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USA और कनाडा की सीमा पर स्थित महान झीलों पश्चिम से पूर्व क्रम
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✍️ संसदीय कामकाज से संबंधित शब्द
👉 प्रश्नकाल — संसद का पहला घंटा प्रश्न काल के लिए होता है। इस दौरान सदस्य प्रश्न पूछते हैं और सामान्यत: मंत्री उत्तर देते हैं। प्रश्न तीन तरह के होते हैं- तारांकित, अतारांकित तथा अल्प सूचना वाले। तारांकित प्रश्नों का उत्तर मौखिक दिया जाता है तथा इसके बाद पूरक प्रश्न पूछे जाते हैं। दूसरी ओर अतारांकित प्रश्नों के मामले में लिखित रिपोर्ट आवश्यक होती है इसलिए इसके बाद पूरक प्रश्न नहीं पूछे जा सकते। अल्प सूचना के प्रश्न वे प्रश्न होते हैं, जिन्हें 10 से कम दिन का नोटिस देकर पूछा जाता है। इनका उत्तर भी मौखिक दिया जाता है।
👉 शून्यकाल — प्रश्नकाल की तरह प्रक्रिया के नियमों में शून्यकाल का उल्लेख नहीं है। इस तरह यह अनौपचारिक साधन है, जिसमें संसद सदस्य बिना पूर्व सूचना के मामले उठा सकते हैं। शून्यकाल प्रश्नकाल के तुरंत बाद शुरू होता है और इसे सदन के नियमित कार्य के कार्यकृत के साथ किया जाता है। दूसरे शब्दों में, प्रश्नकाल और कार्यक्रम तय करने के मध्य के समय को शून्यकाल कहते हैं। संसदीय प्रक्रिया में यह नवाचार भारत की देन है तथा यह वर्ष 1962 से जारी है।
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⭕️ बक्सर का युद्ध (22 अक्टूबर 1764):
✔️ मेजर हेक्टर मुनरो के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने मीर कासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला और दिल्ली के मुगल सम्राट शाहआलम द्वितीय की संयुक्त सेना को बुरी तरह पराजित किया।
✔️ यह भारत में वास्तविक ब्रिटिश प्रभुसत्ता और आधिपत्य स्थापित करने वाला सबसे निर्णायक युद्ध माना जाता है। 1765 ई. में मीर जाफर की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने उसके पुत्र नजमुद्दौला को बंगाल का नया नवाब बना दिया।
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⭕️ प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56)
✔️ आधारित मॉडल: हैरोड-डोमर (Harrod-Domar) मॉडल।
✔️ प्राथमिकता: कृषि विकास, मूल्य स्थिरता, बिजली और परिवहन।
✔️ विकास दर: यह योजना सफल रही। इसमें निर्धारित लक्ष्य 2.1% था, जबकि वास्तविक प्राप्ति 3.6% रही। इस सफलता का मुख्य कारण योजना के अंतिम दो वर्षों में हुई अच्छी फसल थी।
संस्थागत विकास:
✔️ योजना के अंत (वर्ष 1956) तक देश में पांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) की स्थापना की गई।
✔️ उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का गठन हुआ।
✔️ जुलाई 1955 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का राष्ट्रीयकरण किया गया।
✔️ प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं: कृषि को बढ़ावा देने के लिए भाखड़ा, हीराकुंड और दामोदर घाटी जैसी विशाल नदी घाटी परियोजनाओं की शुरुआत इसी योजना अवधि में की गई।
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✔️ आधारित मॉडल: हैरोड-डोमर (Harrod-Domar) मॉडल।
✔️ प्राथमिकता: कृषि विकास, मूल्य स्थिरता, बिजली और परिवहन।
✔️ विकास दर: यह योजना सफल रही। इसमें निर्धारित लक्ष्य 2.1% था, जबकि वास्तविक प्राप्ति 3.6% रही। इस सफलता का मुख्य कारण योजना के अंतिम दो वर्षों में हुई अच्छी फसल थी।
संस्थागत विकास:
✔️ योजना के अंत (वर्ष 1956) तक देश में पांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) की स्थापना की गई।
✔️ उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का गठन हुआ।
✔️ जुलाई 1955 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का राष्ट्रीयकरण किया गया।
✔️ प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं: कृषि को बढ़ावा देने के लिए भाखड़ा, हीराकुंड और दामोदर घाटी जैसी विशाल नदी घाटी परियोजनाओं की शुरुआत इसी योजना अवधि में की गई।
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⭕️ दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61): मुख्य बिंदु
👉 आधारित मॉडल: प्रसिद्ध सांख्यिकीविद पी.सी. महालनोबिस मॉडल पर आधारित।
👉 प्राथमिकता: कृषि से ध्यान हटाकर तीव्र औद्योगीकरण (भारी उद्योग) और सार्वजनिक क्षेत्र के विकास पर बल दिया गया। इसके लिए विदेशी ऋण के माध्यम से भारी आयात की रणनीति अपनाई गई।
👉 विकास दर एवं प्रभाव: विकास दर का लक्ष्य 4.5% था, जबकि वास्तविक प्राप्ति 4.27% रही। पहली योजना (जहां कीमतें घटी थीं) के विपरीत, इस योजना के दौरान कीमतों में 30% की भारी वृद्धि हुई।
👉 प्रमुख स्थापनाएं (उद्योग): भिलाई, दुर्गापुर और राउरकेला में इस्पात संयंत्र तथा कई जलविद्युत ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की गईं।
👉 संस्थान एवं नीतियां: अनुसंधान के लिए 'टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च' और 'परमाणु ऊर्जा आयोग' की स्थापना की गई। साथ ही, देश की दूसरी औद्योगिक नीति भी इसी दौरान लागू हुई।
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👉 आधारित मॉडल: प्रसिद्ध सांख्यिकीविद पी.सी. महालनोबिस मॉडल पर आधारित।
👉 प्राथमिकता: कृषि से ध्यान हटाकर तीव्र औद्योगीकरण (भारी उद्योग) और सार्वजनिक क्षेत्र के विकास पर बल दिया गया। इसके लिए विदेशी ऋण के माध्यम से भारी आयात की रणनीति अपनाई गई।
👉 विकास दर एवं प्रभाव: विकास दर का लक्ष्य 4.5% था, जबकि वास्तविक प्राप्ति 4.27% रही। पहली योजना (जहां कीमतें घटी थीं) के विपरीत, इस योजना के दौरान कीमतों में 30% की भारी वृद्धि हुई।
👉 प्रमुख स्थापनाएं (उद्योग): भिलाई, दुर्गापुर और राउरकेला में इस्पात संयंत्र तथा कई जलविद्युत ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की गईं।
👉 संस्थान एवं नीतियां: अनुसंधान के लिए 'टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च' और 'परमाणु ऊर्जा आयोग' की स्थापना की गई। साथ ही, देश की दूसरी औद्योगिक नीति भी इसी दौरान लागू हुई।
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⭕️ आजाद हिंद फौज (INA) के प्रमुख तथ्य:
✔️ इंडियन इंडिपेंडेंस लीग: 28-30 मार्च 1942 को टोक्यो (जापान) में रासबिहारी बोस के नेतृत्व में इसका गठन हुआ।
✔️स्थापना का विचार: 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' (INA) की स्थापना का विचार सबसे पहले कैप्टन मोहन सिंह के मन में आया था।
✔️ प्रथम डिवीजन का गठन: 1 सितंबर 1942 को INA का औपचारिक गठन हुआ। कैप्टन मोहन सिंह इसके प्रथम सेनापति बने।
✔️ सुभाष चंद्र बोस का आगमन: रासबिहारी बोस के निमंत्रण पर 13 जून 1943 को सुभाष चंद्र बोस बैंकाक आए और INA के नेता बने।
✔️ कमान का हस्तांतरण: 4 जुलाई 1943 को रासबिहारी बोस ने आजाद हिंद फौज की कमान पूरी तरह सुभाष चंद्र बोस को सौंप दी।
✔️ अस्थायी सरकार का गठन: 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में 'स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार' (आजाद हिंद सरकार) की स्थापना की।
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✔️ इंडियन इंडिपेंडेंस लीग: 28-30 मार्च 1942 को टोक्यो (जापान) में रासबिहारी बोस के नेतृत्व में इसका गठन हुआ।
✔️स्थापना का विचार: 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' (INA) की स्थापना का विचार सबसे पहले कैप्टन मोहन सिंह के मन में आया था।
✔️ प्रथम डिवीजन का गठन: 1 सितंबर 1942 को INA का औपचारिक गठन हुआ। कैप्टन मोहन सिंह इसके प्रथम सेनापति बने।
✔️ सुभाष चंद्र बोस का आगमन: रासबिहारी बोस के निमंत्रण पर 13 जून 1943 को सुभाष चंद्र बोस बैंकाक आए और INA के नेता बने।
✔️ कमान का हस्तांतरण: 4 जुलाई 1943 को रासबिहारी बोस ने आजाद हिंद फौज की कमान पूरी तरह सुभाष चंद्र बोस को सौंप दी।
✔️ अस्थायी सरकार का गठन: 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में 'स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार' (आजाद हिंद सरकार) की स्थापना की।
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प्रमुख प्रथम समाचार पत्र/संस्थापक /स्थान और उनके विशेष तथ्य
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❇️ कोशिका झिल्ली
✔️ प्लाज्मा झिल्ली या कोशिका झिल्ली एक अर्द्ध पारगम्य झिल्ली है, जो प्रत्येक सजीव कोशिका के जीवद्रव्य को घेरे रहती है।
✔️ वर्ष 1950 के इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की खोज के बाद कोशिका झिल्ली की विस्तृत संरचना का ज्ञान संभव हो सका है। इस बीच मनुष्य की लाल रक्तकणिकाओं की कोशिका झिल्ली के रासायनिक अध्ययन के बाद जीवद्रव्यझिल्ली की संभावित संरचना के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकी।
✔️ कोशिका झिल्ली में प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। विभिन्न कोशिकाओं में प्रोटीन व लिपिड का अनुपात भिन्न-भिन्न होता है। मनुष्य की रुधिराणु (इरीथ्रोसाइट)की झिल्ली में लगभग 52 प्रतिशत प्रोटीन व 40 प्रतिशत लिपित मिलता है।
✔️ कोशिका झिल्ली का उन्नत नमूना 1972 में सिंगर व निकोल्सन द्वारा प्रतिपादित किया गया जिसे तरल किर्मीर नमूना के रूप में स्वीकार कर लिया गया।
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✔️ कोशिका झिल्ली में प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। विभिन्न कोशिकाओं में प्रोटीन व लिपिड का अनुपात भिन्न-भिन्न होता है। मनुष्य की रुधिराणु (इरीथ्रोसाइट)की झिल्ली में लगभग 52 प्रतिशत प्रोटीन व 40 प्रतिशत लिपित मिलता है।
✔️ कोशिका झिल्ली का उन्नत नमूना 1972 में सिंगर व निकोल्सन द्वारा प्रतिपादित किया गया जिसे तरल किर्मीर नमूना के रूप में स्वीकार कर लिया गया।
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⭕️ अशोक मेहता समिति
गठन — दिसंबर, 1977
✔️ दिसंबर, 1977 में जनता पार्टी की सरकार ने अशोक मेहता की अध्यक्षता में पंचायती राज संस्थाओं पर एक समिति का गठन किया। इस समिति ने अगस्त 1978 में अपनी रिपोर्ट सौंपी और देश में पतनोन्मुख पंचायती राज पद्धति को पुनर्जीवित और मजबूत करने हेतु 132 सिफारिशें की। कुछ प्रमुख सिफारिशें -
👉 त्रिस्तरीय व्यवस्था के स्थान द्विस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
👉 विकेंद्रीकरण का प्रथम बिंदु "जिला" होना चाहिए।
👉जिला परिषद को कार्यकारिणी संस्था और पंचायती राज की मौलिक इकाई के रूप में विकसित किया जाए।
👉राजनीतिक पार्टियां आधिकारिक रूप से भागीदारी करें।
👉पंचायती राज संस्थाओं के पास कराधान की शक्तियाँ अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
👉नियमित सामाजिक लेखा परीक्षा होनी चाहिए।
👉यदि पंचायती राज संस्थाओं को भंग किया जाता है तो नए निर्वाचन छह महीने के भीतर हो जाने चाहिए।
👉हर राज्य में एक पंचायती राज मंत्री की नियुक्ति की जानी चाहिए।
👉एस.सी और एस.टी के लिए आरक्षण के उपबंध किये जाने चाहिए।
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गठन — दिसंबर, 1977
✔️ दिसंबर, 1977 में जनता पार्टी की सरकार ने अशोक मेहता की अध्यक्षता में पंचायती राज संस्थाओं पर एक समिति का गठन किया। इस समिति ने अगस्त 1978 में अपनी रिपोर्ट सौंपी और देश में पतनोन्मुख पंचायती राज पद्धति को पुनर्जीवित और मजबूत करने हेतु 132 सिफारिशें की। कुछ प्रमुख सिफारिशें -
👉 त्रिस्तरीय व्यवस्था के स्थान द्विस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
👉 विकेंद्रीकरण का प्रथम बिंदु "जिला" होना चाहिए।
👉जिला परिषद को कार्यकारिणी संस्था और पंचायती राज की मौलिक इकाई के रूप में विकसित किया जाए।
👉राजनीतिक पार्टियां आधिकारिक रूप से भागीदारी करें।
👉पंचायती राज संस्थाओं के पास कराधान की शक्तियाँ अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
👉नियमित सामाजिक लेखा परीक्षा होनी चाहिए।
👉यदि पंचायती राज संस्थाओं को भंग किया जाता है तो नए निर्वाचन छह महीने के भीतर हो जाने चाहिए।
👉हर राज्य में एक पंचायती राज मंत्री की नियुक्ति की जानी चाहिए।
👉एस.सी और एस.टी के लिए आरक्षण के उपबंध किये जाने चाहिए।
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