Brahmacharya™ (ब्रह्मचर्य) Celibacy
34.8K subscribers
2.35K photos
637 videos
508 files
1.47K links
The Real Brahmacharya ,The Vital Power

ब्रह्मचर्य पालन के लिए इस दुनिया का सर्वश्रेष्ठ और सबसे बड़ा चैनल

यूट्यूब चैनल लिंक
https://youtube.com/@brahmacharya_official?si=cLLiragp8mrWD00P
Download Telegram
🏮🏮🏮🏮🏮🏮🏮🏮🏮

Big Principles for life

- Be kind when most react.
- Stay calm when most panic.
- Fast when most overconsume.
- Listen when most want to talk.
- Work hard when most laze around.
- Be grateful when most feel entitled.
- Focus when most distract themselves.
- Be authentic when most are pretending.
❤57🔥5👍3
📱
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
🔰प्रश्न: मुहँ काला करने का क्या अर्थ है?

जब भी हम कोई ऐसा कर्म करते हैं जिससे आत्मा की पवित्रता अर्थात उर्जा कम हो जाए उसका प्रभाव हमारे मुख से दिखना शुरु हो जाता है, तेज समाप्त हो जाता, सुन्दरता नष्ट हो जाती है, पवित्र आकर्षण व मसूमियत धूमिल होने लगती है, उम्र से बड़े लगने लग जाते हैं यह सारे लक्षण आत्मा की पवित्रता कम होने के हैं,जिस आत्मा में पवित्रता अर्थात उर्जा अधिक होती है वह आत्मा उम्र से छोटी, सुन्दर, मासूम व बहुत ही आकर्षण भरी होती है इसका उदाहरण हैं हमारे देवी देवतायों के चित्र, ब्रह्मा के सिवाए कोई भी देवता ही वृद्ध अवस्था नहीं दिखाई जाती है क्यों? क्योंकि जब आत्मा सम्पूर्ण पवित्र हो तो शरीर की ageing process बहुत धीमी हो जाती है, आयु बढ़ जाती है!

इसलिए वो कर्म जिससे आत्मा की पवित्र उर्जा नष्ट होती हो उसे करना अपना "मुहँ काला करना है " क्योंकि विकारों में सबसे हानिकारक विकार काम विकार है , क्योंकि इससे आत्मा की सबसे अधिक उर्जा नष्ट होती है इसलिए काम विकार में गिरने को मुहँ काला करना कहते हैं पर काम को जीत लो और अन्य विकार भले रहें, नहीं! किसी भी विकार में गिरने से मुहँ काला होता है क्योंकि उससे आत्मा की पवित्रता नष्ट होती है जिसका प्रभाव शरीर में दिखता है जिन आत्मायों की पवित्रता अधिक होती है उनके चेहरे में रूहानी तेज दिखता है उसका व्यक्तित्व व व्यवहार बहुत श्रेष्ठ होता है जिसे परमात्मा कहते हैं " चेहरे व चलन से सेवा "•••🌹💖
❤87🥰5
आज पूरे दिन आपने कितना टाइम वेस्ट किया ?
Anonymous Poll
12%
1 घंटे से कम
14%
1 से 2 घंटे
14%
2 से 3 घंटे
61%
3 घंटे से ज्यादा
😱21👍6🕊5❤1
⭐️⭐️⭐️
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
नई किताब

इंद्रिय संयम ✅
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤21
INDRIY_SANYAM.pdf
5.9 MB
नई किताब 📚

इंद्रिय संयम - श्रीराम शर्मा आचार्य

(युवाओं के लिए स्पेशल )✅

Read More....
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
👍27❤15
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
❤1
🔥🔥🔥🔥

"काम विकार (वासना) का जन्म ही मत होने दो"

एक मनुष्य ने शेर का बच्चा पाला था। बच्चा बहुत गरीब था । एक दिन नींद में वह बच्चा मालिक का बाँया हाथ चाटने लगा। चाटते- चाटते दाँत लग जाने से हाथ का थोड़ा-सा खून निकला। अब बच्चा कान टेढ़ा किये खून चाटने लगा। तकलीफ के मारे मालिक जग पड़ा और अपना हाथ हटाना चाहा। किंचित हाथ हटाते ही शेर एकदम खड़ा हो गया और जाति स्वभावानुसार "गुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र गर्जन कर उसने हाथ को पंजे के नीचे मजबूती से दबा लिया और फिर रक्त चाटने लगा। मालिक ने सोचा 'अरे बाप रे! अब तो मामला बड़ा बेढब है। यदि मैं इसको और प्यार करूँ तो यह मुझे फाड़ खाये बिना नहीं रहेगा।' उसने निश्चय किया और तुरन्त सन्दूक में से पिस्तौल मँगवाई। पिस्तौल मिलते ही 'रे नमकहराम' ऐसा कहकर तत्काल धड़ाके से गोली छोड़कर उसे मार डाला।

ओ मेरे प्यारे भाईयो और बहनों ! यदि कामरूपी शेर तुम्हारा शोषण करना चाहता हो तो तुम भी उसे फौरन मार डालो। कम से कम 30 वर्ष तक विषय से बिलकुल दूर रहो । उसका स्मरण तक मत करो। क्योंकि पूर्वोक्त नव मैथुनों में से प्रत्येक मैथुन ब्रह्मचर्य का नाशक है।

🆘अन्धे को जैसे शीशा दिखलाना व्यर्थ है, वैसे ही कामान्ध पुरुष को भी उपदेश करना व्यर्थ है। उल्लू तो दिन ही में नहीं देख सकता किन्तु कामान्ध पुरुष डबल उल्लू होता है।

जो विषय अत्यन्त प्रिय व मधुर मालूम होता है और जो परमार्थ मनुष्य का इसी जीवन में अमृत तुल्य फल शान्ति देने वाला और अन्त में मुक्तिप्रद है तथा जिसका आधार ब्रह्मचर्य के ऊपर ही मुख्यतः निर्भर करता है: वह परमार्थ उन्हें विष के समान कडुआ मालूम होता है। जो वास्तव में विष है, उसे अमृत समझना और जो प्रत्यक्ष अमृत है उसे विष समझना, ये घोर पाप के लक्षण है!

यह बात निःसन्देह सत्य है कि जिसे साँप काटता है, उसको मिर्च भी तीती नहीं लगती है और न नीम कड़वी लगती है। परन्तु चीनी उसे बहुत कड़वी लगती है। ठीक यही हालत विषय रूपी सर्प से दंशित पुरुषों की भी समझिये। उन्हें सब उलटी ही बातें सूझती हैं और उनकी दृष्टि में पाप ही पाप भरा रहता है। सभी स्त्रियों की ओर पाप दृष्टि से देखते और इस प्रकार व्यर्थ पाप के भागी बन अन्त में नरक को जाते हैं।

आज, बड़े-बड़े देवस्थानों में भी नाच रङ्ग व व्यभिचार घुस गया है। कई मन्दिरों पर तो भद्दे चित्र भी खुदे हुए हैं। हा! पापी पुरुष क्या नहीं करेंगे। गंगा जी में गर्दन तक डूबे रहने पर भी उनकी पाप-दृष्टि नहीं जाती। देव-दर्शन के बहाने मन्दिरों में और वायु-सेवन के मिस से घाट पर तथा जगह-जगह कई गीध बैठे हुए नित्य दिखाई देते हैं। - धिक्कार है ऐसे नारकी जीवों को!

आभार : ये लेख स्वामी शिवानंद जी द्वारा लिखी गई बुक "ब्रह्मचर्य ही जीवन है !"से लिया गया है ।

ऐसे लेख पढ़ने के लिए टेलीग्राम पर इस लिंक से जुड़े 👇

https://t.me/+lyAYPPuFQAgxODU1
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤65🙏14👍7🔥5🤗4
अतः ज़्यादा न सोचे, जीवन की सहजता के साथ चलते रहे। मन शान्त होने पर स्वतः गति पकड़ लेता है लक्ष्य की ओर...👍
❤82👍17
क्या आप हमारे व्हाट्सएप चैनल में जुड़े हो ?
Anonymous Poll
51%
हाँ
49%
नहीं
❤16🔥2🥰1
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
❤3👍1
📝इक बून्द से लेकर
राख की ढेरी तक
🔥
बस

इतनी कहानी तेरी है!

न बचपन था
न बुढ़ापा होगा
और

न ही जवानी तेरी है...
👌


🎁 शिक्षा:- प्यारे साथियों आपके शुद्ध और सात्विक कार्य ही आपके जीवन की सार्थकता है। यह जीवन क्षणिक है, आप इसका सर्वोत्तम सदुपयोग करने का प्रयास करे...
संयम और अनुशासन ही आपके महान जीवन की खूबसूरती का आधार है,
इस निरंतर बनाए रखिए...
👍


यदि आप भी अपना जीवन संवारना चाहते है, तो जॉइन कीजिये👌
यह लिंक है...

https://t.me/+3IxAhZvO5iw1ZjRl

🌏ओनली ONE शेयर For PURE vibes....

🏐🏐🏐
Please open Telegram to view this post
VIEW IN TELEGRAM
❤32🔥2🎉2
बड़ा घर का वैद Ghar ka baid.pdf
7.5 MB
स्वास्थ्यवर्धक पुस्तक

हैल्थ बुक

🔰 घर का बड़ा वैद ✅

Join🔻
@Ayurveda_Yoga_Meditation
❤19👍2🔥2
🔰 स्वास्थ्य से संबंधित कुछ विशेष जानकारियां

1- 90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं। पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए। अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी।
2- कुल 13 अधारणीय वेग हैं
3-160 रोग केवल मांसाहार से होते है
4- 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन के 1 घंटे बाद ही जल पीना चाहिये।
5- 80 रोग चाय पीने से होते हैं।
6- 48 रोग ऐलुमिनियम के बर्तन या कुकर के खाने से होते हैं।
7- शराब, कोल्डड्रिंक और चाय के सेवन से हृदय रोग होता है।
8- अण्डा खाने से हृदयरोग, पथरी और गुर्दे खराब होते हैं।
9- ठंडेजल (फ्रिज)और आइसक्रीम से बड़ी आंत सिकुड़ जाती है।
10- मैगी, गुटका, शराब, सूअर का माँस, पिज्जा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है।
11- भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।
12- बाल रंगने वाले द्रव्यों(हेयरकलर) से आँखों को हानि (अंधापन भी) होती है।
13- दूध(चाय) के साथ नमक (नमकीन पदार्थ) खाने से चर्म रोग हो जाता है।
14- शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।
15- गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से आँखें कमजोर हो जाती हैं।
16- टाई बांधने से आँखों और मस्तिष्क हो हानि पहुँचती है।
17- खड़े होकर जल पीने से घुटनों(जोड़ों) में पीड़ा होती है।
18- खड़े होकर मूत्रत्याग करने से रीढ़ की हड्डी को हानि होती है।
19- भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ता है।
20- जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।
21- मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।
22- पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और क्षय(टीबी) होने का डर रहता है।
23- चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है मलेरिया नहीं होता है।
24- तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।
25- मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त रहता है।
26- अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिए सर्वश्रेश्ठ है।
27- हृदयरोगी के लिए अर्जुनकी छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमी,
सेंधा नमक, गुड़, चोकरयुक्त आटा, छिलकेयुक्त अनाज औषधियां हैं।
28- भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है। अपच नहीं होता है।
29- अपक्व भोजन (जो आग पर न पकाया गया हो) से शरीर स्वस्थ रहता है और आयु दीर्घ होती है।
30- मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर होती है।
31- जल सदैव ताजा(चापाकल, कुएंआदि का) पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होते हैं।
32- नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग) तथा हैजा से बचाता है।
33- चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसलिए सदैव गेहूं मोटा ही पिसवाना चाहिए।
34- फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए।
35- भोजन पकने के 48 मिनट के
अन्दर खा लेना चाहिए। उसके पश्चात् उसकी पोषकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।।
36- मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोषकता 100%, कांसे के बर्तन में 97%, पीतल के बर्तन में 93%, अल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर कुकर में 7-13% ही बचते हैं।
37- गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा, मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक पुराना नहीं प्रयोग करना चाहिए।
38- 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मैदा (बिस्कुट, ब्रेड , समोसा आदि) कभी भी नहीं खिलाना चाहिए।
39- खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेष्ठ होता है उसके बाद काला नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है।
40- जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में से कुछ भी लगाने पर जलन ठीक हो जाती है और फफोले नहीं पड़ते।
41- सरसों, तिल,मूंगफली , सुरजमुखी या नारियल का कच्ची घानी का तेल और देशी घी ही खाना चाहिए है। रिफाइंड तेल और
वनस्पति घी (डालडा) जहर होता है।
42- पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से आँखों की खुजली लाली और जलन ठीक हो जाती है।
43- खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है।
44- चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर उस पर 5-20 मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है। हड्डी टूटने पर चुम्बक का प्रयोग करने से आधे से भी कम समय में ठीक होती है।
45- मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी(कच्ची) चीनी का प्रयोग करना चाहिए सफेद चीनी जहर होता है।
46- कुत्ता काटने पर हल्दी लगाना चाहिए।
47-बर्तन मिटटी के ही प्रयोग करने चाहिए।
48- टूथपेस्ट और ब्रश के स्थान पर दातून और मंजन करना चाहिए दाँत मजबूत रहेंगे।
(आँखों के रोग में दातून नहीं करना चाहिए)
49- यदि सम्भव हो तो सूर्यास्त के पश्चात् न तो पढ़ें और लिखने का काम तो न ही करें तो अच्छा है।
50- निरोग रहने के लिए अच्छी नींद
❤71🔥4👍2🥰1😢1
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
💐आज ये पढ़कर सोएं 💐

आज की रात – खुद को सौंप देने की रात

आज का दिन पूरा हुआ।
जो करना था, जितना हो सका — आपने किया।
अब इस क्षण में कुछ भी अधूरा नहीं है।

धीरे से एक गहरी साँस लीजिए…
और छोड़ दीजिए।

आज जो गलत हुआ,
वह अब बदला नहीं जा सकता।
और जो अच्छा हुआ,
वह आपके भीतर सुरक्षित है।

इस समय किसी चिंता को पकड़कर रखने की ज़रूरत नहीं।
कल का दिन अपनी जगह आएगा।
अभी सिर्फ यह पल है —
और इस पल में आप सुरक्षित हैं।

अपने शरीर को महसूस कीजिए…
पैर ढीले हो रहे हैं…
कंधों का बोझ उतर रहा है…
माथा हल्का हो रहा है…

मन से कहिए —
“अब आराम करने का समय है।”

आपको हर चीज़ का हल अभी नहीं ढूँढना है।
कुछ सवालों को रात भर सोने देना भी
एक समझदारी है।

जैसे धरती हर रात अँधेरे में भी
सूरज के लौटने पर भरोसा रखती है,
वैसे ही आपका मन भी
कल की रोशनी का इंतज़ार कर सकता है।

अगर कोई विचार आए —
उसे जाने दीजिए।
जैसे बादल आते हैं और चले जाते हैं।

आप विचार नहीं हैं।
आप वह शांति हैं
जिसमें विचार आते-जाते हैं।

आज अपने आप से कुछ भी माँगिए मत।
आज बस अपने आप को अनुमति दीजिए —
आराम करने की।

कहिए मन ही मन:
“मैंने आज पर्याप्त किया।”
“मैं ठीक हूँ।”

“अब मैं खुद को विश्राम देता/देती हूँ।”

नींद कोई मजबूरी नहीं है,
नींद एक उपहार है।
और आज आप इस उपहार के योग्य हैं।

अब शब्दों को भी धीरे-धीरे छोड़ दीजिए…
साँस को हल्का होने दीजिए…
और खुद को नींद के हवाले कर दीजिए। 🌙

शुभ रात्रि।
आप सुरक्षित हैं।
आप शांत हैं।
आप सो सकते हैं। 🤍
❤74🙏14👍4👏1
विपरीत लिंग की तरफ आकर्षण से कैसे बचे ?
❤63👍11🔥10👏1
आप पूरे दिन में खुद के लिए कितना टाइम निकालते है ? सच सच बताना , पढ़ो तो इसका जवाब जरूर देना❤️
Anonymous Poll
36%
बिल्कुल नहीं 😢
13%
5 मिनट
17%
30 मिनट
11%
1 घंटा
23%
1 घंटे से ज्यादा 🤗
👍20❤7