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शरीर की वास्तविकता .pdf
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नई बुक ✅
➡️ शरीर की वास्तविकता - स्वामी ध्रुवदेव परिव्राजक ❤️
V. Important✅
ये किताब ,जो चीज आपको लक्ष्य से भटकाती है उससे बचने का तरीका बताती है और गलत आदतें जैसे ज्यादा मोबाइल चलाना ,गंदी चीज़े देखना उन सब से आपको मुक्त करने के आसान टिप्स देती है। ये पुस्तक जरूर पढ़े। हार्ड कॉपी भी जरूर खरीदे जिससे लेखक को उनकी मेहनत का फल मिल सके।✅
V. Important
ये किताब ,जो चीज आपको लक्ष्य से भटकाती है उससे बचने का तरीका बताती है और गलत आदतें जैसे ज्यादा मोबाइल चलाना ,गंदी चीज़े देखना उन सब से आपको मुक्त करने के आसान टिप्स देती है। ये पुस्तक जरूर पढ़े। हार्ड कॉपी भी जरूर खरीदे जिससे लेखक को उनकी मेहनत का फल मिल सके।
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आज का चैलेंज
Day 10 (10/21)
Date: 10/07/2026
1. पूरे दिन का टाइम टेबल बनाना है ।
2 किसी एक इंसान को थैंक्स कहना है ।
3 मोबाइल कम से कम चलाना है जरूरी है तो ही चलाए ।
4 शाम को रिपोर्टिंग ली जाएगी आपसे।
5 किसी अच्छी किताब के 5 पेज पढ़ने है ।
6. कम से कम 2 घंटे मौन रखना है ।
7 मेडिटेशन करना है कम से कम 15 मिनट
Day 10 (10/21)
Date: 10/07/2026
1. पूरे दिन का टाइम टेबल बनाना है ।
2 किसी एक इंसान को थैंक्स कहना है ।
3 मोबाइल कम से कम चलाना है जरूरी है तो ही चलाए ।
4 शाम को रिपोर्टिंग ली जाएगी आपसे।
5 किसी अच्छी किताब के 5 पेज पढ़ने है ।
6. कम से कम 2 घंटे मौन रखना है ।
7 मेडिटेशन करना है कम से कम 15 मिनट
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इंटरनेट का मर्यादापूर्वक यूज करे
अपना कीमती समय यूंही न गंवाएं
ये भी एक नशा है ..इसके आदी मत हो जाना कही ।
नोकरी लगने तक पूरा मर्यादित होकर पढ़ाई करो, संयम बाद में भी रखना है लेकिन इस समय आप बिलकुल भी इस जीवन बदलने वाले टाइम को वेस्ट नही कर सकते।
अपना कीमती समय यूंही न गंवाएं
ये भी एक नशा है ..इसके आदी मत हो जाना कही ।
नोकरी लगने तक पूरा मर्यादित होकर पढ़ाई करो, संयम बाद में भी रखना है लेकिन इस समय आप बिलकुल भी इस जीवन बदलने वाले टाइम को वेस्ट नही कर सकते।
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आज का चैलेंज
Day 11 (11/21)
Date: 11/07/2026
1. पोस्ट पढ़ते ही रुकीये और पूरे दिन का टाइम टेबल बना डालो ।
2 सुबह 8 बजे तक फोन को टच भी मत करना
3 पूरे दिन में हर 2 घंटे में 1 मिनट रुकना और देखना मन में विचारों की गति कैसी रही ? मन को शांत करना है बीच में रुक रुक कर आज
4 आज चेक करना कि मुझमे किसी बात का घमंड तो नहीं है ? है तो किस बात का ? क्या ये बात मुझे परेशान तो नहीं करती ?
5 = एक्सरसाइज या वॉक जरूर करना आज कम से कम 15 मिनट
शाम को रिपोर्ट लूंगा आपसे इसलिए करने ही है ये टास्क💙
रोजना स्वास्थ्य को सुधारे 👇
https://t.me/+lHeOB0kJZxgxYjY1
Day 11 (11/21)
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2 सुबह 8 बजे तक फोन को टच भी मत करना
3 पूरे दिन में हर 2 घंटे में 1 मिनट रुकना और देखना मन में विचारों की गति कैसी रही ? मन को शांत करना है बीच में रुक रुक कर आज
4 आज चेक करना कि मुझमे किसी बात का घमंड तो नहीं है ? है तो किस बात का ? क्या ये बात मुझे परेशान तो नहीं करती ?
5 = एक्सरसाइज या वॉक जरूर करना आज कम से कम 15 मिनट
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ब्रम्हचर्य विज्ञान.pdf
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आज का चैलेंज 🌺
Day 12 (12/21)
1. पोस्ट पढ़ते ही फोन को नीचे रखो और आँखे बंद करके 3 गहरी साँसे लो
2 क्या क्या करोगे आज पूरे दिन उसको लिखो डायरी में
3 पढ़ाई की टेबल पर किताबों का ढेर लगा है हुआ तो सेट करना अच्छे से आज , 5 मिनट लगेगी
4 पूरे दिन में हर 2 घंटे में 1 मिनट रुकना और देखना कौनसी बात ज्यादा सोच रहे हो ? मन को शांत करना है बीच में रुक कर
5 एक्सरसाइज या वॉक जरूर करना आज कम से कम 15 मिनट
6. ऊपर वाले पोस्ट में जो लिंक दिए है ,जिस भी प्लेटफॉर्म पर आप है , उसे फॉलो करे ।
शाम को रिपोर्ट लूंगा आपसे इसलिए करने ही है ये टास्क💙
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Day 12 (12/21)
1. पोस्ट पढ़ते ही फोन को नीचे रखो और आँखे बंद करके 3 गहरी साँसे लो
2 क्या क्या करोगे आज पूरे दिन उसको लिखो डायरी में
3 पढ़ाई की टेबल पर किताबों का ढेर लगा है हुआ तो सेट करना अच्छे से आज , 5 मिनट लगेगी
4 पूरे दिन में हर 2 घंटे में 1 मिनट रुकना और देखना कौनसी बात ज्यादा सोच रहे हो ? मन को शांत करना है बीच में रुक कर
5 एक्सरसाइज या वॉक जरूर करना आज कम से कम 15 मिनट
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सभी लड़के , इस वीडियो को ध्यान से देखो और संभल जाओ ❤️
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आज का चैलेंज 🌺
Day 13 (13/21)
Date: 13/07/2026
1. पोस्ट पढ़ते ही डायरी पेन उठाओ और पूरे दिन का रूटीन बना डालो
2 पढ़ भी तभी पाओगे जब स्वास्थ्य अच्छा होगा , इसलिए कम से कम 15 मिनट आज एक्सरसाइज करनी है ।
3 आज सोशल मीडिया को कितनी देर चलाते हो उसका ऑडिट करेंगे ,ये भी देखना कि क्या सच में जरूरी है उतना चलाना, अगर नहीं ,तो तुरंत याेजना बनाओ ,कैसे कम करोगे ये टाइम
4 . आज गुस्सा नहीं करना है पूरे दिन , आए तो भी कंट्रोल करना है ।
शाम को रिपोर्ट लूंगा आपसे इसलिए करने ही है ये टास्क 💙
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Day 13 (13/21)
Date: 13/07/2026
1. पोस्ट पढ़ते ही डायरी पेन उठाओ और पूरे दिन का रूटीन बना डालो
2 पढ़ भी तभी पाओगे जब स्वास्थ्य अच्छा होगा , इसलिए कम से कम 15 मिनट आज एक्सरसाइज करनी है ।
3 आज सोशल मीडिया को कितनी देर चलाते हो उसका ऑडिट करेंगे ,ये भी देखना कि क्या सच में जरूरी है उतना चलाना, अगर नहीं ,तो तुरंत याेजना बनाओ ,कैसे कम करोगे ये टाइम
4 . आज गुस्सा नहीं करना है पूरे दिन , आए तो भी कंट्रोल करना है ।
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आपको आलस (Laziness) क्यों आता है ?
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कुछ लोगों ने ब्रह्मचर्य को मजाक समझा है ??
आप लोग किसे धोखा दे रहे हो लोगों को या अपने आपको ?
ब्रह्मचर्य कोई बच्चो का खेल नहीं है कि सोचा और आप ब्रह्मचारी हो गये |
विर्य को रोकना इतना आसान होता तो हर कोई ब्रह्मचारी होता |
ब्रह्मचारी होने के लिए आपको हर वो नियम को पूर्णतः करना पडेगा जिनके बिना विर्य कदापी नही रूक सकता है |कुछ दोनो में ही फिर से भंग हो जाएगा
|
दिनचर्या , स्वच्छता ,सात्विक खानपान ,सदविचार , रहन सहन ,ध्यान , प्राणायाम ,इष्ट समर्पण , चिन्तन,मनन |
इनमें से एक भी गलत हुआ तो आपको निश्चित हानि ही होगी और इन सभी नियमों के बिना आप जीवन में कभी भी ब्रह्मचर्य का पालन नही कर पाओगे |
विशेषकर 8 प्रकार के मैथुन का त्याग करना होता है |नहीं तो आप खोखले विचारों का ढिंढोरा पीट रहे हैं बस | और खूद को ही धोखा देकर अपना यह जीवन कुडे में डाल रहे हो बस |
► स्मरण
किसी सुन्दर युवती स्त्री के रूप-लावण्य अथवा हाव, भाव, कटाक्ष एवं श्रृंगार का स्मरण करना, कुत्सित पुरुषों की कुत्सित क्रियाओं का स्मरण करना, अपने द्वारा पूर्व में घटी हुई मैथुन आदि क्रिया का स्मरण करना, भविष्य में किसी स्त्री के साथ मैथुन करने का संकल्प अथवा भावना करना, माला, चन्दन, इत्र, फुलेल, लवेंडर आदि कामोद्दीपक एवं श्रृंगार के पदार्थों का स्मरण करना, पूर्व में देखे हुए किसी सुन्दर स्त्री अथवा बालक के चित्र का अथवा अश्लील चित्र का स्मरण करना—ये सभी मानसिक मैथुन के अंतर्गत हैं | इनसे वीर्य का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूपमें नाश होता है और मनपर तो बुरा प्रभाव पड़ता ही है | मन ख़राब होने से आगे चलकर वैसी क्रिया भी घट सकती है | इसलिए सर्वांग में ब्रह्मचर्य का पालन करनेवाले को चाहिए कि वह उक्त सभी प्रकार के मानसिक मैथुन का त्याग कर दे, जिससे मनमें कामोद्दीपन हो ऐसा कोई संकल्प ही न करे और यदि हो जाय तो उसका तत्काल विवेक एवं विचार के द्वारा त्याग कर दे |
► श्रवण
गंदे तथा कामोद्दीपक एवं श्रृंगार-रस के गानों को सुनना, श्रृंगार-रसका गद्य-पद्यात्मक वर्णन सुनना, स्त्रियों के रूप-लावण्य तथा अंगो का वर्णन सुनना, उनके हाव, भाव, कटाक्ष का वर्णन सुनना, कामविषयक बातें सुनना आदि—ये सभी श्रवणरूप मैथुन के अंतर्गत हैं | ब्रह्मचारी को चाहिए कि वह उक्त सभी प्रकार के श्रवण का त्याग कर दे
► कीर्तन
अश्लील बातों का कथन, श्रृंगार-रसका वर्णन, स्त्रियों के रूप–लावण्य, यौवन एवं श्रृंगार की प्रशंसा तथा उनके हाव, भाव, कटाक्ष आदि का वर्णन, विलासिता का वर्णन, कामोद्दीपक अथवा गंदे गीत गाना तथा ऐसे साहित्य को स्वयं पढ़ना और दूसरों को सुनाना तथा कथा आदि में ऐसे प्रसंगों को विस्तार के साथ कहना—ये सभी कीर्तनरूप मैथुन के अंतर्गत हैं | ब्रह्मचारी को चाहिए कि वह इन सबका त्याग कर दे |
► प्रेक्षण
स्त्रियों के रूप-लावण्य, श्रृंगार तथा उनके अंगों की रचना को देखना, किसी सुंदरी स्त्री अथवा सुन्दर बालक के रूप या चित्र को देखना, नाटक-सिनेमा देखना, कामोद्दीपक वस्तुओं तथा सजावट के सामान को देखना, दर्पण आदि में अपना रूप तथा श्रृंगार देखना—यह सभी प्रेक्षण रूप मैथुन के अंतर्गत हैं | ब्रह्मचारी को चाहिए कि वह जान-बूझकर तो इन वस्तुओं को देखे ही नहीं; यदि भूलसे इनपर दृष्टि पड़ जाय तो इन्हें स्वप्नवत, मायामय, नाशवान एवं दुःखरूप समझकर तुरंत इनपर से दृष्टि को हटा ले, दृष्टि को इन पर ठहरने न दे |
► केलि
स्त्रियों के साथ हँसी-मजाक करना, नाचना-गाना, आमोद-प्रमोद के लिए क्लब वगैरह में जाना, जलविहार करना, फाग खेलना, गन्दी चेष्टाएँ करना, स्त्रीसंग करना आदि—ये सभी केलिरूप मैथुन के अंतर्गत हैं | ब्रह्मचारी को इन सबका सर्वथा त्याग कर देना चाहिए |
► श्रृंगार
अपनेको सुन्दर दिखलाने के लिए बाल सँवारना, कंघी करना, काकुल रखना, शरीर को वस्त्राभूषणादि से सजाना, इत्र, फुलेल, लवेंडर आदि का व्यवहार करना, फूलों की माला धारण करना, अंगराग लगाना, सुरमा लगाना, उबटन करना, साबुन-तेल लगाना, पाउडर लगाना, दाँतों में मिस्सी लगाना, दाँतों में सोना जड़वाना, शौक के लिए बिना आवश्यकता के चश्मा लगाना, होठ लाल करने के लिए पान खाना—यह सभी श्रृंगार के अंतर्गत है | दूसरों के चित्त को आकर्षण करने के उद्देश्य से किया हुआ यह सभी श्रृंगार कामोद्दीपक है, अतएव मैथुन का अंग होने के कारण ब्रह्मचारी के लिए सर्वथा त्याज्य है | कुमारी कन्याओं, बालकों, विधवाओं, सन्यासियों एवं वानप्रस्थों को तो उक्त सभी प्रकार के श्रृंगार से सर्वथा बचना चाहिए | विवाहित स्त्री-पुरुषों को भी ऋतुकाल में सहवास के समय के अतिरिक्त और समय में इन सभी श्रृंगारों से यथासम्भव बचना चाहिए |
ऐसी पोस्ट सिर्फ यहां ही मिलेगी 👇
https://t.me/+RCBOO24o4PS1h2mj
आप लोग किसे धोखा दे रहे हो लोगों को या अपने आपको ?
ब्रह्मचर्य कोई बच्चो का खेल नहीं है कि सोचा और आप ब्रह्मचारी हो गये |
विर्य को रोकना इतना आसान होता तो हर कोई ब्रह्मचारी होता |
ब्रह्मचारी होने के लिए आपको हर वो नियम को पूर्णतः करना पडेगा जिनके बिना विर्य कदापी नही रूक सकता है |कुछ दोनो में ही फिर से भंग हो जाएगा
|
दिनचर्या , स्वच्छता ,सात्विक खानपान ,सदविचार , रहन सहन ,ध्यान , प्राणायाम ,इष्ट समर्पण , चिन्तन,मनन |
इनमें से एक भी गलत हुआ तो आपको निश्चित हानि ही होगी और इन सभी नियमों के बिना आप जीवन में कभी भी ब्रह्मचर्य का पालन नही कर पाओगे |
विशेषकर 8 प्रकार के मैथुन का त्याग करना होता है |नहीं तो आप खोखले विचारों का ढिंढोरा पीट रहे हैं बस | और खूद को ही धोखा देकर अपना यह जीवन कुडे में डाल रहे हो बस |
► स्मरण
किसी सुन्दर युवती स्त्री के रूप-लावण्य अथवा हाव, भाव, कटाक्ष एवं श्रृंगार का स्मरण करना, कुत्सित पुरुषों की कुत्सित क्रियाओं का स्मरण करना, अपने द्वारा पूर्व में घटी हुई मैथुन आदि क्रिया का स्मरण करना, भविष्य में किसी स्त्री के साथ मैथुन करने का संकल्प अथवा भावना करना, माला, चन्दन, इत्र, फुलेल, लवेंडर आदि कामोद्दीपक एवं श्रृंगार के पदार्थों का स्मरण करना, पूर्व में देखे हुए किसी सुन्दर स्त्री अथवा बालक के चित्र का अथवा अश्लील चित्र का स्मरण करना—ये सभी मानसिक मैथुन के अंतर्गत हैं | इनसे वीर्य का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूपमें नाश होता है और मनपर तो बुरा प्रभाव पड़ता ही है | मन ख़राब होने से आगे चलकर वैसी क्रिया भी घट सकती है | इसलिए सर्वांग में ब्रह्मचर्य का पालन करनेवाले को चाहिए कि वह उक्त सभी प्रकार के मानसिक मैथुन का त्याग कर दे, जिससे मनमें कामोद्दीपन हो ऐसा कोई संकल्प ही न करे और यदि हो जाय तो उसका तत्काल विवेक एवं विचार के द्वारा त्याग कर दे |
► श्रवण
गंदे तथा कामोद्दीपक एवं श्रृंगार-रस के गानों को सुनना, श्रृंगार-रसका गद्य-पद्यात्मक वर्णन सुनना, स्त्रियों के रूप-लावण्य तथा अंगो का वर्णन सुनना, उनके हाव, भाव, कटाक्ष का वर्णन सुनना, कामविषयक बातें सुनना आदि—ये सभी श्रवणरूप मैथुन के अंतर्गत हैं | ब्रह्मचारी को चाहिए कि वह उक्त सभी प्रकार के श्रवण का त्याग कर दे
► कीर्तन
अश्लील बातों का कथन, श्रृंगार-रसका वर्णन, स्त्रियों के रूप–लावण्य, यौवन एवं श्रृंगार की प्रशंसा तथा उनके हाव, भाव, कटाक्ष आदि का वर्णन, विलासिता का वर्णन, कामोद्दीपक अथवा गंदे गीत गाना तथा ऐसे साहित्य को स्वयं पढ़ना और दूसरों को सुनाना तथा कथा आदि में ऐसे प्रसंगों को विस्तार के साथ कहना—ये सभी कीर्तनरूप मैथुन के अंतर्गत हैं | ब्रह्मचारी को चाहिए कि वह इन सबका त्याग कर दे |
► प्रेक्षण
स्त्रियों के रूप-लावण्य, श्रृंगार तथा उनके अंगों की रचना को देखना, किसी सुंदरी स्त्री अथवा सुन्दर बालक के रूप या चित्र को देखना, नाटक-सिनेमा देखना, कामोद्दीपक वस्तुओं तथा सजावट के सामान को देखना, दर्पण आदि में अपना रूप तथा श्रृंगार देखना—यह सभी प्रेक्षण रूप मैथुन के अंतर्गत हैं | ब्रह्मचारी को चाहिए कि वह जान-बूझकर तो इन वस्तुओं को देखे ही नहीं; यदि भूलसे इनपर दृष्टि पड़ जाय तो इन्हें स्वप्नवत, मायामय, नाशवान एवं दुःखरूप समझकर तुरंत इनपर से दृष्टि को हटा ले, दृष्टि को इन पर ठहरने न दे |
► केलि
स्त्रियों के साथ हँसी-मजाक करना, नाचना-गाना, आमोद-प्रमोद के लिए क्लब वगैरह में जाना, जलविहार करना, फाग खेलना, गन्दी चेष्टाएँ करना, स्त्रीसंग करना आदि—ये सभी केलिरूप मैथुन के अंतर्गत हैं | ब्रह्मचारी को इन सबका सर्वथा त्याग कर देना चाहिए |
► श्रृंगार
अपनेको सुन्दर दिखलाने के लिए बाल सँवारना, कंघी करना, काकुल रखना, शरीर को वस्त्राभूषणादि से सजाना, इत्र, फुलेल, लवेंडर आदि का व्यवहार करना, फूलों की माला धारण करना, अंगराग लगाना, सुरमा लगाना, उबटन करना, साबुन-तेल लगाना, पाउडर लगाना, दाँतों में मिस्सी लगाना, दाँतों में सोना जड़वाना, शौक के लिए बिना आवश्यकता के चश्मा लगाना, होठ लाल करने के लिए पान खाना—यह सभी श्रृंगार के अंतर्गत है | दूसरों के चित्त को आकर्षण करने के उद्देश्य से किया हुआ यह सभी श्रृंगार कामोद्दीपक है, अतएव मैथुन का अंग होने के कारण ब्रह्मचारी के लिए सर्वथा त्याज्य है | कुमारी कन्याओं, बालकों, विधवाओं, सन्यासियों एवं वानप्रस्थों को तो उक्त सभी प्रकार के श्रृंगार से सर्वथा बचना चाहिए | विवाहित स्त्री-पुरुषों को भी ऋतुकाल में सहवास के समय के अतिरिक्त और समय में इन सभी श्रृंगारों से यथासम्भव बचना चाहिए |
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