🔥युवा कौन है? जवानी क्या है??🔥
☀️उठो जागो और तब तक मत रुको
जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए✅
🌈हे भारत के वीर भाइयों और बहनो क्यों निराश हो?🤔
क्यों हताश हो?🤔
🌈कब तक मन की गुलामी करते हुए जीओगे?? आखिर कब तक।
क्षणिक सुख के पीछे पागल बन रोते रहोगे??क्योंकि ये अदभुत जवानी तुम्हे नाली में बहाने के लिये नही मिली है??😊
धिक्कार है ऐसी जवानी पर जो सिर्फ कंचन कामिनी के पीछे ही बरबाद हो जाती है।✅
एक बात याद रखिये:-🤔
🌻वो जवानी नही,
🌻जो खूंन को जलाती नही
🌻दाग लेकर गुलामी का
🌻 क्यूँ हम जीए
🌻सोचकर रातो को नींद आती नही
🔥जवानी एक धधकती आग है🔥
चाहो तो खुद को भोगो में जलाकर जवानी को राख कर दो। या फिर इसी आग में तपकर दुनिया के अंधकार और अज्ञानता को जला कर राख कर दो👍
अब राख कौनसी चुननी है??🤔
ये निर्णय तुम्हे करना है।✅
🔥लोग कहते है की
🔥ज़माना बदलता है हरदम
🔥मर्द वो है
🔥जो ज़माने बदल देते है
ज़िंदगी सुधारने के लिये अभी जुड़े👇
https://t.me/+RCBOO24o4PS1h2mj
🕊️🌻जय माता दी🌻🕊️
Humanity is The Best Religion😊
🌈Note:- (राष्ट्र सेवा व नारी शक्ति के सम्मान में सिर्फ एक share कीजिये। यह बोहत बडी सेवा है 🙏)
☀️उठो जागो और तब तक मत रुको
जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए✅
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क्षणिक सुख के पीछे पागल बन रोते रहोगे??क्योंकि ये अदभुत जवानी तुम्हे नाली में बहाने के लिये नही मिली है??😊
धिक्कार है ऐसी जवानी पर जो सिर्फ कंचन कामिनी के पीछे ही बरबाद हो जाती है।✅
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🌻दाग लेकर गुलामी का
🌻 क्यूँ हम जीए
🌻सोचकर रातो को नींद आती नही
🔥जवानी एक धधकती आग है🔥
चाहो तो खुद को भोगो में जलाकर जवानी को राख कर दो। या फिर इसी आग में तपकर दुनिया के अंधकार और अज्ञानता को जला कर राख कर दो👍
अब राख कौनसी चुननी है??🤔
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मकर संक्रांति का आध्यात्मिक रहस्य
मकर संक्रांति पर प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालुओं का मेला विभिन्न नदियों के घाटों पर लगता है। इस शुभ दिन तिल खिचड़ी का दान करते हैं। वास्तव में स्थूल परम्पराओं मे आध्यात्मिक रहस्य छुपे हुए हैं। अभी कलियुग का अंतिम समय चल रहा है। सारी मानवता दुखी-अशांत हैं। हर कोई परिवर्तन के इंतजार मेँ हैं । सारी व्यवस्थाएं व मनुष्य की मनोदशा जीर्ण-शीर्ण हो चुकी हैं। ऐसे समय मेँ विश्व सृष्टिकर्ता परमात्मा शिव कलियुग, सतयुग के संधिकाल अर्थात संगमयुग पर ब्रह्मा के तन मेँ आ चुके हैं।
जिस प्रकार भक्ति मार्ग मेँ पुरुषोत्तम मास मेँ दान-पुण्य आदि का महत्व होता है, उसी प्रकार पुरुषोत्तम संगमयुग, जिसमें ज्ञान स्नान करके बुराइयों का दान करने से, पुण्य का खाता जमा करने वाली हर आत्मा उत्तम पुरुष बन सकती है। इस दिन खिचड़ी और तिल का दान करते हैं, इसका भाव यह है कि मनुष्य के संस्कारों मेँ आसुरियता की मिलावट हो चुकी है, अर्थात उसके संस्कार खिचड़ी हो चुके हैं, जिन्हें परिवर्तन करके अब दिव्य संस्कार धारण करने हैं । इसका अर्थ यह है कि प्रत्येक मनुष्य को ईर्ष्या-द्वेष आदि संस्कारों को छोडकर संस्कारों का मिलन इस प्रकार करना है, जिस प्रकार खिचड़ी मिलकर एक हो जाती है।
परमात्मा की अभी आज्ञा है कि तिल समान अपनी सूक्ष्म से सूक्ष्म बुराइयों को भी हमें तिलांजलि देना है। जैसे उस गंगा मेँ भाव-कुभाव से ज़ोर जबर्दस्ती से एक दो को नहलाकर खुश होते हैं और शुभ मानते हैं; इसी प्रकार अब हमें ज्ञान गंगा मेँ नहलाकर मुक्ति-जीवनमुक्ति का मार्ग दिखाना है। जैसे जब नयी फसल आती है तो सभी खुशियाँ मनाते हैं। इसी प्रकार वास्तविक और अविनाशी खुशी प्राप्त होती है, बुराइयों का त्याग करने से। फसल कटाई का समय देशी मास के हिसाब से पौष महीने के अंतिम दिन तथा अंग्रेजी महीने के 12,13, 14 जनवरी को आता है। इस समय एक सूर्य राशि से दूसरी राशि मेँ जाता है। इसलिए इसे संक्रमण काल कहा जाता है, अर्थात एक दशा से दूसरी दशा मेँ जाने का समय। यह संक्रमण काल उस महान संक्रमण काल का यादगार है जो कलियुग के अंत सतयुग के आरंभ मेँ घटता है। इस संक्रमण काल मेँ ज्ञान सूर्य परमात्मा भी राशि बदलते हैं। वे परमधाम छोड़ कर साकार वतन मेँ अवतरित होते हैं। संसार मेँ अनेक क्रांतियाँ हुई। हर क्रांति के पीछे उद्देश्य – परिवर्तन रहा है...
हथियारों के बल पर जो क्रांतियाँ हुई उनसे आंशिक परिवर्तन तो हुआ, किन्तु सम्पूर्ण परिवर्तन को आज मनुष्य तरस रहा है। सतयुग मेँ खुशी का आधार अभी का संस्कार परिवर्तन है, इस क्रांति के बाद सृष्टि पर कोई क्रांति नहीं हुई। संक्रांति का त्योहार संगमयुग पर हुई उस महान क्रांति की यादगार मेँ मनाया जाता है।
✨✨✨✨✨✨✨✨✨
1) स्नान - ब्रह्म मुहूर्त मेँ उठ स्नान, ज्ञान स्नान का यादगार है।
2) तिल खाना - तिल खाना, खिलाना, दान करने का भी रहस्य है। वास्तव में छोटी चीज़ की तुलना तिल से की गयी है। आत्मा भी अति सूक्ष्म है। अर्थात तिल आत्म स्वरूप में टिकने का यादगार है।
3) पतंग उड़ाना - आत्मा हल्की हो तो उड़ने लगती है; देहभान वाला उड़ नहीं सकता है। जबकि आत्माभिमानी अपनी डोर भगवान को देकर तीनों लोकों की सैर कर सकता है।
4) तिल के लड्डू खाना - तिल को अलग खाओ तो कड़वा महसूस होता है। अर्थात अकेले मेँ भारीपन का अनुभव होता है। लड्डू एकता एवं मिठास का भी प्रतीक है।
5) तिल का दान - दान देने से भाग्य बनता है। अतः वर्तमान संगंयुग में हमें परमात्मा को अपनी छोटी कमज़ोरी का भी दान देना है।
6) आग जलाना - अग्नि मेँ डालने से चीज़ें पूरी तरह बदल जाती, सामूहिक आग - योगीजन संगठित होकर एक ही स्मृति से ईश्वर की स्मृति मे टिकते हैं, जिसके द्वारा न केवल उनके जन्म-जन्म के विकर्म भस्म होते हैं, बल्कि उनकी याद की किरणें समस्त विश्व में फाइल कर शांति, पवित्रता, आनंद, प्रेम, शक्ति की तरंगे फैलाती हैं।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
यदि इस पर्व को निम्नलिखित विधि द्वारा मनाए तो न केवल हमें सच्चे सुख की प्राप्ति होगी बल्कि हम परमात्म दुआओं के भी अधिकारी बनेंगे !
आप सबको इस महान पर्व मकर सक्रांति की बहुत-बहुत शुभ कामनाएँ।
मकर संक्रांति पर प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालुओं का मेला विभिन्न नदियों के घाटों पर लगता है। इस शुभ दिन तिल खिचड़ी का दान करते हैं। वास्तव में स्थूल परम्पराओं मे आध्यात्मिक रहस्य छुपे हुए हैं। अभी कलियुग का अंतिम समय चल रहा है। सारी मानवता दुखी-अशांत हैं। हर कोई परिवर्तन के इंतजार मेँ हैं । सारी व्यवस्थाएं व मनुष्य की मनोदशा जीर्ण-शीर्ण हो चुकी हैं। ऐसे समय मेँ विश्व सृष्टिकर्ता परमात्मा शिव कलियुग, सतयुग के संधिकाल अर्थात संगमयुग पर ब्रह्मा के तन मेँ आ चुके हैं।
जिस प्रकार भक्ति मार्ग मेँ पुरुषोत्तम मास मेँ दान-पुण्य आदि का महत्व होता है, उसी प्रकार पुरुषोत्तम संगमयुग, जिसमें ज्ञान स्नान करके बुराइयों का दान करने से, पुण्य का खाता जमा करने वाली हर आत्मा उत्तम पुरुष बन सकती है। इस दिन खिचड़ी और तिल का दान करते हैं, इसका भाव यह है कि मनुष्य के संस्कारों मेँ आसुरियता की मिलावट हो चुकी है, अर्थात उसके संस्कार खिचड़ी हो चुके हैं, जिन्हें परिवर्तन करके अब दिव्य संस्कार धारण करने हैं । इसका अर्थ यह है कि प्रत्येक मनुष्य को ईर्ष्या-द्वेष आदि संस्कारों को छोडकर संस्कारों का मिलन इस प्रकार करना है, जिस प्रकार खिचड़ी मिलकर एक हो जाती है।
परमात्मा की अभी आज्ञा है कि तिल समान अपनी सूक्ष्म से सूक्ष्म बुराइयों को भी हमें तिलांजलि देना है। जैसे उस गंगा मेँ भाव-कुभाव से ज़ोर जबर्दस्ती से एक दो को नहलाकर खुश होते हैं और शुभ मानते हैं; इसी प्रकार अब हमें ज्ञान गंगा मेँ नहलाकर मुक्ति-जीवनमुक्ति का मार्ग दिखाना है। जैसे जब नयी फसल आती है तो सभी खुशियाँ मनाते हैं। इसी प्रकार वास्तविक और अविनाशी खुशी प्राप्त होती है, बुराइयों का त्याग करने से। फसल कटाई का समय देशी मास के हिसाब से पौष महीने के अंतिम दिन तथा अंग्रेजी महीने के 12,13, 14 जनवरी को आता है। इस समय एक सूर्य राशि से दूसरी राशि मेँ जाता है। इसलिए इसे संक्रमण काल कहा जाता है, अर्थात एक दशा से दूसरी दशा मेँ जाने का समय। यह संक्रमण काल उस महान संक्रमण काल का यादगार है जो कलियुग के अंत सतयुग के आरंभ मेँ घटता है। इस संक्रमण काल मेँ ज्ञान सूर्य परमात्मा भी राशि बदलते हैं। वे परमधाम छोड़ कर साकार वतन मेँ अवतरित होते हैं। संसार मेँ अनेक क्रांतियाँ हुई। हर क्रांति के पीछे उद्देश्य – परिवर्तन रहा है...
हथियारों के बल पर जो क्रांतियाँ हुई उनसे आंशिक परिवर्तन तो हुआ, किन्तु सम्पूर्ण परिवर्तन को आज मनुष्य तरस रहा है। सतयुग मेँ खुशी का आधार अभी का संस्कार परिवर्तन है, इस क्रांति के बाद सृष्टि पर कोई क्रांति नहीं हुई। संक्रांति का त्योहार संगमयुग पर हुई उस महान क्रांति की यादगार मेँ मनाया जाता है।
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1) स्नान - ब्रह्म मुहूर्त मेँ उठ स्नान, ज्ञान स्नान का यादगार है।
2) तिल खाना - तिल खाना, खिलाना, दान करने का भी रहस्य है। वास्तव में छोटी चीज़ की तुलना तिल से की गयी है। आत्मा भी अति सूक्ष्म है। अर्थात तिल आत्म स्वरूप में टिकने का यादगार है।
3) पतंग उड़ाना - आत्मा हल्की हो तो उड़ने लगती है; देहभान वाला उड़ नहीं सकता है। जबकि आत्माभिमानी अपनी डोर भगवान को देकर तीनों लोकों की सैर कर सकता है।
4) तिल के लड्डू खाना - तिल को अलग खाओ तो कड़वा महसूस होता है। अर्थात अकेले मेँ भारीपन का अनुभव होता है। लड्डू एकता एवं मिठास का भी प्रतीक है।
5) तिल का दान - दान देने से भाग्य बनता है। अतः वर्तमान संगंयुग में हमें परमात्मा को अपनी छोटी कमज़ोरी का भी दान देना है।
6) आग जलाना - अग्नि मेँ डालने से चीज़ें पूरी तरह बदल जाती, सामूहिक आग - योगीजन संगठित होकर एक ही स्मृति से ईश्वर की स्मृति मे टिकते हैं, जिसके द्वारा न केवल उनके जन्म-जन्म के विकर्म भस्म होते हैं, बल्कि उनकी याद की किरणें समस्त विश्व में फाइल कर शांति, पवित्रता, आनंद, प्रेम, शक्ति की तरंगे फैलाती हैं।
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साइबर क्राइम की रिपोर्ट 📞1930 या cybercrime.gov.in पर करें।
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-प्रेम
- स्नेह के कारण मधुमक्खियां फूल की तरफा आकर्षित होती हैंं ।
- स्नेह की शक्ति सभी जीव जन्तुओं, समुन्दर की सभी मछलियों और सभी पक्षियों को अपनी नस्ल बढाने और झुंड बना कर रहने के लिये प्रेरित करती हैं ।
-स्नेह की शक्ति ही हमे एक दूसरे की ओर खींचती है ।
-प्रेम सर्वशक्तिवान है ।
-प्रेम की शक्ति प्रकृति की हर वस्तु, हर व्यक्ति, हर अणु वा हर परमाणु को सामंजस्य में रखती है ।
-आप जो देते हैं वही आप को वापिस मिलता है अर्थात उसे ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
-हर क्रिया की समान और विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है ।
-देने की हर क्रिया पाने की प्रतिक्रिया उत्पन्न करती है । आप जो देते हैं वह अवश्य आप की ओर लौटता है । यही सृष्टि का गणित है ।
-आप हर पल सकारात्मक या नकारात्मक विचार वा भावनायें दे रहे हैं ।
-आप के जीवन में जो लोग व घटनाये आती हैं वे आप के विचारो और भावनाओ द्वारा ही आकर्षित होते हैं ।
-दोगे तो तुम्हे दिया जायेगा । जो देते हैं वही पाते हैं । मदद करोगे मदद मिलेगी । क्रोध करोगे तो क्रोधी लोग मिलेंगे ।
--आप जो सोचते हैं और महसूस करते हैं उसी के अनुसार हर घटना और हर परिस्थिति का निर्माण होता है ।
-आप सोचते हैं मेरा जीवन बेहतरीन है तो आप के जीवन में ऐसे लोग वा परिस्थितियां आयेगी तो सचमुच आप का जीवन बेहतरीन बनेगा । अगर बूरा सोचेंगे तो बुरे लोग जीवन में आयेंगे ।
-सदा सब के प्रति स्नेह की भावना रखो ।
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आप सब से एक शिकायत है , आप लोग पोस्ट पर रिएक्शन नहीं देते हो ,इतना तो कर ही सकते हो , ये ही मोटिवेशन है हमारे लिए तो 😒
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Vishwa Shanti Ke Mahanayak the Prajapita Brahma Baba (1).pdf
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विश्व शांति के महानायक
प्रजापिता ब्रह्मा
Life changing Biography 💎
प्रजापिता ब्रह्मा
Life changing Biography 💎
❤16
“सपनों में उड़ान भरो”
कुछ काम करो,
न मन को निराश करो
पंख होंगे मजबूत,
तुम सपनों में साहस भरो,
गिरोगे लेकिन फिर से उड़ान भरो,
सपनों में उड़ान भरो।
तलाश करो मंजिल की,
ना व्यर्थ जीवनदान करो,
जग में रहकर कुछ नाम करो,
अभी शुरुआत करो,
सुयोग बीत न जाए कहीं,
सपनों में उड़ान भरो।
समझो खुद को,
लक्ष्य का ध्यान करो,
यूं ना बैठकर बीच राह में,
मंजिल का इंतजार करो,
संभालो खुद को यूं ना विश्राम करो,
सपनों में उड़ान भरो।
उठो चलो आगे बढ़ो,
मन की आवाज सुनो,
खुद के सपने साकार करो,
अपना भी कुछ नाम करो,
इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करो,
सपनों में उड़ान भरो।
बहक जाएं गर कदम,
तो गुरु का ध्यान करो,
तुम पा ना सको ऐसी कोई मंजिल नहीं,
हार जीत का मत ख्याल करो,
अडिग रहकर लक्ष्य का रसपान करो,
सपनों में उड़ान भरो ।
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
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कुछ काम करो,
न मन को निराश करो
पंख होंगे मजबूत,
तुम सपनों में साहस भरो,
गिरोगे लेकिन फिर से उड़ान भरो,
सपनों में उड़ान भरो।
तलाश करो मंजिल की,
ना व्यर्थ जीवनदान करो,
जग में रहकर कुछ नाम करो,
अभी शुरुआत करो,
सुयोग बीत न जाए कहीं,
सपनों में उड़ान भरो।
समझो खुद को,
लक्ष्य का ध्यान करो,
यूं ना बैठकर बीच राह में,
मंजिल का इंतजार करो,
संभालो खुद को यूं ना विश्राम करो,
सपनों में उड़ान भरो।
उठो चलो आगे बढ़ो,
मन की आवाज सुनो,
खुद के सपने साकार करो,
अपना भी कुछ नाम करो,
इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करो,
सपनों में उड़ान भरो।
बहक जाएं गर कदम,
तो गुरु का ध्यान करो,
तुम पा ना सको ऐसी कोई मंजिल नहीं,
हार जीत का मत ख्याल करो,
अडिग रहकर लक्ष्य का रसपान करो,
सपनों में उड़ान भरो ।
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
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आज का चैलेंज✅
1) यह नश्वर देह ही आपको विकारो मे धकेल देती है अतः इस झूटी देह के अभिमान का त्याग कर। आप यह संकल्प 21 बार आज दोहराएंगे:-
✨मैं एक पवित्र आत्मा हूँ भगवान की संतान हूँ✨
2) अब तक यदि आपने डायरी maintain नही कि है। तो आज ही एक छोटी डायरी बनाये✅
3) कृतज्ञता की लिस्ट:-
आज अपनी डायरी में उन सब बातों की लिस्ट बनाये जिनके लिये आपको भगवान को धन्यवाद देना चाहिए। but आप भूल जाते है, या रोज़ नही कहते है🤔
जैसे:- आपके पास सुनने के लिये कान है,👍
देखने के लिये खूबसूरत आंखे है,👍
अच्छे रिश्ते है✅
लेकिन कइयों के पास ये नही है।
इस तरह बोहत ध्यान से हर उस बात कि लिस्ट बनाये जिसके लिये आपके ईश्वर के शुक्रगुज़ार है। यह बोहत लम्बी हो सकती है💐😊
और
इस लिस्ट को बनाकर ईश्वर को धन्यवाद देकर आपको कैसा लगा।
4) इस ग्रुप के ऊपर 3 बिंदी है उन्हे दबाकर पिन कर लेवे और नोटिफिकेशन ऑन रखे ,जिससे सारी अपडेट आपको मिलती रहे। 👍
5) अमृतवेला (ब्रह्मुहूर्त) 3 to 5
में उठने कि अछि आदत का संकल्प कीजिये आज💐✨
और यह गीत सुनेंगे,जो ऊपर भेजा गया है।✅
यह एक अच्छी आदत आपकी सब बुराई पर भारी पड़ जाएगी✅
यकीन मानिए ये सच है।
आज के लिये All The Best👍
😊अच्छी आदतों के लिये टेलीग्राम पर जुड़े:-
https://t.me/+RCBOO24o4PS1h2mj
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❤50👍7🕊3
आज रात 8 बजे बहुत स्पेशल पोस्ट आने वाला है ।
ज्यादा से ज्यादा रिएक्शन दीजिए
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🔥85❤33👍24✍6😱6