यदि आप सुखी जीवन जीना चाहते हैं, तो आपको कुछ चीजों पर नियंत्रण रखना होगा। *"सबसे पहले अपने मन पर नियंत्रण रखें। यद्यपि मन पर नियंत्रण रखना बहुत कठिन है, परंतु असंभव नहीं है।"*
याद रहे, *"संसार में मुफ्त में कुछ भी नहीं मिलता।" "यदि सुखी रहना है, तो मन का नियंत्रण करना ही होगा। यदि आप ईश्वर की दंड व्यवस्था को याद रखेंगे, तो आपका मन पर नियंत्रण हो जाएगा। आप कोई गलत काम नहीं करेंगे।"*
*"इसके बाद अपनी वाणी पर संयम रखें। सोच समझ कर बोलें। बोलने में जल्दबाजी न करें। प्रमाणों से परीक्षा करके सदा सत्य ही बोलें। मीठी सरल और हितकारी भाषा ही बोलें। अभिमान से न बोलें, झूठ न बोलें, कठोर भाषा न बोलें।"*
*"अपनी चाल ढाल पर नियंत्रण रखें। अभिमान से न चलें। सभ्यता और नम्रता से सीधी चाल चलें।"*
*"अपनी सुबह को अपने नियंत्रण में रखें। अर्थात जब आप सुबह सो कर उठते हैं 4:00 बजे या 5:00 बजे, तब से लेकर 8:00 बजे तक, यह समय अपने कंट्रोल में रखें। इस समय आप अपने व्यक्तिगत कार्यों को करें। व्यायाम ध्यान स्नान हवन वेदों का स्वाध्याय इत्यादि।" "सुबह के इन तीन-चार घंटों में संसार व्यापार की बातें न सोचें। दूसरों के साथ कोई व्यवहार न करें।" "यह समय आप अपने व्यक्तिगत कार्यों के लिए रखें। यह तात्पर्य है, सुबह को नियंत्रण में रखने का।"*
*"इसी प्रकार से अपने भोजन पर नियंत्रण रखें। यदि आप शुद्ध शाकाहारी भोजन खाएं। सात्विक भोजन खाएं, तो आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और आप सुखी रहेंगे।"*
*"और अंत में अपने धन पर भी नियंत्रण रखें। फजूल खर्ची न करें। जो आवश्यक खर्च हो, उतना ही करें। बाकी धन का दुरुपयोग न करते हुए सदुपयोग करें। यदि आपके पास धन अधिक हो जाए, तो उसे योग्य पात्रों में दान कर दें। वैदिक धर्म प्रचार में गौशाला अनाथालय धर्मार्थ चिकित्सालय वैदिक गुरुकुल वेद प्रचारक संन्यासी आदि को दान कर दें। इतना करने से आप जीवन में सुखी रहेंगे।"*
--- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़ गुजरात।"*
याद रहे, *"संसार में मुफ्त में कुछ भी नहीं मिलता।" "यदि सुखी रहना है, तो मन का नियंत्रण करना ही होगा। यदि आप ईश्वर की दंड व्यवस्था को याद रखेंगे, तो आपका मन पर नियंत्रण हो जाएगा। आप कोई गलत काम नहीं करेंगे।"*
*"इसके बाद अपनी वाणी पर संयम रखें। सोच समझ कर बोलें। बोलने में जल्दबाजी न करें। प्रमाणों से परीक्षा करके सदा सत्य ही बोलें। मीठी सरल और हितकारी भाषा ही बोलें। अभिमान से न बोलें, झूठ न बोलें, कठोर भाषा न बोलें।"*
*"अपनी चाल ढाल पर नियंत्रण रखें। अभिमान से न चलें। सभ्यता और नम्रता से सीधी चाल चलें।"*
*"अपनी सुबह को अपने नियंत्रण में रखें। अर्थात जब आप सुबह सो कर उठते हैं 4:00 बजे या 5:00 बजे, तब से लेकर 8:00 बजे तक, यह समय अपने कंट्रोल में रखें। इस समय आप अपने व्यक्तिगत कार्यों को करें। व्यायाम ध्यान स्नान हवन वेदों का स्वाध्याय इत्यादि।" "सुबह के इन तीन-चार घंटों में संसार व्यापार की बातें न सोचें। दूसरों के साथ कोई व्यवहार न करें।" "यह समय आप अपने व्यक्तिगत कार्यों के लिए रखें। यह तात्पर्य है, सुबह को नियंत्रण में रखने का।"*
*"इसी प्रकार से अपने भोजन पर नियंत्रण रखें। यदि आप शुद्ध शाकाहारी भोजन खाएं। सात्विक भोजन खाएं, तो आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और आप सुखी रहेंगे।"*
*"और अंत में अपने धन पर भी नियंत्रण रखें। फजूल खर्ची न करें। जो आवश्यक खर्च हो, उतना ही करें। बाकी धन का दुरुपयोग न करते हुए सदुपयोग करें। यदि आपके पास धन अधिक हो जाए, तो उसे योग्य पात्रों में दान कर दें। वैदिक धर्म प्रचार में गौशाला अनाथालय धर्मार्थ चिकित्सालय वैदिक गुरुकुल वेद प्रचारक संन्यासी आदि को दान कर दें। इतना करने से आप जीवन में सुखी रहेंगे।"*
--- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़ गुजरात।"*
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एक छोटे बच्चे ने अपने पिता से कहा, *"पिताजी! यह मनुष्य जीवन तो हमें एक ही बार मिला है। तो इसमें हम क्यों न नाचें गाएं खाएं पिएं और सब प्रकार से मजा करें? न कोई अगला जन्म है, न कोई पिछला जन्म है। यह सारा सुख भोगने का अवसर एक ही बार मिला है।"*
उसके पिता ने समझाया, *"बेटा जन्म तो बार-बार मिलता है। यह मनुष्य जन्म भी मुफ्त में नहीं मिला। पिछले कर्मों का फल है। जो हमने पिछले जन्म में कर्म किए थे, यह जन्म उनका फल है। और इस जन्म में जो अब हम अच्छे काम करेंगे, सेवा परोपकार दान दया ईश्वरभक्ति देशभक्ति प्राणियों की रक्षा करना माता-पिता और गुरुजनों की सेवा करना यज्ञ संध्या उपासना आदि आदि शुभ कर्म करेंगे, इनका फल हमको अगले जन्म में मिलेगा। यही सत्य है।"*
यदि ऐसा मानकर चलें, कि *"यह वर्तमान जन्म मुफ्त में मिला है", "तो ऐसा मुफ्त में फल देने वाला ईश्वर अन्यायकारी माना जाएगा।" "यदि वह मुफ्त में देता है, तो सबको एक समान देना चाहिए। किसी को ईश्वर ने मनुष्य जन्म दिया, किसी को पशु पक्षी, किसी को कीड़ा मकोड़ा, और किसी को वृक्ष आदि। इस तरह से तो ईश्वर अन्यायकारी माना जाएगा।"*
*"परंतु वेदों शास्त्रों के अनुसार ईश्वर न्यायकारी है। वह सबको पिछले कर्मों के आधार पर यह जन्म देता है। और इस जन्म के कर्मों के आधार पर फिर आगे जन्म देगा। इसलिए पिछला जन्म भी था, और इसके बाद अगला जन्म भी होगा।" "ऐसा मानकर चलें, तो ही आप अच्छे काम करेंगे और बुरे कामों से बच पाएंगे।"*
दूसरी बात यह है, कि *"जब भी हम रात को सोकर सुबह उठते हैं, तो वह एक नए जन्म के समान होता है। हमें अच्छे कर्म करने का एक नया अवसर मिलता है। हमें उसका पूरा लाभ उठाना चाहिए, और दिनभर अच्छे काम ही करने चाहिएं।" "जब यह शरीर बूढ़ा हो जाएगा, तब अंत में मृत्यु होगी। वह तो जीवन में एक ही बार होती है, जबकि जन्म के तुल्य प्रातः जागरण बार-बार मिलता रहता है।"*
*"अतः उसका लाभ उठाओ। यदि अभी लाभ नहीं उठाया, अर्थात अच्छे काम नहीं किये, तो फिर आप बुरे काम करेंगे। और फिर अगले जन्म में ईश्वर मनुष्य शरीर भी नहीं देगा। फिर पशु पक्षी योनियों में आपको दंड भोगना पड़ेगा।"*
*"इसलिए इस जन्म में ऊपर बताए सेवा परोपकार आदि ईमानदारी पूर्वक अच्छे काम भी करो, और खाना पीना नाचना गाना आदि सांसारिक सुख भी भोगो।"*
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*
उसके पिता ने समझाया, *"बेटा जन्म तो बार-बार मिलता है। यह मनुष्य जन्म भी मुफ्त में नहीं मिला। पिछले कर्मों का फल है। जो हमने पिछले जन्म में कर्म किए थे, यह जन्म उनका फल है। और इस जन्म में जो अब हम अच्छे काम करेंगे, सेवा परोपकार दान दया ईश्वरभक्ति देशभक्ति प्राणियों की रक्षा करना माता-पिता और गुरुजनों की सेवा करना यज्ञ संध्या उपासना आदि आदि शुभ कर्म करेंगे, इनका फल हमको अगले जन्म में मिलेगा। यही सत्य है।"*
यदि ऐसा मानकर चलें, कि *"यह वर्तमान जन्म मुफ्त में मिला है", "तो ऐसा मुफ्त में फल देने वाला ईश्वर अन्यायकारी माना जाएगा।" "यदि वह मुफ्त में देता है, तो सबको एक समान देना चाहिए। किसी को ईश्वर ने मनुष्य जन्म दिया, किसी को पशु पक्षी, किसी को कीड़ा मकोड़ा, और किसी को वृक्ष आदि। इस तरह से तो ईश्वर अन्यायकारी माना जाएगा।"*
*"परंतु वेदों शास्त्रों के अनुसार ईश्वर न्यायकारी है। वह सबको पिछले कर्मों के आधार पर यह जन्म देता है। और इस जन्म के कर्मों के आधार पर फिर आगे जन्म देगा। इसलिए पिछला जन्म भी था, और इसके बाद अगला जन्म भी होगा।" "ऐसा मानकर चलें, तो ही आप अच्छे काम करेंगे और बुरे कामों से बच पाएंगे।"*
दूसरी बात यह है, कि *"जब भी हम रात को सोकर सुबह उठते हैं, तो वह एक नए जन्म के समान होता है। हमें अच्छे कर्म करने का एक नया अवसर मिलता है। हमें उसका पूरा लाभ उठाना चाहिए, और दिनभर अच्छे काम ही करने चाहिएं।" "जब यह शरीर बूढ़ा हो जाएगा, तब अंत में मृत्यु होगी। वह तो जीवन में एक ही बार होती है, जबकि जन्म के तुल्य प्रातः जागरण बार-बार मिलता रहता है।"*
*"अतः उसका लाभ उठाओ। यदि अभी लाभ नहीं उठाया, अर्थात अच्छे काम नहीं किये, तो फिर आप बुरे काम करेंगे। और फिर अगले जन्म में ईश्वर मनुष्य शरीर भी नहीं देगा। फिर पशु पक्षी योनियों में आपको दंड भोगना पड़ेगा।"*
*"इसलिए इस जन्म में ऊपर बताए सेवा परोपकार आदि ईमानदारी पूर्वक अच्छे काम भी करो, और खाना पीना नाचना गाना आदि सांसारिक सुख भी भोगो।"*
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*
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आग के जलाने वाले स्वभाव को न जानता हुआ पतंगा दीपक पर गिर कर अपने प्राण गँवा देता है, मूर्ख मछली भी मांस से लिपटे कांटे को निगलकर मृत्यु को प्राप्त हो जाती है। किन्तु हम मनुष्य लोग तो जानते हुए भी विपत्तियों से युक्त विषय जाल को नहीं छोड़ते। अहो। मोह की महिमा महान है। अर्थात् अविद्या का प्रभाव कितना अधिक है।
सन्दर्भ -(भर्तृहरि वैराग्यशतक, श्लोक -२०)
सन्दर्भ -(भर्तृहरि वैराग्यशतक, श्लोक -२०)
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महत्वपूर्ण सूचना 🔊
सभी को सादर नमस्ते जी 🙏
हमने आप सभी के लिए कुछ और करने का विचार किया है। हम पिछले कई वर्षों से इस चैनल के माध्यम से आप सभी को ब्रह्मचर्य पालन में सहयोग और मार्गदर्शन देते आ रहे हैं। अब हमारा यह भी कर्तव्य है कि ब्रह्मचर्य के पश्चात उत्तम, संयमित और धर्मानुकूल गृहस्थ जीवन जीने में भी आपका मार्गदर्शन करें।
इसी उद्देश्य से हम आज एक नया चैनल बना रहे हैं। वहाँ आपको गृहस्थ जीवन से संबंधित आवश्यक विषयों का सत्य, प्रामाणिक और शास्त्रसम्मत ज्ञान सरल रूप में मिलता रहेगा।
उस चैनल पर आपको क्या-क्या मिलेगा? 👇
गृहस्थ जीवन में जाना उचित है या नहीं, किसे जाना चाहिए और किसे नहीं
गृहस्थ जीवन में ब्रह्मचर्य, संयम और सदाचार
विवाह की उचित आयु, समय और विवाह से पूर्व की आवश्यक तैयारियाँ
जीवनसाथी का उचित चयन और पति-पत्नी के कर्तव्य
पति-पत्नी में प्रेम, विश्वास, मर्यादा और उचित व्यवहार
दाम्पत्य जीवन और काम-विषयक शास्त्रसम्मत एवं मर्यादित ज्ञान
पुरुषों से संबंधित सामान्य समस्याएँ, वीर्य संबंधी विषय और उचित उपाय
वाजीकरण के शास्त्रीय प्रयोग
संतान प्राप्ति, गर्भधारण और गर्भविज्ञान से संबंधित ज्ञान
उत्तम संतान के लिए आवश्यक संस्कार, गर्भावस्था की देखभाल और संतान का पालन-पोषण
षोडश संस्कार और गृहस्थ के नित्य कर्म
परिवार में प्रेम और एकता बनाए रखने के उपाय
परिवार एवं समाज के प्रति गृहस्थ के कर्तव्य
धन, परिवार और कर्तव्यों के बीच उचित संतुलन
ब्रह्मचर्य से गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने की उचित विधि
विवाह, दाम्पत्य और परिवार से जुड़े आपके प्रश्नों के शास्त्रसम्मत उत्तर
और भी बहुत कुछ।
आप बस चैनल से जुड़ जाइए। धीरे-धीरे इन सभी विषयों पर विस्तार से और क्रमपूर्वक जानकारी दी जाएगी।
यह चैनल भी हमारे ब्रह्मचर्य संबंधी मूल उद्देश्य और मर्यादा के अनुरूप रहेगा। यहाँ अश्लीलता या अनुचित सामग्री नहीं होगी। दाम्पत्य और काम से जुड़े विषयों पर भी केवल आवश्यक, मर्यादित, शिक्षाप्रद और प्रामाणिक जानकारी दी जाएगी।
नीचे चैनल का लिंक है। आप सभी अवश्य जुड़ें और अपने परिचितों तक भी पहुँचाएँ। 👇
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सभी को सादर नमस्ते जी 🙏
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ब्रह्मचर्य का पालन करने से व्यक्ति अपने समय, ध्यान और ऊर्जा को बेहतर दिशा में लगा सकता है। इससे आत्मसंयम बढ़ाने, मन को एकाग्र रखने और अपने लक्ष्य पर ध्यान देने में मदद मिलती है।
संयमित जीवन अपनाइए, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहिए और स्वयं को बेहतर बनाने का प्रयास करते रहिए। 🙏
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