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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य ही जीवन
१९.वीर्य रक्षा के अनूठे नियम
१६. दृढ़-प्रतिज्ञा
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
#celibacybookssummary
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हमारे ब्रम्हचारी युवा और युवती हम अपने ब्रम्हचर्य की जानकारी को जादा लोगो से साझा करने हेतू, उन तक पोहोचने के हेतू काम कर रहे हैं ऊसी दौरान हमको cross promotion करना पड रहा है......
आप सभी हम पर विश्वास कीजिये.......
हम सिर्फ ब्रम्हचर्य का प्रसार करने मैं जुटे हुए है और आगे भी पुरे भारतवर्ष मैं ब्रम्हचर्य का ही प्रसार करेंगे !
धन्यवाद🙏
@bramachrya01
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ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ) pinned «❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇ #hastag #celibacybookssummary #Chanakyaniti #Mondayspecial #bramhachryamotivation #meditation #memesonnofap #Celibacy #celibacyquestionanswer Use above☝ hastag to find out post related. आप को जिस विषय पर पोस्ट पढ़नी वो…»
🔰आखिर वीर्यनाश करने से दुर्बलता कैसे आती है ?
अप्राकृतिक माध्यम अतार्थ हस्तमैथून द्वारा वीर्यनाश करने से तो दुर्बलता आती ही है लेकिन प्राकृतिक माध्यम अतार्थ संभोग द्वारा वीर्यनाश करने पर भी दुर्बलता आती है । इसके पीछे सबसे बड़ा कारण ये है :
वास्तव में जब जब हमारे मन में काम उत्तेजना होती है तब तब हमारे शरीर को ये लगता है कि अब इस शरीर से प्रजनन होने वाली है या यूं कहे की एक नए इंसान की उत्तपत्ति होने वाली है । इसलिए शरीर वीर्य को बाहर निकालता है । तो वीर्य वास्तव में इसलिए बनता है ताकि उससे एक नए इंसान की उत्तपत्ति ( प्रजनन ) हो सके । इसके शुक्राणुओं में DNA होती है जिसके द्वारा पिता के शारीरिक गुण बच्चो में जाते है । इसमें विभिन प्रकार के प्रोटीन होती है जो वीर्य को बाकी कोशिकाओं से अलग बनाती है ।
वीर्य एक ऐसी कोशिकाओं का समूह है जो कहने को तो बाकी कोशिकाओं के तरह हर समय बनते बिगड़ते रहता है लेकिन वास्तव में इसे पुरी तरह से विकसित होने में लगभग 72 दिन लगता है । तब जाके ये प्रजनन प्रक्रिया के लिए उत्कृष्ट हो पाता है । वीर्य युही नही बनता क्योंकि हमारे शरीर की पहली प्राथमिकता प्रजनन है इसलिए शरीर द्वारा वीर्य की उत्तपत्ति करने में कोई लापरवाही नही बरती जाती । भोजन से वीर्य बनने की प्रक्रिया बड़ी लंबी है । जो भोजन पचता है, उसका पहले रस बनता है। पांच दिन तक उसका पाचन होकर रक्त बनता है। पांच दिन बाद रक्त से मांस, उसमें से 5-5 दिन के अंतर से मेद, अस्थि, मज्जा और अंत में शुक्र बनता है। इस प्रकार आहार से शुक्र बनने में करीब एक महीना लग जाता है।
अलग अलग चिकित्सा शास्त्रों के इस सन्द्रव में कुछ एक सा ही कहना है की एक वीर्य कोशिका बनने में लगभग 100 रक्त कोशिकाओं का छय होता है । सायद इसलिए वीर्यनाशी का चेहरा रक्त के कमी के कारण पिला पड़ा रहता है । आयुर्वेद की मानें तो केवल 15 मिलीलीटर वीर्य बनने में ही लगभग 40 दिनों का समय लग जाता है । और ये प्रक्रिया 7 चारणों में होती है इसलिए वीर्य को सातवाँ धातु भी कहा जाता है ।
जिस प्रकार एक अच्छी उपज के लिए अच्छे बीज का होना ज़रूरी है, उसी प्रकार स्वस्थ संतान के लिए शुद्ध और दोषरहित वीर्य का होना अनिवार्य है। वीर्य एक जैविक तरल पदार्थ है, जिसमें सामान्यतः शुक्राणु होते हैं। शुक्राशय ग्रंथि, पौरुष ग्रंथि तथा मूत्रप्रसेकीय ग्रंथियों से होने वाले स्राव का मिश्रण शुक्र यानि वीर्य है। वीर्य को ‘‘शुक्र‘‘ भी कहते हैं।
रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र....ये सात धातुएं शरीर को धारण करती हैं। ये क्रमशः पुष्ट होती हैं और हमारा आहार अंत में सातवीं धातु शुक्र के रूप में परिवर्तित होती है। सातों धातुओं के पुष्ट और सबल होने पर ही हमारा शरीर स्वस्थ रहता है। इन सात धातुओं में सातवीं धातु शुक्र परम श्रेष्ठ होती है। शुद्ध और दोषरहित वीर्य गाढ़ा, चिकना, सफेद, मलाई जैसा मधुर, जलनरहित और कांच जैसा चिकना होता है। जबकि पतला, मैला, पीला, पतले दूध जैसा, बदबूदार, झागदार और पानी की तरह टपकने वाला वीर्य दूषित, कमज़ोर और विकारयुक्त होता है।
🔰दोषपूर्ण वीर्य के कारण
अत्यधिक मैथुन,शक्ति से अधिक श्रम,पोषक तत्वों की कमी,अप्राकृतिक तरीकों से वीर्यपात
प्रकृति विरुद्ध पदार्थों का सेवन,रोगग्रस्त व्यक्ति के साथ यौन संबंध
मिर्च-मसालेदार / खटाई / मादक पदार्थों का सेवन
चिंता/ शोक/ भय/मानसिक तनाव
गुप्त रोग /क्षय रोग /वृद्धावस्था
🔰कैसे बनाएं इसे बेहतर
ब्रह्मचर्य नींद और उत्तम आहार - ये तीन चीज़े शरीर की मूलभूत आवश्यकता होती है । अच्छा आहार अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है। यदि आहार अच्छा नहीं है व पाचन प्रक्रिया सही नहीं है तो रक्त कम बनेगा और रक्त कम बनने से अन्य धातुओं के साथ वीर्य भी गुण व मात्रा के रूप में कम बनता है। इसके साथ ही किसी भी तरह का रोग वीर्य बनने की प्रक्रिया को बाधित कर देता है या शरीर में संक्रमण होने से वीर्य की गुणवत्ता पर्न प्रभाव रहता है।
वीर्य कम होने पर काम शक्ति और कामेच्छा भी कम हो जाती है। इसीलिए आयुर्वेद में विशेष आहार और औषधीय वनस्पतियां बताई गई हैं जिनका सेवन सम्पूर्ण स्वास्थ्य विशेष रूप से ओज व प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है।
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अप्राकृतिक माध्यम अतार्थ हस्तमैथून द्वारा वीर्यनाश करने से तो दुर्बलता आती ही है लेकिन प्राकृतिक माध्यम अतार्थ संभोग द्वारा वीर्यनाश करने पर भी दुर्बलता आती है । इसके पीछे सबसे बड़ा कारण ये है :
वास्तव में जब जब हमारे मन में काम उत्तेजना होती है तब तब हमारे शरीर को ये लगता है कि अब इस शरीर से प्रजनन होने वाली है या यूं कहे की एक नए इंसान की उत्तपत्ति होने वाली है । इसलिए शरीर वीर्य को बाहर निकालता है । तो वीर्य वास्तव में इसलिए बनता है ताकि उससे एक नए इंसान की उत्तपत्ति ( प्रजनन ) हो सके । इसके शुक्राणुओं में DNA होती है जिसके द्वारा पिता के शारीरिक गुण बच्चो में जाते है । इसमें विभिन प्रकार के प्रोटीन होती है जो वीर्य को बाकी कोशिकाओं से अलग बनाती है ।
वीर्य एक ऐसी कोशिकाओं का समूह है जो कहने को तो बाकी कोशिकाओं के तरह हर समय बनते बिगड़ते रहता है लेकिन वास्तव में इसे पुरी तरह से विकसित होने में लगभग 72 दिन लगता है । तब जाके ये प्रजनन प्रक्रिया के लिए उत्कृष्ट हो पाता है । वीर्य युही नही बनता क्योंकि हमारे शरीर की पहली प्राथमिकता प्रजनन है इसलिए शरीर द्वारा वीर्य की उत्तपत्ति करने में कोई लापरवाही नही बरती जाती । भोजन से वीर्य बनने की प्रक्रिया बड़ी लंबी है । जो भोजन पचता है, उसका पहले रस बनता है। पांच दिन तक उसका पाचन होकर रक्त बनता है। पांच दिन बाद रक्त से मांस, उसमें से 5-5 दिन के अंतर से मेद, अस्थि, मज्जा और अंत में शुक्र बनता है। इस प्रकार आहार से शुक्र बनने में करीब एक महीना लग जाता है।
अलग अलग चिकित्सा शास्त्रों के इस सन्द्रव में कुछ एक सा ही कहना है की एक वीर्य कोशिका बनने में लगभग 100 रक्त कोशिकाओं का छय होता है । सायद इसलिए वीर्यनाशी का चेहरा रक्त के कमी के कारण पिला पड़ा रहता है । आयुर्वेद की मानें तो केवल 15 मिलीलीटर वीर्य बनने में ही लगभग 40 दिनों का समय लग जाता है । और ये प्रक्रिया 7 चारणों में होती है इसलिए वीर्य को सातवाँ धातु भी कहा जाता है ।
जिस प्रकार एक अच्छी उपज के लिए अच्छे बीज का होना ज़रूरी है, उसी प्रकार स्वस्थ संतान के लिए शुद्ध और दोषरहित वीर्य का होना अनिवार्य है। वीर्य एक जैविक तरल पदार्थ है, जिसमें सामान्यतः शुक्राणु होते हैं। शुक्राशय ग्रंथि, पौरुष ग्रंथि तथा मूत्रप्रसेकीय ग्रंथियों से होने वाले स्राव का मिश्रण शुक्र यानि वीर्य है। वीर्य को ‘‘शुक्र‘‘ भी कहते हैं।
रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र....ये सात धातुएं शरीर को धारण करती हैं। ये क्रमशः पुष्ट होती हैं और हमारा आहार अंत में सातवीं धातु शुक्र के रूप में परिवर्तित होती है। सातों धातुओं के पुष्ट और सबल होने पर ही हमारा शरीर स्वस्थ रहता है। इन सात धातुओं में सातवीं धातु शुक्र परम श्रेष्ठ होती है। शुद्ध और दोषरहित वीर्य गाढ़ा, चिकना, सफेद, मलाई जैसा मधुर, जलनरहित और कांच जैसा चिकना होता है। जबकि पतला, मैला, पीला, पतले दूध जैसा, बदबूदार, झागदार और पानी की तरह टपकने वाला वीर्य दूषित, कमज़ोर और विकारयुक्त होता है।
🔰दोषपूर्ण वीर्य के कारण
अत्यधिक मैथुन,शक्ति से अधिक श्रम,पोषक तत्वों की कमी,अप्राकृतिक तरीकों से वीर्यपात
प्रकृति विरुद्ध पदार्थों का सेवन,रोगग्रस्त व्यक्ति के साथ यौन संबंध
मिर्च-मसालेदार / खटाई / मादक पदार्थों का सेवन
चिंता/ शोक/ भय/मानसिक तनाव
गुप्त रोग /क्षय रोग /वृद्धावस्था
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ब्रह्मचर्य नींद और उत्तम आहार - ये तीन चीज़े शरीर की मूलभूत आवश्यकता होती है । अच्छा आहार अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है। यदि आहार अच्छा नहीं है व पाचन प्रक्रिया सही नहीं है तो रक्त कम बनेगा और रक्त कम बनने से अन्य धातुओं के साथ वीर्य भी गुण व मात्रा के रूप में कम बनता है। इसके साथ ही किसी भी तरह का रोग वीर्य बनने की प्रक्रिया को बाधित कर देता है या शरीर में संक्रमण होने से वीर्य की गुणवत्ता पर्न प्रभाव रहता है।
वीर्य कम होने पर काम शक्ति और कामेच्छा भी कम हो जाती है। इसीलिए आयुर्वेद में विशेष आहार और औषधीय वनस्पतियां बताई गई हैं जिनका सेवन सम्पूर्ण स्वास्थ्य विशेष रूप से ओज व प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है।
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य ही जीवन
१९.वीर्य रक्षा के अनूठे नियम
१७. डायरी
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१९.वीर्य रक्षा के अनूठे नियम
१७. डायरी
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हस्तमैथुन के नुकसान
1 शरीर का कमजोर हो जाना
इस दुनिया में सभी लोग अच्छी ज़िंदगी के लिए मेहनत करते है। लेकिन हस्तमैथुन करने की वजह से आप अपनी ज़िंदगी को अच्छी बनाने के बजाय और ज्यादा खराब बना देते हो। हस्तमैथुन करने से कभी भी आपकी सेहत अच्छी नहीं बन सकती है।हस्तमैथुन करने से आपके शरीर में कमजोरी आती है। आपने इस बात बात पर जरूर ध्यान दिया होगा कि जब भी आप हस्तमैथुन कर लेते हो तो आपको ऐसा लगता है जैसे की आपकी सारी ताकत खत्म हो गई है। आपको बता दू अगर आपको अच्छी सेहत चाहिए तो इस लत से आपको किनारा करना ही होगा।
2 लिंग में उत्तेजना का बंद हो जाना
एक पुरुष के लिए इससे ज्यादा शर्म की बात क्या हो सकती है कि उसके लिंग में उत्तेजना का आना बंद ही हो जाये। अधिक मात्रा में हस्तमैथुन करने से लिंग में उत्तेजना आना बंद हो जाती है। अगर आपकी उत्तेजना आना बंद हो गई है तो आपकी मैरिड लाइफ बर्बाद हो सकती है। क्योंकि अगर आपकी पार्टनर आपसे संतुष्ट नहीं है तो आप दोनों के रिश्ते पर इसका असर पड़ेगा।
3 लिंग में ढीलापन आना
अगर हम हस्तमैथुन बहुत अधिक और गलत तरीके से मारते है। तो धीरे-धीरे हमारा लिंग ढीला हो जाता है और एक समय ऐसा आता है। जब उत्तेजित अवस्था में भी लिंग पूरी तरह से खड़ा नहीं हो पाता है और उसमे ढीलापन रहने लगता है।
4 लिंग में सूजन का हो जाना
कई लोग ऐसे होते है जो जल्दबाजी में तेजी से हस्तमैथुन करने लगते है। जिसकी वजह से उनके वीर्य से पहले निकलने वाला तरल पानी उनकी मांशपेशियों में चला जाता है। जिसकी वजह से इंसान के लिंग में सूजन आ जाती है। ऐसा बार बार होने से ये एक गंभीर बीमारी बन जाती है। ये सूजन आसानी से नहीं जाती। तो इससे बचने के लिए हस्तमैथुन की लत से दूर ही रहे।
5 लिंग की मांशपेशियो का टूट जाना
कई लोग हस्तमैथुन करते वक़्त लिंग की मांशपेशियों को बहुत ही तेजी से जकड लेते है और लिंग को दबाने और मोड़ने लगते है। ये लोग सोचते है कि ऐसा करने से उनका वीर्य बाहर नहीं निकलेगा। ऐसा करना बिलकुल भी सही नहीं है ऐसा करने पर आपको गंभीर समस्याओ का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा करने से Peyronie पायरोनी नामक बीमारी भी हो जाती है। इस बीमारी की वजह से लिंग टेढ़ा हो जाता है। तो आप समझ सकते है आपको कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
6 शुक्राणुओं की संख्या में कमी होना
हमारे वर्य में लाखो की संख्या में शुक्राणु (sperm ) जो हमारे पिता बनने में सहायक होते है। लेकिन जो लोग रोजाना हस्तमैथुन करते है। उनके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम हो जाती है। इसका सबसे बड़ा नुकसान ये है कि जब इंसान की शादी हो जाती है। तो वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम होने की वजह से पिता बनने से वंचित रह जाता है।
7 पाचन तंत्र पर बुरा असर होना
अच्छी सेहत के लिए हमारे पाचनतंत्र का ठीक होना बहुत ही जरुरी है। पाचनतंत्र हमारे शरीर की वो मशीन होती है। जो भोजन में जरुरी तत्व निकालकर हमारे शरीर को देती है। जिससे हमारा शरीर बलवान और सेहतमंद रहता है।हस्तमैथुन करने से हमारे पाचनतंत्र पर बुरा असर पड़ता है। हस्तमैथुन हमारे पाचनतंत्र को कमजोर कर देता है जिसकी वजह से खाना पचने अधिक समय लगता है। इसलिए अच्छे पाचनतंत्र के लिए हस्तमैथुन से दुरी बनाये रखना बहुत जरुरी है।
8 आँखों के निचे काले घेरे
ज्यादा हस्तमैथुन करने की वजह से सेहत तो ख़राब होती ही है। लेकिन इस सेहत की खराबी को हम अपनी आँखों के निचे होने वाले काले घेरो से जान सकते है। ज्यादा हस्तमैथुन करने की वजह से हमारी आंखों के निचे काले घेरे हो जाते है। आम बोलचाल में जिन्हे हम डार्क सर्कल कहते है। ज्यादा हस्तमैथुन करने की वजह से हमारी आंखों रोशनी भी कम होती है।
9 बालो की समस्या
ज्यादा हस्तमैथुन करने की वजह से बालो की समस्या भी उत्पन्न होती है। उम्र से पहले बालो का पकना, सफ़ेद बाल होना, बालो का झड़ना (हेयरफाल ) जैसी अनेक बालो से सम्बंधित समस्याएँ उत्पन्न होती है।
अब तक मैंने आपको बताया की हस्तमैथुन करने के नुकसान और हस्तमैथुन करने से आपको क्या-क्या नुकसान हो सकते है। अगर आप इन से बचना चाहते है तो आपको हस्तमैथुन करना छोड़ना ही होगा.
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हस्तमैथुन के नुकसान
1 शरीर का कमजोर हो जाना
इस दुनिया में सभी लोग अच्छी ज़िंदगी के लिए मेहनत करते है। लेकिन हस्तमैथुन करने की वजह से आप अपनी ज़िंदगी को अच्छी बनाने के बजाय और ज्यादा खराब बना देते हो। हस्तमैथुन करने से कभी भी आपकी सेहत अच्छी नहीं बन सकती है।हस्तमैथुन करने से आपके शरीर में कमजोरी आती है। आपने इस बात बात पर जरूर ध्यान दिया होगा कि जब भी आप हस्तमैथुन कर लेते हो तो आपको ऐसा लगता है जैसे की आपकी सारी ताकत खत्म हो गई है। आपको बता दू अगर आपको अच्छी सेहत चाहिए तो इस लत से आपको किनारा करना ही होगा।
2 लिंग में उत्तेजना का बंद हो जाना
एक पुरुष के लिए इससे ज्यादा शर्म की बात क्या हो सकती है कि उसके लिंग में उत्तेजना का आना बंद ही हो जाये। अधिक मात्रा में हस्तमैथुन करने से लिंग में उत्तेजना आना बंद हो जाती है। अगर आपकी उत्तेजना आना बंद हो गई है तो आपकी मैरिड लाइफ बर्बाद हो सकती है। क्योंकि अगर आपकी पार्टनर आपसे संतुष्ट नहीं है तो आप दोनों के रिश्ते पर इसका असर पड़ेगा।
3 लिंग में ढीलापन आना
अगर हम हस्तमैथुन बहुत अधिक और गलत तरीके से मारते है। तो धीरे-धीरे हमारा लिंग ढीला हो जाता है और एक समय ऐसा आता है। जब उत्तेजित अवस्था में भी लिंग पूरी तरह से खड़ा नहीं हो पाता है और उसमे ढीलापन रहने लगता है।
4 लिंग में सूजन का हो जाना
कई लोग ऐसे होते है जो जल्दबाजी में तेजी से हस्तमैथुन करने लगते है। जिसकी वजह से उनके वीर्य से पहले निकलने वाला तरल पानी उनकी मांशपेशियों में चला जाता है। जिसकी वजह से इंसान के लिंग में सूजन आ जाती है। ऐसा बार बार होने से ये एक गंभीर बीमारी बन जाती है। ये सूजन आसानी से नहीं जाती। तो इससे बचने के लिए हस्तमैथुन की लत से दूर ही रहे।
5 लिंग की मांशपेशियो का टूट जाना
कई लोग हस्तमैथुन करते वक़्त लिंग की मांशपेशियों को बहुत ही तेजी से जकड लेते है और लिंग को दबाने और मोड़ने लगते है। ये लोग सोचते है कि ऐसा करने से उनका वीर्य बाहर नहीं निकलेगा। ऐसा करना बिलकुल भी सही नहीं है ऐसा करने पर आपको गंभीर समस्याओ का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा करने से Peyronie पायरोनी नामक बीमारी भी हो जाती है। इस बीमारी की वजह से लिंग टेढ़ा हो जाता है। तो आप समझ सकते है आपको कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
6 शुक्राणुओं की संख्या में कमी होना
हमारे वर्य में लाखो की संख्या में शुक्राणु (sperm ) जो हमारे पिता बनने में सहायक होते है। लेकिन जो लोग रोजाना हस्तमैथुन करते है। उनके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम हो जाती है। इसका सबसे बड़ा नुकसान ये है कि जब इंसान की शादी हो जाती है। तो वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम होने की वजह से पिता बनने से वंचित रह जाता है।
7 पाचन तंत्र पर बुरा असर होना
अच्छी सेहत के लिए हमारे पाचनतंत्र का ठीक होना बहुत ही जरुरी है। पाचनतंत्र हमारे शरीर की वो मशीन होती है। जो भोजन में जरुरी तत्व निकालकर हमारे शरीर को देती है। जिससे हमारा शरीर बलवान और सेहतमंद रहता है।हस्तमैथुन करने से हमारे पाचनतंत्र पर बुरा असर पड़ता है। हस्तमैथुन हमारे पाचनतंत्र को कमजोर कर देता है जिसकी वजह से खाना पचने अधिक समय लगता है। इसलिए अच्छे पाचनतंत्र के लिए हस्तमैथुन से दुरी बनाये रखना बहुत जरुरी है।
8 आँखों के निचे काले घेरे
ज्यादा हस्तमैथुन करने की वजह से सेहत तो ख़राब होती ही है। लेकिन इस सेहत की खराबी को हम अपनी आँखों के निचे होने वाले काले घेरो से जान सकते है। ज्यादा हस्तमैथुन करने की वजह से हमारी आंखों के निचे काले घेरे हो जाते है। आम बोलचाल में जिन्हे हम डार्क सर्कल कहते है। ज्यादा हस्तमैथुन करने की वजह से हमारी आंखों रोशनी भी कम होती है।
9 बालो की समस्या
ज्यादा हस्तमैथुन करने की वजह से बालो की समस्या भी उत्पन्न होती है। उम्र से पहले बालो का पकना, सफ़ेद बाल होना, बालो का झड़ना (हेयरफाल ) जैसी अनेक बालो से सम्बंधित समस्याएँ उत्पन्न होती है।
अब तक मैंने आपको बताया की हस्तमैथुन करने के नुकसान और हस्तमैथुन करने से आपको क्या-क्या नुकसान हो सकते है। अगर आप इन से बचना चाहते है तो आपको हस्तमैथुन करना छोड़ना ही होगा.
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य ही जीवन
१९.वीर्य रक्षा के अनूठे नियम
१८. सततोद्योग
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१८. सततोद्योग
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RESPECTED SIR,
PLEASE REOMOVE THIS BOT FROM OUR CHANNEL IT'S SPREDING BAD THINGS AMONG OUR BRAVE BRAMHACHARI SUBSCIBERS...🙏🙏🙏🙏
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PLEASE REOMOVE THIS BOT FROM OUR CHANNEL IT'S SPREDING BAD THINGS AMONG OUR BRAVE BRAMHACHARI SUBSCIBERS...🙏🙏🙏🙏
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ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
RESPECTED SIR, PLEASE REOMOVE THIS BOT FROM OUR CHANNEL IT'S SPREDING BAD THINGS AMONG OUR BRAVE BRAMHACHARI SUBSCIBERS...🙏🙏🙏🙏 ❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌ ❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌ ❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌❌
Done ✅.
Thank you for this ...🙏
हम किसी कार्य मै वस्थ होने के वजह से पुरा द्यान नही दे पाया ।
आपका ऐसा ही सहयोग बना रहे।
Thank you for this ...🙏
हम किसी कार्य मै वस्थ होने के वजह से पुरा द्यान नही दे पाया ।
आपका ऐसा ही सहयोग बना रहे।
ब्रम्हाचारी भाइयो एव बहेनो हमारे हातो कोई चुक होई हो तो माफ करिये ।
और ऐसे गलती आयींदा से ना हो इसलिए आपका साथ और मनोकामनाये हमारे साथ हमेशा रहे यही प्रार्थना ।🙏
~Owner 🌷
KEEP CALM AND
BE THE
BRAMHACHARI 💪
और ऐसे गलती आयींदा से ना हो इसलिए आपका साथ और मनोकामनाये हमारे साथ हमेशा रहे यही प्रार्थना ।🙏
~Owner 🌷
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👍1
ये वासना की दुनिया बहुत ही खतरनाक होती है जी😌
इसमें न ❌घुसे तो ही बढ़िया होता है
(पर ऐसा कोई भी मनुष्य नहीं जो इसमें न गिरा हो🙂)
सब इस कामवासना ,सेक्स, गंदे खयालो में गिरे है
☝️लेकिन जब यह समझ में आ जाएं की इससे 🧍♂शारीरिक,🤯मानसिक,सामाजिक और आध्यात्मिक🧘♂ आदि सभी प्रकार से केवल हानि होती है तो तुरंत संभल जाना चाहिए और इसे हल्के में लेना बंद कर देना चाहिए🙏🙂
क्योंकि जब हम पूर्ण रूप से पवित्र और कमवासना से बेखबर रहते है तब तो कोई फरक नहीं पड़ता जो की _ऐसा केवल बचपन में होता था_ पर अब जब इसमें गिर चुके हैं तो पूरे जीवन के लिए सतर्क हो जाना चाहिए और ये स्वीकार कर लेनी चाहिए की जब तक संयम से जीवन न जिया जाए तो पुनः गिरा जा सकता है ।
इसलिए एक बार पूरी तरह से मन बनाकर संकल्प लेना चाहिए उसके फिर इन सब चीजों के बारे में कभी नहीं सोचना चाहिए केवल प्रभु में मन लगाना चाहिए🧘♂
क्योंकि हमारा दिमाग हमेशा रिप्लेसमेंट पर काम करता है यानी गलत आदत के जगह अच्छी आदत अपना लो गलत आदत को ज्यादा छोड़ने के चक्कर में मत रहो वो प्रभु की कृपा से अपने आप छूट जाएगा
#sanatandharma
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इसमें न ❌घुसे तो ही बढ़िया होता है
(पर ऐसा कोई भी मनुष्य नहीं जो इसमें न गिरा हो🙂)
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☝️लेकिन जब यह समझ में आ जाएं की इससे 🧍♂शारीरिक,🤯मानसिक,सामाजिक और आध्यात्मिक🧘♂ आदि सभी प्रकार से केवल हानि होती है तो तुरंत संभल जाना चाहिए और इसे हल्के में लेना बंद कर देना चाहिए🙏🙂
क्योंकि जब हम पूर्ण रूप से पवित्र और कमवासना से बेखबर रहते है तब तो कोई फरक नहीं पड़ता जो की _ऐसा केवल बचपन में होता था_ पर अब जब इसमें गिर चुके हैं तो पूरे जीवन के लिए सतर्क हो जाना चाहिए और ये स्वीकार कर लेनी चाहिए की जब तक संयम से जीवन न जिया जाए तो पुनः गिरा जा सकता है ।
इसलिए एक बार पूरी तरह से मन बनाकर संकल्प लेना चाहिए उसके फिर इन सब चीजों के बारे में कभी नहीं सोचना चाहिए केवल प्रभु में मन लगाना चाहिए🧘♂
क्योंकि हमारा दिमाग हमेशा रिप्लेसमेंट पर काम करता है यानी गलत आदत के जगह अच्छी आदत अपना लो गलत आदत को ज्यादा छोड़ने के चक्कर में मत रहो वो प्रभु की कृपा से अपने आप छूट जाएगा
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