Forwarded from RAJASTHAN ALL EXAM STUDY📚
आधुनिक भारत में अकाल आयोग/समितियां –
स्मिथ समिति — 1860- 61
कैंपबेल आयोग —1866- 67
स्ट्रैची आयोग — 1878- 80
लॉयल आयोग — 1897
मैकडॉनल्ड आयोग -1900
वुड्हेड आयोग— 1945
#Facts 👆
#PYQ
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स्मिथ समिति — 1860- 61
कैंपबेल आयोग —1866- 67
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लॉयल आयोग — 1897
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1947 की प्रमुख टाइमलाइन –
•• 20 Feb,1947 को एटली की घोषणा–
•• जून,1948 तक अंग्रेज भारत छोड़ देंगे।
•• 3 जून,1947 को माउंटबेटन योजना प्रस्तुत की गई।
•• 4 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद में "भारतीय स्वतंत्रता अधि०" प्रस्तुत किया गया।
•• 18 जुलाई को इस अधि० को राजकीय स्वीकृति मिली।
•• अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतन्त्रता मिली।
Note...
०बाल्कन प्लान का संबंध "लॉर्ड माउंटबेटन" से था।
०लॉर्ड माउंटबेटन" भारत के अंतिम वायसराय तथा स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल थे।
०सी राजगोपालाचारी" स्वतंत्र भारत के अंतिम तथा भारत के पहले व अंतिम भारतीय गवर्नर जनरल थे।
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•• 4 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद में "भारतीय स्वतंत्रता अधि०" प्रस्तुत किया गया।
•• 18 जुलाई को इस अधि० को राजकीय स्वीकृति मिली।
•• अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतन्त्रता मिली।
Note...
०बाल्कन प्लान का संबंध "लॉर्ड माउंटबेटन" से था।
०लॉर्ड माउंटबेटन" भारत के अंतिम वायसराय तथा स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल थे।
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7 साल का संघर्ष 😭 | जीवन का सबसे बड़ा इवेंट 🎁 | 10 मार्च LIVE - Pawan Sir
7 Saal ka sangharsh, mehnat, failures…
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⬜️ बादामी के चालुक्य (प्रारंभिक पश्चिमी चालुक्य)
यह मूल शाखा थी जिसने 6ठी से 8वीं शताब्दी तक शासन किया।
पुलकेशिन प्रथम (543–566 ई.): वास्तविक संस्थापक जिसने वातापी (बादामी) को अपनी राजधानी बनाया।
कीर्तिवर्मन प्रथम (566–597 ई.): इसने साम्राज्य का विस्तार कोंकण और तटीय क्षेत्रों तक किया।
मंगलेश (597–609 ई.): कीर्तिवर्मन का भाई, जिसने कार्यवाहक शासक के रूप में शासन किया।
पुलकेशिन द्वितीय (609–642 ई.): इस वंश का सबसे प्रतापी राजा। इसने उत्तर भारतीय सम्राट हर्षवर्द्धन को नर्मदा के तट पर हराया था।
विक्रमादित्य प्रथम (655–680 ई.): पल्लवों के कब्जे से बादामी को वापस छुड़ाया।
विनयादित्य (680–696 ई.)
विजयादित्य (696–733 ई.): सबसे लंबे समय तक शासन करने वाला राजा।
विक्रमादित्य द्वितीय (733–744 ई.): इसने पल्लवों की राजधानी कांची पर अधिकार किया था।
कीर्तिवर्मन द्वितीय (744–753 ई.): बादामी शाखा का अंतिम शासक। इसे राष्ट्रकूट शासक दंतिदुर्ग ने पराजित किया था।
⬜️. कल्याणी के चालुक्य (परवर्ती पश्चिमी चालुक्य)
इस वंश ने 10वीं शताब्दी में राष्ट्रकूटों के पतन के बाद खुद को स्थापित किया।
तैलप द्वितीय (973–997 ई.): राष्ट्रकूटों को हराकर कल्याणी के चालुक्य वंश की स्थापना की।
सत्याश्रय (997–1008 ई.)
जयसिंह द्वितीय (1015–1044 ई.)
सोमेश्वर प्रथम (1042–1068 ई.): इसने राजधानी मान्यखेत से कल्याणी स्थानांतरित की।
विक्रमादित्य षष्ठ (1076–1126 ई.): इस शाखा का सबसे शक्तिशाली शासक। इसके दरबार में विल्हण (विक्रमांकदेवचरित के लेखक) और विज्ञानेश्वर (मिताक्षरा के लेखक) रहते थे।
सोमेश्वर तृतीय (1126–1138 ई.): एक विद्वान राजा जिसने 'मानसोल्लास' ग्रंथ की रचना की।
सोमेश्वर चतुर्थ (1184–1200 ई.): इस वंश का अंतिम महत्वपूर्ण शासक।
3. वेंगी के चालुक्य (पूर्वी चालुक्य)
पुलकेशिन द्वितीय के भाई कुब्ज विष्णुवर्द्धन ने इस शाखा की स्थापना आंध्र प्रदेश में की थी।
कुब्ज विष्णुवर्द्धन (624–641 ई.): संस्थापक।
जयसिंह प्रथम (641–673 ई.)
विजयादित्य तृतीय (849–892 ई.): इस शाखा का सबसे प्रतापी राजा।
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यह मूल शाखा थी जिसने 6ठी से 8वीं शताब्दी तक शासन किया।
पुलकेशिन प्रथम (543–566 ई.): वास्तविक संस्थापक जिसने वातापी (बादामी) को अपनी राजधानी बनाया।
कीर्तिवर्मन प्रथम (566–597 ई.): इसने साम्राज्य का विस्तार कोंकण और तटीय क्षेत्रों तक किया।
मंगलेश (597–609 ई.): कीर्तिवर्मन का भाई, जिसने कार्यवाहक शासक के रूप में शासन किया।
पुलकेशिन द्वितीय (609–642 ई.): इस वंश का सबसे प्रतापी राजा। इसने उत्तर भारतीय सम्राट हर्षवर्द्धन को नर्मदा के तट पर हराया था।
विक्रमादित्य प्रथम (655–680 ई.): पल्लवों के कब्जे से बादामी को वापस छुड़ाया।
विनयादित्य (680–696 ई.)
विजयादित्य (696–733 ई.): सबसे लंबे समय तक शासन करने वाला राजा।
विक्रमादित्य द्वितीय (733–744 ई.): इसने पल्लवों की राजधानी कांची पर अधिकार किया था।
कीर्तिवर्मन द्वितीय (744–753 ई.): बादामी शाखा का अंतिम शासक। इसे राष्ट्रकूट शासक दंतिदुर्ग ने पराजित किया था।
⬜️. कल्याणी के चालुक्य (परवर्ती पश्चिमी चालुक्य)
इस वंश ने 10वीं शताब्दी में राष्ट्रकूटों के पतन के बाद खुद को स्थापित किया।
तैलप द्वितीय (973–997 ई.): राष्ट्रकूटों को हराकर कल्याणी के चालुक्य वंश की स्थापना की।
सत्याश्रय (997–1008 ई.)
जयसिंह द्वितीय (1015–1044 ई.)
सोमेश्वर प्रथम (1042–1068 ई.): इसने राजधानी मान्यखेत से कल्याणी स्थानांतरित की।
विक्रमादित्य षष्ठ (1076–1126 ई.): इस शाखा का सबसे शक्तिशाली शासक। इसके दरबार में विल्हण (विक्रमांकदेवचरित के लेखक) और विज्ञानेश्वर (मिताक्षरा के लेखक) रहते थे।
सोमेश्वर तृतीय (1126–1138 ई.): एक विद्वान राजा जिसने 'मानसोल्लास' ग्रंथ की रचना की।
सोमेश्वर चतुर्थ (1184–1200 ई.): इस वंश का अंतिम महत्वपूर्ण शासक।
3. वेंगी के चालुक्य (पूर्वी चालुक्य)
पुलकेशिन द्वितीय के भाई कुब्ज विष्णुवर्द्धन ने इस शाखा की स्थापना आंध्र प्रदेश में की थी।
कुब्ज विष्णुवर्द्धन (624–641 ई.): संस्थापक।
जयसिंह प्रथम (641–673 ई.)
विजयादित्य तृतीय (849–892 ई.): इस शाखा का सबसे प्रतापी राजा।
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🇮🇳Defence Career Guidance Seminar at Jaipur & Jodhpur
अगर सपना है NDA, Army, Navy या Air Force में कॅरियर बनाने का ! 🇮🇳 तो, चाहिए सही दिशा चुनने के लिए Experts की Guidance !
जयपुर और जोधपुर में उत्कर्ष क्लासेस आपके लिए आयोजित कर रहा है Defence Career Guidance Seminar💥
📍 जयपुर – 15 March | सुबह 10:00 बजे
📍 जोधपुर – 22 March | सुबह 10:00 बजे
इस सेमिनार में आप पाएँगे:👇
🎯NDA, Army, Navy या Air Force जैसे Defence Exams की पूरी जानकारी
🎯इन Exams के लिए तैयारी की सही Strategy, बेहतर Roadmap
🎯Defence Exams के Experts से Direct Guidance
🔥इतना ही नहीं, इस सेमिनार में Defence Aspirants के लिए FREE Scholarship Test भी होगा, जिसमें आपको मिल सकती है उत्कर्ष के डिफेंस बैचेज़ में 90% तक की Scholarship! 🎓
⏳ सीटें Limited हैं !
form link: https://zfrmz.in/q9ud5hA27kC18VReJW1b
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दक्षिण राज्यों का मुगल साम्राज्य में विलय--
सर्वप्रथम अकबर ने अहमदनगर पर आक्रमण किया था और संधि के बाद उसके एक हिस्से बरार को मुगल साम्राज्य में मिलाया था।
अहमदनगर: शाहजहाँ ने 1633 ई. में इसे जीतकर मुगल साम्राज्य का हिस्सा बनाया और निजामशाही वंश का अंत किया।
बीजापुर: औरंगजेब ने 1686 ई. में आदिल शाही शासक सिकंदर शाह को हराकर इसे मुगलों के अधीन कर लिया।
गोलकुंडा: औरंगजेब ने 1687 ई. में कुतुब शाही वंश के अंतिम शासक को हराकर दक्षिण के इस संपन्न राज्य को जीता।
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सर्वप्रथम अकबर ने अहमदनगर पर आक्रमण किया था और संधि के बाद उसके एक हिस्से बरार को मुगल साम्राज्य में मिलाया था।
अहमदनगर: शाहजहाँ ने 1633 ई. में इसे जीतकर मुगल साम्राज्य का हिस्सा बनाया और निजामशाही वंश का अंत किया।
बीजापुर: औरंगजेब ने 1686 ई. में आदिल शाही शासक सिकंदर शाह को हराकर इसे मुगलों के अधीन कर लिया।
गोलकुंडा: औरंगजेब ने 1687 ई. में कुतुब शाही वंश के अंतिम शासक को हराकर दक्षिण के इस संपन्न राज्य को जीता।
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🔥 सरकारी नौकरी सिर्फ एक सपना नहीं, अब एक बड़ा संकल्प बनने जा रही है। 💯
14 मार्च 2026 शाम 6 बजे होने जा रही है एक बड़ी घोषणा, जो हजारों विद्यार्थियों की तैयारी का रास्ता बदल सकती है।
अगर आप LDC, BSTC, PTET, CET, REET, Lab Assistant, Vanpal या 4th Grade की तैयारी कर रहे हैं, तो इस ऐलान को बिल्कुल मिस मत करना।
📢 जुड़े रहिए – आज शाम 6 बजे
📍 केवल Selection Hub YouTube Channel पर।
तैयार हो जाइए… क्योंकि यह घोषणा आपकी तैयारी में नया मोड़ ला सकती है
Join Today at 6 pm 👇👇👇🔥🔥🔥🔥🔥🔥 https://youtube.com/live/HJ51HK-3mr8?feature=share
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दक्षिण राज्यों का मुगल साम्राज्य में विलय--
सर्वप्रथम अकबर ने अहमदनगर पर आक्रमण किया था और संधि के बाद उसके एक हिस्से बरार को मुगल साम्राज्य में मिलाया था।
अहमदनगर: शाहजहाँ ने 1633 ई. में इसे जीतकर मुगल साम्राज्य का हिस्सा बनाया और निजामशाही वंश का अंत किया।
बीजापुर: औरंगजेब ने 1686 ई. में आदिल शाही शासक सिकंदर शाह को हराकर इसे मुगलों के अधीन कर लिया।
गोलकुंडा: औरंगजेब ने 1687 ई. में कुतुब शाही वंश के अंतिम शासक को हराकर दक्षिण के इस संपन्न राज्य को जीता।
सर्वप्रथम अकबर ने अहमदनगर पर आक्रमण किया था और संधि के बाद उसके एक हिस्से बरार को मुगल साम्राज्य में मिलाया था।
अहमदनगर: शाहजहाँ ने 1633 ई. में इसे जीतकर मुगल साम्राज्य का हिस्सा बनाया और निजामशाही वंश का अंत किया।
बीजापुर: औरंगजेब ने 1686 ई. में आदिल शाही शासक सिकंदर शाह को हराकर इसे मुगलों के अधीन कर लिया।
गोलकुंडा: औरंगजेब ने 1687 ई. में कुतुब शाही वंश के अंतिम शासक को हराकर दक्षिण के इस संपन्न राज्य को जीता।
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सहारनपुर नियम' (Saharanpur Rules)
लॉर्ड डलहौजी द्वारा 1855 में जारी किए गए 'सहारनपुर नियम' (Saharanpur Rules) ब्रिटिश भारत की भू-राजस्व प्रणाली, विशेष रूप से महालवाड़ी व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सुधार थे।
इन नियमों की मुख्य विशेषताएं और प्रभाव नीचे दिए गए हैं:
राजस्व दर में कमी: इन नियमों के माध्यम से सरकार (State) का हिस्सा कुल लगान (Rental value) के 66% से घटाकर 50% कर दिया गया था।
उद्देश्य: इससे पहले 1833 के नियमों के तहत राजस्व की दर (66%) बहुत अधिक थी, जिसे किसान वहन नहीं कर पा रहे थे। डलहौजी ने इस बोझ को कम करने के लिए ये नए निर्देश जारी किए।
क्षेत्र: यह नियम मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी प्रांतों (वर्तमान उत्तर प्रदेश), पंजाब और मध्य प्रांतों में लागू किए गए थे।
सीमित प्रभाव: आधिकारिक रूप से दर कम करने के बावजूद, जमीनी स्तर पर कई राजस्व अधिकारियों ने इन नियमों को पूरी तरह लागू नहीं किया, जिससे किसानों में असंतोष बना रहा।
1857 का विद्रोह: राजस्व की यह ऊँची दरें (भले ही कागजों पर कम की गई थीं) 1857 के विद्रोह के प्रमुख आर्थिक कारणों में से एक बनीं।
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भारतीय समाज-संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर 'सक्रिय हस्तक्षेप की नीति' kyu apnayi gyi
इस अवधि में ब्रिटिश कम्पनी ने पूर्ववर्ती अहस्तक्षेप की नीति का परित्याग करते हुए भारतीय समाज-संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर 'सक्रिय हस्तक्षेप की नीति' को प्रोत्साहन देना शुरू किया।
इस सक्रियता का मुख्य कारण ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति थी। औद्योगिक पूंजीवाद के हितों को पूरा करने के लिये ब्रिटिश सरकार भारत को एक बेहतर बाजार के रूप में तब्दील करना चाहती थी, किंतु यह तभी सम्भव था, जब भारतीय जनता ब्रिटिश परम्पराओं से परिचित हो, उनका सम्मान करे तथा उन्हें श्रेष्ठ समझे, साथ ही अपनी सामाजिक जड़ताओं का त्याग करे। इसी परिप्रेक्ष्य में अब ब्रिटिश सरकार की सामाजिक-सांस्कृतिक नीति भारतीय समाज में आशिक आधुनिकीकरण लाने की ओर प्रेरित हुई।
'श्वेत व्यक्ति का भार' (The White Man's Burden) जैसे सिद्धांत का औचित्य सिद्ध करने के लिये यह आवश्यक था कि ब्रिटिश भारतीयों को तथाकथित रूप से सभ्य बनाने हेतु प्रयास करे। उक्त अनेक कारणों के अतिरिक्त तत्कालीन नवजात प्रबुद्ध भारतीय वर्ग का दबाव व समर्थन ब्रिटिश सरकार पर था कि वह सामाजिक दुर्बलताओं एवं कुरीतियों के उन्मूलन हेतु प्रयास करे एवं शिक्षा, विज्ञान व तकनीक को बढ़ावा दे।
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महिलाओं को उत्तराधिकार के रूप में धन सम्बंधी अधिकार
एक अन्य प्रावधान के तहत सन् 1937 में महिलाओं को उत्तराधिकार के रूप में धन सम्बंधी अधिकार भी प्रदान किये गए, जिसका वर्णन 'हिंदू महिला सम्पत्ति अधिकार अधिनियम', 1937 में मिलता है।
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11-25 = ₹1,100 Each
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