ई_दृष्टि_नवत्र_TGT_PGT_रिमाइंडर_भारतीय_इतिहास_भाग_1.pdf
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ई_दृष्टि_नवत्र_TGT_PGT_रिमाइंडर_भूगोल_भाग_3_EDRISTI.pdf
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UPPCS के लिए महत्वपूर्ण fact
(1)गांधी इरविन समझौते का प्रारूप किसने तैयार किया-हर्बर्ट इमरसन
(2)किस शासक का मकबरा अष्ठभुजीय है-लोदी वंश
(3)तुगलक कालीन जैन संत-प्रभु सूरी
(4)किस प्राचीन कालीन शासक ने दक्षिण पूर्व एशिया मे नौसेनिक अभ्यास कराया था-राजेन्द्र-1(चोल)
(5)जौनपुर का अंतिम शासक-हुसैन शाह
(6)श्वेत विद्रोह(1883,इल्बर्ट बिल विवाद) किसके काल मे हुआ-रिपन
(7)भारतीय राष्ट्रवाद का उत्प्रेरक कौन-कर्जन
(8)पुस्तक'गांधी बनाम लेनिन'-एस ए डांगे की
(9)अनेक प्राचीन लीपियो की सूची किसमे-ललित विस्तार मे
(10)प्रशासन मे महिलाओ की सर्वाधिक भागीदारी किसमे-चालुक्य वंश मे
(11)औरंगजेब शासन का सरकारी इतिहासकार-मोहम्मद काजिम
(12)ICS अधिकारी जिसने भारत मे अंग्रेजी साम्राज्य पर भितरघात किया था-एच वी कामथ
(13)सरस्वती व दशावती नदी के मध्य का भाग कहलाता था-ब्रह्मावर्त्त
(14)तारीख ए फिरोजशाही-बरनी
फुतुहात ए फिरोजशाही-फिरोज शाह तुगलक
(15)बनारस मे स्थायी बंदोबस्त लागू किया-जोनाथन डंकन ने
(16)आधुनिक उर्दू शायरी का जनक है-वली दकनी
(17)मोपलाओ को इस्लाम मे परिवर्तित कराया-अब्दुल्ला खराजी ने
(18)शिक्षा मे व्यवसायिक पाठ्यक्रम लागू किया-फिरोज शाह तुगलक ने
(19)सीरी दुर्ग का निर्माण अलाउद्दीन खिलजी ने कराया-दिल्ली को मंगोल आक्रमण से बचाने हेतु
(20)पुराणो का अध्ययन करने वाला प्रथम मुस्लिम -अलबरूनी
(21)भारत छोड़ो प्रस्ताव का लेखक-जवाहर लाल नेहरू
असहयोग प्रस्ताव का लेखक-महात्मा गांधी
(22)वेदांग ज्योतिष के लेखक-लगध
(23)तुजुर्मा ए बाराही का संबंध है-ज्योतिष से(बाराही-बारह राशिया)
(24)भारत का तोता(तोतिये हिंद) -अमीर खुसरो
भारत का सादी-अमीर हसन
(25)नियमित यौगिक क्रिया अपनाने वाला सूफी संप्रदाय-सत्तारी संप्रदाय(मुहम्मद गौस)
(26)पश्चिमी भारत का पुनर्जागरण कर्ता-महादेव गोविंद रानाडे
(27)वज्रछेदिका संबंधित है-महायान से
(28)बज्रयान मे बोधिसत्व की पत्नी को किस नाम से जाना जाता है-तारा
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📕असहयोग आंदोलन -
👉 गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन । अगस्त 1920 को प्रारंभ किया गया। पश्चिमी भारत, बंगाल तथा उत्तरी भारत में असहयोग आंदोलन को अभूतपूर्व सफलता मिली।
👉असहयोग आंदोलन के दौरान ही मोतीलाल नेहरू, लाला लाजपत राय, सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू तथा राजेंद्र प्रसाद न्यायालय का बहिष्कार कर आंदोलन में कूद पड़े थे।
👉5 नवंबर 1920 को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन में गांधी जी ने असहयोग आंदोलन शुरू होने के ' 1 वर्ष के भीतर स्वराज' प्राप्त करने का नारा दिया। इसके साथ ही सरकारी उपाधि, स्कूल न्यायालयों तथा विदेशी सामानों का पूर्णतः बहिष्कार की योजना भी थी। असहयोग आंदोलन की अनेक सफलताएं है, इसी आंदोलन ने पहली बार देश की जनता को इकट्ठा किया।
📕साइमन कमीशन (1927)
📕नेहरु रिपोर्ट -
👉साइमन कमीशन की नियुक्ति ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने सर जॉन साइमन के नेतृत्व में की थी।
👉 इस कमीशन में सात सदस्य थे, जो सभी ब्रिटेन की संसद के मनोनीत सदस्य थे। यही कारण था कि इसे 'श्वेत कमीशन' कहा गया।
👉ब्रिटेन में होने वाले 1929 ईस्वी में आम चुनाव को ध्यान में रखकर सरकार ने 9 नवम्बर 1927 ईस्वी में साइमन कमीशन की नियुक्ति की।
👉 इस कमीशन में अध्यक्ष सहित कुल 7 सदस्य थे 1. जॉन साइमन 2. मि. बाथम 3. स्ट्रैथ कोना 4. लेन फोक्स 5. कैडेगन 6. एटली 7. बर्नोन हार्ट शोन
👉साइमन कमीशन की घोषणा 8 नवम्बर, 1927 ईस्वी को की गई। कमीशन को इस बात की जाँच करनी थी कि क्या भारत इस लायक़ हो गया है कि यहाँ लोगों को संवैधानिक अधिकार दिये जाएँ। इस कमीशन में किसी भी भारतीय को शामिल नहीं किया गया, जिस कारण इसका बहुत ही तीव्र विरोध हुआ।
👉साइमन कमीशन 3 फरवरी, 1928 को बंबई पहुंचा और मार्च 1928 तक यहाँ रहा था। अपनी दूसरी यात्रा (11 अक्टूबर, 1928 से 13 अप्रैल, 1929) के दौरान, साइमन कमीशन ने देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया और लाहौर, कराची, पेशावर, पूना, पटना, कलकत्ता, शिलांग, मद्रास, नागपुर और रंगून में अपने सत्र आयोजित किए। अंततः यह कमिशन दिल्ली आ गया।
📕नेहरु रिपोर्ट -
👉साइमन कमीशन (1927) के प्रत्युत्तर में नेहरू रिपोर्ट (1928) तैयार की गई थी, जिसमें भारत के नए डोमिनियन संविधान का खाका था।
👉इसे तैयार करने वाली सर्वदलीय समिति के अध्यक्ष मोतीलाल नेहरू थे। जवाहरलाल नेहरु इस के सचिव थे। 2 मुस्लिमों सहित कुल 9 अन्य लोग इस समिति के सदस्य थे।
👉भारतीय संविधान का मसविदा तैयार करने की दिशा में भारतीयों का प्रथम प्रयास। भारत को औपनिवेशिक स्वराज्य का दर्जा दिये जाने की मांग।
👉पृथक निर्वाचन व्यवस्था का विरोध, अल्पसंख्यकों हेतु पृथक स्थान आरक्षित किये जाने का विरोध करते हुए संयुक्त निर्वाचन पद्धति की मांग।
👉भाषायी आधार पर प्रांतों के गठन की मांग। 19 मौलिक अधिकारों की मांग। केंद्र एवं प्रांतो में उत्तरदायी सरकार की स्थापना की मांग।
📕होम रूल लीग आंदोलन
👉 तिलक की होमरूल लीग (1916)
📕 एनी बेसेन्ट की होमरूल लीग (1916)
👉 तिलक की होमरूल लीग (1916)
👉बाल गंगाधर तिलक ने अप्रैल 1916 में अपनी इंडियन होमरूल लीग' की स्थापना की। इसकी पहली बैठक बेलगाम में हुई और पूना को इसका मुख्यालय बनाया गया।
यह संगठन मुख्यतः महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रांत और बरार क्षेत्रों में सक्रिय था। तिलक की लीग को छह शाखाओं में संगठित किया गया था। इसके प्रमुख लक्ष्य थेः स्वराज्य की मांग को बल देना, भाषायी आधार पर प्रांतों की स्थापना करना और शिक्षा का प्रसार करना। तिलक ने अपने लीग के प्रचार के लिए अपने समाचार पत्रों मराठा और केसरी का इस्तेमाल किया।
👉तिलक द्वारा स्थापित होमरूल लीग के पहले अध्यक्ष जोसेफ बैष्ठिस्टा थे और एन. सी. केलकर इसके सचिव थे।
📕 एनी बेसेन्ट की होमरूल लीग (1916)
👉 सितंबर 1916 में एनी बेसेंट ने मद्रास से 'ऑल इंडिया होमरूल लीग' की शुरुआत की। यह संगठन पूरे भारत में फैला और इसकी लगभग 200 शाखाएं बनीं।
👉 संगठनात्मक दृष्टि से यह लीग तिलक की तुलना में कमजोर थी, लेकिन सदस्य संख्या अधिक थी। इसमें बी. एम. वाडिया और सी.पी. रामास्वामी अय्यर जैसे नेताओं की भी सक्रिय भूमिका रही।
👉 एनी बेसेंट ने कॉमनवील और न्यू इंडिया के माध्यम से अपनी लीग का प्रचार किया। एनी बेसेंट द्वारा स्थापित होम रूल लीग के प्रथम अध्यक्ष सचिव जॉर्ज अरुंडले थे।
👉अरुंडले के अलावा इस संगठन का मुख्य कार्य बी.डब्ल्यू. वाडिया और सी.पी. रामास्वामी आईयर के द्वारा संभाला जाता था।
📕 सूरत विभाजन (1907)
👉1905 के बाद जब आंदोलन तेज हुआ, तो उग्र राष्ट्रवादियों ने इसका नेतृत्व संभाल लिया और बहिष्कार, स्वदेशी, तथा राष्ट्रीय शिक्षा को नगरपालिकाओं, विधान परिषदों, न्यायालयों जैसे संस्थानों तक विस्तारित करने का आह्वान किया।
👉 इसके साथ ही 1907 के कांग्रेस अधिवेशन में अध्यक्ष पद को लेकर उग्रवादियों और नरमपंथियों के बीच गहरा विवाद उत्पन्न हुआ। यह विवाद अंततः सूरत अधिवेशन (1907) में कांग्रेस के दो गुटों- उग्रवादी और नरमपंथी - में विभाजन का कारण बना, जिसे सूरत विभाजन कहा गया। यह घटना कांग्रेस के इतिहास में विचारधारात्मक मतभेद के चरम बिंदु को दर्शाती है।
👉26 दिसंबर 1907 को ताप्ती नदी तट पर सूरत सूरत में में हुए कांग्रेस अधिवेशन में 1600 प्रतिनिधियों की उपस्थिति में नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच मतभेद के कारण कांग्रेस का विभाजन हुआ, जिसे 'सूरत विभाजन' कहा जाता है।
👉1907 में कांग्रेस का सूरत विभाजन विचारधारा की स्पष्ट टकराहट का परिणाम था।
👉उदारवादी नेताओं का मानना था कि स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखा जाना चाहिए और इसका दायरा सिर्फ विदेशी कपड़ों और शराब के बहिष्कार तक होना चाहिए।
📕स्वदेशी आंदोलन
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👉7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता टाउनहॉल में आयोजित एक विशाल बैठक में बहिष्कार प्रस्ताव के पारित होने के साथ, स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक घोषणा की गई।
👉क्रोध करने के लि स्वदेशी आंदोलन की जड़ें विभाजन विरोधी आंदोलन में थीं, जो लॉर्ड कर्ज़न के बंगाल प्रांत को विभाजित करने के फैसले का विरोध करने के लिये शुरू किया गया था।
वर्ष 1906 में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कलकत्ता में कॉन्ग्रेस का अधिवेशन आयोजित किया गया, जिसमें स्वशासन या स्वराज को INC के लक्ष्य के रूप में घोषित किया गया।
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भरी दुनिया है चकाचौंध देखने को मगर,
मेरे चेहरे की परेशानी को कौन देखेगा।”
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