⭕️ आजाद हिंद फौज (INA) के प्रमुख तथ्य:
✔️ इंडियन इंडिपेंडेंस लीग: 28-30 मार्च 1942 को टोक्यो (जापान) में रासबिहारी बोस के नेतृत्व में इसका गठन हुआ।
✔️स्थापना का विचार: 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' (INA) की स्थापना का विचार सबसे पहले कैप्टन मोहन सिंह के मन में आया था।
✔️ प्रथम डिवीजन का गठन: 1 सितंबर 1942 को INA का औपचारिक गठन हुआ। कैप्टन मोहन सिंह इसके प्रथम सेनापति बने।
✔️ सुभाष चंद्र बोस का आगमन: रासबिहारी बोस के निमंत्रण पर 13 जून 1943 को सुभाष चंद्र बोस बैंकाक आए और INA के नेता बने।
✔️ कमान का हस्तांतरण: 4 जुलाई 1943 को रासबिहारी बोस ने आजाद हिंद फौज की कमान पूरी तरह सुभाष चंद्र बोस को सौंप दी।
✔️ अस्थायी सरकार का गठन: 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में 'स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार' (आजाद हिंद सरकार) की स्थापना की।
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✔️ इंडियन इंडिपेंडेंस लीग: 28-30 मार्च 1942 को टोक्यो (जापान) में रासबिहारी बोस के नेतृत्व में इसका गठन हुआ।
✔️स्थापना का विचार: 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' (INA) की स्थापना का विचार सबसे पहले कैप्टन मोहन सिंह के मन में आया था।
✔️ प्रथम डिवीजन का गठन: 1 सितंबर 1942 को INA का औपचारिक गठन हुआ। कैप्टन मोहन सिंह इसके प्रथम सेनापति बने।
✔️ सुभाष चंद्र बोस का आगमन: रासबिहारी बोस के निमंत्रण पर 13 जून 1943 को सुभाष चंद्र बोस बैंकाक आए और INA के नेता बने।
✔️ कमान का हस्तांतरण: 4 जुलाई 1943 को रासबिहारी बोस ने आजाद हिंद फौज की कमान पूरी तरह सुभाष चंद्र बोस को सौंप दी।
✔️ अस्थायी सरकार का गठन: 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में 'स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार' (आजाद हिंद सरकार) की स्थापना की।
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प्रमुख प्रथम समाचार पत्र/संस्थापक /स्थान और उनके विशेष तथ्य
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❇️ कोशिका झिल्ली
✔️ प्लाज्मा झिल्ली या कोशिका झिल्ली एक अर्द्ध पारगम्य झिल्ली है, जो प्रत्येक सजीव कोशिका के जीवद्रव्य को घेरे रहती है।
✔️ वर्ष 1950 के इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की खोज के बाद कोशिका झिल्ली की विस्तृत संरचना का ज्ञान संभव हो सका है। इस बीच मनुष्य की लाल रक्तकणिकाओं की कोशिका झिल्ली के रासायनिक अध्ययन के बाद जीवद्रव्यझिल्ली की संभावित संरचना के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकी।
✔️ कोशिका झिल्ली में प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। विभिन्न कोशिकाओं में प्रोटीन व लिपिड का अनुपात भिन्न-भिन्न होता है। मनुष्य की रुधिराणु (इरीथ्रोसाइट)की झिल्ली में लगभग 52 प्रतिशत प्रोटीन व 40 प्रतिशत लिपित मिलता है।
✔️ कोशिका झिल्ली का उन्नत नमूना 1972 में सिंगर व निकोल्सन द्वारा प्रतिपादित किया गया जिसे तरल किर्मीर नमूना के रूप में स्वीकार कर लिया गया।
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✔️ प्लाज्मा झिल्ली या कोशिका झिल्ली एक अर्द्ध पारगम्य झिल्ली है, जो प्रत्येक सजीव कोशिका के जीवद्रव्य को घेरे रहती है।
✔️ वर्ष 1950 के इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की खोज के बाद कोशिका झिल्ली की विस्तृत संरचना का ज्ञान संभव हो सका है। इस बीच मनुष्य की लाल रक्तकणिकाओं की कोशिका झिल्ली के रासायनिक अध्ययन के बाद जीवद्रव्यझिल्ली की संभावित संरचना के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकी।
✔️ कोशिका झिल्ली में प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। विभिन्न कोशिकाओं में प्रोटीन व लिपिड का अनुपात भिन्न-भिन्न होता है। मनुष्य की रुधिराणु (इरीथ्रोसाइट)की झिल्ली में लगभग 52 प्रतिशत प्रोटीन व 40 प्रतिशत लिपित मिलता है।
✔️ कोशिका झिल्ली का उन्नत नमूना 1972 में सिंगर व निकोल्सन द्वारा प्रतिपादित किया गया जिसे तरल किर्मीर नमूना के रूप में स्वीकार कर लिया गया।
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⭕️ अशोक मेहता समिति
गठन — दिसंबर, 1977
✔️ दिसंबर, 1977 में जनता पार्टी की सरकार ने अशोक मेहता की अध्यक्षता में पंचायती राज संस्थाओं पर एक समिति का गठन किया। इस समिति ने अगस्त 1978 में अपनी रिपोर्ट सौंपी और देश में पतनोन्मुख पंचायती राज पद्धति को पुनर्जीवित और मजबूत करने हेतु 132 सिफारिशें की। कुछ प्रमुख सिफारिशें -
👉 त्रिस्तरीय व्यवस्था के स्थान द्विस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
👉 विकेंद्रीकरण का प्रथम बिंदु "जिला" होना चाहिए।
👉जिला परिषद को कार्यकारिणी संस्था और पंचायती राज की मौलिक इकाई के रूप में विकसित किया जाए।
👉राजनीतिक पार्टियां आधिकारिक रूप से भागीदारी करें।
👉पंचायती राज संस्थाओं के पास कराधान की शक्तियाँ अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
👉नियमित सामाजिक लेखा परीक्षा होनी चाहिए।
👉यदि पंचायती राज संस्थाओं को भंग किया जाता है तो नए निर्वाचन छह महीने के भीतर हो जाने चाहिए।
👉हर राज्य में एक पंचायती राज मंत्री की नियुक्ति की जानी चाहिए।
👉एस.सी और एस.टी के लिए आरक्षण के उपबंध किये जाने चाहिए।
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गठन — दिसंबर, 1977
✔️ दिसंबर, 1977 में जनता पार्टी की सरकार ने अशोक मेहता की अध्यक्षता में पंचायती राज संस्थाओं पर एक समिति का गठन किया। इस समिति ने अगस्त 1978 में अपनी रिपोर्ट सौंपी और देश में पतनोन्मुख पंचायती राज पद्धति को पुनर्जीवित और मजबूत करने हेतु 132 सिफारिशें की। कुछ प्रमुख सिफारिशें -
👉 त्रिस्तरीय व्यवस्था के स्थान द्विस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
👉 विकेंद्रीकरण का प्रथम बिंदु "जिला" होना चाहिए।
👉जिला परिषद को कार्यकारिणी संस्था और पंचायती राज की मौलिक इकाई के रूप में विकसित किया जाए।
👉राजनीतिक पार्टियां आधिकारिक रूप से भागीदारी करें।
👉पंचायती राज संस्थाओं के पास कराधान की शक्तियाँ अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
👉नियमित सामाजिक लेखा परीक्षा होनी चाहिए।
👉यदि पंचायती राज संस्थाओं को भंग किया जाता है तो नए निर्वाचन छह महीने के भीतर हो जाने चाहिए।
👉हर राज्य में एक पंचायती राज मंत्री की नियुक्ति की जानी चाहिए।
👉एस.सी और एस.टी के लिए आरक्षण के उपबंध किये जाने चाहिए।
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