चुनाव सुधार से संबंधित प्रमुख समितियाँ
1. तारकुंडे समिति (1974)
मुख्य सिफारिश: निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति की सलाह पर किए जाने की सिफारिश की।
2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990)
मुख्य उद्देश्य: भारत में चुनाव सुधारों के सुझाव देने के लिए गठित की गई। इसकी कुछ प्रमुख सिफारिशों को 1996 में लागू किया गया।
3. वोहरा समिति (1993)
मुख्य उद्देश्य: अपराध और राजनीति के बीच गठजोड़ की जाँच करने के लिए गठित की गई।
4. इंद्रजीत गुप्ता समिति (1998)
मुख्य उद्देश्य: चुनावों के लिए राज्य द्वारा वित्त पोषण (State Funding of Elections) के विचार पर ध्यान केंद्रित किया।
5. भारतीय विधि आयोग की 170वीं रिपोर्ट (1999)
मुख्य उद्देश्य: भारत के चुनावी कानूनों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
6. तन्खा समिति (2010)
मुख्य उद्देश्य: चुनाव कानूनों एवं चुनाव सुधारों की समीक्षा करने तथा उनमें आवश्यक संशोधनों की सिफारिश करने के लिए गठित एक कोर समिति।
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1. तारकुंडे समिति (1974)
मुख्य सिफारिश: निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति की सलाह पर किए जाने की सिफारिश की।
2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990)
मुख्य उद्देश्य: भारत में चुनाव सुधारों के सुझाव देने के लिए गठित की गई। इसकी कुछ प्रमुख सिफारिशों को 1996 में लागू किया गया।
3. वोहरा समिति (1993)
मुख्य उद्देश्य: अपराध और राजनीति के बीच गठजोड़ की जाँच करने के लिए गठित की गई।
4. इंद्रजीत गुप्ता समिति (1998)
मुख्य उद्देश्य: चुनावों के लिए राज्य द्वारा वित्त पोषण (State Funding of Elections) के विचार पर ध्यान केंद्रित किया।
5. भारतीय विधि आयोग की 170वीं रिपोर्ट (1999)
मुख्य उद्देश्य: भारत के चुनावी कानूनों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
6. तन्खा समिति (2010)
मुख्य उद्देश्य: चुनाव कानूनों एवं चुनाव सुधारों की समीक्षा करने तथा उनमें आवश्यक संशोधनों की सिफारिश करने के लिए गठित एक कोर समिति।
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विश्व के चक्रवात और उनके क्षेत्रीय नाम
क्र. सं. चक्रवात का नाम क्षेत्र संबंधित देश / क्षेत्रीय नाम
1. साइक्लोन (Cyclone) भारतीय महासागर (अरब सागर, बंगाल की खाड़ी) भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका आदि में प्रयुक्त नाम
2. हरिकेन (Hurricane) उत्तरी अटलांटिक महासागर, पूर्वी प्रशांत महासागर अमेरिका, कैरिबियन, मैक्सिको, मध्य अमेरिका
3. टाइफून (Typhoon) पश्चिमी प्रशांत महासागर चीन, जापान, फिलीपींस, कोरिया
4. विली-विली (Willy-Willy) ऑस्ट्रेलिया ऑस्ट्रेलियाई तटों पर आने वाले चक्रवातों का पारंपरिक नाम
5. उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone) दक्षिणी हिंद महासागर मेडागास्कर, मॉरीशस, रीयूनियन द्वीप आदि क्षेत्र
6. बगुइओ (Baguio) फिलीपींस (स्थानीय नाम)
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क्र. सं. चक्रवात का नाम क्षेत्र संबंधित देश / क्षेत्रीय नाम
1. साइक्लोन (Cyclone) भारतीय महासागर (अरब सागर, बंगाल की खाड़ी) भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका आदि में प्रयुक्त नाम
2. हरिकेन (Hurricane) उत्तरी अटलांटिक महासागर, पूर्वी प्रशांत महासागर अमेरिका, कैरिबियन, मैक्सिको, मध्य अमेरिका
3. टाइफून (Typhoon) पश्चिमी प्रशांत महासागर चीन, जापान, फिलीपींस, कोरिया
4. विली-विली (Willy-Willy) ऑस्ट्रेलिया ऑस्ट्रेलियाई तटों पर आने वाले चक्रवातों का पारंपरिक नाम
5. उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone) दक्षिणी हिंद महासागर मेडागास्कर, मॉरीशस, रीयूनियन द्वीप आदि क्षेत्र
6. बगुइओ (Baguio) फिलीपींस (स्थानीय नाम)
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फटाफट रिवीजन सीरीज – विज्ञान
(टॉप 10 वनलाइनर)
1. रक्त में शर्करा का स्तर सामान्यतया मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (mg/dL) के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।
2. दूध का खट्टा होना लैक्टिक अम्ल के कारण होता है।
3. न्यूट्रिनो एक ऐसा कण है, जिस पर शून्य आवेश होता है।
4. रेडियोधर्मिता एक नाभिकीय गुण है तथा हाइड्रोजन बम नाभिकीय संलयन के सिद्धांत पर आधारित है।
5. रिंगेलमैन स्केल का प्रयोग धुएँ के घनत्व के मापन में होता है।
6. वायुमंडल में प्रकाश के प्रसार (प्रकीर्णन) का मुख्य कारण धूल कण हैं।
7. विश्व का पहला हृदय प्रत्यारोपण डॉ. क्रिश्चियन बर्नार्ड ने किया था।
8. कार्बोहाइड्रेट में नाइट्रोजन एक आवश्यक अवयव नहीं होता है।
9. क्लोरोफिल, आर.एन.ए. और डी.एन.ए. में नाइट्रोजन होता है।
10. शीत प्रकोष्ठ में फल भंडारण से उनका भंडारण जीवन बढ़ जाता है, क्योंकि वहाँ श्वसन दर का ह्रास हो जाता है।
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(टॉप 10 वनलाइनर)
1. रक्त में शर्करा का स्तर सामान्यतया मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (mg/dL) के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।
2. दूध का खट्टा होना लैक्टिक अम्ल के कारण होता है।
3. न्यूट्रिनो एक ऐसा कण है, जिस पर शून्य आवेश होता है।
4. रेडियोधर्मिता एक नाभिकीय गुण है तथा हाइड्रोजन बम नाभिकीय संलयन के सिद्धांत पर आधारित है।
5. रिंगेलमैन स्केल का प्रयोग धुएँ के घनत्व के मापन में होता है।
6. वायुमंडल में प्रकाश के प्रसार (प्रकीर्णन) का मुख्य कारण धूल कण हैं।
7. विश्व का पहला हृदय प्रत्यारोपण डॉ. क्रिश्चियन बर्नार्ड ने किया था।
8. कार्बोहाइड्रेट में नाइट्रोजन एक आवश्यक अवयव नहीं होता है।
9. क्लोरोफिल, आर.एन.ए. और डी.एन.ए. में नाइट्रोजन होता है।
10. शीत प्रकोष्ठ में फल भंडारण से उनका भंडारण जीवन बढ़ जाता है, क्योंकि वहाँ श्वसन दर का ह्रास हो जाता है।
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नागरिकता
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भारतीय संविधान के भाग
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🔳 आंग्ल–मराठा काल की प्रमुख संधियाँ
1. सूरत की संधि (7 मार्च, 1775 ई.)
🔹 बंबई की अंग्रेजी सरकार ने गवर्नर जनरल और उसकी काउंसिल की अनुमति के बिना रघुनाथ राव (राघोबा) को पेशवा बनाने के उद्देश्य से 1775 ई. में ‘सूरत की संधि’ कर डाली।
2. पुरंदर की संधि (1 मार्च, 1776 ई.)
🔹 बंगाल स्थित कलकत्ता काउंसिल ने बंबई सरकार द्वारा की गई सूरत की संधि को मान्यता देने से इनकार कर दिया।
🔹 इसके बाद, वारेन हेस्टिंग्स ने अपनी ओर से कर्नल अप्टन को पूना दरबार भेजा, जहाँ उन्होंने पुरंदर की संधि की।
3. वड़गाँव की संधि (1779 ई.)
🔹 1779 ई. में वड़गाँव की संधि उस समय हुई, जब बंबई सरकार ने बिना गवर्नर जनरल की अनुमति के मराठों से संघर्ष आरंभ किया।
4. सालबाई की संधि (1782 ई.)
🔹 महादजी सिंधिया, जो मराठा संघ के नेतृत्व की महत्वाकांक्षा रखता था, अब अंग्रेजों से समझौते की दिशा में झुकाव दिखाने लगा।
🔹 अंततः, मराठा संघ और अंग्रेजों के बीच सन् 1782 ई. में ‘सालबाई की संधि’ संपन्न हुई।
5. देवगाँव की संधि (17 दिसंबर, 1803 ई.)
🔹 सन् 1803 ई. में हुए द्वितीय आंग्ल–मराठा युद्ध के पश्चात्, भोंसले वंश के शासक को अंग्रेजों के साथ देवगाँव नामक स्थान पर एक स्वतंत्र संधि करने के लिए बाध्य होना पड़ा।
6. पूना की संधि (13 जून, 1817 ई.)
🔹 13 जून, 1817 ई. को अंग्रेजों और पेशवा बाजीराव द्वितीय के मध्य ‘पूना की संधि’ संपन्न हुई।
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1. सूरत की संधि (7 मार्च, 1775 ई.)
🔹 बंबई की अंग्रेजी सरकार ने गवर्नर जनरल और उसकी काउंसिल की अनुमति के बिना रघुनाथ राव (राघोबा) को पेशवा बनाने के उद्देश्य से 1775 ई. में ‘सूरत की संधि’ कर डाली।
2. पुरंदर की संधि (1 मार्च, 1776 ई.)
🔹 बंगाल स्थित कलकत्ता काउंसिल ने बंबई सरकार द्वारा की गई सूरत की संधि को मान्यता देने से इनकार कर दिया।
🔹 इसके बाद, वारेन हेस्टिंग्स ने अपनी ओर से कर्नल अप्टन को पूना दरबार भेजा, जहाँ उन्होंने पुरंदर की संधि की।
3. वड़गाँव की संधि (1779 ई.)
🔹 1779 ई. में वड़गाँव की संधि उस समय हुई, जब बंबई सरकार ने बिना गवर्नर जनरल की अनुमति के मराठों से संघर्ष आरंभ किया।
4. सालबाई की संधि (1782 ई.)
🔹 महादजी सिंधिया, जो मराठा संघ के नेतृत्व की महत्वाकांक्षा रखता था, अब अंग्रेजों से समझौते की दिशा में झुकाव दिखाने लगा।
🔹 अंततः, मराठा संघ और अंग्रेजों के बीच सन् 1782 ई. में ‘सालबाई की संधि’ संपन्न हुई।
5. देवगाँव की संधि (17 दिसंबर, 1803 ई.)
🔹 सन् 1803 ई. में हुए द्वितीय आंग्ल–मराठा युद्ध के पश्चात्, भोंसले वंश के शासक को अंग्रेजों के साथ देवगाँव नामक स्थान पर एक स्वतंत्र संधि करने के लिए बाध्य होना पड़ा।
6. पूना की संधि (13 जून, 1817 ई.)
🔹 13 जून, 1817 ई. को अंग्रेजों और पेशवा बाजीराव द्वितीय के मध्य ‘पूना की संधि’ संपन्न हुई।
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STET 2026: एडमिट कार्ड जारी
📌डाउनलोड लिंक- https://stetregistration.cbrt.co.in/login
✅ परीक्षा तिथि: 25 अक्टूबर से 20 नवंबर तक
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