जिसे ज्ञान है और वो कुछ करता नहीं वही सबसे बड़ा दोषी है,

ईश्वर के द्वारा हिसाब हम सभी का होना है बचेगा कोई नहीं

अमित आर्य
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भगवान बुद्ध और भीमावदी

भीमवादियों के लिए भगवान बुद्ध ने पहले ही बता दिया था आप गुण मिलाकर देख लो

भगवान बुद्ध के समय जो लोग भिक्षुक बनते थे इनमें 2 प्रकार के व्येक्ति थे एक तो वो जो वैराग्य की भावना से मोक्ष निर्वाण की खोज में भिक्षु बनते ओर दूसरे वो जो घर से फालतू थे इन्हे वैराग्य मोक्ष से कोई लेना देना नही था इन्हे तो सम्मान चाहिए था


ये जो दूसरे किस्म के लोग थे इन्हे भगवान बुद्ध अच्छे से जानते थे और इनकी पहचान करने और इन्हे संघ से बाहर निकालने के लिए भगवान बुद्ध ने कुछ नियम बनाए थे इन नियमो को पढ़ कर कोई भी इन धूर्तों को आसानी से पहचान सकता था


देखिये भगवान बुद्ध सुत्निपात के धम्मचरित सूत में क्या बता रहे हैं 


 इस सूत्र में भिक्षुओं के लिए उपदेश हैं। इसमें यह आदेश है कि बुरे भिक्षुओं को संघ से निकाल कर अच्छे भिक्षुओं को निर्वाण के लिए प्रयत्न करना चाहिए । 


धार्मिक तथा श्रेष्ठ आचरण ही उत्तम है। जो घर से बेघर हो प्रव्रजित हो कर भी मुँहफट (भीमवादी नवबोधो में ये गुण खूब भरा हुआ है)  ओर, पशु की तरह, दूसरों को सतानेवाला है उसका जीवन पापी है। वह अपने मल को बढाता है ॥ १-२॥ है



जो भिक्षु झगडालु हे और मोह से भरा है, वह बुद्ध के बताये धर्म को समझाने पर भी नहीं समझता  ३ 


जो अविद्या के वशीभूत हो सन्तो को सताता है, वह नहीं जानता कि यह पाप नरक को ले जानेवाला मार्ग है ॥ ४ ॥ (भीमवादी आज यही कार्य तो खूब करते हैं)


ऐसा भिक्षु मृत्यु के बाद नरक में पड़ता है और वह एक जन्म से दूसरे जन्म को और अन्धकार से अन्धकार को प्राप्त हो परलोक में दुःख भोगता है ॥ ५ ॥ ऐसे पापी मनुष्य को शुद्ध करना वैसा ही कठिन है जैसा कि भरे हुए कई वर्ष पुराने गूथ कूप ( = संडास ) को ॥ ६ ॥


भिक्षुओ ! पापी इच्छा, पापी विचार, पापी आचार और पापी सगतिवाले किसी को जानो तो सब मिल कर उसे निकाल दो, कचरे की तरह उसे दो, कूडे की तरह उसे हटा दो ॥ ७-८ ॥ दूर कर


पापी इच्छा, पापी आचार और पापी सगतिवाले को निकालने के बाद उन तुच्छो को बाहर कर दो जो अभ्रमण हो श्रमण वेष धारण करते हैं ॥ ९ ॥ जागरूक हो शुद्ध पुरुष शुद्ध पुरुषों की संगति करें। इस प्रकार बुद्धिमान् -मेल से हट कर दु ख का अन्त कर सकेंगे ॥ १० ॥ (आज भीमवादी भिक्षु का वेश बनाते हैं ओर हिंदुओ को कोसने में ही लगे रहते हैं)


नोट: जब कोई भीमवादी भिक्षु बनता है तो वो नफरत को मन में रखकरके भिक्षु बनता है उसे निर्वाण वैराग्य से कोई लेना देना नही आप इन नवबोध भिक्षुओं के भाषणों में ये दूसरे दर्जे के भिक्षुक के रूप देख सकते हैं परंतु दुख है की आज दुनिया का कोई भी बुद्ध को मानने वाला इस गंदगी को साफ करने के लिए इस विषय में नही बोलता जानते हो क्यों क्युकी उन्हे भारत में बुद्ध के श्रेष्ठ विचार नही बल्कि भीम वादियों की घृणित मानसिकता के सहारे भारत में बौद्ध संप्रदाय को फैलाने की असीम संभावना दिखती है 


क्या होगा इन संप्रदायों से एक और नया विवाद द्वेष ही उत्पन होगा 


जानते हो भगवान बुद्ध ने कोई संप्रदाय नहीं चलाया बुद्ध ने तो शुद्ध धर्म की बात कही यानी की अहिंसा ,करुणा, राग द्वेष से दूर, चोरी ना करना, इंद्रियों का स्वामी बनना, जब भगवान बुद्ध जीवित थे तो उनके साथ लाखो व्यक्ति जुड़े थे बुद्ध ने उस समय के जन्मजात पंडो के पाखंड का विरोध किया जीव हत्या का विरोध कीया ओर आप आज देखलो बुद्ध को मानने वाले कई देशों के लोग खूब मासाहारी हैं  इसिको तो अधर्म पाप संप्रदाय बोलते हैं

भगवान बुद्ध वेद का सम्मान करते थे हवन यज्ञ गायत्री की प्रशंसा करते थे, ओर आजके भीमवादी केवल द्वेष इसीलिए बुद्ध के कहे अनुसार भीमवादी घोर नरक में जाएंगे


नमस्ते जी 🙏 ईश्वर हम सबको सद्बुद्धि दे और दुनिया के सभी संप्रदाय समाप्त हो जाए और केवल शुद्ध धर्म ही बचे तो यह धरती सच में स्वर्ग हो जाएगी
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भाई आपका तो पता नहीं किंतु मेरा तो जीवन नास्तिकता या फिर अंधविश्वास में ही जाता यदि ऋषि दयानंद जैसा योगी जन्म नहीं लेता , मानो जीवन ही नरक होता, जातिवाद को देखकर मेरा तो मन खट्टा होने लगा था, ऋषि दयानंद ने ही सही प्रकार समझाया सनातन वैदिक धर्म क्या है वेद कितने महत्वपूर्ण हैं

ईश्वर का बार बार धन्यवाद की इस काल में कुछ ही समय पहले ऐसा योगी हमारे लिए भेजा 🙏ओ३म्🙏
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यदि आपको भी वीर रस पूर्ण इतिहास की कहानियां देखना पसंद है तो आप इस चेनल को सब्सक्राइब जरूर करें और दूसरों के साथ साझा भी करें, बहुत मेहनत से वीडियो बना रहा हूं आपको साथ देना होगा मित्रो , इस चेनल को आप सभी सबस्क्राइब जरूर करें
https://www.youtube.com/@AryaPutrToons
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अमित आर्यावर्त (भारत योगी) pinned «यदि आपको भी वीर रस पूर्ण इतिहास की कहानियां देखना पसंद है तो आप इस चेनल को सब्सक्राइब जरूर करें और दूसरों के साथ साझा भी करें, बहुत मेहनत से वीडियो बना रहा हूं आपको साथ देना होगा मित्रो , इस चेनल को आप सभी सबस्क्राइब जरूर करें https://www.youtube.com/@AryaPutrToons»
मुझे ये देख कर हैरानी हुई कि मेरे साथ अधिकतर नास्तिक या विधर्मी ही जुड़े हुए हैं, मुझे लगता था कि मेरे साथ अधिकतर व्यक्ति मेरी समान विचार धारा के जुड़े होंगे , जिन्हें अपने प्राचीन इतिहास से प्रेम होगा और उन्हें वीरों योगियों की ऐतिहासिक घटनाएं जानने में रुचि होगी,

मैने कल आप सभी के साथ इस विषय के अपने एक युटुब चैनल का लिंक साझा किया था और बोला था कि सबस्क्राइब करो , टेलीग्राम पर मेरे साथ 2 ग्रुप में 7000 लोग जुड़े हुए हैं ओर व्हाट्स एप चेनल पर 1000 , किंतु कल सबस्क्राइब कितने व्यक्तियों ने किया केवल 50 से 60 व्यक्तियों ने 😄 भाई अब ये समझ नहीं आ रहा की मुझसे वो कौनसी गलती हुई कि मैं अपने साथ अपनी समान विचार धारा के कुछ 1000 व्यक्तियों को ही नहीं जोड़ पाया,

ये जो प्राचीन ऐतिहासिक घटनाएं होती हैं ना दोस्तो ये हमारे जीवन को श्रेष्ठ बनाने में बड़ा ही महत्वपूर्ण योगदान देती हैं

खैर मुझे जानने वालो में से अधिकतर व्यक्ति भले ही ना जुड़े किंतु वहां कहानियां तो आती ही रहेंगी क्योंकि मुझे बहुत ही आनंद आता है अपने प्राचीन आर्य श्रेष्ठ वीर वीरांगनाओं के जीवन को पढ़ने में

ओर एनीमेशन बहुत ही अच्छा माध्यम है लोगों तक जानकारी पहुंचाने का
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🚩ओ३म्🚩
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अमित आर्यावर्त (भारत योगी) pinned «मुझे ये देख कर हैरानी हुई कि मेरे साथ अधिकतर नास्तिक या विधर्मी ही जुड़े हुए हैं, मुझे लगता था कि मेरे साथ अधिकतर व्यक्ति मेरी समान विचार धारा के जुड़े होंगे , जिन्हें अपने प्राचीन इतिहास से प्रेम होगा और उन्हें वीरों योगियों की ऐतिहासिक घटनाएं जानने में रुचि…»
यदि जानना चाहते हो कि वैदिक काल में योगी कैसे हुआ करते थे उनका चिंतन क्या था धर्म राष्ट्र समाज के लिए तो आपको ऋषि दयानंद को पढ़ना चाहिए

धर्म क्या है, योग क्या है, बल क्या है, राष्ट्र क्या है, गौ वंश क्या है, ईश्वर क्या है , ये सब कुछ एक ही व्यक्ति को पढ़ कर मालूम चल जाएगा और वो हैं ऋषि दयानंद

यही कारण था कि मोदी जी ने बोला था कि सभी युवाओं को ऋषि दयानंद पर खोज करनी चाहिए, तो ये राष्ट्र पूरा ही बदल जाएगा

आज अधिकतर हिंदुओ को भय सताता है कि कहीं ये राष्ट्र इस्लामिक मुल्क ना बन जाए, यदि हम सभी आर्य होगे तो भारत तो छोड़िए आस पास के जो इस्लामिक मुल्क गजवाए हिन्द का स्वप्न पाले बैठे हैं उन्हें अपनी ही भूमि बचानी मुश्किल हो जाएगी

हमे याद रखना चाहिए कि भारत की स्वतंत्रता में लगे 80% क्रांतिकारी आर्य समाजी थे और जो आर्यसमाजी नहीं भी थे वे भी शरण आर्यसमाज में ही लिया करते थे आर्यसमाज देश की स्वतंत्रता का मुख्य केंद्र था

हमे भूलना नहीं चाहिए 1938 का हैदराबाद का आंदोलन जहां का नवाब हिंदुओ को दबाकर रखता था अत्याचार करता था , उस नवाब को उसकी औकात इन्हीं आर्य समाजियों ने दिखाई थी जिनके बारे में आज पाखंडी लोग विष फैला रहे हैं

भूलना मत वेद का सूर्य फिर निकलेगा और ऐसा चमकेगा की सब मत सब पाखंड स्वाहा जाएगा
अमित आर्य

🚩ओ३म्🚩
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ये भाई सचमे अच्छे पवित्र हृदय का व्यक्ति है और अपनी सनातन धर्म की जड़ों से जुड़ा हुआ है, इस भाई ने पूरा व्याख्यान हिन्दी में दिया है

एक तरफ भारत के , मध्यम परिवार, धनवान सभी मौका मिलने खुद को अंग्रेज दिखाने से नहीं चूकते , वही दूसरी तरफ भारत का सबसे धनवान ये युवा अपने व्याख्यान के लिए हिंदी भाषा को चुनता है इससे अच्छी बात ओर क्या होगी,
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होली, वासन्तीय नवसस्येष्टि पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं,

कभी तो हवन कर लिया करो हिंदू भाइयों कभी तो अपने आर्य श्रेष्ठ पूर्वजों के कुछ संस्कार अपना लिया करो🙏
🚩ओ३म्🚩
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रहस्यमय योद्धा ने फिर से भारत के दुश्मनों को ठोकना शुरू किया

आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी के आने के बाद भारत इतना शक्तिशाली बना है कि अपने दुश्मनों को उनके ही देश में ठोकता है, वास्तविक स्वतंत्रता 2014 के बाद ही मिली है, पहले कुछ कुछ समय के लिए हलचल हुई किंतु सही स्वतंत्रता 14 के बाद मिली ,

आने वाले समय में भारत अत्यंत शक्तिशाली बने और हिंदुओ को कुछ सद्बुद्धि आए कि वो अपने आर्य श्रेष्ठ पूर्वजों की तरह एक ईश्वर एक वेद के मार्ग पर चलें तो हमारी अधिकतर समस्याएं समाप्त हो जाएंगी फिर एकता होगी अखंड ओर यही मार्ग होगा अखंड भारत का

भारत में इसीपरकार राष्ट्रवादी नेतृत्व बना रहे सीधे रस्ते से नहीं तो छल से बल से ही बनाना पड़े किंतु 100 साल तक राष्ट्रवादी हिंदुओं की मूक समर्थक सरकार ही सत्ता में रहे तो देश हर प्रकार से मजबूत बनेगा योजनाओं पर कार्य करने का भरपूर समय मिलेगा

रहस्यमय योद्धा ने फिर से भारत के दुश्मनों को ठोकना शुरू किया
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ये भारत के लिए गर्व का विषय है

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के युटुब चैनल पर एक वीडियो अपलोड हुई हैं, जिसमें हर्क्यूलिस पिलर्स इवेंट में, भारतीय स्ट्रॉन्गमैन विस्पी खराड़ी ने इन पिलर्स को 2 मिनट 10.75 सेकंड तक पकड़कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है।

दोनों खंभों का वजन लगभग 336 किलो के आस पास है यानी एक खंभे का वजन 168 के आस पास है

भाई सचमे वीडियो देख कर आनंद आगया, जानते हो विदेशी अंग्रेजो को लगता था कि ये कार्य कोई भारतीय नहीं कर सकता

अंग्रेज लोग अक्सर भारतीयों का मजाक बनाते रहते हैं, किंतु भारतीय जैसे जैसे व्यायाम करते जाएंगे वैसे वैसे भारतीयों की नस्ल प्राचीन आर्यों के जैसी होती जाएगी यानी श्रेष्ठ मजबूत ओर प्राचीन आर्यों से बलवान कोई नहीं था
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😆कुछ भाइयों की बाते सुनकर सच में खूब हसी आती है , कुछ कांग्रेसी या नोटा दबाने वाले बोलते हैं अरे देखो मोदी के कारण स्टोक मार्किट गिर रही है

अब इन्हें कौन समझाएं भाई उतार चढ़ाव तो इस दुनिया का नियम है, रोज दिन रात होते हैं, वैदिक सिद्धांतों के अनुसार ये ब्रह्मांड भी लगभग 4 अरब साल से कुछ ऊपर का होता है फिर इतनी ही काल रात्री होती है, मोक्ष ना होने तक हम भी शरीर बदलते रहते हैं, ये स्थूल दिखने वाली प्रकृति भी एक दिन अपने मूल में समा जाती है फिर समय होने पर सर्वव्यापक ईश्वर रूपी चित्रकार फिर रचदेता है उसी प्रकृति के मूल से इस दृश्यमान प्रकृति को

अरे कांग्रेसी या नोटा दबाने वालों क्या तुम कभी कपड़े नहीं बदलते क्या? क्या वो मैले नहीं होते क्या? या फिर ये बोलोगे की तुम्हारे वस्त्र भी मोदी के कारण मैले हो गए

तो भाई स्टॉक मार्किट कौनसा दुनिया से अलग है कभी ऊपर कभी नीचे ये तो चलता ही रहता है, चार्ट देखलो ऐसे ही चलती है मार्किट

हां भाई मालूम है अब तुम वही राग गाओ ये तो जुआ है ये तो जुआ है 😄

वैसे अभी पोरकीस्थान में भारत के दुश्मन आतंकियों को ठोका जा रहा है अदृश्य योद्धाओं के द्वारा इससे तो तुम्हे कोई समस्या नहीं होती होगी? देख लेना कही मोदी का विरोध करते करते तुम देश का ही विरोध ना करने लगना
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