UPSSSC, LOWER PCS, PET ,UPSI, CTET, SUPER TET, UPTET ,TGT ,PGT , TEACHING , Other Exam.
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📕आधुनिक भारतीय इतिहास में प्रमुख आयोग जो बार बार परीक्षा में पूछे जाते रहे हैं -

📕शिक्षा आयोग –

▪️हंटर आयोग (1882):
लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में शिक्षा की प्रगति की समीक्षा के लिए।

▪️रैले आयोग (1902):
लॉर्ड कर्जन द्वारा विश्वविद्यालय शिक्षा में सुधार के लिए।

▪️सैंडलर आयोग (1917):
कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं और माध्यमिक शिक्षा में सुधार के लिए।

▪️हार्टोग समिति (1929):
शिक्षा के विभिन्न पहलुओं, विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षा, की स्थिति की समीक्षा के लिए।

📕 आर्थिक और अकाल आयोग –

▪️स्ट्रेची आयोग (1878):
लॉर्ड लिटन के समय अकाल राहत कार्यों की समीक्षा और एक अकाल संहिता (Famine Code) बनाने के लिए।


▪️ल्यॉल आयोग (1897):
अकाल राहत उपायों की प्रभावशीलता की जाँच के लिए।

▪️हिल्टन यंग आयोग (1926):
भारतीय मुद्रा और वित्त व्यवस्था की जाँच के लिए, जिसकी सिफारिशों पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की स्थापना हुई।


▪️कृषि आयोग (1926):
भारत में कृषि की स्थिति को सुधारने और किसानों की समस्याओं की जाँच के लिए।


📕 प्रशासनिक, राजनीतिक और सैन्य आयोग –

▪️पील आयोग (1858):
1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश भारतीय सेना के पुनर्गठन के लिए।

▪️फ्रेजर आयोग (1902):
लॉर्ड कर्जन द्वारा पुलिस प्रशासन में सुधारों के लिए सुझाव देने हेतु।

▪️ ली आयोग (1923):
भारत में लोक सेवा (civil services) की स्थिति और भारतीयकरण की जाँच के लिए, जिसने यूपीएससी (UPSC) की स्थापना की सिफारिश की।

▪️साइमन कमीशन (1927)
: 1919 के भारत सरकार अधिनियम के कामकाज की समीक्षा और संवैधानिक सुधारों की सिफारिश करने के लिए।

▪️ बटलर आयोग (1927):
ब्रिटिश सरकार और भारतीय रियासतों (Princely States) के बीच संबंधों को बेहतर बनाने के लिए।

▪️हंटर आयोग (1919):
जलियांवाला बाग हत्याकांड की जाँच के लिए।


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📕 भारतीय संविधान के भाग –

▪️ भाग 1– संघ और उसका राज्य क्षेत्र (अनु.1–4)

▪️ भाग 2 – नागरिकता (अनु. 5–11)

▪️ भाग 3 – मौलिक अधिकार (अनु. 12– 35)

▪️ भाग 4 – राज्य के नीति निदेशक तत्व (अनु. 36–51)

▪️ भाग 5 – संघ (अनु. 52–151)

▪️ भाग 6 – राज्य (अनु. 152–237)

▪️ भाग 7 – सातवां संविधान संशोधन अधिनियम 1956 द्वारा निरस्त

▪️ भाग 8 – संघ राज्य क्षेत्र (अनु. 239–242)

▪️ भाग 9 – पंचायतें (अनु. 243–243ण), 73वें संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा जोड़ा गया

▪️ भाग 9(क) – नगरपालिकाएं (अनु. 243त – 243 य छ), 74वां संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा जोड़ा गया

▪️ भाग 9(ख) – सहकारी समिति (अनु. 243य ज – 243य न), 97वां संविधान संशोधन अधिनियम 2011 द्वारा जोड़ा गया

▪️ भाग 10 – अनुसूचित तथा जनजातीय क्षेत्र (अनु. 244, 244क)

▪️ भाग 11 – संघ तथा राज्यों के मध्य संबंध (अनु. 245–263)

▪️ भाग 12 – वित्त, संपति संविदाय व वाद (अनु. 264–300क)



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📕वस्तु एवं सेवा कर (GST)

प्रभावी तिथि –
1 जुलाई 2017
प्रावधान –
101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2016
कर का स्वरूप –
अप्रत्यक्ष कर
GST दरें –
0%, 5%, 12%, 18% और 28%
सबसे पहले GST लागू करने वाला देश –
फ्रांस (1954)
GST से बाहर –
पेट्रोलियम, विद्युत, आबकारी टैक्स

📕 ऐतिहासिक तथ्य

GST का सुझाव –
विजय केलकर टास्क फोर्स (2003)
उद्देश्य – “
एक देश, एक कर” प्रणाली लागू करना

📕 GST परिषद (Article 279A)

अध्यक्ष – केन्द्रीय वित्त मंत्री
उपाध्यक्ष – राज्यों के मंत्री (परिषद द्वारा चुने गए)
सदस्य – कुल 33 (2 केन्द्र से + 31 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से)
वोटिंग पॉवर –
केन्द्र: 1/3
राज्य: 2/3
निर्णय – 3/4 बहुमत से


📕GST में समाहित कर

केन्द्रीय कर
केन्द्रीय उत्पाद शुल्क
सेवा कर
अतिरिक्त/विशेष सीमा शुल्क
राज्य कर
राज्य वैट
बिक्री/व्यापार कर
खरीद कर
विलासिता कर
प्रवेश कर
मनोरंजन कर (स्थानीय को छोड़कर)
विज्ञापन कर
उपकर एवं अधिभार

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UPSSSC

JE Civil 8-Exam/2024

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📕 स्वतंत्रता पश्चात भारत में भूमि सुधार

स्वतंत्रता के समय भारत में कृषि व्यवस्था अत्यंत शोषणकारी थी। बिचौलियों (ज़मींदारों) का वर्चस्व था और किसान मात्र बटाईदार बनकर रह गए थे।

भूमि सुधारों को चार मुख्य स्तंभों में विभाजित किया जा सकता है।

​1. बिचौलियों का उन्मूलन (Abolition of Intermediaries)

​यह भूमि सुधार का पहला और सबसे सफल चरण था। इसका मुख्य उद्देश्य ज़मींदारी प्रथा को समाप्त कर भूमि का स्वामित्व वास्तविक काश्तकारों (किसानों) को देना था।

​प्रमुख अधिनियम: उत्तर प्रदेश ज़मींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 (UP Zamindari Abolition and Land Reforms Act - UPZALR)।
​
परिणाम: इस अधिनियम के माध्यम से लगभग 2 करोड़ काश्तकारों का सीधा संबंध राज्य से स्थापित हुआ। बिचौलियों को हटाकर भूमि का मालिकाना हक किसानों को दिया गया।


​2. काश्तकारी सुधार (Tenancy Reforms)

​जो किसान दूसरों की ज़मीन पर खेती करते थे, उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए तीन स्तरों पर काम किया गया:

​लगान का विनियमन: लगान की दर को फसल के मूल्य के 1/4 या 1/5 भाग तक सीमित किया गया।

​पट्टे की सुरक्षा: किसानों को मनमाने ढंग से बेदखल करने पर रोक लगाई गई

।

​
स्वामित्व का अधिकार: लंबे समय से खेती कर रहे काश्तकारों को ज़मीन खरीदने या स्वामित्व प्राप्त करने का अधिकार दिया गया

।

​3. जोत की सीमा निर्धारण (Ceiling on Land Holdings)

​सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक परिवार के पास अधिकतम भूमि रखने की सीमा तय की गई। अतिरिक्त भूमि (Surplus Land) को भूमिहीन मजदूरों और छोटे किसानों में वितरित करना इसका लक्ष्य था।


​अधिनियम: उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम, 1960 (UP Imposition of Ceiling on Land Holdings Act)।

​संशोधन: 1972-73 में इस सीमा को और कम किया गया ताकि अधिक अधिशेष भूमि प्राप्त की जा सके।

​चुनौती: बेनामी संपत्ति और पारिवारिक बँटवारे के कानूनी दांवपेच के कारण यह चरण पूर्णतः सफल नहीं रहा।


​4. चकबंदी (Consolidation of Holdings)

​किसानों की भूमि छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखरी हुई थी, जिससे वैज्ञानिक खेती संभव नहीं थी। बिखरे हुए खेतों को एक स्थान पर एकत्रित करने की प्रक्रिया 'चकबंदी' कहलाई।


​अधिनियम: उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम, 1953 (UP Consolidation of Holdings Act)।

​लाभ: सिंचाई और प्रबंधन में आसानी।
​मुकदमेबाजी में कमी।
​कृषि उत्पादकता में वृद्धि।

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उत्तर प्रदेश में भूमि सुधारों की दिशा में 'उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006' (UP Revenue Code, 2006) एक मील का पत्थर है। इसने स्वतंत्रता के बाद के दर्जनों जटिल कानूनों (जैसे UPZALR Act 1950) को समाहित कर एक सरल व्यवस्था दी है। इसे 11 फरवरी 2016 से प्रभावी रूप से लागू किया गया।


​1. जोतदारों (Tenure Holders) का सरलीकरण

​इस संहिता के तहत भूमि धारकों को मुख्यतः चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

​संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर (Bhumidhar with Transferable Rights):

इन्हें भूमि पर पूर्ण अधिकार प्राप्त है। ये भूमि बेच सकते हैं, उपहार में दे सकते हैं या बंधक रख सकते हैं।

​असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर

(Bhumidhar with Non-Transferable Rights): इन्हें खेती का अधिकार है, लेकिन ये भूमि बेच नहीं सकते। हालांकि, 5 वर्ष की अवधि के बाद इन्हें संक्रमणीय अधिकार मिल सकते हैं।

​असामी (Asami): ये आमतौर पर पट्टेदार होते हैं जिन्हें विशिष्ट अवधि के लिए भूमि दी जाती है।

​सरकारी पट्टेदार: जिन्हें सरकार द्वारा विशेष उद्देश्यों के लिए भूमि आवंटित की जाती है।

​2. भूमि उपयोग का परिवर्तन (धारा 80)
​
पुराने कानूनों में कृषि भूमि को गैर-कृषि (आवासीय या औद्योगिक) घोषित कराना बहुत कठिन था।

​प्रावधान: अब कृषि भूमि का उपयोग गैर-कृषि कार्य के लिए करने हेतु एसडीएम (SDM) से अनुमति लेने की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बना दिया गया है।
​3. दलितों और पिछड़ों की भूमि का संरक्षण

​भूमिहीनों और कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं:

​धारा 98: अनुसूचित जाति (SC) का व्यक्ति अपनी भूमि गैर-SC व्यक्ति को जिलाधिकारी (DM) की पूर्व अनुमति के बिना नहीं बेच सकता।

​शर्त: अनुमति तभी मिलती है जब विक्रेता के पास बिक्री के बाद कम से कम 1.26 हेक्टेयर भूमि शेष बच रही हो, या कोई गंभीर आपात स्थिति (बीमारी, शिक्षा) हो।

​4. पट्टेदारी (Leasing) में ढील

​पुराने कानूनों में भूमि को पट्टे पर देना (बटाई पर देना) कानूनी रूप से प्रतिबंधित था, जिससे भू-स्वामी को भूमि छिन जाने का डर रहता था।

​नया प्रावधान: अब कोई भी भू-स्वामी अपनी भूमि को खेती के लिए कानूनी रूप से पट्टे पर दे सकता है। इससे 'बटाई' व्यवस्था को कानूनी मान्यता मिली है और भूमि मालिक का स्वामित्व सुरक्षित रहता है।

​5. स्वामित्व और उत्तराधिकार के नियम
​वसीयत:
संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर अपनी भूमि की वसीयत कर सकता है।

​उत्तराधिकार: यदि किसी किसान की मृत्यु बिना वसीयत के होती है, तो उत्तराधिकार की एक स्पष्ट वरीयता सूची (Order of Succession) दी गई है, जिसमें अब बेटियों और विधवाओं के अधिकारों को अधिक स्पष्टता दी गई है।

​6. विवादों का निपटारा और डिजिटल रिकॉर्ड

​राजस्व न्यायालय: मुकदमों के शीघ्र निस्तारण के लिए राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित किया गया है।

​सीमा विवाद (धारा 24): मेड़ या सीमा संबंधी विवादों के लिए SDM को त्वरित पैमाइश कराने का अधिकार दिया गया है।

​डिजिटलीकरण: खतौनी और खसरा का कंप्यूटरीकरण अनिवार्य किया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।



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📕रेयर अर्थ कॉरिडोर

👉 चार राज्य शामिल

👉 ओडिसा,केरला, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु
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असिस्टेंट प्रोफेसर की 18 & 19 अप्रैल को होने वाली परीक्षा के लिए जनपद की अग्रिम सूचना 8 अप्रैल से जारी कर दी जाएगी
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📕 'युवा विज्ञानी कार्यक्रम' (YUVIKA) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा स्कूली बच्चों के लिए आयोजित एक विशेष दो-सप्ताह का आवासीय ग्रीष्मकालीन कार्यक्रम है।

👉 इसका उद्देश्य कक्षा 9 के छात्रों में अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोगों के प्रति रुचि पैदा करना और उन्हें वैज्ञानिक करियर के लिए प्रेरित करना है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए।


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📕 नासा ने चंद्रमा के लिए मानवयुक्त मिशन – आर्टेमिस II भेजा

👉नासा का 50 वर्षों से अधिक समय के बाद चंद्रमा लिए पहला मानवयुक्त मिशन – आर्टेमिस II के ऑरियन अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण हो गया है।

👉 इस अमरीका के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी।

👉दस दिन के इस मिशन में शामिल दल एक मिनीबस के आकार के कैप्सूल में चंद्रमा की परिक्रमा करेगा।



👉इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री –

1 रीड वाइजमैन

2- विक्टर ग्लोवर,

3- क्रिस्टीना कोच

4- कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन शामिल हैं।


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पर्यावरणीय आंदोलन,चिपको आंदोलन
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RO/ARO डॉक्यूमेंट वैरीफिकेशन
15 अप्रैल से प्रारम्भ