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सफलता कड़ी मेहनत मांगती है | ज़ोरदार परिश्रम वो ही कर पाता है, जिसके शरीर में पर्याप्त जोश एवं उत्साह हो
इसलिए अपनी ऊर्जा की रक्षा करे, ब्रह्मचर्य का पालन करें 💪
सफलता कड़ी मेहनत मांगती है | ज़ोरदार परिश्रम वो ही कर पाता है, जिसके शरीर में पर्याप्त जोश एवं उत्साह हो
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9.4.2022
"बचपन से ही लोग विद्या पढ़ने के लिए स्कूल में जाते हैं। फिर बड़े हो कर कॉलेज में भी जाते हैं। कुछ बच्चे गुरुकुल में भी जाते हैं। कुछ लोग दोनों प्रकार की पढ़ाई करते हैं, पहले स्कूल कॉलेज में पढ़ते हैं, फिर बाद में गुरुकुल में भी पढ़ते हैं।"
चाहे कहीं भी पढ़ें। विचारणीय विषय तो यह है, कि पढ़ने लिखने का उद्देश्य क्या है? "मनुष्य बनना। मनुष्यता सीखना। मनुष्यता के अनुसार जीवन जीना। स्वयं भी सुखी रहना और दूसरों को भी सुख देना।" यह पढ़ाई-लिखाई अथवा विद्या/ शिक्षा प्राप्ति का उद्देश्य है।
यदि कोई व्यक्ति स्कूल कॉलेज में पढ़ कर या गुरुकुल में पढ़कर, या दोनों जगह पढ़कर भी शाब्दिक रूप से विद्या तो प्राप्त कर लेता है, परन्तु अपना आचरण ठीक नहीं करता। "जैसे कि रावण भी बहुत पढ़ा लिखा था। अनेक शास्त्रों का विद्वान था। बलशाली था। राजा भी था। फिर भी उसने कुछ दोष ऐसे कर दिए, जिनके कारण आज तक लोग उसकी बदनामी करते हैं। प्रतिवर्ष उस के पुतले जलाए जाते हैं।"
इस सारे इतिहास को जानने पर यह पता चलता है, कि "विद्या पढ़ना तो अच्छी बात है। परंतु वह सार्थक तभी है, जब व्यक्ति उस पढ़ी हुई विद्या के अनुसार उत्तम आचरण भी करे। मनुष्यता भी इसी का नाम है।" "यदि मनुष्य विद्या पढ़कर भी रावण जैसा ही आचरण करे, तो उसका विद्या पढ़ना बेकार ही नहीं, बल्कि हानिकारक है। क्योंकि 'विद्या पढ़कर भी विपरीत आचरण करने वाले को तो दंड भी बहुत अधिक मिलता है,' ऐसा वेदो में बताया गया है। अतः विद्या पढ़कर अपने आचरण को सुधारना अत्यंत आवश्यक है।"
"जो लोग विद्या पढ़कर श्रीराम चन्द्र जी की तरह आचरण करते हैं, उनका अनुकरण करते हैं। और इसी प्रकार से अन्य विद्वानों ऋषि-मुनियों का अनुकरण करते हैं, उन लोगों का विद्या पढ़ना सार्थक और सफल है। ऐसे लोग स्वयं भी सुखी रहते हैं, और संसार के लोगों को भी सुख देते हैं। परंतु जो रावण का अनुकरण करते हैं, वे अच्छे लोग नहीं हैं।"
कहने को तो रावण बहुत पहले मर चुका। परंतु रावण की जो प्रवृत्ति थी, जो उसकी नीयत थी, वह आज भी जीवित है। उसकी नीयत नहीं मरी। वह परंपरागत दूसरे मनुष्य में आज भी पाई जाती है।
"इसलिए यदि आप विद्या पढ़ते हैं, तो आप भी श्रीराम चन्द्र जी का अनुकरण करें। अपने बच्चों को भी वैसा ही प्रशिक्षण देवें। और जो समाज में रावण के अनुयाई आज भी आपके आसपास बिखरे हुए हैं, उनसे भी अवश्य ही सावधान रहें। उनमें से जो कोई रावण प्रशासन की पकड़ में आ जाता है, उसे तो प्रशासन की ओर से दंड मिल जाता है, जेल भी हो जाती है। परंतु सब तो पकड़ में नहीं आते। जो रावण प्रशासन की पकड़ में नहीं आए, और आपके आसपास विचरण करते हैं, उनसे सावधान रहने की आवश्यकता है। कहीं ऐसा न हो, कि वे आपकी या आपके परिवार की किसी प्रकार की कोई हानि कर दें।"
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"बचपन से ही लोग विद्या पढ़ने के लिए स्कूल में जाते हैं। फिर बड़े हो कर कॉलेज में भी जाते हैं। कुछ बच्चे गुरुकुल में भी जाते हैं। कुछ लोग दोनों प्रकार की पढ़ाई करते हैं, पहले स्कूल कॉलेज में पढ़ते हैं, फिर बाद में गुरुकुल में भी पढ़ते हैं।"
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यदि कोई व्यक्ति स्कूल कॉलेज में पढ़ कर या गुरुकुल में पढ़कर, या दोनों जगह पढ़कर भी शाब्दिक रूप से विद्या तो प्राप्त कर लेता है, परन्तु अपना आचरण ठीक नहीं करता। "जैसे कि रावण भी बहुत पढ़ा लिखा था। अनेक शास्त्रों का विद्वान था। बलशाली था। राजा भी था। फिर भी उसने कुछ दोष ऐसे कर दिए, जिनके कारण आज तक लोग उसकी बदनामी करते हैं। प्रतिवर्ष उस के पुतले जलाए जाते हैं।"
इस सारे इतिहास को जानने पर यह पता चलता है, कि "विद्या पढ़ना तो अच्छी बात है। परंतु वह सार्थक तभी है, जब व्यक्ति उस पढ़ी हुई विद्या के अनुसार उत्तम आचरण भी करे। मनुष्यता भी इसी का नाम है।" "यदि मनुष्य विद्या पढ़कर भी रावण जैसा ही आचरण करे, तो उसका विद्या पढ़ना बेकार ही नहीं, बल्कि हानिकारक है। क्योंकि 'विद्या पढ़कर भी विपरीत आचरण करने वाले को तो दंड भी बहुत अधिक मिलता है,' ऐसा वेदो में बताया गया है। अतः विद्या पढ़कर अपने आचरण को सुधारना अत्यंत आवश्यक है।"
"जो लोग विद्या पढ़कर श्रीराम चन्द्र जी की तरह आचरण करते हैं, उनका अनुकरण करते हैं। और इसी प्रकार से अन्य विद्वानों ऋषि-मुनियों का अनुकरण करते हैं, उन लोगों का विद्या पढ़ना सार्थक और सफल है। ऐसे लोग स्वयं भी सुखी रहते हैं, और संसार के लोगों को भी सुख देते हैं। परंतु जो रावण का अनुकरण करते हैं, वे अच्छे लोग नहीं हैं।"
कहने को तो रावण बहुत पहले मर चुका। परंतु रावण की जो प्रवृत्ति थी, जो उसकी नीयत थी, वह आज भी जीवित है। उसकी नीयत नहीं मरी। वह परंपरागत दूसरे मनुष्य में आज भी पाई जाती है।
"इसलिए यदि आप विद्या पढ़ते हैं, तो आप भी श्रीराम चन्द्र जी का अनुकरण करें। अपने बच्चों को भी वैसा ही प्रशिक्षण देवें। और जो समाज में रावण के अनुयाई आज भी आपके आसपास बिखरे हुए हैं, उनसे भी अवश्य ही सावधान रहें। उनमें से जो कोई रावण प्रशासन की पकड़ में आ जाता है, उसे तो प्रशासन की ओर से दंड मिल जाता है, जेल भी हो जाती है। परंतु सब तो पकड़ में नहीं आते। जो रावण प्रशासन की पकड़ में नहीं आए, और आपके आसपास विचरण करते हैं, उनसे सावधान रहने की आवश्यकता है। कहीं ऐसा न हो, कि वे आपकी या आपके परिवार की किसी प्रकार की कोई हानि कर दें।"
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ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
ब्रम्हचर्य पालन करने वालो के लिये विश्व का सर्वोत्तम टेलिग्राम चॅनल,
यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके |
इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है|
#hastag
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पवित्रता अपने आप पर निर्भर करती है। कोई भी दूसरा आपको पवित्र नहीं कर सकता हैं । -
गौतम बुद्ध
गौतम बुद्ध
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आज कल के लोग ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल कुवारा रहने को समझते है ?
ब्रह्म+चर्य , यानी परम का मार्ग जिसपर पवित्रता हो
विवाह करना गुनाह नहीं हे जरूर करो लेकिन अपने वीर्य की बरबादी कभी मत करना , संतानोत्पत्ति के लिए शारीरिक संबंध रख सकते हे अपनी पत्नी से लेकिन अकारण उस उत्पादक शक्ति का नाश क्यो ?
ब्रम्हचर्य बहुत व्यापक हे मोक्ष का मार्ग हे
किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए ब्रह्मचर्य परम आवश्यक है
अपने मन ओर इन्द्रियों को नियंत्रण रखना ब्रह्मचर्य हे
धर्म को धारण करना ब्रह्मचर्य हे
अपने वीर्य की रक्षा करना ब्रह्मचर्य हे
स्वयं को अनुशासित रखना ब्रह्मचर्य हे
मन की गुलामी को छोड़ना ब्रह्मचर्य हे
वेदों को पढ़ना और उसको अमल करना ब्रह्मचर्य हे
ब्रह्म+चर्य , यानी परम का मार्ग जिसपर पवित्रता हो
विवाह करना गुनाह नहीं हे जरूर करो लेकिन अपने वीर्य की बरबादी कभी मत करना , संतानोत्पत्ति के लिए शारीरिक संबंध रख सकते हे अपनी पत्नी से लेकिन अकारण उस उत्पादक शक्ति का नाश क्यो ?
ब्रम्हचर्य बहुत व्यापक हे मोक्ष का मार्ग हे
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पीछे कितना वीर्यनाश हो चुका है, उसकी चिंता छोड़कर अब कैसे वीर्यरक्षण हो सके, उसके लिये उपाय करने हेतु कमर कस लो |
ध्यान रहे: वीर्यशक्ति का दमन नहीं करना है, उसे ऊर्ध्वगामी बनाना है । वीर्यशक्ति का उपयोग हम ठीक ढंग से नहीं कर पाते । इसलिये इस शक्ति के ऊर्ध्वगमन के कुछ प्रयोग हम समझ लें ।
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जिसने भी वीर्य को शरीर से लीक किया। उसने अपने ही हाथों से अपने
शरीर को वीक किया।
शरीर को वीक किया।
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समय का चक्र बहुत तेज चलता है
इसलिए ना तो अपने बल का अहंकार करें
और ना ही अपने
धन का
इसलिए ना तो अपने बल का अहंकार करें
और ना ही अपने
धन का
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90 दिनों तक ब्रह्मचर्य करने से व्यक्ति अपने आस पास दिव्यता का अनुभव करता है क्योंकि इन 90 दिनों में वो कोई भी कुकर्म नहीं करता ना ही गंदे विचार रखता है।
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वीरता शब्द ही वीर्य से आया है , इसलिए वीर बनना है तो वीर्य की रक्षा करो
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शरीर के अन्दर विद्यमान 'वीर्य' ही जीवन शक्ति का भण्डार है। शारीरिक एवं मानसिक दुराचर तथा प्राकृतिक एवं अप्राकृतिक मैथुन से इसका क्षरण होता है। कामुक चिंतन से भी इसका नुकसान होता है। मैथून के द्वारा पूरे शरीर में मंथन चलता है और शरीर का सार तत्व कुछ ही समय में बाहर आ जाता है। रस निकाल लेने पर जैसे गन्ना छूट हो जाता है कुछ वैसे ही स्थित वीर्यहीन मनुष्य की हो जाती है। ऐसे मनुष्य की तुलना मणिहीन नाग से भी की जा सकती है। खोखला होता जाता है इन्सान।
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Use above☝ hastag to find out post related.
आप को जिस विषय पर पोस्ट पढ़नी वो # use करे.🙏
हमारे चैनल की ये विशेषता है की हम कोई भी पोस्ट दुबारा ( REPEAT) नहीं करते ,ताकि आपको हर पोस्ट मै कुछ नया और अलग जानकारी प्राप्त हो 🙏
आप चाहिए तो इस चैनल के सबसे पहले पोस्ट की लिंक से पहले पोस्ट से आज तक की सारी पोस्ट पढ़ लेवे ।
first post link :- https://t.me/bramachrya01/4
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आज हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर हम हमारे सभी बहनो को हमारी टीम से एक छोटासा तोफा देना चाहते है. आशा करता हु आपको वो जरूर अच्छा लगेगा!
जब ब्रम्हचर्य का पालन करने वाला व्यक्ति किसी अपने देश की हि बहन को रास्ते मे अधर्मी लोगो से या लड़को से छेड़ते हुए देखता है तो वो जरूर उस बहन को बचा सकता है पर हर वक्त ऐसा हो ये तय नहीं इसलिए हमारे बहन को हि ऐसे लोगो पर माँ काली बनके गरजाना पड़ेगा और उन जैसे अधर्मी लोगोकी हड्डी तोड़नी पड़ेगी सोच और समझ से और साथ हि साथ आत्मरक्षा भी करनी होगी उसके लिए हि हम #selfdefense hastag चलाने जा रहे है जहा आपको आत्मरक्षा की जानकारी मिलेगी।
हमारे सभी भाई ये वीडियो अपने बहन,चाची,माँ,मामी और अपने मित्र से भी साझा करे ताकि वो आत्मरक्षा के लिए सज्ज हो।
~ @bramachrya01 Team 🙏
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आज हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर हम हमारे सभी बहनो को हमारी टीम से एक छोटासा तोफा देना चाहते है. आशा करता हु आपको वो जरूर अच्छा लगेगा!
जब ब्रम्हचर्य का पालन करने वाला व्यक्ति किसी अपने देश की हि बहन को रास्ते मे अधर्मी लोगो से या लड़को से छेड़ते हुए देखता है तो वो जरूर उस बहन को बचा सकता है पर हर वक्त ऐसा हो ये तय नहीं इसलिए हमारे बहन को हि ऐसे लोगो पर माँ काली बनके गरजाना पड़ेगा और उन जैसे अधर्मी लोगोकी हड्डी तोड़नी पड़ेगी सोच और समझ से और साथ हि साथ आत्मरक्षा भी करनी होगी उसके लिए हि हम #selfdefense hastag चलाने जा रहे है जहा आपको आत्मरक्षा की जानकारी मिलेगी।
हमारे सभी भाई ये वीडियो अपने बहन,चाची,माँ,मामी और अपने मित्र से भी साझा करे ताकि वो आत्मरक्षा के लिए सज्ज हो।
~ @bramachrya01 Team 🙏
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मैथुन क्रिया से होने वाले नुकसान निम्रानुसार है।
शरीर की जीवनी शक्ति घट जाती है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। * आँखो की रोशनी कम हो जाती है। * शारीरिक एवं मानसिक बल कमजोर हो जाता है। * जिस तरह जीने के लिये ऑक्सीजन चाहिए वैसे ही 'निरोग' रहने के लिये 'वीर्य'। * ऑक्सीजन प्राणवायु है तो वीर्य जीवनी शक्ति है। * अधिक मैथुन से स्मरण शक्ति कमजोर हो जाता है। * चिंतन विकृत हो जाता है।
शरीर की जीवनी शक्ति घट जाती है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। * आँखो की रोशनी कम हो जाती है। * शारीरिक एवं मानसिक बल कमजोर हो जाता है। * जिस तरह जीने के लिये ऑक्सीजन चाहिए वैसे ही 'निरोग' रहने के लिये 'वीर्य'। * ऑक्सीजन प्राणवायु है तो वीर्य जीवनी शक्ति है। * अधिक मैथुन से स्मरण शक्ति कमजोर हो जाता है। * चिंतन विकृत हो जाता है।
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