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नाटक हमेशा से ही उत्तर प्रदेश की कला का भाग रहे हैं फिर चाहे बृज क्षेत्र में हो रही रास लीला हो या अवध क्षेत्र की रामलीला। नाट्य कला में आइए सबसे पहले जान लेते हैं शास्त्रीय नाटकों के बारे में-

उत्तर प्रदेश में शास्त्रीय नाटक

ऐसा माना जाता है की उत्तरप्रदेश में शास्त्रीय नाटकों की शुरुआत भारतेंदु युग से हुई और भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अपने लिखे हुए नाटकों जैसे 
वैदिक हिंसा हिंसा न भवति, सत्य हरिश्चंद्र, अंधेर नगरी, भारत दुर्दशा

 के माध्यम से समाज के तत्कालीन विषयों पर चुटीले प्रहार किए। इतिहास में थोड़ा और पीछे जाए तो लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह जो की एक लेखक भी थे उनके द्वारा लिखा गया एक नाटक 
राधा कन्हैया का किस्सा

 और सैय्यद आगाहसन का लिखा हुआ 
इंद्रसभा

 
नाटक भारतेंदु हरिश्चंद्र के युग के पहले से विद्यमान थे। उत्तर प्रदेश के अन्य प्रसिद्ध नाटककारों में भारतेंदु जी के पिता बाबू गोपाल चंद्र जी ने 
नहुष

 
नाम का नाटक लिखा था जिसे विशुद्ध नाटक रीति में लिखा गया पहला नाटक माना जाता है। वही शीतला प्रसाद त्रिपाठी द्वारा लिखें गए 
जानकी मंगल

 को आधुनिक शैली में प्रदर्शित पहला नाटक माना जाता है ।
उत्तर प्रदेश में लोक नाटक

ये तो थी शास्त्रीय नाटकों की बात पर उत्तर प्रदेश में शास्त्रीय नाटकों से ज्यादा प्रसिद्ध यहां के लोक नाटक हुए। लोक नाटकों की उत्पत्ति का कोई निश्चित समय नहीं है क्योंकि ये समय के साथ धीरे-धीरे ऐतिहासिक रूप से आम लोगों द्वारा विकसित किए गए। रामलीला और रास लीला जैसे लोक नाट्य तो हजारों साल से उत्तर प्रदेश में किए जा रहे हैं हां समय के साथ उनके प्रदर्शन में बदलाव जरूर आया है। जिनमे बड़ी-बड़ी लाइट्स आधुनिक मंचों और म्यूजिक सिस्टम ने बड़ी भूमिका निभाई है। उत्तर प्रदेश के लोक नाट्यों में 
नौटंकी, रामलीला , रासलीला, गुलाबो सिताबो, स्वांग, बिदेसिया और भगत

 जैसे नाट्य शामिल हैं।
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UPPSC द्वारा लगभग 15,000 पदों पर भर्तियाँ सम्पन्न की जाएंगी

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उत्तर प्रदेश में वन्यजीव अभयारण्यों की सूची👇👇

• बखिरा अभ्यारण्य - संतकबीरनगर
• चंद्र प्रभा अभयारण्य - चंदौली
• कछुआ अभयारण्य - वाराणसी
• कैमूर अभयारण्य - मिर्ज़ापुर & सोनभद्र
• कतर्नियाघाट अभयारण्य - बहराईच
• किशनपुर अभयारण्य - लखीमपुर खीरी
• लाख बहोसी अभयारण्य - कन्नौज
• महावीर स्वामी अभयारण्य - ललितपुर
• राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य - आगरा, इटावा
• नवाबगंज पक्षी अभयारण्य -  उन्नाव
• पार्वती अरगा अभयारण्य - गोंडा
• ओखला अभयारण्य - गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर
• पटना अभयारण्य - एटा
• रानीपुर अभयारण्य - बांदा, चित्रकूट
• समन अभयारण्य - मैनपुरी
• समसपुर अभयारण्य - रायबरेली
• सांडी अभयारण्य - हरदोई
• सोहागी बरवा अभयारण्य - महाराजगंज
• सुहेलवा अभयारण्य - बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती
• सूर सरोवर अभयारण्य - आगरा
• सुरहा ताल अभयारण्य - बलिया
• विजय सागर अभयारण्य - महोबा


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U.P के प्रमुख मेले व आयोजन स्थल

• बटेश्वर मेला (पशु) - आगरा
• नौचंदी - मेरठ
• ददरी मेला (पशु) - बलिया
• गढ़‌मुक्तेश्वर मेला - हापुड़
• हरिदास जयंती - निधिवन, वृंदावन
• देवा शरीफ - बाराबंकी
• सैयद सालार मेला - बहराइच
• गोलागोकर्ण नाथ - खीरी
• नककटैया मेला - वाराणसी
• शाकुंभरी देवी - सहासपुर
• गोविन्द साहब - अम्बेडकर नगर
• खिचड़ी मेला - गोरखपुर
• चैत्र रामनवमी मेला - अयोध्या
• हिन्दू-मुस्लिम एकता का सुलह कुल महोत्सव - आगरा

• त्रिवेणी महोत्सव - प्रयागराज
• ताज महोत्सव - आगरा
• कबीर महोत्सव मगहर - संतकबीरनगर


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उत्तर प्रदेश में प्रमुख हवाई अड्‌डे ⬇️⬇️

• चौ० चरण सिंह अंतर्रा. हवाई अड्‌डा अमौसी - लखनऊ

• लालबहादुर शास्त्री बावतपुर अंत हवाई अड्डा - वाराणसी

• खेरिया हवाई अड्‌डा - आगरा

• बमरौली हवाई अड्‌डा - प्रयागराज

• चकेरी हवाई अड्‌डा - कानपुर

• फुरसतगंज हवाई अड्‌डा - रायबरेली

• हिंडन हवाई अड्‌डा - गाजियाबाद

• डा. अम्बेडकर अंत. हवाई अड्‌डा - मेरठ

• सरसावा अंतर्राष्ट्रीय हावाई अड्‌डा - सहारनपुर

• नागरिक उड्‌ड्‌यन प्रशिक्षण केन्द्र - बमरौली. (प्रयाग)

• नेशनल पैराशूट ट्रेनिंग कालेज - आगरा

• इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड्‌डयन अकादमी-फुरसतगंज



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📕लेखपाल फीस पेमेंट लिंक जारी

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पश्चिम बंगाल में तो खेला हो गया

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📕प्रमुख क्षेत्रीय वर्षा के नाम और उनके विवरण नीचे दिए गए हैं:

​1. आम्र वर्षा (Mango Showers)
​यह वर्षा मुख्य रूप से केरल और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में मानसून से पहले (Pre-monsoon) होती है।

​महत्व: यह वर्षा आम की फसल को जल्दी पकाने में मदद करती है, इसलिए इसे 'आम्र वर्षा' कहा जाता है।


​2. फूलों वाली बौछार (Blossom Showers)

​यह भी मानसून पूर्व वर्षा का एक प्रकार है जो मुख्य रूप से केरल और उसके आसपास के क्षेत्रों में होती है।
​महत्व: यह कॉफी के फूलों के खिलने के लिए अत्यंत लाभदायक होती है, इसीलिए इसे 'चेरी ब्लॉसम' या फूलों वाली बौछार कहते हैं।



​3. काल बैसाखी (Kaal Baisakhi)

​यह पश्चिम बंगाल और असम में वैशाख के महीने में होने वाली तीव्र कड़क और गरज के साथ वर्षा है।

​प्रकृति: यह वर्षा अक्सर विनाशकारी तूफानों के साथ आती है, लेकिन चाय, जूट और चावल की खेती के लिए काफी उपयोगी मानी जाती है।

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असम में नाम: असम में इसे 'बारदोली छीड़ा' (Bordoisila) के नाम से जाना जाता है।

​4. लू (Loo) और धूल भरी आँधी


​उत्तर-पश्चिम भारत (जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, और राजस्थान) में गर्मियों में चलने वाली गर्म और शुष्क हवाओं के बाद कभी-कभी हल्की वर्षा होती है। इसे स्थानीय स्तर पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

नोट:
'मावट' वह वर्षा है जो सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण उत्तर भारत में होती है, जो रबी की फसलों के लिए 'सुनहरी बूंदों' की तरह काम करती है।



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📕जलोढ़ मिट्टी दो प्रकार की होती है:

👉 खादर, बांगर. 

👉खादर,
नई जलोढ़ मिट्टी होती है, जो हर साल बाढ़ के कारण जमा होती है

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👉 बांगर,
पुरानी जलोढ़ मिट्टी होती है।


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