जो बुरे/गंदे चीजे करने मै आपको क्षणिक आनंद आता था उसी चीज से जब आपको घृणता हो जाएगी समझ लीजिये आप सही रास्ते पर हो 💪🔥
@bramachrya01
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काफी व्यक्ति इस प्रकार मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं
लंबी आयु प्राप्ति का केवल एक ही मार्ग है ब्रह्म मुहूर्त में उठना योग प्राणायाम कुंभक व्यायाम आदि करना भोजन को खूब चबा चबाकर खाना
भोजन तभी खाना जब भूख लगे । भूख नहीं लगे तो खाना नहीं खाना
मन में संशय हो खाऊं या नहीं खाऊं तो हमेशा ना खाऊं ऐसा ही चुनना
स्वस्थ रहने के लिए काजू बादाम दूध की आवश्यकता नहीं है स्वस्थ रहने के लिए पेट का स्वस्थ होना जरूरी है जो खाया उसका ठीक प्रकार हजम होकर सही-सही रस बनजाए तो ही आप स्वस्थ रह सकते हैं और आप में कमजोरी कभी नहीं आएगी बस ब्रह्मचर्य आपका पक्का होना चाहिए और प्रतिरोधक क्षमता प्राणशक्ति बहुत अधिक बढ़ जाएगी इसमें कोई शंका नहीं
परंतु इन सब बातों से षड्यंत्र कारियो की कमाई नहीं होनी इसीलिए वह तुम्हें मिर्त्यू की दो डोज दे रहे हैं
लंबी आयु प्राप्ति का केवल एक ही मार्ग है ब्रह्म मुहूर्त में उठना योग प्राणायाम कुंभक व्यायाम आदि करना भोजन को खूब चबा चबाकर खाना
भोजन तभी खाना जब भूख लगे । भूख नहीं लगे तो खाना नहीं खाना
मन में संशय हो खाऊं या नहीं खाऊं तो हमेशा ना खाऊं ऐसा ही चुनना
स्वस्थ रहने के लिए काजू बादाम दूध की आवश्यकता नहीं है स्वस्थ रहने के लिए पेट का स्वस्थ होना जरूरी है जो खाया उसका ठीक प्रकार हजम होकर सही-सही रस बनजाए तो ही आप स्वस्थ रह सकते हैं और आप में कमजोरी कभी नहीं आएगी बस ब्रह्मचर्य आपका पक्का होना चाहिए और प्रतिरोधक क्षमता प्राणशक्ति बहुत अधिक बढ़ जाएगी इसमें कोई शंका नहीं
परंतु इन सब बातों से षड्यंत्र कारियो की कमाई नहीं होनी इसीलिए वह तुम्हें मिर्त्यू की दो डोज दे रहे हैं
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ पाश्चात्य देश और हम
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
#celibacybookssummary
पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ पाश्चात्य देश और हम
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
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🧘🏻♂ताड़ासन
वीर्यस्राव क्यों होता है ? जब पेट में दबाव ( Intro-Abdominal Pressure) बढ़ता है तब वीर्यस्राव होता है। इस प्रेशर के बढ़ने के कारण इस प्रकार हैं-
1. ठूँस-ठूँस कर खाना
2. बार-बार खाना
3. कब्जियत
4. गैस होने पर (वायु करे ऐसी आलू, ग्वारफली, भींडी, तली हुई चीजों का सेवन एवं अधिक भोजन करने के कारण)
5. सेक्स सम्बन्धी विचार, चलचित्र एवं पत्रिकाओं से।
इस प्रेशर के बढ़ने से प्राण नीचे के केन्द्रों में....नाभि से नीचे मूलाधार केन्द्र में आ जाता है, जिसकी वजह से वीर्यस्राव हो जाता है। इस प्रकार के प्रेशर के कारण हर्निया की बीमारी भी हो जाती है।
📌ताड़ासन करने से प्राण ऊपर के केन्द्रों में चले जाता है जिससे तुरंत ही पुरूषों के वीर्यस्राव व स्त्रियों के प्रदर रोग की तकलीफ में लाभ होता है।
वीर्यस्राव क्यों होता है ? जब पेट में दबाव ( Intro-Abdominal Pressure) बढ़ता है तब वीर्यस्राव होता है। इस प्रेशर के बढ़ने के कारण इस प्रकार हैं-
1. ठूँस-ठूँस कर खाना
2. बार-बार खाना
3. कब्जियत
4. गैस होने पर (वायु करे ऐसी आलू, ग्वारफली, भींडी, तली हुई चीजों का सेवन एवं अधिक भोजन करने के कारण)
5. सेक्स सम्बन्धी विचार, चलचित्र एवं पत्रिकाओं से।
इस प्रेशर के बढ़ने से प्राण नीचे के केन्द्रों में....नाभि से नीचे मूलाधार केन्द्र में आ जाता है, जिसकी वजह से वीर्यस्राव हो जाता है। इस प्रकार के प्रेशर के कारण हर्निया की बीमारी भी हो जाती है।
📌ताड़ासन करने से प्राण ऊपर के केन्द्रों में चले जाता है जिससे तुरंत ही पुरूषों के वीर्यस्राव व स्त्रियों के प्रदर रोग की तकलीफ में लाभ होता है।
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हम क्यों नही मानते 1 जनवरी को नया साल...?
> न ऋतु बदली, न मौसम,
> न कक्षा बदली, न सत्र
> न फसल बदली, न खेती
> न पेड़ पौधों की रंगत
> न सूर्य चाँद सितारों की दिशा
> ना ही नक्षत्र।।
1 जनवरी आने से पहले ही सब नववर्ष की बधाई देने लगते हैं। मानों कितना बड़ा पर्व हैं ।
नया केवल एक दिन ही नही होता, कुछ दिन तो नई अनुभूति होनी ही चाहिए, आखिर हमारा देश त्योहारों का देश हैं ।
ईस्वी संवत का नया साल 1 जनवरी को और भारतीय नववर्ष (विक्रमी संवत) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है।
आईये देखते हैं दोनों का तुलनात्मक अंतर :-
1. प्रकृति-
1 जनवरी को कोई अंतर नही जैसा दिसम्बर वैसी जनवरी, लेकिन चैत्र मास में चारों तरफ फूल खिल जाते हैं, पेड़ो पर नए पत्ते आ जाते हैं। चारो तरफ हरियाली मानो प्रकृति नया साल मना रही हो I
2. वस्त्र-
दिसम्बर और जनवरी में वही वस्त्र, कंबल, रजाई, ठिठुरते हाथ पैर, लेकिन चैत्र मास में सर्दी जा रही होती है, गर्मी का आगमन होने जा रहा होता है I
3. विद्यालयो का नया सत्र - दिसंबर जनवरी वही कक्षा कुछ नया नहीं, जबकि मार्च अप्रैल में स्कूलों का रिजल्ट आता है नई कक्षा नया सत्र यानि विद्यालयों में नया साल I
4. नया वित्तीय वर्ष -
दिसम्बर-जनवरी में कोई खातों की क्लोजिंग नही होती, जबकि 31 मार्च को बैंको की (audit) कलोसिंग होती है नए वही खाते खोले जाते है I सरकार का भी नया सत्र शुरू होता है I
5. कलैण्डर -
जनवरी में नया कलैण्डर आता हैं, जबकि चैत्र में नया पंचांग आता हैं उसी से सभी भारतीय पर्व, विवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं I इसके बिना हिन्दू समाज जीबन की कल्पना भी नही कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग I
6. किसानो का नया साल -
दिसंबर-जनवरी में खेतो में वही फसल होती हैं, जबकि मार्च-अप्रैल में फसल कटती है नया अनाज घर में आता है तो किसानों का नया वर्ष और उतसाह I
7. पर्व मनाने की विधि -
31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर मदिरा पान करते है, हंगामा करते है, रात को पीकर गाड़ी चलने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी वारदात, पुलिस प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश होता हैं, जबकि भारतीय नववर्ष व्रत से शुरू होता है पहला नवरात्र होता हैं घर-घर मे माता रानी की पूजा होती है I शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है I
8. ऐतिहासिक महत्त्व -
1 जनवरी का कोई ऐतेहासिक महत्व नही हैं, जबकि चैत्र प्रतिपदा के दिन महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुआत, भगवान झूलेलाल का जन्म, नवरात्रे प्रारंम्भ, ब्रहम्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना इत्यादि का संबंध इस दिन से है I
अंग्रेजी कलेंडर की तारीख और अंग्रेज मानसिकता के लोगो के अलावा कुछ नही बदला, जबकि अपना नव संवत् ही नया साल है I
जब ब्रह्माण्ड से लेकर सूर्य चाँद की दिशा, मौसम, फसल, कक्षा, नक्षत्र, पौधों की नई पत्तिया, किसान की नई फसल, विद्यार्थी की नई कक्षा, मनुष्य में नया रक्त संचरण आदि परिवर्तन होते है। जो विज्ञान आधारित है I
अपनी मानसिकता को बदले I विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने। स्वयं सोचे की क्यों मनाये हम 1 जनवरी को नया वर्ष..?
"केवल कैलेंडर बदलें, अपनी संस्कृति नहीं"
आओ जागे और जगाएँ, भारतीय संस्कृति अपनाएँ और आगे बढ़ें।
🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸🌼🌸
#sanatandharma
KEEP CALM AND
BE THE
BRAMHACHARI 💪
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हम क्यों नही मानते 1 जनवरी को नया साल...?
> न ऋतु बदली, न मौसम,
> न कक्षा बदली, न सत्र
> न फसल बदली, न खेती
> न पेड़ पौधों की रंगत
> न सूर्य चाँद सितारों की दिशा
> ना ही नक्षत्र।।
1 जनवरी आने से पहले ही सब नववर्ष की बधाई देने लगते हैं। मानों कितना बड़ा पर्व हैं ।
नया केवल एक दिन ही नही होता, कुछ दिन तो नई अनुभूति होनी ही चाहिए, आखिर हमारा देश त्योहारों का देश हैं ।
ईस्वी संवत का नया साल 1 जनवरी को और भारतीय नववर्ष (विक्रमी संवत) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है।
आईये देखते हैं दोनों का तुलनात्मक अंतर :-
1. प्रकृति-
1 जनवरी को कोई अंतर नही जैसा दिसम्बर वैसी जनवरी, लेकिन चैत्र मास में चारों तरफ फूल खिल जाते हैं, पेड़ो पर नए पत्ते आ जाते हैं। चारो तरफ हरियाली मानो प्रकृति नया साल मना रही हो I
2. वस्त्र-
दिसम्बर और जनवरी में वही वस्त्र, कंबल, रजाई, ठिठुरते हाथ पैर, लेकिन चैत्र मास में सर्दी जा रही होती है, गर्मी का आगमन होने जा रहा होता है I
3. विद्यालयो का नया सत्र - दिसंबर जनवरी वही कक्षा कुछ नया नहीं, जबकि मार्च अप्रैल में स्कूलों का रिजल्ट आता है नई कक्षा नया सत्र यानि विद्यालयों में नया साल I
4. नया वित्तीय वर्ष -
दिसम्बर-जनवरी में कोई खातों की क्लोजिंग नही होती, जबकि 31 मार्च को बैंको की (audit) कलोसिंग होती है नए वही खाते खोले जाते है I सरकार का भी नया सत्र शुरू होता है I
5. कलैण्डर -
जनवरी में नया कलैण्डर आता हैं, जबकि चैत्र में नया पंचांग आता हैं उसी से सभी भारतीय पर्व, विवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं I इसके बिना हिन्दू समाज जीबन की कल्पना भी नही कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग I
6. किसानो का नया साल -
दिसंबर-जनवरी में खेतो में वही फसल होती हैं, जबकि मार्च-अप्रैल में फसल कटती है नया अनाज घर में आता है तो किसानों का नया वर्ष और उतसाह I
7. पर्व मनाने की विधि -
31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर मदिरा पान करते है, हंगामा करते है, रात को पीकर गाड़ी चलने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी वारदात, पुलिस प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश होता हैं, जबकि भारतीय नववर्ष व्रत से शुरू होता है पहला नवरात्र होता हैं घर-घर मे माता रानी की पूजा होती है I शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है I
8. ऐतिहासिक महत्त्व -
1 जनवरी का कोई ऐतेहासिक महत्व नही हैं, जबकि चैत्र प्रतिपदा के दिन महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुआत, भगवान झूलेलाल का जन्म, नवरात्रे प्रारंम्भ, ब्रहम्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना इत्यादि का संबंध इस दिन से है I
अंग्रेजी कलेंडर की तारीख और अंग्रेज मानसिकता के लोगो के अलावा कुछ नही बदला, जबकि अपना नव संवत् ही नया साल है I
जब ब्रह्माण्ड से लेकर सूर्य चाँद की दिशा, मौसम, फसल, कक्षा, नक्षत्र, पौधों की नई पत्तिया, किसान की नई फसल, विद्यार्थी की नई कक्षा, मनुष्य में नया रक्त संचरण आदि परिवर्तन होते है। जो विज्ञान आधारित है I
अपनी मानसिकता को बदले I विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने। स्वयं सोचे की क्यों मनाये हम 1 जनवरी को नया वर्ष..?
"केवल कैलेंडर बदलें, अपनी संस्कृति नहीं"
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ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
ब्रम्हचर्य पालन करने वालो के लिये विश्व का सर्वोत्तम टेलिग्राम चॅनल,
यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके |
इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है|
#hastag
यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके |
इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है|
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ व्यायाम का लक्षण
♦ व्यायाम मात्रा नुसार ही करे
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#celibacybookssummary
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( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ व्यायाम का लक्षण
♦ व्यायाम मात्रा नुसार ही करे
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नमस्कार 🙏
नींद की आवश्यकता इस बात पर निर्भर करती है कि आपका मस्तिष्क कितना निर्भय ओर निश्चिंत हे जितने ज्यादा आप शांत रहोगे नींद उतनी कम चाहिए
🌟ज्यादा सोने की बात महत्वपूर्ण नहीं है
नींद की क्वालिटी महत्वपूर्ण है
यदि आप 6 घंटे अच्छी गहरी नींद लेते है तो आप पूरे आनंद ओर ऊर्जावान रहेंगे
गहरी नींद के कई लाभ है यदि आप गहरी मीठी नींद लेते है तो इससे शरीर स्वस्थ ओर मन एकाग्रचित शांत रहता है
विद्यार्थी को 6 से 7 घंटे पर्याप्त होते है
6 घंटे ठीक है विद्यार्थी के लिए
ओर जो व्यक्ति शारीरिक मजदूरी करे उनके लिए 7,8 घंटे बहुत हे
व्यवसाय वाले 6,7 घंटे सोए
😴😴😴😴😴😴😴
ओर जब हम खुश रहते है तो सोने का मन कम करता है
जब ज्यादा चिंता तनाव में रहते हे तो मन अधिक सोना चाहता है सुबह उठता नहीं
नींद यदि गहरी नहीं आती तो
खूब थकाना चाहिए खुद को
ओर दवाई ले सकते है
अश्वगंधा चूर्ण
गहरी सांस ले , बहुत लाभकारी है कभी भी ले
नींद की आवश्यकता इस बात पर निर्भर करती है कि आपका मस्तिष्क कितना निर्भय ओर निश्चिंत हे जितने ज्यादा आप शांत रहोगे नींद उतनी कम चाहिए
🌟ज्यादा सोने की बात महत्वपूर्ण नहीं है
नींद की क्वालिटी महत्वपूर्ण है
यदि आप 6 घंटे अच्छी गहरी नींद लेते है तो आप पूरे आनंद ओर ऊर्जावान रहेंगे
गहरी नींद के कई लाभ है यदि आप गहरी मीठी नींद लेते है तो इससे शरीर स्वस्थ ओर मन एकाग्रचित शांत रहता है
विद्यार्थी को 6 से 7 घंटे पर्याप्त होते है
6 घंटे ठीक है विद्यार्थी के लिए
ओर जो व्यक्ति शारीरिक मजदूरी करे उनके लिए 7,8 घंटे बहुत हे
व्यवसाय वाले 6,7 घंटे सोए
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ओर जब हम खुश रहते है तो सोने का मन कम करता है
जब ज्यादा चिंता तनाव में रहते हे तो मन अधिक सोना चाहता है सुबह उठता नहीं
नींद यदि गहरी नहीं आती तो
खूब थकाना चाहिए खुद को
ओर दवाई ले सकते है
अश्वगंधा चूर्ण
गहरी सांस ले , बहुत लाभकारी है कभी भी ले
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( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ अत्यधिक व्यायाम से हानिया
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( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ अत्यधिक व्यायाम से हानिया
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