ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ) pinned «किसने कहा कि ध्यानी को गुस्सा नहीं करना चाहिये ? भगवान् राम भी समुद्र की हरकत पर गुस्से में आकर धनुष बाण उठा लेते हैं और हमेशा मुस्कराते रहने वाले भगवान् कृष्ण भी महाभारत के युद्ध में रथ का पहिया लेकर दौड़ पड़ते हैं | ध्यानी का गुस्सा अलग ही किस्म का होता…»
*बहुत अधिक ब्रह्मचर्य की चिंता करने वाले और दिन-रात ब्रह्मचर्य- ब्रह्मचर्य करने वालो का ही सबसे अधिक वीर्यनाश व ब्रह्मचर्य खण्डित होता है।*
✍🏻स्वामी यतिश्वरानंद
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मनुष्य को किन अवस्थाओं में मौन (चुप) रहना चाहिए?
मूत्र उत्सर्ग करते समय, श्राद्धकाल में भोजन के समय ,दातुन
करते समय ,मैथुन काल में व्यक्ति को चुप रहना चाहिए।
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राजीव दीक्षित भी ब्रम्हाचारी थे । ऐसे हि किसीका दिमाग़ कम्प्यूटर होता नहीं ! ब्रम्हचर्य का पालन करने के बाद कम्प्यूटर से भी ज्यादा अच्छा काम करता है मनुष्य का दिमाग़
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"आप दुनिया में दो रोटी कमाकर, दो बच्चे-बच्ची पैदा करके, उनको पाल-पोसकर मर मिटने के लिए नहीं आये हो अपितु सत्य-असत्य का विवेक करके, मिथ्या और शाश्वत का विवेक करके, नित्य-अनित्य का विवेक करके मुक्ति पाने के लिए आये हो। मैं कौन हूँ ? शरीर मेरा है तो मैं शरीर नहीं हूँ। मन मेरा है तो मन मैं नहीं हूँ। बुद्धि मेरी है तो मैं बुद्धि नहीं हूँ… आखिर मैं कौन हूँ ?’ इसका विवेक करके अपने-आपको पाकर उसमें विश्रांति पाने के लिये आये हो।"
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ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
ब्रम्हचर्य पालन करने वालो के लिये विश्व का सर्वोत्तम टेलिग्राम चॅनल,
यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके |
इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है|
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ब्रह्म मुहूर्त्त क्या हैं? ब्रह्म मुहूर्त्त में उठने के क्या लाभ हैं?
रात्रि के अन्तिम प्रहर को ब्रह्म मुहूर्त्त कहते हैं। निद्रा त्याग करने का शास्त्र
विहित यह समय सर्वोत्तम होता है। ब्रह्म मुहूर्त में जागने से मनुष्य को सौन्दर्य, बल, विद्या, बुद्धि और स्वस्थता प्राप्त होती हैं।
वैज्ञानिक शोधों के अनुसार प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में वायु मण्डल प्रदूषण रहित होता है। इसमें उस समय 41 प्रतिशत ऑक्सीजन होती है जिसे हम प्राण वायु के रूप में सदैव प्रयोग करते हैं। 155% नाइट्रोजन, 4% कार्बन डाईऑक्साइड होती है। कार्बन डाईऑक्साइड सबसे दूषित वायु होती है जो फेफड़ो के लिए हानिकारक है। सूर्योदय के साथ ही सड़कों पर अनेक प्रकार के वाहन चलने लगते हैं जिनसे कार्बन डाईऑक्साइड निकलती है और वायु मण्डल में प्रदूषण फैलने लगता है। जिसकी मात्रा 4% से बढ़कर 60% तक हो जाती है। आयुर्वेद के दृष्टिकोण से ब्रह्म मुहूर्त में उठकर टहलने से संजीवनी शक्ति से परिपूर्ण मलयगिरी की ओर से आने वाली हवा शरीर को स्पर्श करके नव शक्ति का संचार करती हैं। इस अमृततुल्य वायु का सेवन करना अति लाभदायक हैं।
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रात्रि के अन्तिम प्रहर को ब्रह्म मुहूर्त्त कहते हैं। निद्रा त्याग करने का शास्त्र
विहित यह समय सर्वोत्तम होता है। ब्रह्म मुहूर्त में जागने से मनुष्य को सौन्दर्य, बल, विद्या, बुद्धि और स्वस्थता प्राप्त होती हैं।
वैज्ञानिक शोधों के अनुसार प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में वायु मण्डल प्रदूषण रहित होता है। इसमें उस समय 41 प्रतिशत ऑक्सीजन होती है जिसे हम प्राण वायु के रूप में सदैव प्रयोग करते हैं। 155% नाइट्रोजन, 4% कार्बन डाईऑक्साइड होती है। कार्बन डाईऑक्साइड सबसे दूषित वायु होती है जो फेफड़ो के लिए हानिकारक है। सूर्योदय के साथ ही सड़कों पर अनेक प्रकार के वाहन चलने लगते हैं जिनसे कार्बन डाईऑक्साइड निकलती है और वायु मण्डल में प्रदूषण फैलने लगता है। जिसकी मात्रा 4% से बढ़कर 60% तक हो जाती है। आयुर्वेद के दृष्टिकोण से ब्रह्म मुहूर्त में उठकर टहलने से संजीवनी शक्ति से परिपूर्ण मलयगिरी की ओर से आने वाली हवा शरीर को स्पर्श करके नव शक्ति का संचार करती हैं। इस अमृततुल्य वायु का सेवन करना अति लाभदायक हैं।
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🕉️ “अश्मा भवतु नस्तनू:”
🔆 हमारे शरीर वज्र की भांति सशक्त व सबल होने चाहिए। रोगी होकर जीना पाप व अपराध है ।
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दातुन करने के लिए कौन सी वनस्पति श्रेष्ठ हैं?
आयुर्वेद के अनुसार गूलर, नीम, कीकर (बबूल) वज्रदंती, आदि वृक्षों की टहनियों का दातुन करें। नीम एक ऐसा वृक्ष हैं जिसकी जड़, तना, पत्तियाँ, छालें आदि औषधीय गुणों से भरपूर हैं। कुछ लोगों का मत है कि टूथपेस्ट और बुश से दाँतों की जितनी अच्छी सफाई होती हैं उतनी अच्छी सफाई दातुन से सम्भव नहीं है। यह सत्य है कि ब्रुश दांतों की अच्छी सफाई करता है। वह दाँतों के मैल को अपने में भर लेता है और दूषित हो जाता हैं। टूथपेस्ट के बचे अवशेष के साथ पायरिया के कीटाणु बुश की तली में चिपके रहते हैं फिर अगले दिन ब्रुश करते समय वे कीटाणु दाँतों से चिपक जाते हैं। इस तरह टूथपेस्ट-बुश से ज्यादातर पायरिया होने के चांस रहते हैं। बुश करने वालों को संभवतः प्रत्येक सप्ताह नया बुश ले लेना चाहिए अर्थात् एक सप्ताह से अधिक दिनों तक एक बुश प्रयोग में न लायें।
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