अमित आर्यावर्त (भारत योगी)
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वैदिक धर्म का प्रचार ही हमारा मकसद होना चाहिए वैदिक धर्म बचेगा तभी देश बचेगा

https://youtube.com/c/AmitAryavart
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🙏😔आजाद🙏😔 उनके सपनों का भारत हम कब बना पाएंगे
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अद्भुत अद्भुत जानकारी जीवन बचाने वाली

एक भाई मिला, उसने बताया कि लॉकडाउन के समय उसे भी सांस लेने में बहुत परेशानी हुई थी। अस्पतालों में जगह नहीं थी, ऑक्सीजन सिलेंडर भी कम थे, इसलिए वह अस्पताल के बाहर ही पड़ा था — बेहद तकलीफ में।

उसी समय वहां एक एक्यूप्रेशर चिकित्सक आए। उन्होंने उसकी दोनों बाहों पर पेपर टेप से सफेद मटर चिपका दीं और उसके साथ वालों से कहा —
“इन्हें लगातार दबाते रहो, यानी दबाना–छोड़ना, दबाना–छोड़ना... जैसे पंप करते हैं। या फिर हल्का दबाव बनाए रखो। हर दो से तीन घंटे बाद मटर बदल देना।”

वह भाई बोला — “इसके बाद धीरे-धीरे मेरी ऑक्सीजन बढ़ने लगी। जो स्तर बहुत नीचे चला गया था, उसमें सुधार आने लगा।”

मैंने उसे बताया —
“एक्यूप्रेशर में बाजू पर LU4 नाम का एक बिंदु होता है, जो शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है।” वही आपको लगाया गया था

✍️ आर्यपुत्र
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29 वर्ष के ये युवा धीरेन्द्र शास्त्री जी आज हिंदुओं को एक करने के लिए बड़ा ही उत्तम कार्य कर रहे हैं, सभी आर्य भाइयों बहनों को इनका समर्थन करना चाहिए

ओर जो ये जादू चमत्कार दिखाते हैं वे उन लोगों को जोड़ने के लिए उत्म विधि है जिन्हें वही भाषा समझ आती है क्योंकि तुम नहीं दिखाओगे तो वे वीर्यहीन ईसाइयों के पाले में चले जाएंगे

आप केवल एक लकीर खींच कर उसी पर चल कर भारत को सनातनी राष्ट्र हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं कर पाएंगे

मुझे बाबा बागेश्वर जी की विधि आज के लोगो के मस्तिष्क की अवस्था को देख कर उत्तम लगी लक्ष्य अपने लोगों को जोड़ने का है

जो वीर हैं वे तो आखिरी सांस तक साथ नहीं छोड़ेंगे सनातन का ओर जो वीर्यहीन कायर है उन्हें चमत्कार जोड़ कर रखेगा , ओर विद्यावान तो कोई विरला ही बनना चाहता है

हम सभी को हर उस बाबा सन्यासी साधु या आम आमदी का समर्थन करना चाहिए जो हिंदुओ को एक करने के लिए कर्म कर रहे हैं , आने वाले 25 वर्ष में ये एकता बहुत काम आएगी

आखिरी बात अपनो की काट सार्वजनिक कभी मत करना ये ही नाश का मार्ग है

✍️आर्य पुत्र
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एक नंबर रागनी सुन कर देखो
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ये विधि हमारे आर्य पूर्वजों की प्राचीन काल से आज भी चली आती है, इस विधि से व्यायाम करने से हाथों में विशेष बल बढ़ता है, पहले के पहलवान तो इसका विशेष अभ्यास किया करते थे और योद्धा भी हाथों को ताकत देने के लिए विशेष अभ्यास किया करते थे इसका, व्यक्ति को अपना लक्ष्य देखते हुए विशेष बल के लिए अभ्यास भी अत्यधिक विशेष करना होता है

किंतु हमारे जैसे साधारण लोगों के लिए साधारण अभ्यास ही काफी है तो देखिए ये विधि ओर स्वस्थ मजबूत रहें और विधि भी जीवित रहे यही उद्वेश्य है

https://youtu.be/IoKBVRWHyRo?si=UVFpuYq2pYTDnlLD

✍️ आर्यपुत्र
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मैने चैनल पर वीडियो डाल दी है यदि आप इस पूरी वीडियो को ध्यानपूर्वक देखेंगे, तो पाएँगे कि इसमें कुछ अत्यंत गूढ़ रहस्य छिपे हुए हैं। ये बातें केवल उसी साधक को समझ में आएँगी जो गंभीरता, धैर्य और सूक्ष्म दृष्टि से इसे देखेगा। पहली नज़र में सब कुछ साधारण प्रतीत होगा, और साधारण ही ग्रहण होगा; परंतु वास्तविक ज्ञान तो वही पकड़ पाता है जिसकी अंतर-दृष्टि जागृत हो।

पिछली बार कुछ ही दिन पहले जब मैंने यह विषय साझा किया था, तब मेरी दौड़ केवल 3.5 किलोमीटर थी। किन्तु कुछ ही दिनों में यह बढ़कर 7–8 किलोमीटर हो चुकी है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि शीघ्र ही यह 10 और फिर 20 किलोमीटर तक पहुँच जाएगी।

विशेष बात यह है कि दौड़ के पश्चात न थकान होती है, न मांसपेशियों में किसी प्रकार का तनाव या खिंचाव। शरीर स्वाभाविक रूप से हल्का और संतुलित बना रहता है।

इसके बाद शक्ति-वृद्धि के लिए कुछ विशिष्ट व्यायाम करने चाहिए—
• 30 से 50 किलो की बोरी उठाकर स्थिर खड़े रहना
• लेटकर पैरों को मोड़कर हवा में वजन को देर तक स्थिर रखना
• हाथों से खाली बोरी को निचोड़ना
• दाँतों से 10, 20, 30 किलो तक वजन को कुछ समय तक थामे रखना
• एक-एक उँगली से मध्यम वजन रोककर अभ्यास करना
ताकत बढ़ाने वाले प्रत्येक व्यायाम में रुकने के समय को बढ़ाते जाना है

हर अभ्यास में सावधानी अत्यंत आवश्यक है। लंगोट का दृढ़ बंधन अनिवार्य है, अन्यथा हानि सम्भव है।

संपूर्ण विद्या का आधार उसी रहस्य को समझना है जिसे प्राचीन आर्यों ने ‘प्राण-वायु’ कहा है—
वही शक्ति, वही बल, वही जीवन की मूल धारा।

प्रत्येक व्यायाम उसी प्रकार करना है जो रहस्य वीडियो में समझाया है

https://youtu.be/o3kapdRIwAE

✍️ आर्यपुत्र
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पिछले 16–17 वर्षों से मैं कभी भी किसी भी दाँत पर टूथपेस्ट नहीं लगाता और न ही ब्रश करता हूँ, फिर भी मेरे दाँत बहुत—मतलब बहुत—मजबूत हैं।

दाँत साफ करने का मेरे पास कोई एक तरीका या एक ही मंजन नहीं है। मैं परिस्थितियों और उपलब्ध चीज़ों के अनुसार अलग-अलग तरीकों से दाँत साफ कर लेता हूँ। देखिए नीचे:

लौंग, अम्बा हल्दी और थोड़ा सा सेंधा नमक — इन सबके चूर्ण में सरसों का तेल मिलाकर इतना पेस्ट बना लेता हूँ कि उससे दाँत साफ किए जा सकें।

कभी नींबू के पत्तों को रगड़ लेता हूँ।

कभी नींबू को निचोड़ने के बाद उसे उल्टा करके, उस पर सेंधा नमक लगाकर दाँत साफ कर लेता हूँ।

कभी नीम आदि की दातून कर लेता हूँ।

कभी ऐसे ही उँगलियों से दाँत रगड़ लेता हूँ।

और दाँतों को मजबूत रखने के लिए मैं अपने सामर्थ्य अनुसार दाँतों से वजन उठाकर 1–2 मिनट तक रोककर रखता हूँ। इससे दाँत और जबड़ा बहुत मजबूत बने रहते हैं।
(लेकिन आप यह मत करना — कहीं ऐसा न हो कि दाँत ही सारे बाहर आ जाएँ! 😂)

अच्छा भाई, ये सब राजीव दीक्षित जी का ही उपकार है मुझ पर, और मैं ये सब नियमित रूप से करता रहता हूँ।

वैसे एक ओर अद्भुत क्रिया है जिससे आपके दांत और हड्डियों को बहुत लाभ मिलेगा उसके लिए आप ये वीडियो देखो ओर सीखो

https://youtu.be/o3kapdRIwAE


✍️ आर्य पुत्र
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जर्मनी के एक एलोपैथी डॉक्टर थे, जिन्हें डॉ. वॉल के नाम से जाना जाता है। उनके पास एक महिला अपने घुटने के दर्द का इलाज करवाने आती थी। काफी समय तक इलाज चलने के बाद भी उसकी समस्या ठीक नहीं हो रही थी और अंत में उसे ऑपरेशन की सलाह दी गई।

उस महिला ने फिर एक्यूप्रेशर से उपचार करवाया, जिससे उसके घुटनों के दर्द में गहरा आराम मिला। बाद में वह महिला वापस डॉ. वॉल के पास गई और उन्हें पूरा अनुभव बताया।

यह सुनकर डॉ. वॉल आश्चर्यचकित हो गए। एक्यूप्रेशर को गलत सिद्ध करने के उद्देश्य से उन्होंने एक विशेष मशीन बनाई, जिससे शरीर के एक्यूप्रेशर बिंदुओं की जांच की जा सके। परीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि हर बिंदु से संबंधित अंगों में ऊर्जा का प्रवाह सचमुच प्रभावित होता है। ओर शरीर के अंगों की ऊर्जा संतुलित होने लगती है यानी बीमारी भागने लगती है।

इसी शोध के दौरान उन्होंने कुछ नए बिंदुओं की खोज भी की, और यह पद्धति आगे चलकर Electro-Acupuncture के नाम से प्रसिद्ध हुई। इसके बाद डॉ. वॉल ने इसी क्षेत्र को अपना मुख्य चिकित्सा क्षेत्र बना लिया।

वैसे आपको बता दूं कि जिसे हम आज एक्यूप्रेशर कहते हैं, भारत में इसे मर्म-दाब चिकित्सा कहा जाता है। यह विद्या आयुर्वेद की अनमोल देन है, और ऋषियों ने सभी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियाँ सम्पूर्ण मानवता के हित के लिए ही बनाई गई हैं ओर भारत से समस्त ज्ञान विश्व में गया है

🚩 सभी का भला हो, सभी का मंगल हो, सभी सुखी हों। 🚩
✍️ आर्यपुत्र
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पेट के रोगों का रामबाण उपाय — यानी बीमारी की जड़ को ही हिला दो।

आपको चाहे कोई भी पेट का रोग क्यों न हो, यदि आप क्रोध करना, दूसरों से जलना, पीठ पीछे चुगली करना और किसी की बुराई में आनंद लेना जैसे नकारात्मक कर्मों का त्याग कर दें, तो आप देखेंगे कि आश्चर्यजनक रूप से आपके पेट संबंधी रोग स्वतः ही ठीक होने लगेंगे। तब औषधियाँ भी अपना कार्य सही ढंग से करने लगती हैं।

इसके बाद आप जो भी चिकित्सा करेंगे, वह अपना पूरा प्रभाव दिखाएगी।
इसके लिए दो कार्य ज़रूर करें —

1) वे सभी प्वाइंट लगाएँ जो मैंने तनाव आदि के लिए अपनी वीडियो में बताए हैं। मेरे युटुब चैनल bharat yogi पर इस नाम से वो वीडियो है "5 मिनट में दिमाग हल्का करने की विधि" मैं जब किसी रोगी की चिकित्सा करता हूं तो ये वाले पॉइंट जरूर लगाता हूं

2) प्रतिदिन ध्यान का अभ्यास करें।

और हमेशा अपने उन्नति के कार्यों में लगे रहें, खाली न बैठें।

✍️ आर्यपुत्र
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वन्दे मातरम् , निश्चित ही भारत आज शक्तिशाली हुआ है मोदी जी के नेतृत्व में, किंतु देश के अंदर की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा जो कि देश के लिए बहुत घातक होगा।

मैं सोचता हूं जब ये बात आपको मुझे हम सब 100 करोड़ भारतीयों को मालूम है तो क्या मोदी जी को नहीं मालूम होगी? , निश्चित ही उन्हें भी मालूम होगी ओर हमसे कई कई गुना बेहतर तरीके से मालूम होगी। देखना है होता है क्या जो होगा उसके लिए हमें खुद को हर दिन त्यार करना चाहिए क्योंकि आग लगने पर कुंए नहीं खोदे जाते

✍️आर्यपुत्र
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कुछ नहीं होगा इन वृद्धों से ये सब केवल भाषण देते हैं ओर उसमें भी राक्षसों से मर्यादा में व्यवहार करना है ये बोलते हैं ,

किसी भी संगठन का मुखिया एक योग्य युवा को होना चाहिए वृद्ध जनों को केवल सलाहकार होना चाहिए क्योंकि साहस केवल युवा में होता है और समझ वृद्ध में

हिंदुओं के सभी संगठनों का यही हाल है आर्यसमाज हो या rss, आर्यसमाज को देख लो बोलने को बड़ा संगठन है किंतु कब्जा उनका है जिनकी 1 टांग श्मशान की चिता में रखी हुई है ,

युवाओं को तो मौका ही नहीं देना है जमीनों पर धन पर कुंडली बांधे बैठें हैं

वहीं दूसरी तरफ लूली कटे सियार झुंड में निर्दोष हिंदुओ की निर्ममता से हत्याएं कर रहे हैं , भारत में अलग रूप से देखने को मिलता है और पाकिस्तान बंगला देश में अलग
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हिंदू माने मूर्ख अपने बच्चों को लाला जोकर सेंटा के कपड़े पहनाकर बचपन से ही सेक्युलर नाम की बीमारी के कीड़े से कटवाता है, फिर ये बच्चे ना देश के ना धर्म के, बनेंगे केवल मानसिक गुलाम

ओर तुम्हारी ये सेक्युलर वाली बीमारी जो खानग्रेस ने तुम्हे दी है धीमे विष की तरह भारत के मूल को खा रही है

हर साल बहुत प्रयास होते हैं तुम्हे समझाने के किंतु तुम शपथ लिए बैठे हो की अपने पैरों तले कुआं खोदोगे

⚔️🚩✍️ आर्य पुत्र⚔️🚩
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80 वर्ष की आयु में भी माँ भारती का यह सिंहपुत्र आज राष्ट्र के लिए तन–मन–प्राण से युद्धरत है। कई बार कदम लड़खड़ाते हैं किंतु हौसला आज भी युवा की भांति है।

जिस आयु में शरीर शिथिल हो जाता है, इंद्रियाँ शिथिल पड़ जाती हैं—उसी आयु में यह वीर भारत माता की सेवा में अडिग खड़ा है।

भारत की धरती सदा से वीरों की जननी रही है। इतिहास गवाह है—जब इस्लामिक आक्रांताओं ने भारत माता की पावन भूमि को रौंदने का प्रयास किया, तब 90 वर्ष के वयोवृद्ध पहलवान भी रणभूमि में गर्जना करते हुए उतरे और शत्रुओं के छक्के छुड़ा दिए।

यह रक्त हमारी नसों में बहता है।
मित्रों! अब जागने का समय है। 100 करोड़ भारतवासी यदि ब्रह्मचर्य को जीवन का मूलमंत्र बनाएं, प्रतिदिन व्यायाम और योग को अपना शस्त्र बनाएं—तो हम 100 वर्ष की आयु में भी ऐसे प्रचंड रहेंगे कि आवश्यकता पड़ने पर शत्रुओं का शीश धड़ से अलग करने में एक क्षण भी न लगे।

✍️आर्य पुत्र
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लिवर ट्रांसप्लांट के पेशेंट का लिवर ठीक हुआ एक्यूप्रेशर से ये है मर्म दाब चिकित्सा, आज बहुत ही ज्यादा उन्नति हो चुकी है इस मार्ग की
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मैं अपनी जान-पहचान के जितने भी लोगों को जानता हूँ, उनमें आर्यसमाजियों को छोड़कर शायद ही किसी के पास हमारा सच्चा इतिहास—महाभारत—हो।

रोज़ हम कई-कई घंटे मोबाइल फोन में व्यर्थ बिता देते हैं। क्या अपने गौरवशाली इतिहास को पढ़ने के लिए दिन का सिर्फ़ एक घंटा भी नहीं निकाल सकते?

महाभारत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि असीम ज्ञान का महासागर है। जैसे ही आप महाभारत पढ़ना शुरू करते हैं, आपकी रुचि स्वयं बढ़ती जाती है—यह जानने की उत्कंठा रहती है कि आगे क्या होगा। और फिर पता ही नहीं चलता कि कब पूरी महाभारत पढ़ ली।

टीवी पर जो महाभारत दिखाई जाती है, उसमें बहुत सी बाते मनगढ़ंत होती है। उसे असली महाभारत मानने की भूल नहीं करनी चाहिए। टीवी वालों ने अपनी कल्पना से बहुत कुछ जोड़ दिया है।

इस बार मैं गीता प्रेस, गोरखपुर वाली महाभारत मंगवाने की सोच रहा हूँ। शायद उसके 6 भाग हैं और कीमत लगभग 4000 रुपये के आसपास है।

अब तक मैंने जो महाभारत पढ़ी है, वह आर्यसमाज से प्राप्त थी, जिसमें बाद के मिलावटी अंशों को हटा दिया गया था। वह अध्ययन के लिए उत्तम थी।
लेकिन अब मन है कि पूरा ग्रंथ, बिना कुछ छोड़े, जैसा उपलब्ध है, वैसा ही पढ़ा जाए—और इसके लिए गीता प्रेस की महाभारत उपयुक्त प्रतीत होती है।

✍️ आर्य पुत्र
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