UPSC NOTES
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जहांगीर के समय 1622 में फारस के शासक शाह अब्बास प्रथम ने कंधार पर अधिकार कर लिया था । 1638 में अली मर्दान ने कंधार मुगल अधिकारी सैय्यद खान को सौंप दिया था उस समय शाहजहां ने अली मर्दान को एक लाख रुपए का इनाम भी दिया था तथा उसे मुगल सेवा में ले लिया ।

शाह अब्बास द्वितीय ने 11 फरवरी 1649 को कंधार पर अधिकार कर लिया और इसके पश्चात मुगल शासक कंधार को वापस प्राप्त करने में असफल रहे थे हालांकि शाहजहां ने 1649 और 1652 में औरंगजेब के नेतृत्व में तथा 1653 में दारा शिकोह के नेतृत्व में अभियान किया लेकिन वे असफल रहे ।
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वियतनाम से संबंधित महत्वपूर्ण सम्मेलन

हनोई समझौता - 6 मार्च 1946 , फ्रांस व वियतनाम के मध्य

जेनेवा सम्मेलन -1954, वियतनाम को दो भागों उतरी वियतनाम व दक्षिणी वियतनाम में विभाजित कर दिया गया।
इंडोनेशिया कम्युनिस्ट पार्टी -1920

इण्डोनेशियन नेशनल पार्टी -1927
26 जुलाई 1956 को मिस्र के राष्ट्रपति नासिर ने स्वेज नहर पर कब्जा कर लिया था

तब अक्टूबर 1956 में स्वेज नहर पर कब्जा करने के लिए आपरेशन मस्केटियर अभियान।
मिस्र इंग्लैंड के अधीन था जिसे 16 अगस्त 1936 को लंदन कन्वेंशन के तहत आजादी मिली।
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नामीबिया 1990 में स्वतंत्र किया गया

घाना 1957 में आजाद हुआ

माउ माऊ विद्रोह (1953) के पश्चात केन्या 1962 में आजाद हुआ

अंगोला और मोज़ाम्बिक पुर्तगाल के अधीन थे ।
च्यांग काई शेक प्रारंभ साम्यवादी विचारधारा का अनुयाई था और जब 1925 में सनयात सेन की मृत्यु हो गई तब कोमितागं दाल का प्रमुख बन गया और इसके अगले ही वर्ष रुसी सलाहकार ब्लूचर के कहने पर उत्तरी चीन के प्रमुख नगरों हैको, नानकिगं और शंघाई पर अधिकार कर लिया लेकिन इसी दौरान 1927 में एक पूंजीपति की पुत्री मुंग मेंग लेगं से उसे प्यार हो जाता है और उससे शादी कर बैठता है... इसके पश्चात न्होंने साम्यवादियों की अराजकता को समाप्त करने के लिए शुद्धिकरण अभियान प्रारंभ किया और 2.5 लाख साम्यवादियों का कत्ल कर दिया ... इसी दौरान चीन में कन्फ्यूसियस की विचारधारा का प्रचार प्रसार करने के लिए 1934 में नवजीवन आंदोलन चलाया और साम्यवादियों का दमन करने के लिए नीली कुर्ती दल का गठन किया जिनके अत्याचारों से पीड़ित होकर साम्यवादियों ने 16 अक्टूबर 1934 से 20 अक्टूबर 1935 तक कियांग्सी प्रांत से शेन्सी प्रात तक लांग मार्च किया ... इसी क्रम में जापान चीन में अपने प्रभुत्व का विस्तार कर रहा था और 1931 में मंचुरिया पर अधिकार कर लिया... राष्ट्र संघ ने लिटन आयोग का भी गठन किया लेकिन वह भी कुछ नहीं कर पाया और 1937 में दुबारा चीन पर आक्रमण कर दिया... साम्यवादियो ने बड़ा दिल दिखाते हुए च्यांग काई शेक को प्रधान सेनापति बनाया लेकिन वह जापान की जगह साम्यवादियो को निपटाने लग गया... जिसके कारण चीन में तीन सरकारें चलने लगी... च्यांग काई शेक की चुगकिंग सरकार... माओत्से तुंग की येनान में और नानकिंग में जापानी सरकार... अंत में 1 अक्टूबर 1949 को चीन में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना सरकार का गठन हुआ और च्यांग काई शेक की सरकार फारमोसा भाग गयी...
त्रिग्वेली का संबंध नार्वे से था इन्होंने 1952 में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के पद से त्यागपत्र दे दिया था

डैग हैमरसोल्ड अफ्रीका में हवाई दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी

यु थांट म्यांमार निवासी थे यानी एशिया से संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रथम महासचिव बने

बुतरस घाली का संबंध अफ्रीका से था
राष्ट्र संघ के द्वारा 1920 में ब्रुसेल्स में प्रथम अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सम्मेलन तथा 1927 में जिनेवा में दूसरा आर्थिक सम्मेलन बुलाया गया था

राष्ट्र संघ के द्वारा 1933 में विश्व आर्थिक संकट की समस्या का समाधान करने के लिए लंदन में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा सम्मेलन बुलाया गया था
राष्ट्र संघ की स्थापना 10 जनवरी 1920 को हुई थी जिस दिन पेरिस शांति संध्या लागू की गई थी

राष्ट्र संघ का उद्घाटन पोएंकारे ने किया

1 नवंबर 1920 को राष्ट्र संघ का मुख्यालय लंदन से जेनेवा स्थानांतरित कर दिया गया जहां पर 15 नवंबर 1920 को इसका प्रथम अधिवेशन हुआ ।
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चकरी नृत्य कंजर जाति के महिलाओं के द्वारा किया जाने वाला लोक नृत्य है

तेरहताली नृत्य रामदेव जी के भक्तों के द्वारा किया जाता है जो कामड़ जाति के द्वारा किया जाता है

अग्नि नृत्य जश्नाती संप्रदाय के द्वारा कतरियासर क्षेत्र में किया जाता है

कालबेलिया जाति के नृत्य -‌शंकरिया, पणिहारी, इण्डोणी, बगड़िया
ऊंट महोत्सव का आयोजन बीकानेर में जनवरी में किया जाता है

महावीर जी का मेला चैत्र माह में लगता है

ग्रीष्म उत्सव माउंट आबू में ग्रीष्म ऋतु में मनाया जाता है

पुष्कर जी का मेला हाल ही में कार्तिक मास में आयोजित किया गया है
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भरतपुर में छात्रों ने गोपीलाल यादव के नेतृत्व में 1920-21 में जो राजनीतिक आंदोलन किया, वह न केवल भरतपुर वरन् राजस्थान में अपनी प्रकार का पहला आन्दोलन था

बाकी तीनों का संबंध मारवाड़ सेवा संघ से था
अललपखं नामक प्रतिमा मूल रूप से शाहबाद दुर्ग में है

यह दुर्ग बांरा जिले में है