बांकीपुर उपचुनाव से सीख 📚
- जब 243 सीटें थीं, तब PK का खाता भी नहीं खुला।
- लेकिन जब सिर्फ 1 सीट थी, तब PK ने जीत का परचम लहरा दिया।
सीख:
- किस विज्ञापन में कितने पद है, उसका कोई मतलब नहीं है। आपका चयन आपकी तैयारी पर निर्भर करता है। इसलिए पोस्ट कम देखकर कोई भी फॉर्म छोड़ें नहीं, बल्कि हर अवसर का लाभ उठाएँ! 💯
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@eBPSCtalks
भारतीय राजनीति और चुनाव प्रक्रिया में "जमानत जब्त होना" एक बहुत ही प्रसिद्ध वाक्यांश है। अक्सर जब कोई उम्मीदवार चुनाव में बहुत बुरी तरह हारता है, तो कहा जाता है कि "उसकी जमानत जब्त हो गई"।
विस्तार से समझते हैं कि इसका तकनीकी, कानूनी और व्यावहारिक अर्थ क्या होता है:
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1. 'जमानत' (Security Deposit) क्या होती है?
चुनाव आयोग का नियम है कि जब भी कोई व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए नामांकन (Nomination) दाखिल करता है, तो उसे एक निश्चित राशि (फीस) सरकारी खजाने या चुनाव आयोग के पास जमा करनी होती है। इसे अमानत राशि या Security Deposit कहा जाता है।
> यह राशि क्यों ली जाती है?
> इसका मुख्य उद्देश्य अगंभीर (Non-serious) और फर्जी उम्मीदवारों को चुनाव में खड़े होने से रोकना होता है, ताकि केवल वही लोग पर्चा भरें जो चुनाव को लेकर गंभीर हैं।
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2. 'जमानत जब्त' कब होती है? (कानूनी नियम)
जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 (Representation of the People Act, 1951) के नियमों के अनुसार:
- यदि कोई उम्मीदवार कुल पड़े वैध वोटों (Valid Votes) का कम से कम 1/6 हिस्सा (यानी 16.66%) हासिल करने में असफल रहता है, तो उसकी जमा की गई अमानत राशि वापस नहीं मिलती और उसे जब्त कर लिया जाता है।
- उदाहरण: यदि किसी क्षेत्र में कुल 1,00,000 वैध वोट पड़े हैं, तो अपनी जमानत बचाने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 16,667 वोट लाने होंगे। यदि उसे इससे कम वोट मिले, तो उसकी जमानत जब्त हो जाएगी।
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3. विभिन्न चुनावों में जमानत राशि कितनी होती है?
| चुनाव का प्रकार | General | SC/ST |
| लोकसभा MP | ₹25,000 | ₹12,500 |
| विधानसभा MLA/MLC | ₹10,000 | ₹5,000 |
| राष्ट्रपति / उपराष्ट्रपति | ₹15,000 | ₹15,000 (सभी के लिए एक समान) |
--- @BPSCmassala
1. 1/6 (16.66%) से अधिक वोट मिलने पर: चाहे उम्मीदवार चुनाव हारे भी, लेकिन यदि उसे 1/6 से अधिक वोट मिले हैं, तो उसकी राशि लौटा दी जाती है।
2. चुनाव जीतने पर: यदि कोई उम्मीदवार चुनाव जीत जाता है (भले ही उसे 1/6 से कम वोट मिले हों), तब भी उसकी जमानत राशि वापस मिल जाती है।
3. नामांकन वापस लेने या रद्द होने पर: यदि किसी उम्मीदवार का नामांकन खारिज हो जाता है या वह तय समय में अपना नाम वापस ले लेता है, तो उसकी राशि लौटा दी जाती है।
4. उम्मीदवार की मृत्यु होने पर: यदि मतदान शुरू होने से पहले उम्मीदवार का निधन हो जाता है, तो राशि उसके परिजनों को लौटा दी जाती है।
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5. 'जमानत जब्त' होने का राजनीतिक और सामाजिक असर
पैसों के लिहाज से यह रकम बहुत बड़ी नहीं होती, लेकिन राजनीतिक रूप से 'जमानत जब्त होना' अपमानजनक माना जाता है।
भारतीय राजनीति और चुनाव प्रक्रिया में "जमानत जब्त होना" एक बहुत ही प्रसिद्ध वाक्यांश है। अक्सर जब कोई उम्मीदवार चुनाव में बहुत बुरी तरह हारता है, तो कहा जाता है कि "उसकी जमानत जब्त हो गई"।
विस्तार से समझते हैं कि इसका तकनीकी, कानूनी और व्यावहारिक अर्थ क्या होता है:
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1. 'जमानत' (Security Deposit) क्या होती है?
चुनाव आयोग का नियम है कि जब भी कोई व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए नामांकन (Nomination) दाखिल करता है, तो उसे एक निश्चित राशि (फीस) सरकारी खजाने या चुनाव आयोग के पास जमा करनी होती है। इसे अमानत राशि या Security Deposit कहा जाता है।
> यह राशि क्यों ली जाती है?
> इसका मुख्य उद्देश्य अगंभीर (Non-serious) और फर्जी उम्मीदवारों को चुनाव में खड़े होने से रोकना होता है, ताकि केवल वही लोग पर्चा भरें जो चुनाव को लेकर गंभीर हैं।
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2. 'जमानत जब्त' कब होती है? (कानूनी नियम)
जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 (Representation of the People Act, 1951) के नियमों के अनुसार:
- यदि कोई उम्मीदवार कुल पड़े वैध वोटों (Valid Votes) का कम से कम 1/6 हिस्सा (यानी 16.66%) हासिल करने में असफल रहता है, तो उसकी जमा की गई अमानत राशि वापस नहीं मिलती और उसे जब्त कर लिया जाता है।
- उदाहरण: यदि किसी क्षेत्र में कुल 1,00,000 वैध वोट पड़े हैं, तो अपनी जमानत बचाने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 16,667 वोट लाने होंगे। यदि उसे इससे कम वोट मिले, तो उसकी जमानत जब्त हो जाएगी।
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3. विभिन्न चुनावों में जमानत राशि कितनी होती है?
| चुनाव का प्रकार | General | SC/ST |
| लोकसभा MP | ₹25,000 | ₹12,500 |
| विधानसभा MLA/MLC | ₹10,000 | ₹5,000 |
| राष्ट्रपति / उपराष्ट्रपति | ₹15,000 | ₹15,000 (सभी के लिए एक समान) |
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4. किन परिस्थितियों में जमानत राशि वापस मिल जाती है ?
1. 1/6 (16.66%) से अधिक वोट मिलने पर: चाहे उम्मीदवार चुनाव हारे भी, लेकिन यदि उसे 1/6 से अधिक वोट मिले हैं, तो उसकी राशि लौटा दी जाती है।
2. चुनाव जीतने पर: यदि कोई उम्मीदवार चुनाव जीत जाता है (भले ही उसे 1/6 से कम वोट मिले हों), तब भी उसकी जमानत राशि वापस मिल जाती है।
3. नामांकन वापस लेने या रद्द होने पर: यदि किसी उम्मीदवार का नामांकन खारिज हो जाता है या वह तय समय में अपना नाम वापस ले लेता है, तो उसकी राशि लौटा दी जाती है।
4. उम्मीदवार की मृत्यु होने पर: यदि मतदान शुरू होने से पहले उम्मीदवार का निधन हो जाता है, तो राशि उसके परिजनों को लौटा दी जाती है।
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5. 'जमानत जब्त' होने का राजनीतिक और सामाजिक असर
पैसों के लिहाज से यह रकम बहुत बड़ी नहीं होती, लेकिन राजनीतिक रूप से 'जमानत जब्त होना' अपमानजनक माना जाता है।
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writeup_mts_03082026 (1).pdf
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Multi Tasking (Non-Technical) Staff, and Havaldar (CBIC and CBN) Examination, 2025: Declaration of result of Computer Based Examination to shortlist candidates for PET/ PST for the post of Havaldar.
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List1_03082026.pdf
1.3 MB
- Qualified candidates.
List2_03082026.pdf
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- List of candidates whose result were not processed due to malpractices.
List3_03082026.pdf
56.8 KB
- List Of Debarred Candidates.
एक समय था जब शादी से पहले लड़कियां चादर पर कढ़ाई करके पूरी पेटी भर लेती थी लेकिन आजकल सब कुछ बदल गया है कोई हाथ से मेहनत नहीं करना चाहता।।
आज भी जब किसी रिश्तेदारी में जाता हूं और इस प्रकार की चादर देखता हूं तो दिल खुश हो जाता है।।
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आज भी जब किसी रिश्तेदारी में जाता हूं और इस प्रकार की चादर देखता हूं तो दिल खुश हो जाता है।।
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- हथकरघा दिवस (National Handloom Day)
- हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेन्नई में की थी, और यह दिन भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत का सम्मान करने, बुनकरों के सामाजिक-आर्थिक योगदान को उजागर करने और 'स्वदेशी आंदोलन' की याद दिलाने के लिए मनाया जाता है जो 7 अगस्त 1905 को शुरू हुआ था। यह दिन हथकरघा को बढ़ावा देने और ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने का संकल्प लेता है।
- मुख्य बिंदु:
- कब: हर साल 7 अगस्त को क्यों ?
भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत के प्रतीक हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए.
हथकरघा बुनकरों और श्रमिकों को सम्मानित करने और उनके योगदान को दर्शाने के लिए।
स्वदेशी आंदोलन (7 अगस्त 1905) की याद में, जिसने घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहित किया था।
- शुरुआत: पहला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 7 अगस्त 2015 को मनाया गया था।
- उद्देश्य: हथकरघा को बढ़ावा देना, बुनकरों की आय बढ़ाना, महिला सशक्तिकरण (70% से अधिक बुनकर महिलाएं हैं), और इस कालातीत शिल्प की रक्षा करना है।
@BPSCmassala
- हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेन्नई में की थी, और यह दिन भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत का सम्मान करने, बुनकरों के सामाजिक-आर्थिक योगदान को उजागर करने और 'स्वदेशी आंदोलन' की याद दिलाने के लिए मनाया जाता है जो 7 अगस्त 1905 को शुरू हुआ था। यह दिन हथकरघा को बढ़ावा देने और ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने का संकल्प लेता है।
- मुख्य बिंदु:
- कब: हर साल 7 अगस्त को क्यों ?
भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत के प्रतीक हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए.
हथकरघा बुनकरों और श्रमिकों को सम्मानित करने और उनके योगदान को दर्शाने के लिए।
स्वदेशी आंदोलन (7 अगस्त 1905) की याद में, जिसने घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहित किया था।
- शुरुआत: पहला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 7 अगस्त 2015 को मनाया गया था।
- उद्देश्य: हथकरघा को बढ़ावा देना, बुनकरों की आय बढ़ाना, महिला सशक्तिकरण (70% से अधिक बुनकर महिलाएं हैं), और इस कालातीत शिल्प की रक्षा करना है।
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'एक पर हमला, तीनों पर आक्रमण माना जाएगा': पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच मक्का में रक्षा समझौता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने शुक्रवार को एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत, तीनों देशों में से किसी एक पर भी हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। एक संयुक्त बयान के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई बैठक के दौरान 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने शुक्रवार को एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत, तीनों देशों में से किसी एक पर भी हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। एक संयुक्त बयान के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई बैठक के दौरान 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए।
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Re-Tender-Notice-Caterers_BPSC-20260723-bcdvfu.pdf
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Sealed bids are invited from interested Caterers/Firms for Supply of Lunch (Buffet) – Veg./Non-Veg. and Lunch packets (Special/ Normal) on different occasions and when required at BPSC Office, Patna.
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