UPSC NOTES
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अकबर ने अपने शासनकाल के 24 वर्ष वे वर्ष सूबा व्यवस्था शुरू की ।

अकबर ने प्रारंभिक अपने साम्राज्य को 15 सूबों में बांटा।( प्रारंभ में 12, बाद में अलीगढ़, खानदेश और बरार के विलय के बाद 15 हो गये)।
अकबर के समय 1595 ईस्वी में कंधार का विलय मुगल साम्राज्य में हुआ था लेकिन उसे सुबा नहीं बनाया गया
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"🚨वर्दी के अपने सपने की ओर बढ़ाइए पहला कदम !

📢Utkarsh Classes आपके लिए लेकर आ रहा है सब-इंस्पेक्टर मेगा सेमिनार; जिसमें आपको मिलेगी सपने को हकीकत बनाने की सीधी व सटीक दिशा।🎯

🗓️तारीख व समय:  31 अगस्त |⏰ सुबह 10:30 बजे

📍सेमिनार का स्थान:
👉जोधपुर: उत्कर्ष कॉम्पलेक्स, शास्त्री नगर।
👉जयपुर: उत्कर्ष टॉवर, गोपालपुरा बायपास रोड।

📞Jodhpur: 9773366869 | Jaipur: 9773366871

💫सेमिनार जॉइन करने के लाभ:
✅अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा हर पहलू पर मार्गदर्शन
✅प्रथम प्रश्न-पत्र (हिंदी) के लिए विशेष गाइडेंस
✅परीक्षा में सफलता की सम्पूर्ण रणनीति पर चर्चा
✅परीक्षोपयोगी बुकलेट व ब्रोशर नि:शुल्क
✅सेमिनार में शामिल सभी विद्यार्थियों को बैच फीस में विशेष छूट

⏳तो, देर न करें ! आज ही रजिस्टर कर अपनी सीट सुनिश्चित करें।👇

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वैदिक काल में पशुपालन मुख्य व्यवसाय था हालांकि वे कृषि भी करते थे
गुप्त काल में सबसे पहले सोने के सिक्के चलाने वाला चंद्रगुप्त प्रथम था

गुप्त काल में सबसे पहले तांबे के सिक्के  चलाने वाला राम गुप्त था

गुप्तकाल में चांदी के सिक्के चलाने वाला चन्द्रगुप्त द्वितीय था

दीनार - सोने का सिक्का

रूपक - चांदी का सिक्का

माषक - तांबे का सिक्का
Forwarded from E-Books
🚨SI Mega Seminar — Jodhpur & Jaipur !

📢अगर आप आगामी राजस्थान पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के परीक्षार्थी हैं! तो, आपके लिए है एक शानदार मौका; जी हाँ, Utkarsh Classes आपके लिए आयोजित कर रहा है “सब-इंस्पेक्टर मेगा सेमिनार” —
जहाँ मिलेगा सटीक मार्गदर्शन, तैयारी की सटीक रणनीति और सफलता पाने तक का सही रास्ता!

🗓️ तारीख: 31 अगस्त |⏰ सुबह: 10:30 बजे

स्थान:
📍 जोधपुर: उत्कर्ष कॉम्पलेक्स, शास्त्री नगर
📍 जयपुर: उत्कर्ष टॉवर, गोपालपुरा बायपास रोड

✨ सेमिनार के विशेष लाभ:
✅ हिंदी प्रश्न-पत्र पर एक्सपर्ट गाइडेंस
✅ सम्पूर्ण सफलता के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन
✅ नि:शुल्क बुकलेट व ब्रोशर
✅ बैच फीस पर स्पेशल छूट

📞 Jodhpur: 9773366869 | Jaipur: 9773366871

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मौर्यकालीन मूर्ति कला मे धौली तथा कालसी से हाथी की मूर्ति मिली है जिसमें कालसी की हाथी की मूर्ति के नीचे गजतमे लिखा है
मथुरा की परखम से यक्ष मणिभद्र की मूर्ति मिली है
बिहार के दीदारगंज से चामर ग्रहणी यक्षी की प्रतिमा मिली है
पटना के पास लोहानीपुर से दो जैन तीर्थंकरों की मूर्ति मिली है
कंपनी के शासन काल में पहला अकाल जॉन लॉरेंस के समय मे पडा था जिसकी प्रतिक्रिया स्वरूप सन्यासी विद्रोह हुआ इसका वर्णन बकिम चंद्र चटर्जी ने आनंदमठ में किया है
जार्ज केम्पेबल समिति का गठन 1866 में उड़ीसा में पड़े अकाल के संदर्भ में किया गया

स्ट्रेची संयोग लॉर्ड लिटन के समय मे गठित किया गया था इसे प्रथम अकाल आयोग कहा गया जिसके तहत प्रत्येक प्रांत में अकाल कोष के गठन का प्रावधान किया गया

एटनी मैकडोनल आयोग का गठन लॉर्ड कर्जन के समय 1900 मे किया गया था जिसके तहत अकाल आयुक्त की नियुक्ति की गई


जॉन वूडहेड आयोग 1943 में लार्ड वेवेल के समय गठित किया गया
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👮‍♂️ क्या आप Sub-Inspector बनने का सपना देख रहे हैं?
तो आपके लिए आयोजित होने जा रहा है Utkarsh द्वारा Sub-Inspector Mega Seminar!

🗓️ दिनांक: 31 अगस्त | ⏰ समय: सुबह 10:30 बजे
📍 जोधपुर व जयपुर में एक साथ !
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बंगाल काश्तकारी अधिनियम 1885 में पाबना विद्रोह की जांच के लिए एक आयोग के गठन की प्रतिक्रिया स्वरूप हुआ था

पाबना विद्रोह 1873-73‌ के मध्य बंगाल में हुआ था जिसका नेतृत्व ईशान चंद्र राय ,शंभू पाल , खोदी मल्लाह तथा केशव चंद्र राय के नेतृत्व में हुआ था

इन नेताओं ने नारा दिया "हम महारानी और सिर्फ महारानी के रैयत्त होना चाहते हैं"
शकुरखेडा़ का युद्ध 1724 ईस्वी में निजाम उल मुल्क और मुबारिज खां के मध्य हुआ। इस युद्ध में मराठों ने निजाम उल मुल्क को पराजित किया।

इसके बाद 1728 में पालखेडा़ का युद्ध हुआ जिसमें बाजीराव प्रथम ने निजाम को पराजित किया और मुंगी शिवगांव की संधि की ।
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"🚨रजिस्ट्रेशन का अंतिम दिन है!

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उत्तरी प्रांत - मोरो त्रयम्बक पिंगले

दक्षिण पश्चिम - अन्ना जी दत्तो

दक्षिण पूर्व - दंतो जी पंत
संगम कालीन समाज -

इसमें वर्ण विभाजन की व्यवस्था आधारित नहीं था अपितु यह वर्ग विभाजन पर आधारित था। इसमें वर्ण व्यवस्था एवं दास प्रथा दोनों का ही अभाव था। संगम कालीन सामाजिक विभाजन किस प्रकार था -

1. अरसर- यह शासक वर्ग था।

2. अंडनार -ब्राह्मण वर्ग को अंडनार कहा जाता था। संगम युग का ब्राह्मण मांस मदिरा का सेवन करता था जिसे निंदनीय नहीं माना जाता था।

3. वेनिगर-व्यापार या वनिक वर्गीय लोग वेनिगर कहलाते थे।

4 वेल्लाल - किसान वर्ग को वेल्लाल कहा जाता था तथा इनका प्रमुख वेलिर कहलाता था।
यह वेलिर स्वयं को द्वारकाधीश कृष्ण का वंशज मानते थे ।
वेल्लाल भी धनी और भूमिहीन किसानों में विभाजित थे।

धनी किसानों को वेल, अरशु या कविदि की उपाधि दी जाती थी।