22 जुलाई राष्ट्रीय ध्वज दिवस है इसी दिन 1947 में भारत की संविधान सभा ने वर्तमान तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया था इसलिए यह तारीख भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखती है।
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CET फॉर्म अप्लाई करने की 23 जुलाई लास्ट डेट है।
🌟 राज. इतिहास
किस प्रतिहार शासक ने पालों और भीलों के उपद्रव से तंग आकर उनके गाँवों को जलाकर नष्ट किया था।
किस प्रतिहार शासक ने पालों और भीलों के उपद्रव से तंग आकर उनके गाँवों को जलाकर नष्ट किया था।
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राजस्थान में पंचायत चुनाव की अधिसूचना 23 सितंबर 2026 को जारी होगी...🙄
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RPSC 2ND GRADE EXAM 2026 GK GROUP - A में पूछा गया प्रश्न ✍️
FROM MARGIN TO MAINSTREAM MEMORIES पुस्तक के लेखक - राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया
- @ARENAOFCONCEPTSTUDY
FROM MARGIN TO MAINSTREAM MEMORIES पुस्तक के लेखक - राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया
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Arena of Concept Study With Bhanwar️™
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मैंने अब तक राजस्थान में शायद ही कोई ऐसा शिक्षक देखा हो जो पुस्तक लिखने के बाद भी उसी समर्पण और निरंतरता के साथ विद्यार्थियों के लिए मेहनत करता रहे।
किताब लिखते समय हर लेखक अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करता है, लेकिन अक्सर वह मेहनत पुस्तक प्रकाशित होने तक ही सीमित रह जाती है।
ऐसे समय में भंवर जी सर एक अलग उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कई महीनों की कड़ी मेहनत से राजस्थान भूगोल एवं अर्थव्यवस्था की उत्कृष्ट पुस्तक तैयार की, लेकिन यहीं नहीं रुके।
हर परीक्षा के बाद उन्होंने अपनी पुस्तक का परिणाम पूरी पारदर्शिता के साथ विद्यार्थियों के सामने रखा। उस दौर में भी, जब कई संस्थान और शिक्षक परिणामों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं।
यही एक सच्चे शिक्षक की पहचान है। सिर्फ पुस्तक बेचना नहीं, बल्कि अपने काम की ईमानदारी से जवाबदेही निभाना।
आपकी इस मेहनत, ईमानदारी और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण को मेरा सलाम 🙌
किताब लिखते समय हर लेखक अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करता है, लेकिन अक्सर वह मेहनत पुस्तक प्रकाशित होने तक ही सीमित रह जाती है।
ऐसे समय में भंवर जी सर एक अलग उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कई महीनों की कड़ी मेहनत से राजस्थान भूगोल एवं अर्थव्यवस्था की उत्कृष्ट पुस्तक तैयार की, लेकिन यहीं नहीं रुके।
हर परीक्षा के बाद उन्होंने अपनी पुस्तक का परिणाम पूरी पारदर्शिता के साथ विद्यार्थियों के सामने रखा। उस दौर में भी, जब कई संस्थान और शिक्षक परिणामों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं।
यही एक सच्चे शिक्षक की पहचान है। सिर्फ पुस्तक बेचना नहीं, बल्कि अपने काम की ईमानदारी से जवाबदेही निभाना।
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