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2nd Grade Psychology || PYQ BASED Crash Course || (Live From Studio Room) -2025
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रुचि/ interest By Dr. Dheer Singh Dhabhai #motivation #changeyourmindse...
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रुचि/ interest By Dr. Dheer Singh Dhabhai #motivation #changeyourmindsetchangeyourlife
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संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख पहल के रूप में सरकार ने ज्ञान भारतम मिशन शुरू किया है। इसका उद्देश्य देश भर के शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में स्थित एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण, संरक्षण, डिजिटलीकरण करके उन्हें सुलभ बनाना है। ज्ञान भारतम मिशन की शुरुआत केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई थी। इसकी घोषणा जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो शो ‘मन की बात’ के 124वें एपिसोड के दौरान की।
4 अगस्त से विधिवत शुरू
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NISAR मिशन: भारत-अमेरिका की ऐतिहासिक अंतरिक्ष साझेदारी
NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar (NISAR) मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण और पृथ्वी अवलोकन के क्षेत्र में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक अभूतपूर्व सहयोग का प्रतीक है। यह मिशन 30 जुलाई 2025 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ISRO के GSLV-F16 रॉकेट द्वारा सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह पहली बार है जब दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों—NASA और ISRO—ने संयुक्त रूप से हार्डवेयर विकास के साथ एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह तैयार किया है।
NISAR की प्रमुख विशेषताएं और उपलब्धियां:
विश्व का पहला डुअल-बैंड रडार उपग्रह:
NISAR दुनिया का पहला उपग्रह है जो L-बैंड (1.25 GHz, 24 सेमी तरंगदैर्ध्य, NASA द्वारा प्रदान) और S-बैंड (3.20 GHz, 12 सेमी तरंगदैर्ध्य, ISRO द्वारा प्रदान) Synthetic Aperture Radar (SAR) तकनीक का उपयोग करता है। यह डुअल-फ्रीक्वेंसी रडार प्रणाली पृथ्वी की सतह पर सूक्ष्म परिवर्तनों (सेंटीमीटर स्तर तक) को मापने में सक्षम है।
SweepSAR तकनीक का उपयोग करके यह उपग्रह 240 किमी की चौड़ाई वाले क्षेत्र को उच्च रिज़ॉल्यूशन (3-10 मीटर) के साथ स्कैन करता है, जो इसे बड़े क्षेत्रों को कवर करने और विस्तृत छवियां प्रदान करने में अद्वितीय बनाता है।
वैश्विक कवरेज और बार-बार निगरानी:
NISAR प्रत्येक 12 दिनों में पृथ्वी की पूरी सतह को स्कैन करता है, जिससे यह पारिस्थितिकी तंत्र, बर्फ की चादरें, ग्लेशियर, समुद्र तल वृद्धि, भूजल, और प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी, और भूस्खलन की निगरानी के लिए समयबद्ध और सुसंगत डेटा प्रदान करता है।
यह उपग्रह विशेष रूप से दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्रों, जैसे अंटार्कटिका की क्रायोस्फीयर, का अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो अन्य रडार उपग्रहों द्वारा कम कवर किए जाते हैं।
विविध अनुप्रयोग:
प्राकृतिक आपदा प्रबंधन: NISAR भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, भूस्खलन, और बाढ़ जैसी आपदाओं के लिए निकट-वास्तविक समय में डेटा प्रदान करता है, जिससे आपदा प्रतिक्रिया और पूर्वानुमान में सुधार होता है।
कृषि और संसाधन प्रबंधन: यह फसल की स्थिति, मिट्टी की नमी, और वन बायोमास की निगरानी में मदद करता है, जो खाद्य सुरक्षा और जल संसाधन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
जलवायु परिवर्तन अध्ययन: ग्लेशियर गति, बर्फ की चादरों की गतिशीलता, और पारिस्थितिकी तंत्र परिवर्तनों का अध्ययन करके यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में योगदान देता है।
खुली डेटा नीति:
NISAR का डेटा 1-2 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगा, और आपातकालीन स्थिति में कुछ घंटों के भीतर। यह नीति वैश्विक वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए डेटा को सुलभ बनाती है।
NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar (NISAR) मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण और पृथ्वी अवलोकन के क्षेत्र में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक अभूतपूर्व सहयोग का प्रतीक है। यह मिशन 30 जुलाई 2025 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ISRO के GSLV-F16 रॉकेट द्वारा सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह पहली बार है जब दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों—NASA और ISRO—ने संयुक्त रूप से हार्डवेयर विकास के साथ एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह तैयार किया है।
NISAR की प्रमुख विशेषताएं और उपलब्धियां:
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NISAR दुनिया का पहला उपग्रह है जो L-बैंड (1.25 GHz, 24 सेमी तरंगदैर्ध्य, NASA द्वारा प्रदान) और S-बैंड (3.20 GHz, 12 सेमी तरंगदैर्ध्य, ISRO द्वारा प्रदान) Synthetic Aperture Radar (SAR) तकनीक का उपयोग करता है। यह डुअल-फ्रीक्वेंसी रडार प्रणाली पृथ्वी की सतह पर सूक्ष्म परिवर्तनों (सेंटीमीटर स्तर तक) को मापने में सक्षम है।
SweepSAR तकनीक का उपयोग करके यह उपग्रह 240 किमी की चौड़ाई वाले क्षेत्र को उच्च रिज़ॉल्यूशन (3-10 मीटर) के साथ स्कैन करता है, जो इसे बड़े क्षेत्रों को कवर करने और विस्तृत छवियां प्रदान करने में अद्वितीय बनाता है।
वैश्विक कवरेज और बार-बार निगरानी:
NISAR प्रत्येक 12 दिनों में पृथ्वी की पूरी सतह को स्कैन करता है, जिससे यह पारिस्थितिकी तंत्र, बर्फ की चादरें, ग्लेशियर, समुद्र तल वृद्धि, भूजल, और प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी, और भूस्खलन की निगरानी के लिए समयबद्ध और सुसंगत डेटा प्रदान करता है।
यह उपग्रह विशेष रूप से दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्रों, जैसे अंटार्कटिका की क्रायोस्फीयर, का अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो अन्य रडार उपग्रहों द्वारा कम कवर किए जाते हैं।
विविध अनुप्रयोग:
प्राकृतिक आपदा प्रबंधन: NISAR भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, भूस्खलन, और बाढ़ जैसी आपदाओं के लिए निकट-वास्तविक समय में डेटा प्रदान करता है, जिससे आपदा प्रतिक्रिया और पूर्वानुमान में सुधार होता है।
कृषि और संसाधन प्रबंधन: यह फसल की स्थिति, मिट्टी की नमी, और वन बायोमास की निगरानी में मदद करता है, जो खाद्य सुरक्षा और जल संसाधन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
जलवायु परिवर्तन अध्ययन: ग्लेशियर गति, बर्फ की चादरों की गतिशीलता, और पारिस्थितिकी तंत्र परिवर्तनों का अध्ययन करके यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में योगदान देता है।
खुली डेटा नीति:
NISAR का डेटा 1-2 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगा, और आपातकालीन स्थिति में कुछ घंटों के भीतर। यह नीति वैश्विक वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए डेटा को सुलभ बनाती है।
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