अमित आर्यावर्त (भारत योगी)
Photo
क्या महाराज विक्रमादित्य काल्पनिक हैं? जैसा कि वामपंथी कम्युनिस्ट सेक्युलर या मूर्ख लोग ये बोलते हैं कि वे काल्पनिक थे
महाभारत के बाद सम्राट विक्रम ही ऐसे हुए हैं जिनमें इतने सारे गुण थे कि वे संपूर्ण पृथ्वी के सबसे शक्तिशाली चक्रवर्ती सम्राट बने, यही बात सनातन धर्म के विरोधियों को हजम नहीं होती क्योंकि उनका मानना है कि कोई भारतवासी इतना महान कैसे हो सकता है कि वो अत्याचारी भी नहीं था धर्म का पालन करने वाला था धनुर्वेद का सम्पूर्ण विद्वान था बुद्धि में ज्ञान में किसी विद्वान जैसा था , जो न्याय करने में सबसे न्यायप्रिय था
राज महाराज तो बहुत हुए किंतु उनका आभामंडल इतना विशाल नहीं था कि वे आम लोगों में किसी कहानियों के रूप में याद किए जाएं किंतु सम्राट विक्रम बिल्कुल अलग ही व्यक्ति थे, इनके इतिहास को दबाए जाने के बाद भी भारत नेपाल के सनातनियों में हमेशा याद किए जाते रहे इनकी कहानियां सुनाई जाती रही , लोक कवियों ने इन पर किस्से लिखे
सबसे बड़ा प्रमाण तो खुद विक्रम संवत ही है किसी काल्पनिक मनुष्य के नाम पर संवत नहीं चलता खैर विरोधियों को समझ नहीं आएगा इन प्रमाणों से भी समझ नहीं आएगा
किंतु ये प्रमाण उन सभी के लिए उपयोगी है जो पक्के सनातनी हैं अपनी वैदिक परम्पराओं पर विश्वाश रखते हैं क्यों इकलौते हम भारतवासी सनातनी ही हैं जो करोड़ो साल से अपनी संस्कृति को अपने सीने से लगाए हैं इसे विलुप्त नहीं होने देंगे
ये प्रमाण 4 है अभी आगे 10 से ज्यादा प्रमाण आएंगे फिर आपको आखिर में एक विशेष जानकारी दूंगा
यह मृण्मयी मुद्रांक अण्डाकार आकार का तथा धूसर काले रंग का है 2.00 से.मी. आकार वाले इस मुद्रांक पर ब्राह्मी लिपि में 'मूलदेवस' लेख अंकित है। मूलदेव विक्रमादित्य के सभासद रहे हैं। कसरावद उत्खनन में मिले पात्र खण्डों तथा अयोध्या से प्राप्त जनपद सिक्कों पर भी 'मूलदेव' का उल्लेख मिलता हैं। इस मुद्रांक पर ईसा पूर्व प्रथम शती की ब्राह्मी लिपि हैं।
https://youtu.be/5Y4L94r38FU?si=oKsOJxhrb9xfgtSB
ओ३म्
महाभारत के बाद सम्राट विक्रम ही ऐसे हुए हैं जिनमें इतने सारे गुण थे कि वे संपूर्ण पृथ्वी के सबसे शक्तिशाली चक्रवर्ती सम्राट बने, यही बात सनातन धर्म के विरोधियों को हजम नहीं होती क्योंकि उनका मानना है कि कोई भारतवासी इतना महान कैसे हो सकता है कि वो अत्याचारी भी नहीं था धर्म का पालन करने वाला था धनुर्वेद का सम्पूर्ण विद्वान था बुद्धि में ज्ञान में किसी विद्वान जैसा था , जो न्याय करने में सबसे न्यायप्रिय था
राज महाराज तो बहुत हुए किंतु उनका आभामंडल इतना विशाल नहीं था कि वे आम लोगों में किसी कहानियों के रूप में याद किए जाएं किंतु सम्राट विक्रम बिल्कुल अलग ही व्यक्ति थे, इनके इतिहास को दबाए जाने के बाद भी भारत नेपाल के सनातनियों में हमेशा याद किए जाते रहे इनकी कहानियां सुनाई जाती रही , लोक कवियों ने इन पर किस्से लिखे
सबसे बड़ा प्रमाण तो खुद विक्रम संवत ही है किसी काल्पनिक मनुष्य के नाम पर संवत नहीं चलता खैर विरोधियों को समझ नहीं आएगा इन प्रमाणों से भी समझ नहीं आएगा
किंतु ये प्रमाण उन सभी के लिए उपयोगी है जो पक्के सनातनी हैं अपनी वैदिक परम्पराओं पर विश्वाश रखते हैं क्यों इकलौते हम भारतवासी सनातनी ही हैं जो करोड़ो साल से अपनी संस्कृति को अपने सीने से लगाए हैं इसे विलुप्त नहीं होने देंगे
ये प्रमाण 4 है अभी आगे 10 से ज्यादा प्रमाण आएंगे फिर आपको आखिर में एक विशेष जानकारी दूंगा
यह मृण्मयी मुद्रांक अण्डाकार आकार का तथा धूसर काले रंग का है 2.00 से.मी. आकार वाले इस मुद्रांक पर ब्राह्मी लिपि में 'मूलदेवस' लेख अंकित है। मूलदेव विक्रमादित्य के सभासद रहे हैं। कसरावद उत्खनन में मिले पात्र खण्डों तथा अयोध्या से प्राप्त जनपद सिक्कों पर भी 'मूलदेव' का उल्लेख मिलता हैं। इस मुद्रांक पर ईसा पूर्व प्रथम शती की ब्राह्मी लिपि हैं।
https://youtu.be/5Y4L94r38FU?si=oKsOJxhrb9xfgtSB
ओ३म्
YouTube
सम्राट विक्रमादित्य का न्याय | विक्रमादित्य की संपूर्ण जीवन गाथा | vikramaditya ki kahani | भाग 1
सम्राट विक्रमादित्य का न्याय | विक्रमादित्य की संपूर्ण जीवन गाथा | vikramaditya ki kahani | भाग 1 #hindistory
विशेष धन्यवाद
यह सत्य इतिहास श्री प्रताप नारायण सिंह जी द्वारा रचित पुस्तक "युग पुरुष: सम्राट विक्रमादित्य" से लिया गया है। लेखक द्वारा अनुमति…
विशेष धन्यवाद
यह सत्य इतिहास श्री प्रताप नारायण सिंह जी द्वारा रचित पुस्तक "युग पुरुष: सम्राट विक्रमादित्य" से लिया गया है। लेखक द्वारा अनुमति…
❤16
डिप्रेशन की कोई दवाई नहीं होती, या तो ये ध्यान से ठीक होता है या फिर एक्यूप्रेशर से ऊर्जा का संतुलन बनादेने से ठीक होता है,
ये एक ऐसी विधि बताई है जो आपकी अनेकों अनेक बीमारियां में लाभ देगी 1 महीना प्रयोग करके देखें आपका जीवन बदल जाएगा
https://youtu.be/cYMtN4I1WTE
ये एक ऐसी विधि बताई है जो आपकी अनेकों अनेक बीमारियां में लाभ देगी 1 महीना प्रयोग करके देखें आपका जीवन बदल जाएगा
https://youtu.be/cYMtN4I1WTE
YouTube
डिप्रेशन का पक्का इलाज | Mind Detox | Budh Ka Trikon | 3 एक्यूप्रेशर प्वाइंट lu9 , h7, p6
डिप्रेशन दूर करने का अद्भुत रहस्य | Budh ka Trikon Acupressure Points buddha triangle
क्या आप जानते हैं कि सिर्फ 3 खास एक्यूप्रेशर पॉइंट्स दबाकर आप अपने मन को शांत और ऊर्जा से भर सकते हैं? इस वीडियो में हम बताएंगे Budh ka Trikon (LU9, H7, P6) पॉइंट्स के…
क्या आप जानते हैं कि सिर्फ 3 खास एक्यूप्रेशर पॉइंट्स दबाकर आप अपने मन को शांत और ऊर्जा से भर सकते हैं? इस वीडियो में हम बताएंगे Budh ka Trikon (LU9, H7, P6) पॉइंट्स के…
❤14
िमाग को हल्का करने की सबसे उत्तम विधि है ये इसका प्रयोग हजारों सालों से होता आया है, ना कोई खर्च न की नुकसान ओर अनेकों समस्याओं का एक समाधान
ये एक ऐसी विधि बताई है जो आपकी अनेकों अनेक बीमारियां में लाभ देगी 1 महीना प्रयोग करके देखें आपका जीवन बदल जाएगा
https://youtu.be/cYMtN4I1WTE
🚩
ये एक ऐसी विधि बताई है जो आपकी अनेकों अनेक बीमारियां में लाभ देगी 1 महीना प्रयोग करके देखें आपका जीवन बदल जाएगा
https://youtu.be/cYMtN4I1WTE
🚩
❤14
*।।ओ३म्।।*
🙏सादर नमस्ते जी।
∆∆• *जो पूर्ण ब्रह्मचर्यरूप तपस्या से पूर्ण विद्वान् सुशिक्षित सुशील जितेंद्रिय होकर राज्य का पालन करता है वही राजा उत्तम होता है।*
∆∆• *जिस राजा के अनेक प्रकार के उत्तम प्रबंध, उत्तम औषधियां, उत्तम सेना और धार्मिक विद्वान् अधिकारी हैं वही संपूर्ण प्रतिष्ठा को प्राप्त होता है।*
∆∆• *जो राजा छोटे भी संग्राम के लिए बड़ी युद्ध सामग्री को इकट्ठा करते हैं वे शत्रुओं को जीतते हुए संपूर्ण प्रजा को निरंतर सुखी करने योग्य हैं।*
∆∆• *हे राजन्! जिस भोजन और पान से बुद्धि और बल बड़े उसका भोजन और उसका पान करिए। उसका भोजन न करें व करावें जिससे बुद्धिभ्रंश होवे।*
∆∆• *४४ वर्ष तक ब्रह्मचर्य करने से ब्रह्मचारी रूद्ररूप प्राणों को प्राप्त होता है। उसके आगे किसी दुष्ट की दुष्टता नहीं चलती और वह सब दुष्ट कर्म करने वालों को सदा रुलाता है।*
∆∆• *अधिक ब्रह्मचर्य का पालन करने से जो सुख और विषयसंबंधी भी जो अधिक आनंद होता है वह ब्रह्मचर्य को न करने से स्वप्न में भी प्राप्त नहीं होता।*
*[स्वामी दयानंद सरस्वती]*
प्रस्तुति:- ध्रुवदेव, दर्शन योग महाविद्यालय, आर्यवन , रोजड़
🙏सादर नमस्ते जी।
∆∆• *जो पूर्ण ब्रह्मचर्यरूप तपस्या से पूर्ण विद्वान् सुशिक्षित सुशील जितेंद्रिय होकर राज्य का पालन करता है वही राजा उत्तम होता है।*
∆∆• *जिस राजा के अनेक प्रकार के उत्तम प्रबंध, उत्तम औषधियां, उत्तम सेना और धार्मिक विद्वान् अधिकारी हैं वही संपूर्ण प्रतिष्ठा को प्राप्त होता है।*
∆∆• *जो राजा छोटे भी संग्राम के लिए बड़ी युद्ध सामग्री को इकट्ठा करते हैं वे शत्रुओं को जीतते हुए संपूर्ण प्रजा को निरंतर सुखी करने योग्य हैं।*
∆∆• *हे राजन्! जिस भोजन और पान से बुद्धि और बल बड़े उसका भोजन और उसका पान करिए। उसका भोजन न करें व करावें जिससे बुद्धिभ्रंश होवे।*
∆∆• *४४ वर्ष तक ब्रह्मचर्य करने से ब्रह्मचारी रूद्ररूप प्राणों को प्राप्त होता है। उसके आगे किसी दुष्ट की दुष्टता नहीं चलती और वह सब दुष्ट कर्म करने वालों को सदा रुलाता है।*
∆∆• *अधिक ब्रह्मचर्य का पालन करने से जो सुख और विषयसंबंधी भी जो अधिक आनंद होता है वह ब्रह्मचर्य को न करने से स्वप्न में भी प्राप्त नहीं होता।*
*[स्वामी दयानंद सरस्वती]*
प्रस्तुति:- ध्रुवदेव, दर्शन योग महाविद्यालय, आर्यवन , रोजड़
🔥14
आंख दर्द की जलन आदि की सबसे अच्छी चिकित्सा
https://youtu.be/aY2j7HipfHY?si=Tw4Un0VWTCnNM5Pb
https://youtu.be/aY2j7HipfHY?si=Tw4Un0VWTCnNM5Pb
YouTube
आंख का दर्द पुराने से पुराना तुरंत ठीक करें | Eye Pain Relief with Sujok Therapy
क्या आपको आंखों में दर्द, जलन, थकान या दबाव महसूस होता है? 👀
इस वीडियो में मैंने सुजोक थेरेपी के अनुसार आंख दर्द को दूर करने का सरल और असरदार तरीका बताया है।
👉 इसमें आप जानेंगे:
आंखों के दर्द का कारण
सुजोक पॉइंट्स कहाँ होते हैं
पॉइंट्स पर कैसे दबाव देना…
इस वीडियो में मैंने सुजोक थेरेपी के अनुसार आंख दर्द को दूर करने का सरल और असरदार तरीका बताया है।
👉 इसमें आप जानेंगे:
आंखों के दर्द का कारण
सुजोक पॉइंट्स कहाँ होते हैं
पॉइंट्स पर कैसे दबाव देना…
❤6
अमित आर्यावर्त (भारत योगी) pinned «आंख दर्द की जलन आदि की सबसे अच्छी चिकित्सा https://youtu.be/aY2j7HipfHY?si=Tw4Un0VWTCnNM5Pb»
क्या आप 15 घंटे पढ़ते हैं?
या फिर काम का बोझ अधिक है?
तो निश्चित ही आप तनाव में भी रहते होंगे।
जिस पल आप भूत या भविष्य में भटकते हैं, तो चिंतन बिगड़कर चिंता का रूप ले लेता है।
और जब बिंदी हट जाती है तो चिंता → चिता बन जाती है।
आज लगभग हर व्यक्ति तनाव में जी रहा है, जिसके कारण –
पेट खराब होना
नींद न आना
दिल की धड़कन तेज या धीमी होना
माइग्रेन होना
बीपी बढ़ना
आत्महत्या के विचार आना
आदि-आदि हज़ारों प्रकार की समस्याएँ देखने को मिलती हैं।
👉 इससे बचने के 3 उपाय हैं:
व्यायाम
ध्यान
एक्यूप्रेशर
एक्यूप्रेशर के 3 पॉइंट बताए गए हैं, जिन्हें हज़ारों सालों से प्रयोग किया जा रहा है।
आज इंसानों को इनकी बहुत ज़रूरत है।
तो देखिए यह वीडियो और बचाइए अपना और अपनों का जीवन।
यह चिकित्सा आपको फ्री में बताई गई है।
वरना किसी चिकित्सक के पास जाने पर इसी उपचार के आपको 500 से 3000 रुपए तक खर्च करने पड़ सकते थे।
🔗 वीडियो लिंक: https://youtu.be/cYMtN4I1WTE?si=Nwaej8frvcMJ0II5
🚩 ओ३म् 🚩
या फिर काम का बोझ अधिक है?
तो निश्चित ही आप तनाव में भी रहते होंगे।
जिस पल आप भूत या भविष्य में भटकते हैं, तो चिंतन बिगड़कर चिंता का रूप ले लेता है।
और जब बिंदी हट जाती है तो चिंता → चिता बन जाती है।
आज लगभग हर व्यक्ति तनाव में जी रहा है, जिसके कारण –
पेट खराब होना
नींद न आना
दिल की धड़कन तेज या धीमी होना
माइग्रेन होना
बीपी बढ़ना
आत्महत्या के विचार आना
आदि-आदि हज़ारों प्रकार की समस्याएँ देखने को मिलती हैं।
👉 इससे बचने के 3 उपाय हैं:
व्यायाम
ध्यान
एक्यूप्रेशर
एक्यूप्रेशर के 3 पॉइंट बताए गए हैं, जिन्हें हज़ारों सालों से प्रयोग किया जा रहा है।
आज इंसानों को इनकी बहुत ज़रूरत है।
तो देखिए यह वीडियो और बचाइए अपना और अपनों का जीवन।
यह चिकित्सा आपको फ्री में बताई गई है।
वरना किसी चिकित्सक के पास जाने पर इसी उपचार के आपको 500 से 3000 रुपए तक खर्च करने पड़ सकते थे।
🔗 वीडियो लिंक: https://youtu.be/cYMtN4I1WTE?si=Nwaej8frvcMJ0II5
🚩 ओ३म् 🚩
❤25👍3
4 साल पुराना रोग 4 दिन में 80% ठीक हो सकता है?
मुझे पहले कई व्यक्ति मिले जिन्हें लगता था कि मर्म-दाब चिकित्सा पद्धति में कोई दम नहीं है।
वास्तव में मर्म-दाब चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद की देन है जिसे आज एक्यूप्रेशर के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में शरीर के अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं (मर्म) का उल्लेख मिलता है।
मेरे पिताजी को पिछले 4 साल से गर्दन हिलने की समस्या थी। मैंने उन्हें कई उपाय बताए, लेकिन उन्होंने कोई नहीं अपनाया। 2023 के मध्य में, जब समस्या बहुत जटिल नहीं थी, मैंने उन्हें मर्म-दाब से चिकित्सा करने की सलाह दी। यह चिकित्सा भी मुझे ही करनी थी, कहीं बाहर नहीं जाना था। किंतु उन्होंने कहा कि “इससे ठीक नहीं होगा।”
अब 2025 में जब समस्या बहुत बढ़ गई — गर्दन स्थिर ही नहीं रहती थी। सीधी करते तो आगे को झुक जाती, हाथ से सहारा देना पड़ता। साथ ही सांस फूलने लगी, खून भी कम हो गया, और सीढ़ियाँ चढ़ते ही सांस तेज हो जाती थी।
इस बार उन्होंने मेरी बात मान ली। जुलाई के मध्य से मैंने मर्म-दाब से उनकी चिकित्सा प्रारंभ की।
सबसे पहले मैंने खून की कमी और फेफड़ों की चिकित्सा की। केवल 7 दिन में ही असर दिखने लगा। सांस फूलना कम हो गया, खून भी बढ़ने लगा। अब तो वे तीसरी मंजिल तक बिना रुके चले जाते हैं और सांस नहीं फूलता।
इसके बाद मैंने गर्दन की चिकित्सा शुरू की। केवल 4 दिन में ही गर्दन की समस्या में 80% आराम हो गया। मुझे भी आश्चर्य हुआ कि 4 साल पुरानी समस्या 4 दिन में इतनी जल्दी ठीक हो सकती है।
अब गर्दन की समस्या भी कुछ ही दिनों में पूरी तरह ठीक हो जाएगी। केवल मोतियाबिंद की समस्या बाकी है, जिसकी चिकित्सा चल रही है।
वास्तव में मर्म-दाब चिकित्सा बहुत ही उपयोगी है। बिना किसी दवा के, केवल शरीर की ऊर्जा का संतुलन बना देने मात्र से, शरीर के अंग सही ढंग से कार्य करने लगते हैं।
आयुर्वेद में कुल 107 मर्म बिंदुओं का उल्लेख है।
ये बिंदु पूरे शरीर में फैले हुए हैं और हर एक का संबंध किसी न किसी अंग और उसके कार्य से होता है।
इन्हें चोट या आघात लगने पर गंभीर रोग, विकलांगता या मृत्यु तक हो सकती है, इसलिए इन्हें “जीवन के द्वार” भी कहा गया है।
इन्हीं बिंदुओं पर हल्का, नियंत्रित दबाव देने से शरीर की ऊर्जा संतुलित होती है और उपचारात्मक प्रभाव मिलता है।
👉 सरल भाषा में कहें तो,
मर्म बिंदु शरीर के “पावर स्विच” जैसे हैं —
वर्तमान में मैं एक नई पुस्तक लिखने पर कार्य शुरू कर रहा हूं विषय है मर्म दाब एक्यूप्रेशर से स्वप्नदोष की स्थाई चिकित्सा
✍️ आर्यपुत्र
🚩ओ३म् नमस्ते जी🚩
मुझे पहले कई व्यक्ति मिले जिन्हें लगता था कि मर्म-दाब चिकित्सा पद्धति में कोई दम नहीं है।
वास्तव में मर्म-दाब चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद की देन है जिसे आज एक्यूप्रेशर के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में शरीर के अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं (मर्म) का उल्लेख मिलता है।
मेरे पिताजी को पिछले 4 साल से गर्दन हिलने की समस्या थी। मैंने उन्हें कई उपाय बताए, लेकिन उन्होंने कोई नहीं अपनाया। 2023 के मध्य में, जब समस्या बहुत जटिल नहीं थी, मैंने उन्हें मर्म-दाब से चिकित्सा करने की सलाह दी। यह चिकित्सा भी मुझे ही करनी थी, कहीं बाहर नहीं जाना था। किंतु उन्होंने कहा कि “इससे ठीक नहीं होगा।”
अब 2025 में जब समस्या बहुत बढ़ गई — गर्दन स्थिर ही नहीं रहती थी। सीधी करते तो आगे को झुक जाती, हाथ से सहारा देना पड़ता। साथ ही सांस फूलने लगी, खून भी कम हो गया, और सीढ़ियाँ चढ़ते ही सांस तेज हो जाती थी।
इस बार उन्होंने मेरी बात मान ली। जुलाई के मध्य से मैंने मर्म-दाब से उनकी चिकित्सा प्रारंभ की।
सबसे पहले मैंने खून की कमी और फेफड़ों की चिकित्सा की। केवल 7 दिन में ही असर दिखने लगा। सांस फूलना कम हो गया, खून भी बढ़ने लगा। अब तो वे तीसरी मंजिल तक बिना रुके चले जाते हैं और सांस नहीं फूलता।
इसके बाद मैंने गर्दन की चिकित्सा शुरू की। केवल 4 दिन में ही गर्दन की समस्या में 80% आराम हो गया। मुझे भी आश्चर्य हुआ कि 4 साल पुरानी समस्या 4 दिन में इतनी जल्दी ठीक हो सकती है।
अब गर्दन की समस्या भी कुछ ही दिनों में पूरी तरह ठीक हो जाएगी। केवल मोतियाबिंद की समस्या बाकी है, जिसकी चिकित्सा चल रही है।
वास्तव में मर्म-दाब चिकित्सा बहुत ही उपयोगी है। बिना किसी दवा के, केवल शरीर की ऊर्जा का संतुलन बना देने मात्र से, शरीर के अंग सही ढंग से कार्य करने लगते हैं।
आयुर्वेद में कुल 107 मर्म बिंदुओं का उल्लेख है।
ये बिंदु पूरे शरीर में फैले हुए हैं और हर एक का संबंध किसी न किसी अंग और उसके कार्य से होता है।
इन्हें चोट या आघात लगने पर गंभीर रोग, विकलांगता या मृत्यु तक हो सकती है, इसलिए इन्हें “जीवन के द्वार” भी कहा गया है।
इन्हीं बिंदुओं पर हल्का, नियंत्रित दबाव देने से शरीर की ऊर्जा संतुलित होती है और उपचारात्मक प्रभाव मिलता है।
👉 सरल भाषा में कहें तो,
मर्म बिंदु शरीर के “पावर स्विच” जैसे हैं —
वर्तमान में मैं एक नई पुस्तक लिखने पर कार्य शुरू कर रहा हूं विषय है मर्म दाब एक्यूप्रेशर से स्वप्नदोष की स्थाई चिकित्सा
✍️ आर्यपुत्र
🚩ओ३म् नमस्ते जी🚩
❤31🔥6
तलाक और भारतीय संस्कृति
तलाक भारतीय संस्कृति का हिस्सा कभी नहीं रहा। हमारी वैदिक परंपरा में विवाह को केवल एक अनुबंध (Contract) नहीं, बल्कि एक संस्कार माना गया है — ऐसा पवित्र बंधन जिसमें पुरुष महिला ये मानते हैं कि उनका साथ जन्मों-जन्मों तक चलेगा।
इसी कारण तलाक का कोई मूल हिंदी या संस्कृत शब्द आज तक सुनने या देखने को नहीं मिलता।
हाँ, आधुनिक काल में लोग अलग-अलग शब्दों को जोड़कर "विवाह विच्छेद" या "दाम्पत्य विच्छेद" जैसे शब्द बना लेते हैं, लेकिन ये परंपरागत नहीं हैं, बल्कि आधुनिक कानूनी व्यवस्था के अनुसार गढ़े गए शब्द हैं।
एक प्रेरणादायक घटना
मुझे किसी से एक वकील के बारे में जानकारी मिली, जिनका काम लोगों के तलाक के केस देखना था।
लेकिन बाद में उन्होंने एक्यूप्रेशर सीखा, और उनकी सोच पूरी तरह बदल गई।
अब जब कोई पति-पत्नी तलाक के लिए उनके पास आता है, तो वह उन्हें सबसे पहले कुछ विशेष एक्यूप्रेशर पॉइंट्स लगाने की सलाह देते हैं और खुद भी सिखा देते हैं।
फिर उन्हें कहते हैं –
"पहले ये पॉइंट्स कुछ दिन नियमित लगाइए, फिर तलाक की प्रक्रिया पर बात करेंगे।"
परिणाम यह हुआ कि ज्यादातर मामलों में कुछ ही दिनों में पति-पत्नी के बीच आपसी तनाव कम हो जाता है, समझदारी बढ़ती है, और वे तलाक का विचार ही छोड़ देते हैं।
वे चमत्कारी पॉइंट्स
बुद्ध का त्रिकोण (Buddha’s Triangle)
– इस पर मैंने एक पूरा वीडियो भी बनाया है।
https://youtu.be/cYMtN4I1WTE?si=Izjcsj-qLBjLx0bu
LIV-3 (Liver 3 Point)
इन पॉइंट्स को लगाने से:
मानसिक तनाव और चिंता कम होती है।
गुस्सा शांत होता है।
धैर्य और सकारात्मक सोच बढ़ती है।
नींद अच्छी आती है।
शरीर से विषाक्त पदार्थ (Toxins) बाहर निकलते हैं।
और सैकड़ों छोटी-बड़ी शारीरिक व मानसिक समस्याएँ स्वतः ठीक होने लगती हैं।
खुद अनुभव करें
अगर आपको विश्वास न हो तो किसी तनावग्रस्त व्यक्ति या महिला पर ये पॉइंट्स लगाकर देखिए,
या खुद पर कुछ दिन आजमाइए।
आप स्वयं अनुभव करेंगे कि मन, शरीर और रिश्तों में अद्भुत परिवर्तन होता है।
✍️आर्यपुत्र
तलाक भारतीय संस्कृति का हिस्सा कभी नहीं रहा। हमारी वैदिक परंपरा में विवाह को केवल एक अनुबंध (Contract) नहीं, बल्कि एक संस्कार माना गया है — ऐसा पवित्र बंधन जिसमें पुरुष महिला ये मानते हैं कि उनका साथ जन्मों-जन्मों तक चलेगा।
इसी कारण तलाक का कोई मूल हिंदी या संस्कृत शब्द आज तक सुनने या देखने को नहीं मिलता।
हाँ, आधुनिक काल में लोग अलग-अलग शब्दों को जोड़कर "विवाह विच्छेद" या "दाम्पत्य विच्छेद" जैसे शब्द बना लेते हैं, लेकिन ये परंपरागत नहीं हैं, बल्कि आधुनिक कानूनी व्यवस्था के अनुसार गढ़े गए शब्द हैं।
एक प्रेरणादायक घटना
मुझे किसी से एक वकील के बारे में जानकारी मिली, जिनका काम लोगों के तलाक के केस देखना था।
लेकिन बाद में उन्होंने एक्यूप्रेशर सीखा, और उनकी सोच पूरी तरह बदल गई।
अब जब कोई पति-पत्नी तलाक के लिए उनके पास आता है, तो वह उन्हें सबसे पहले कुछ विशेष एक्यूप्रेशर पॉइंट्स लगाने की सलाह देते हैं और खुद भी सिखा देते हैं।
फिर उन्हें कहते हैं –
"पहले ये पॉइंट्स कुछ दिन नियमित लगाइए, फिर तलाक की प्रक्रिया पर बात करेंगे।"
परिणाम यह हुआ कि ज्यादातर मामलों में कुछ ही दिनों में पति-पत्नी के बीच आपसी तनाव कम हो जाता है, समझदारी बढ़ती है, और वे तलाक का विचार ही छोड़ देते हैं।
वे चमत्कारी पॉइंट्स
बुद्ध का त्रिकोण (Buddha’s Triangle)
– इस पर मैंने एक पूरा वीडियो भी बनाया है।
https://youtu.be/cYMtN4I1WTE?si=Izjcsj-qLBjLx0bu
LIV-3 (Liver 3 Point)
इन पॉइंट्स को लगाने से:
मानसिक तनाव और चिंता कम होती है।
गुस्सा शांत होता है।
धैर्य और सकारात्मक सोच बढ़ती है।
नींद अच्छी आती है।
शरीर से विषाक्त पदार्थ (Toxins) बाहर निकलते हैं।
और सैकड़ों छोटी-बड़ी शारीरिक व मानसिक समस्याएँ स्वतः ठीक होने लगती हैं।
खुद अनुभव करें
अगर आपको विश्वास न हो तो किसी तनावग्रस्त व्यक्ति या महिला पर ये पॉइंट्स लगाकर देखिए,
या खुद पर कुछ दिन आजमाइए।
आप स्वयं अनुभव करेंगे कि मन, शरीर और रिश्तों में अद्भुत परिवर्तन होता है।
✍️आर्यपुत्र
YouTube
5 मिनट में दिमाग हल्का करने की विधि | Mind Detox Step by Step | 3 एक्यूप्रेशर प्वाइंट lu9 , h7, p6
डिप्रेशन दूर करने का अद्भुत रहस्य | Budh ka Trikon Acupressure Points buddha triangle
क्या आप जानते हैं कि सिर्फ 3 खास एक्यूप्रेशर पॉइंट्स दबाकर आप अपने मन को शांत और ऊर्जा से भर सकते हैं? इस वीडियो में हम बताएंगे Budh ka Trikon (LU9, H7, P6) पॉइंट्स के…
क्या आप जानते हैं कि सिर्फ 3 खास एक्यूप्रेशर पॉइंट्स दबाकर आप अपने मन को शांत और ऊर्जा से भर सकते हैं? इस वीडियो में हम बताएंगे Budh ka Trikon (LU9, H7, P6) पॉइंट्स के…
❤18
भूत-प्रेत, जादू-टोना और अंधविश्वास से मुक्ति का मार्ग
ऋषि दयानंद सरस्वती जी ने बोला कि वेदों की ओर वापस लौटो वेद विद्या के कारण आज मैं और मेरा पूरा परिवार प्रेत, जादू-टोना, फलित ज्योतिष जैसी काल्पनिक और डरावनी बातों से कोसों दूर हैं।
मैं हमेशा ईश्वर, आत्मा और प्रकृति को समझने का प्रयास करता हूं।
गायत्री मंत्र का नियमित जाप करने से मन में केवल परमात्मा के प्रति श्रद्धा रहती है, और किसी अलौकिक अनदेखी शक्ति का भय नहीं रहता।
नीचे तीन वास्तविक घटनाएं साझा कर रहा हूँ, जो इस बात का प्रमाण हैं कि भय और अंधविश्वास केवल अज्ञान का परिणाम है:
घटना 1 – हल्दी और चावल का डर नहीं
करीब एक साल पहले मेरे घर के आगे सीढ़ियों पर किसी ने हल्दी और चावल रख दिए।
किंतु मेरे परिवार के किसी भी सदस्य के मन में भय, शंका या असुरक्षा की भावना नहीं आई।
हमारे लिए यह केवल चावल और हल्दी थे – न कि कोई जादुई वस्तु।
घटना 2 – दरवाजे पर नई कील
हाल ही में किसी ने हमारे घर के दरवाजे के ठीक आगे नई कील रख दी।
बहुत से लोग इसे टोना-टोटका मानकर डर जाते, लेकिन हमारे परिवार में किसी को कोई भय नहीं हुआ।
हम जानते हैं कि केवल ईश्वर ही सबका रक्षक है, न कि कोई कील या वस्तु किसी का भाग्य बदल सकती है।
घटना 3 – अनाज और पानी को लांघना
हर सुबह जब मैं व्यायाम के लिए खेतों की ओर जाता हूँ, तो रास्ते में अक्सर चौक पर अनाज के दाने और पानी चढ़ा हुआ मिलता है।
मैं कई बार इन चीजों को लांघकर आगे बढ़ा हूँ।
आज तक मेरा कोई नुकसान नहीं हुआ, और न ही कभी होगा।
हाँ, जिस दिन मृत्यु का दिन आएगा, उसे कोई भी वस्तु या शक्ति टाल नहीं सकती, क्योंकि जन्म और मृत्यु केवल ईश्वर के हाथ में हैं।
तर्क – यदि टोना-टोटका सच होता...
यदि हल्दी, चावल, कील, नींबू, लाल कपड़ा या किसी के बाल जैसी चीजों से किसी का विनाश हो सकता,
तो भारत को सीमा पर सैनिक रखने की आवश्यकता ही नहीं होती।
हम केवल कील और चावल से पाकिस्तान और चीन का विनाश कर देते।
यदि भूत-प्रेत और अदृश्य शक्तियों में इतनी ताकत होती कि वे मनुष्य के जीवन को प्रभावित कर सकें,
तो आज दुनिया भर की सरकारें सुरक्षा के लिए करोड़ों-अरबों रुपए खर्च क्यों करतीं?
आज पूरी दुनिया पर उन्हीं काल्पनिक शक्तियों का राज होता, न कि मनुष्य का।
वास्तविकता:
ये सभी बातें भय, अज्ञान और दुर्बल मन की उपज हैं।
भय का असली कारण – ब्रह्मचर्य का अभाव
जो मनुष्य वीर्यहीन है,
वेदों के अनुसार ईश्वर का ध्यान नहीं करता,
यम और नियमों का पालन नहीं करता,
तो उसका मन अस्थिर रहता है और वह काल्पनिक शक्तियों से भयभीत होने लगता है।
ऐसा मनुष्य हमेशा डर और शंका में जीता है।
वीर्यवान व्यक्ति का मन स्थिर और निडर होता है।
वही व्यक्ति सत्य को पहचान पाता है और किसी काल्पनिक शक्ति के प्रभाव में नहीं आता।
जीवन का सत्य – सुख-दुख का चक्र
क्या कोई मनुष्य ऐसा है जो कभी बीमार न पड़ा हो?
क्या कोई घर ऐसा है जहाँ कभी मृत्यु न हुई हो?
क्या कोई परिवार ऐसा है जिसमें सुख-दुख साथ-साथ न आए हों?
यदि ये सब प्राकृतिक और सार्वभौमिक घटनाएं हैं,
तो फिर भूत-प्रेत और टोने-टोटके के आगे घुटने टेकने का क्या औचित्य है?
संसार का एकमात्र मुखिया – परमात्मा
जैसे किसी घर में यदि कई मुखिया हों, तो झगड़ा और अव्यवस्था बढ़ती है।
वैसे ही इस संसार का भी एक ही मुखिया है –
जिसे वेद और उपनिषद निराकार, सर्वव्यापक, न्यायकारी और अनंत बुद्धिमान कहते हैं।
योगीजन समाधि में जाकर जिस ईश्वर का अनुभव करते हैं,
वही इस संसार का एकमात्र शासक और रक्षक है।
निष्कर्ष – केवल न्याय, अन्याय नहीं
ईश्वर की व्यवस्था मनुष्य की व्यवस्था जैसी नहीं है।
वह सर्वज्ञ और अनंत बुद्धिमान है।
इसलिए उसकी सृष्टि में किसी के साथ अन्याय नहीं होता,
केवल पूर्ण न्याय होता है।
अंतिम संदेश
भूत-प्रेत, जादू-टोना और फलित ज्योतिष जैसे अंधविश्वास मनुष्य के अज्ञान और भय की उपज हैं।
सच्चे ज्ञान, ब्रह्मचर्य, और वेद- ईश्वर भक्ति से यह भय स्वतः समाप्त हो जाता है।
"जिस दिन मनुष्य का मन केवल ईश्वर में स्थिर हो जाता है,
उस दिन उसके लिए संसार की कोई काल्पनिक शक्ति अस्तित्व ही नहीं रखती।"
ऋषि दयानंद के ये उपकार अनेकों जन्मों में नहीं उतार पाऊंगा मैं तो 🙏
✍️🚩आर्यपुत्र
ऋषि दयानंद सरस्वती जी ने बोला कि वेदों की ओर वापस लौटो वेद विद्या के कारण आज मैं और मेरा पूरा परिवार प्रेत, जादू-टोना, फलित ज्योतिष जैसी काल्पनिक और डरावनी बातों से कोसों दूर हैं।
मैं हमेशा ईश्वर, आत्मा और प्रकृति को समझने का प्रयास करता हूं।
गायत्री मंत्र का नियमित जाप करने से मन में केवल परमात्मा के प्रति श्रद्धा रहती है, और किसी अलौकिक अनदेखी शक्ति का भय नहीं रहता।
नीचे तीन वास्तविक घटनाएं साझा कर रहा हूँ, जो इस बात का प्रमाण हैं कि भय और अंधविश्वास केवल अज्ञान का परिणाम है:
घटना 1 – हल्दी और चावल का डर नहीं
करीब एक साल पहले मेरे घर के आगे सीढ़ियों पर किसी ने हल्दी और चावल रख दिए।
किंतु मेरे परिवार के किसी भी सदस्य के मन में भय, शंका या असुरक्षा की भावना नहीं आई।
हमारे लिए यह केवल चावल और हल्दी थे – न कि कोई जादुई वस्तु।
घटना 2 – दरवाजे पर नई कील
हाल ही में किसी ने हमारे घर के दरवाजे के ठीक आगे नई कील रख दी।
बहुत से लोग इसे टोना-टोटका मानकर डर जाते, लेकिन हमारे परिवार में किसी को कोई भय नहीं हुआ।
हम जानते हैं कि केवल ईश्वर ही सबका रक्षक है, न कि कोई कील या वस्तु किसी का भाग्य बदल सकती है।
घटना 3 – अनाज और पानी को लांघना
हर सुबह जब मैं व्यायाम के लिए खेतों की ओर जाता हूँ, तो रास्ते में अक्सर चौक पर अनाज के दाने और पानी चढ़ा हुआ मिलता है।
मैं कई बार इन चीजों को लांघकर आगे बढ़ा हूँ।
आज तक मेरा कोई नुकसान नहीं हुआ, और न ही कभी होगा।
हाँ, जिस दिन मृत्यु का दिन आएगा, उसे कोई भी वस्तु या शक्ति टाल नहीं सकती, क्योंकि जन्म और मृत्यु केवल ईश्वर के हाथ में हैं।
तर्क – यदि टोना-टोटका सच होता...
यदि हल्दी, चावल, कील, नींबू, लाल कपड़ा या किसी के बाल जैसी चीजों से किसी का विनाश हो सकता,
तो भारत को सीमा पर सैनिक रखने की आवश्यकता ही नहीं होती।
हम केवल कील और चावल से पाकिस्तान और चीन का विनाश कर देते।
यदि भूत-प्रेत और अदृश्य शक्तियों में इतनी ताकत होती कि वे मनुष्य के जीवन को प्रभावित कर सकें,
तो आज दुनिया भर की सरकारें सुरक्षा के लिए करोड़ों-अरबों रुपए खर्च क्यों करतीं?
आज पूरी दुनिया पर उन्हीं काल्पनिक शक्तियों का राज होता, न कि मनुष्य का।
वास्तविकता:
ये सभी बातें भय, अज्ञान और दुर्बल मन की उपज हैं।
भय का असली कारण – ब्रह्मचर्य का अभाव
जो मनुष्य वीर्यहीन है,
वेदों के अनुसार ईश्वर का ध्यान नहीं करता,
यम और नियमों का पालन नहीं करता,
तो उसका मन अस्थिर रहता है और वह काल्पनिक शक्तियों से भयभीत होने लगता है।
ऐसा मनुष्य हमेशा डर और शंका में जीता है।
वीर्यवान व्यक्ति का मन स्थिर और निडर होता है।
वही व्यक्ति सत्य को पहचान पाता है और किसी काल्पनिक शक्ति के प्रभाव में नहीं आता।
जीवन का सत्य – सुख-दुख का चक्र
क्या कोई मनुष्य ऐसा है जो कभी बीमार न पड़ा हो?
क्या कोई घर ऐसा है जहाँ कभी मृत्यु न हुई हो?
क्या कोई परिवार ऐसा है जिसमें सुख-दुख साथ-साथ न आए हों?
यदि ये सब प्राकृतिक और सार्वभौमिक घटनाएं हैं,
तो फिर भूत-प्रेत और टोने-टोटके के आगे घुटने टेकने का क्या औचित्य है?
संसार का एकमात्र मुखिया – परमात्मा
जैसे किसी घर में यदि कई मुखिया हों, तो झगड़ा और अव्यवस्था बढ़ती है।
वैसे ही इस संसार का भी एक ही मुखिया है –
जिसे वेद और उपनिषद निराकार, सर्वव्यापक, न्यायकारी और अनंत बुद्धिमान कहते हैं।
योगीजन समाधि में जाकर जिस ईश्वर का अनुभव करते हैं,
वही इस संसार का एकमात्र शासक और रक्षक है।
निष्कर्ष – केवल न्याय, अन्याय नहीं
ईश्वर की व्यवस्था मनुष्य की व्यवस्था जैसी नहीं है।
वह सर्वज्ञ और अनंत बुद्धिमान है।
इसलिए उसकी सृष्टि में किसी के साथ अन्याय नहीं होता,
केवल पूर्ण न्याय होता है।
अंतिम संदेश
भूत-प्रेत, जादू-टोना और फलित ज्योतिष जैसे अंधविश्वास मनुष्य के अज्ञान और भय की उपज हैं।
सच्चे ज्ञान, ब्रह्मचर्य, और वेद- ईश्वर भक्ति से यह भय स्वतः समाप्त हो जाता है।
"जिस दिन मनुष्य का मन केवल ईश्वर में स्थिर हो जाता है,
उस दिन उसके लिए संसार की कोई काल्पनिक शक्ति अस्तित्व ही नहीं रखती।"
ऋषि दयानंद के ये उपकार अनेकों जन्मों में नहीं उतार पाऊंगा मैं तो 🙏
✍️🚩आर्यपुत्र
👏17🔥5❤4👍4
यदि कुछ करना है तो अपने जीवित दादा दादी माता पिता की सेवा करो , यदि नाना नानी को भी जरूरत है तो उनकी भी पूरी सेवा करनी चाहिए
ये तो तर्क की बात है , जीवित माता पिता की आज्ञा मानते नहीं उनकी सेवा करते नहीं, मरने के बाद कौए को अपना बाप दादा मान कर खिलाते हो उनके नामसे अनेकों कर्म करते हो इसका लाभ कुछ नहीं, जो जीव आत्मा अपने कर्म संस्कारों के साथ जा चुकी वही उसका मार्ग निर्धारित करेंगे
जब आखरी संस्कार का नाम ही अंतिम संस्कार है तो इसके बाद क्या रह गया? इसके बाद यदि शेष कुछ है तो वो है ईश्वर की न्याय व्यस्था जिसने जैसे कर्म किए होंगे ईश्वर उसे वैसी योनि में भेज देगा और होगी नई यात्रा शुरू जब तक मोक्ष ना प्राप्त कर ले
यदि अपने पूर्वजों को याद करना है तो उनके बताए अच्छे संस्कारों को जीवनभर पालन करो
मेरे बड़े दादा जी ने अपने मित्र को बचाने के लिए अपनी जान देदी वो चाहते तो अपना जीवन बचा सकते थे , जब मैने बचपन में ये बात सुनी थी तो उसी दिन समझ आ गया था कि अपने मित्र के साथ कभी भी दगा नहीं करना, किसी के साथ कभी भी दगा नहीं करनी चाहिए , मैने उनके इस अच्छे संस्कार को जीवन में धारण किया और किसी के साथ कभी आज तक छल कपट नहीं किया क्या इस संस्कार से मेरे दादा हमेशा मेरे मन मस्तिष्क में नहीं रहेंगे जब तक मैं जीवित रहूंगा
सनातन धर्म में अंतिम संस्कार के बाद ओर कोई संस्कार शेष नहीं रहता बाकी जो कुछ धर्म के नाम पर किया जाता है वो अपने अपने मन की लीला है
✍️आर्यपुत्र
ये तो तर्क की बात है , जीवित माता पिता की आज्ञा मानते नहीं उनकी सेवा करते नहीं, मरने के बाद कौए को अपना बाप दादा मान कर खिलाते हो उनके नामसे अनेकों कर्म करते हो इसका लाभ कुछ नहीं, जो जीव आत्मा अपने कर्म संस्कारों के साथ जा चुकी वही उसका मार्ग निर्धारित करेंगे
जब आखरी संस्कार का नाम ही अंतिम संस्कार है तो इसके बाद क्या रह गया? इसके बाद यदि शेष कुछ है तो वो है ईश्वर की न्याय व्यस्था जिसने जैसे कर्म किए होंगे ईश्वर उसे वैसी योनि में भेज देगा और होगी नई यात्रा शुरू जब तक मोक्ष ना प्राप्त कर ले
यदि अपने पूर्वजों को याद करना है तो उनके बताए अच्छे संस्कारों को जीवनभर पालन करो
मेरे बड़े दादा जी ने अपने मित्र को बचाने के लिए अपनी जान देदी वो चाहते तो अपना जीवन बचा सकते थे , जब मैने बचपन में ये बात सुनी थी तो उसी दिन समझ आ गया था कि अपने मित्र के साथ कभी भी दगा नहीं करना, किसी के साथ कभी भी दगा नहीं करनी चाहिए , मैने उनके इस अच्छे संस्कार को जीवन में धारण किया और किसी के साथ कभी आज तक छल कपट नहीं किया क्या इस संस्कार से मेरे दादा हमेशा मेरे मन मस्तिष्क में नहीं रहेंगे जब तक मैं जीवित रहूंगा
सनातन धर्म में अंतिम संस्कार के बाद ओर कोई संस्कार शेष नहीं रहता बाकी जो कुछ धर्म के नाम पर किया जाता है वो अपने अपने मन की लीला है
✍️आर्यपुत्र
❤24👍7🔥4👏4
जहरीले कीड़े के काटने पर क्या करें?
मधुमक्खी
भौंरा
ततैया
बिच्छू
जहरीले मकड़ी
कनखजूरा
खटमल https://youtu.be/x8z9jPOcIDo
मधुमक्खी
भौंरा
ततैया
बिच्छू
जहरीले मकड़ी
कनखजूरा
खटमल https://youtu.be/x8z9jPOcIDo
YouTube
जहरीले कीड़े के काटने पर तुरंत करो ये प्राथमिक उपचार । दुर्लभ जानकारी
🐝 ज़हरीले कीड़े के काटने पर तुरंत करें ये काम!
ज़हरीले कीड़े जैसे मधुमक्खी, ततैया, बिच्छू, जहरीली मकड़ी या कनखजूरा के काटने पर अक्सर लोग घबरा जाते हैं। 😨
लेकिन घबराने की बजाय अगर आपको शरीर का एक गुप्त पॉइंट पता हो, तो सिर्फ 15 मिनट में ज़हर का असर कम किया…
ज़हरीले कीड़े जैसे मधुमक्खी, ततैया, बिच्छू, जहरीली मकड़ी या कनखजूरा के काटने पर अक्सर लोग घबरा जाते हैं। 😨
लेकिन घबराने की बजाय अगर आपको शरीर का एक गुप्त पॉइंट पता हो, तो सिर्फ 15 मिनट में ज़हर का असर कम किया…
❤15
अमित आर्यावर्त (भारत योगी) pinned «जहरीले कीड़े के काटने पर क्या करें? मधुमक्खी भौंरा ततैया बिच्छू जहरीले मकड़ी कनखजूरा खटमल https://youtu.be/x8z9jPOcIDo»
मेरे जीवन का सबसे खुशी का पल वो था जब मुझे एक जीवित क्रांतिकारी से मिलने का मौका मिला था भारत स्वाभिमान जब बना था तब, और वो थे आदरणीय श्री राजीव दीक्षित जी
किंतु अच्छे ओर क्रांतिकारी इंसान के दुश्मन बहुत अधिक होते हैं, ये वो महामानव थे जिनकी आत्म बहुत ही अधिक पवित्र है
भाई राजीव दीक्षित जी के विचारों को यदि आप लोगों के साथ साझा करें तो ये हमेशा जीवित रहेंगे दूसरे क्रांतिकारियों की तरह हमारे दिलों में आने वाली पीढ़ियों में अपने बच्चों को इन महापुरुषों के बारे में जरूर बताएं,
जैसे, ऋषि दयानंद, ब्रह्मचारी राममूर्ति, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, चंद्रशेखर आजाद, भगतसिंह, दुर्गाभाभी, राजीव दीक्षित जी, कोलकाता के गोपाल पाठा आदि आदि जितनों के बारे में आप जानते हों
✍️ आर्यपुत्र 🚩🧘♀️⚔️
किंतु अच्छे ओर क्रांतिकारी इंसान के दुश्मन बहुत अधिक होते हैं, ये वो महामानव थे जिनकी आत्म बहुत ही अधिक पवित्र है
भाई राजीव दीक्षित जी के विचारों को यदि आप लोगों के साथ साझा करें तो ये हमेशा जीवित रहेंगे दूसरे क्रांतिकारियों की तरह हमारे दिलों में आने वाली पीढ़ियों में अपने बच्चों को इन महापुरुषों के बारे में जरूर बताएं,
जैसे, ऋषि दयानंद, ब्रह्मचारी राममूर्ति, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, चंद्रशेखर आजाद, भगतसिंह, दुर्गाभाभी, राजीव दीक्षित जी, कोलकाता के गोपाल पाठा आदि आदि जितनों के बारे में आप जानते हों
✍️ आर्यपुत्र 🚩🧘♀️⚔️
❤42👍8👏3🔥2
है किसी में इतना साहस कि सच बोल सके? अकेले राजीव भाई में ही ये साहस था
सच तो यह है कि “जन गण मन” सबसे पहले 1911 में जॉर्ज पंचम के भारत आगमन पर उसकी चापलूसी के लिए गाया गया था। और दुर्भाग्यवश, बाद में नेहरू की जिद के कारण इसे ही भारत का राष्ट्रगान बना दिया गया।
जबकि उस समय भारत के सभी क्रांतिकारी “वन्दे मातरम्” गाया करते थे। सवाल यह उठता है कि नेहरू को वन्देमातरम् से इतनी चिढ़ क्यों थी?
महान क्रांतिकारी श्री राजीव दीक्षित जी ने इस सत्य को उजागर किया था।
सोचिए मित्रो, क्या आज भी हम “जन गण मन” गाकर उसी अंग्रेज शासक की परोक्ष भक्ति नहीं कर रहे, जिसने हमारे पूर्वजों पर अनगिनत अत्याचार किए?
इतिहास गवाह है—
1911 में जब जॉर्ज पंचम भारत आया और उसे “भारत का सम्राट” घोषित किया गया, तब कलकत्ता में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ। उसी अवसर पर रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने यह गीत प्रस्तुत किया, जिसे अंग्रेजी हुकूमत ने राजा के सम्मान का गीत मानकर स्वीकार किया।
तो बताइए—
उस समय क्रांतिकारियों के प्रिय गीत “वन्दे मातरम्” को क्यों नहीं गाया गया?
क्योंकि कांग्रेसियों को उससे चिढ़ थी। कारण साफ़ था— उसमें अंग्रेजों की चापलूसी नहीं थी। ओर जन गण मन को तो लोगों को ये कहकर भी बहकाया जा सकता था कि ये गीत तो ईश्वर की प्रार्थना है
और यही चापलूसी आज भी हम दोहरा रहे हैं।
मेरे लिए तो “वन्दे मातरम्” ही सब कुछ है। पिछले 17 साल से
आप सभी को अपने बच्चों को भी ये सच्चाई बतानी चाहिए जो कि मैं जानता हूं अधिकतर हिंदू नहीं बताएंगे
जब लोग चर्चा करेंगे तो वर्तमान की सरकार भी कुछ सोचेगी इस विषय पर
✍️ आर्यपुत्र
सच तो यह है कि “जन गण मन” सबसे पहले 1911 में जॉर्ज पंचम के भारत आगमन पर उसकी चापलूसी के लिए गाया गया था। और दुर्भाग्यवश, बाद में नेहरू की जिद के कारण इसे ही भारत का राष्ट्रगान बना दिया गया।
जबकि उस समय भारत के सभी क्रांतिकारी “वन्दे मातरम्” गाया करते थे। सवाल यह उठता है कि नेहरू को वन्देमातरम् से इतनी चिढ़ क्यों थी?
महान क्रांतिकारी श्री राजीव दीक्षित जी ने इस सत्य को उजागर किया था।
सोचिए मित्रो, क्या आज भी हम “जन गण मन” गाकर उसी अंग्रेज शासक की परोक्ष भक्ति नहीं कर रहे, जिसने हमारे पूर्वजों पर अनगिनत अत्याचार किए?
इतिहास गवाह है—
1911 में जब जॉर्ज पंचम भारत आया और उसे “भारत का सम्राट” घोषित किया गया, तब कलकत्ता में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ। उसी अवसर पर रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने यह गीत प्रस्तुत किया, जिसे अंग्रेजी हुकूमत ने राजा के सम्मान का गीत मानकर स्वीकार किया।
तो बताइए—
उस समय क्रांतिकारियों के प्रिय गीत “वन्दे मातरम्” को क्यों नहीं गाया गया?
क्योंकि कांग्रेसियों को उससे चिढ़ थी। कारण साफ़ था— उसमें अंग्रेजों की चापलूसी नहीं थी। ओर जन गण मन को तो लोगों को ये कहकर भी बहकाया जा सकता था कि ये गीत तो ईश्वर की प्रार्थना है
और यही चापलूसी आज भी हम दोहरा रहे हैं।
मेरे लिए तो “वन्दे मातरम्” ही सब कुछ है। पिछले 17 साल से
आप सभी को अपने बच्चों को भी ये सच्चाई बतानी चाहिए जो कि मैं जानता हूं अधिकतर हिंदू नहीं बताएंगे
जब लोग चर्चा करेंगे तो वर्तमान की सरकार भी कुछ सोचेगी इस विषय पर
✍️ आर्यपुत्र
❤23👍6🔥2👏1
बम-पटाखे ज़रूर फोड़ने चाहिए — इससे कई लोगों की सालभर की रोज़ी रोटी जुड़ी है। पटाखों से होने वाला प्रदूषण इतना भयंकर नहीं कि धरती का नाश हो जाएगा।
जिस व्यक्ति से आप पटाखों के बारे में आलोचना सुनते हैं, उसे सख्ती से परखें: क्या उसके पास बाइक है? बात बात पर बाइक गाड़ी चलाता है? क्या वो प्लास्टिक पन्नी आदि का अधिक प्रयोग करता है? क्या वो ऐसी का प्रयोग करता है भयंकर सत्र वाला प्रदूषण फैलाता है?
क्या वो ज्ञानीचंद वायु शुद्धि के लिए हवन करता है? देखिए पूरा साल क्या कर्म करता है वही असल तस्वीर दिखाता है किसी भी दोगले की।
वही लोग जो बात बात पर सालभर बाइक गाड़ी चलाकर हवा में जहरीला धुआं उठाते हैं, सभी प्रकार का सामान पन्नियों में लाते हैं — वे तो पूरे साल भयानक स्तर का प्रदूषण फैला रहे होते हैं।
दीपावली पर बच्चे बम फोड़कर खुश होते हैं उनकी खुशियाँ छीनकर आपको क्या मिलेगा?
यह बकवास बंद कीजिए कि पटाखे नहीं फोड़ने चाहिए। अगर करना है, तो पूरे साल के कामों की जिम्मेदारी लें और अपनी ज़िम्मेदारी के साथ त्योहार भी मनाएं।
हमारे मुख्य त्यौहार — होली, दीपावली — खेती और किसानों से जुड़े हैं; ये परम्पराएँ हवन के बिना अधूरी हैं। हवन जरूर होता था पहले अब तुमने छोड़ दिया
अगर आप बम-पटाखों पर ₹10,000 खर्च कर सकते हैं, तो हवन पर ₹1,000 क्यों नहीं दे सकते?
हवन में कोई घटिया पदार्थ ना डाले जिसे आप खुद नहीं खा सकते ऐसा घटिया पदार्थ ना डालें
सोचिए।
✍️ आर्यपुत्र
जिस व्यक्ति से आप पटाखों के बारे में आलोचना सुनते हैं, उसे सख्ती से परखें: क्या उसके पास बाइक है? बात बात पर बाइक गाड़ी चलाता है? क्या वो प्लास्टिक पन्नी आदि का अधिक प्रयोग करता है? क्या वो ऐसी का प्रयोग करता है भयंकर सत्र वाला प्रदूषण फैलाता है?
क्या वो ज्ञानीचंद वायु शुद्धि के लिए हवन करता है? देखिए पूरा साल क्या कर्म करता है वही असल तस्वीर दिखाता है किसी भी दोगले की।
वही लोग जो बात बात पर सालभर बाइक गाड़ी चलाकर हवा में जहरीला धुआं उठाते हैं, सभी प्रकार का सामान पन्नियों में लाते हैं — वे तो पूरे साल भयानक स्तर का प्रदूषण फैला रहे होते हैं।
दीपावली पर बच्चे बम फोड़कर खुश होते हैं उनकी खुशियाँ छीनकर आपको क्या मिलेगा?
यह बकवास बंद कीजिए कि पटाखे नहीं फोड़ने चाहिए। अगर करना है, तो पूरे साल के कामों की जिम्मेदारी लें और अपनी ज़िम्मेदारी के साथ त्योहार भी मनाएं।
हमारे मुख्य त्यौहार — होली, दीपावली — खेती और किसानों से जुड़े हैं; ये परम्पराएँ हवन के बिना अधूरी हैं। हवन जरूर होता था पहले अब तुमने छोड़ दिया
अगर आप बम-पटाखों पर ₹10,000 खर्च कर सकते हैं, तो हवन पर ₹1,000 क्यों नहीं दे सकते?
हवन में कोई घटिया पदार्थ ना डाले जिसे आप खुद नहीं खा सकते ऐसा घटिया पदार्थ ना डालें
सोचिए।
✍️ आर्यपुत्र
❤28👏6🔥3
अपनी तो हवन की तैयारी पूरी है और आपकी? हां मैं बम भी फोडूंगा कुछ मात्रा में किंतु हवन से आधी मात्रा में
आप बताओ आपका क्या हाल है हवन करोगे या म्लेच्छ बन कर जीओगे जैसे अभी तक जीते आए हो?
हवन में बस यही तो चाहिए शुद्ध घी देसी गाय का, शुद्ध जड़ीबूटियों की सामग्री, समिधा अच्छे से सुखी हुई, देसी कपूर, कुछ मीठा जैसे गुड या शक्कर, ओर नई फसल , हवन के मंत्र नहीं आते तो ओ३म् महामंत्र से करो
ओर एक बात पूरे साल की जिम्मेदारी भी लो जितना हो पन्नी का प्रयोग नहीं करो मैं 90% पन्नी का प्रयोग नहीं करता हूं
गाड़ी बाइक का जरूरी हो तो ही प्रयोग करोगे व्यर्थ में नहीं
Ac में नहीं सोएंगे, मेरे घर भी ऐसी है किंतु मैं नहीं सोता उसमें
व्यर्थ में अधिक कपड़े नहीं खरीदोगे मुझे लगता है 3 जोड़ी में कुछ साल निकल जाएंगे मेरे तो निकल जाते हैं, आने जाने का 1 जोड़ी अलग रख लो, आप जानते ही होंगे कि ये कपड़े बनाने वाले कैसे नदियों को प्रदूषित करते हैं किस किस सत्र का प्रदूषण फैलाते हैं , विशेषकर महिलाओं को इस विषय में सोचना चाहिए
आदि आदि ओर भी बहुत कुछ जो आप कर सको अच्छा वो करो
अच्छा ये सब करने से आपका स्वास्थ्य और आयु ओर बल भी बढ़ेगा
आप बताओ आपका क्या हाल है हवन करोगे या म्लेच्छ बन कर जीओगे जैसे अभी तक जीते आए हो?
हवन में बस यही तो चाहिए शुद्ध घी देसी गाय का, शुद्ध जड़ीबूटियों की सामग्री, समिधा अच्छे से सुखी हुई, देसी कपूर, कुछ मीठा जैसे गुड या शक्कर, ओर नई फसल , हवन के मंत्र नहीं आते तो ओ३म् महामंत्र से करो
ओर एक बात पूरे साल की जिम्मेदारी भी लो जितना हो पन्नी का प्रयोग नहीं करो मैं 90% पन्नी का प्रयोग नहीं करता हूं
गाड़ी बाइक का जरूरी हो तो ही प्रयोग करोगे व्यर्थ में नहीं
Ac में नहीं सोएंगे, मेरे घर भी ऐसी है किंतु मैं नहीं सोता उसमें
व्यर्थ में अधिक कपड़े नहीं खरीदोगे मुझे लगता है 3 जोड़ी में कुछ साल निकल जाएंगे मेरे तो निकल जाते हैं, आने जाने का 1 जोड़ी अलग रख लो, आप जानते ही होंगे कि ये कपड़े बनाने वाले कैसे नदियों को प्रदूषित करते हैं किस किस सत्र का प्रदूषण फैलाते हैं , विशेषकर महिलाओं को इस विषय में सोचना चाहिए
आदि आदि ओर भी बहुत कुछ जो आप कर सको अच्छा वो करो
अच्छा ये सब करने से आपका स्वास्थ्य और आयु ओर बल भी बढ़ेगा
❤22👍5