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📕 विक्टोरिया झील के बारे में

इसे 'डार्विन के ड्रीमपोंड' के नाम से भी जाना जाता है।

👉विक्टोरिया झील अफ्रीका की सबसे बड़ी एवं दुनिया की सबसे बड़ी उष्णकटिबंधीय झील है। 

👉यह क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी झील है (प्रथम और द्वितीय स्थान पर क्रमशः कैस्पियन सागर और सुपीरियर झील हैं )

👉यह सुपीरियर झील के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी ताजे पानी की झील है।

👉 विषुवत रेखा इस झील से होकर गुजरती है।

👉 झील का क्षेत्रफल तीन देशों में विभाजित है : तंजानिया, युगांडा व केन्या 

👉उद्गम स्रोत : यह व्हाइट नील (White Nile) नदी का उदगम स्रोत है।

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🔆 प्राचीन भारत में साहित्यिक गतिविधियाँ

📍 प्रारंभिक व्याकरण और कानून की पुस्तकें
✅ अष्टाध्यायी – पाणिनी (5वीं शताब्दी ईसा पूर्व) , सबसे प्रारंभिक व्याकरण पुस्तक, जिसे भगवती सूत्र भी कहा जाता है
✅ महाभाष्य – पतंजलि द्वारा लिखित
✅ मनुस्मृति – एक कानून की किताब
✅ अर्थशास्त्र – कौटिल्य द्वारा लिखित
✅ इंडिका – मेगस्थनीज द्वारा , मौर्य समाज और प्रशासन का एक स्रोत
✅ चण्डसूत्र – पिंगला द्वारा लिखित

📍 बौद्ध एवं शास्त्रीय साहित्यिक कृतियाँ
✅ बुद्धचरित – अश्वघोष द्वारा
✅ रघुवंश – कालिदास द्वारा
✅ नैषध चरित – श्री हर्ष द्वारा

📍 शास्त्रीय एवं काव्य साहित्य
✅ कामसूत्र और आर्य मंजुश्री – वात्स्यायन द्वारा
✅ पवनधूत – धोयी द्वारा
✅ स्वप्न वासवदत्ता – भासा द्वारा
✅ मतविलास प्रहसन – महेंद्रवर्मन प्रथम द्वारा
✅ हर्षचरित – बाणभट्ट द्वारा लिखित
✅ विक्रमदेव चरित – बिल्हण द्वारा लिखित

📍 संस्कृत एवं अन्य शास्त्रीय कृतियाँ
✅ दशकुमारचरित – दण्डिन द्वारा
✅ वासवदत्ता – सुबांडु द्वारा
✅ बृहत् कथामंजरी – क्षेमेन्द्र द्वारा
✅ कथासरित्सागर – सोमदेव द्वारा
✅ पंचतंत्र – विष्णुशर्मा द्वारा
✅ हितोपदेश – नारायण पंडित द्वारा

📍 यात्रा एवं ऐतिहासिक विवरण
✅ फ़ो-क्यो-की – फ़ा-हिएन द्वारा
✅ सी-यू-की – ह्वेन त्सांग द्वारा

📍 वैज्ञानिक एवं खगोलीय ग्रंथ
✅ पंचसिद्धांतिका – वराहमिहिर द्वारा
✅ सूर्यसिद्धांतिका और आर्यभट्टीयम – आर्यभट्ट द्वारा
✅ नीतिसार – कामन्दका द्वारा
✅ चरक संहिता – चरक द्वारा
✅ हस्तायुर्वेद – पालकाप्य द्वारा

📍 कानूनी और चिकित्सा ग्रंथ
✅ मिताक्षरा – विग्नेश्वर द्वारा
✅ दायभाग – जीमूतवाहन द्वारा
✅ सिद्धांत सिरोमणि – भास्कराचार्य द्वारा
✅ निगाहन्तु – धन्वन्तरि द्वारा

📍 ऐतिहासिक एवं राजनीतिक कार्य
✅ मुद्राराक्षस – विशाखदत्त द्वारा
✅ प्रबंध चिंतामणि – मेरुथुंगा द्वारा
✅ भारत का भूगोल – टॉलेमी द्वारा
✅ बृहत् कथाकोश – हरिषेण द्वारा
✅ मृचकटिका – शूद्रक द्वारा
✅ पृथ्वीराज विजया – जयानक द्वारा
✅ नाला वेम्बा – पुगालेंडी द्वारा

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रैयतवाड़ी व्यवस्था



रैयतवाड़ी व्यवस्था: किसानों के साथ व्यक्तिगत रूप से किए गए लगान समझौते को रैयतवाड़ी कहा गया है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत ब्रिटिश भारत की 51% भूमि आई। 1792 ई० में रैयतवाड़ी व्यवस्था वारामहल जिले में पहली बार कर्नल रीड द्वारा लागू की गई। 1820 में यह व्यवस्था मद्रास में लागू कर दी गई और इसे सुचारु रूप से चलाने के लिए मुनरो को मद्रास का गवर्नर नियुक्त किया गया। 1825 में यह व्यवस्था बम्बई में लागू कर दी गई तथा 1858 तक यह व्यवस्था सम्पूर्ण दक्कन और अन्य क्षेत्रों में लागू कर दी गई।


इस व्यवस्था की मुख्य विशेषताएँ निम्न थीं-

👉सरकार और किसान के बीच कोई बिचौलिया वर्ग नहीं था।

👉भूमि का स्वामित्व किसानों को दिया गया जिससे वे भूमि का विक्रय कर सकते थे एवं गिरवी रख सकते थे।

👉लगान की अदायगी न होने पर भूमि जब्त की जा सकती थी।

👉लगान अदाएगी की प्रत्येक 30 वर्ष बाद पुनर्समीक्षा करने की व्यवस्था की गई थी।

👉राजस्व के रूप में किसानों को उपज का 1/2 भाग देना था, जो धन के रूप में देना होता था।


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कैबिनेट मिशन योजना (1946)


👉कैबिनेट मिशन 24 मार्च, 1946 को दिल्ली आया

👉 इसके अध्यक्ष भारत मंत्री लॉर्ड पैथिक लॉरेंस थे तथा अन्य दो सदस्य स्टैफोर्ड क्रिप्स (अध्यक्ष बोर्ड ऑफ ट्रेड) तथा ए.वी. एलेक्जेंडर (नौसेना मंत्री) थे।

👉कैबिनेट मिशन ने त्रिस्तरीय शासन व्यवस्था को सुझाया।

👉 प्रांतों के छोटे अथवा बड़े गुट बनाने के अधिकार की पुष्टि की तथा प्रांतों को अ, ब और स तीन श्रेणियों में विभक्त किया।

👉 कैबिनेट मिशन ने अपने प्रस्तावों की घोषणा की, इसके प्रमुख प्रस्ताव थे-
(1) भारत की एकता बनाई रखी जाए।
(2) मुस्लिम लीग की पाकिस्तान कीमांग ठुकरा दी गई।

(3) भारत एक संघ होगा जिसमें ब्रिटिश प्रांत तथा देशी रियासतें शामिल होंगी।

(4) संविधान निर्मात्री संस्था या संविधान सभा का गठन प्रांतीय विधानसभाओं तथा देशी रियासतों के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाए।

कैबिनेट मिशन, 1946 ने वायसराय की एक्जीक्यूटिव काउंसिल का पुनर्गठन कर अंतरिम सरकार के गठन का सुझाव दिया

👉कैबिनेट मिशन योजना के पक्ष में गांधीजी पूरी तरह से थे।

👉 इस योजना के संदर्भ में गांधीजी ने कहा-' यह योजना उस समय की परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में सबसे उत्कृष्ट योजना थी, जिसमें ऐसे बीज थे, जिनसे दुःख की मारी भारत भूमि यातना से मुक्त हो सकती थी।"

👉 मौलाना अबुल कलाम आजाद कैबिनेट मिशन के भारत आगमन के समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष थे।


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