Bihar CET B.Ed - 2026 official
✅बीएड में 4th,5th एवं 6th मेरिट लिस्ट के से नामांकन हेतु ऑफिसियल वेबसाइट पर जानकारी update कर दी गईं है :
✅पोर्टल पर रिक्त सीटों की लिस्ट प्रदर्शित करने की तिथि - 28 जुलाई 2026
✅गैर पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए पंजीकरण एवं कॉलेज चॉइस फिलिंग / पंजीकृत अनामांकित अभ्यर्थियों के लिए कॉलेज विकल्प EDIT करने की तिथि - 28 से 30 जुलाई 2026
✅बीएड में 4th,5th एवं 6th मेरिट लिस्ट के से नामांकन हेतु ऑफिसियल वेबसाइट पर जानकारी update कर दी गईं है :
✅पोर्टल पर रिक्त सीटों की लिस्ट प्रदर्शित करने की तिथि - 28 जुलाई 2026
✅गैर पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए पंजीकरण एवं कॉलेज चॉइस फिलिंग / पंजीकृत अनामांकित अभ्यर्थियों के लिए कॉलेज विकल्प EDIT करने की तिथि - 28 से 30 जुलाई 2026
⭕️ ₹10 और ₹20 के पॉलिमर नोटों को सरकार की मंजूरी
भारत सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलिमर बैंक नोट जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
मुख्य बिंदु:
👉 RBI ने ₹10 और ₹20 के 100-100 करोड़ (1 बिलियन) पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल (मैदानी परीक्षण) का प्रस्ताव सरकार को भेजा था।
👉लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लिखित उत्तर में इसकी जानकारी दी।
👉फील्ड ट्रायल सफल होने के बाद इन मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों का नियमित प्रचलन (Regular Circulation) शुरू किया जाएगा।
⭕️ “सारनाथ का प्राचीन बौद्ध स्थल” यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल (भारत में कुल 45 धरोहर स्थल)
✍️ 25 जुलाई 2026 को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत 2025-26 चक्र के लिए भारत की आधिकारिक दावेदारी वाले “सारनाथ के प्राचीन बौद्ध स्थल” को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया।
✍️ यह सम्मान पाने वाली यह भारत की 45वीं धरोहर बन गई है। यह वैश्विक सम्मान भारत की लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाता है और वास्तुकला की उत्कृष्टता, क्षेत्रीय पहचान और ऐतिहासिक निरंतरता की विविध परंपराओं को प्रदर्शित करता है।
✍️ सारनाथ के प्राचीन स्थल को 1998 में विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल किया गया था। इस जगह को विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव जनवरी 2025 में विश्व धरोहर समिति के विचार के लिए भेजा गया था।
⭕️ प्राचीन बौद्ध स्थल, सारनाथ -
✍️ इस सूची में शामिल स्थल के दो भाग हैं – चौखंडी स्तूप और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष (धमेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार, अशोक स्तंभ, आदि), जो उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित हैं। ये दोनों हिस्से मिलकर सारनाथ के प्राचीन स्थल के वास्तुशिल्प और पुरातात्विक अवशेषों को संजोए हुए हैं।
✍️ बौद्ध परंपरा में इस स्थल को अलग-अलग नामों, ऋषिपत्तन, इषिपत्तन, मृगदाव के नाम से जाना जाता है। ये सभी नाम एक पवित्र स्थान की ओर इशारा करते हैं, जहाँ छठी शताब्दी ईसा पूर्व में बुद्ध आए थे और उन्होंने अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे 'धर्म के पहिये का घूमना' (धर्मचक्र प्रवर्तन ) कहा जाता है। इसी घटना से बौद्ध संघ की शुरुआत हुई और आर्य अष्टांगिक मार्ग के सिद्धांतों की स्थापना हुई।
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Bpsc official syllabus and new exam pattern se samjhe bpsc ki taiyari kaise kare ?
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