तुम्हारे भीतर सौ खामियाँ हों,
तुम्हें एक-सौ-एक पता होनी चाहिए
पर उन खामियों से दबकर ,
हारकर, अपने-आपको
गिरा हुआ नहीं मान लेना है।
बिल्कुल भी नहीं !
साफ़ देखना है कि
तुम कितने गिरे हुए हो,
और फिर मुट्ठी भींच कर,
हँस कर कहना है,
"पतन मैंने जी लिया
परमात्मा मेरा बाकी है।
तुम्हें एक-सौ-एक पता होनी चाहिए
पर उन खामियों से दबकर ,
हारकर, अपने-आपको
गिरा हुआ नहीं मान लेना है।
बिल्कुल भी नहीं !
साफ़ देखना है कि
तुम कितने गिरे हुए हो,
और फिर मुट्ठी भींच कर,
हँस कर कहना है,
"पतन मैंने जी लिया
परमात्मा मेरा बाकी है।