ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
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ब्रम्हचर्य पालन करने वालो के लिये विश्व का सर्वोत्तम टेलिग्राम चॅनल,
यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके |
इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है|
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य ही जीवन
२२. हमारी भारत-माता
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वीर्य जिसे मनुष्य के प्रजनन का मूलाधार कहते है। वीर्य जो हमारे शरीर का ढाँचा चलाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण शक्ति का स्त्रोत है । इसके अनर्थक नाश से मनुष्य के विवेकबुद्धि का सम्पूर्ण नाश तय है, हमारे जीवन काल के उत्साह का त्याग यानी वीर्य का नाश ।

- डर, असंतोष, लालसा, क्रोध, महत्वाकांक्षा का अभाव. निरित्साह,नकारात्मकता ये सब वीर्य के नाश के कारण हमारे स्वभाव में बढ़ता रहता है ।

- शरीर मे वीर्य का भंडार होना यानी जान में जान आना; जीवन में हर्ष, उत्साह, उमंग का सूर्योदय होना ।

- वीर्य की कमी से एकाग्रता की कमी महसूस होती है, इससे अपने काम मे हमेशा परेशानी होती हैं ।

- आत्महीनता: इसके कारण हम अपना आत्मविश्वास खों बैठते है , जिससे हम हमेशा डरते है ।

- अपने सामर्थ्य को हम न्यून मानकर खुदको ही कोसते रहते है ।

- अपने माता-पिता को दोष देना, अपने आपको कोसते रहना, किसीसे से बात न करना, अपने आपको चार दीवारी के अंदर कैद करना यह सब अनुभव अतिरिक्त वीर्यनाश के कारण महसूस होते है ।

- वीर्य नाश से बाल झडते है,पुरुषों में दाढ़ी और मूछ आना बंद होता है ।

- किसी भी चीज़ को समझने-समजाने की, लिखने की,पढ़ने की,बोलने की गति धीमी हो जाती है ।

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पुस्तक:- चाणक्य नीति
आठवा अध्याय
श्लोक १३
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पुस्तक:- चाणक्य नीति
आठवा अध्याय
श्लोक १४
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युवाओं के नाम एक पैगाम 🌷

इस दुनिया का सबसे गंदा काम है काम विकार में जाना।

इस काम के कारण सारे अच्छे कर्म खतम हो जाते है सारा पुण्य समाप्त हो जाता है।

हर दुख का कारण काम विकार ही है ।


अरे ये गंदे विचार तुझ राजा को अपने वश में कैसे कर सकते है ? तुम मालिक हो अपनी कर्मेद्रियों के ,गुलाम नही , अरे तेरी दुर्गति इन काम वासना के विचारो से ही हुई है।

न जाने तूने कितना टाइम कोरी कामुक कल्पना करने में बर्बाद कर दिया है। अरे ओ फैशन और दिखावे में फंसे युवा देख ले किधर जा रहा है तू ? इन चमड़े के शरीरों पर आकर्षित हो अपनी जीवन शक्ति को क्यों व्यर्थ बहा रहा है तू ! क्या तेरी सोचने समझने की शक्ति खत्म हो चुकी है ?? क्या इतना बेबस हो गया है तू गलत आदतों में ? पूछ आज तू खुद से ये सवाल ....

जरा सोच वो सारा टाइम अपने लक्ष्य में लगाता तो आज तू कहा होता ।

जाग जा अब भी कुछ नही बिगड़ा है। अब भी वक्त है । अब सही राह पर चल पड़ ,नही तो पछताने के सिवाय कुछ नही बचेगा। इसलिए अब उठ खड़ा हो , पावनता के सही रास्ते पर चल और मंजिल की तरफ बढ़ । सफलता तुम्हारा इंतजार कर रही है।

फिर मत कहना बताया नही था !
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पुस्तक:- चाणक्य नीति
आठवा अध्याय
श्लोक १५
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पुस्तक:- चाणक्य नीति
आठवा अध्याय
श्लोक १६
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कोई 15 साल से कोई 20 साल से अपनी शक्ति (वीर्य) को बर्बाद कर रहा,

अभी सिर्फ 15, 20 दिन ही ब्रह्मचर्य पालन करके सभी समस्या ठीक हो जाये ऐसी उम्मीद करना बुद्धिमानी नहीं है ।

की हुई गलती का side effects को भुगतने में कोई आपको बचा नहीं सकता , न कोई मदद कर सकता है, हाँ इतना जरूर है ,

आप खुद अपने पुरुषार्थ से कम से कम एक साल भी ईमानदारी से ब्रह्मचर्य का पालन करें तो 70% समस्या से मुक्ति पा सकते है, @brahmacharya1

बाकी 30% समस्या का महत्व खत्म हो जाएगा जब आपके जीवन में आध्यात्मिक शक्ति आएगी । इसलिए रोते रोते समय खराब न करें, न कोई सुनेगा न कोई बचाएगा,


ये सत्य है आपके पुरुषार्थ के सामने भगवान भी यार दोस्त बन सकता है , ये सिर्फ हमारा विचार नहीं बल्कि सनातन संस्कृति का सनातन विचार है ।

🌹🌺सर्वे भवन्तु सुखिनः 🌼♥️

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ब्रह्मचर्य क्यों आवश्यक हे🕉👇

💠🌸🌺विषय विकारों में लिप्त है वह बंधा हुआ है तथा जो विषयों से अलिप्त है वह मुक्त है। वही महाशूर है, जो कामदेव के बाणों से व्यथित  न हुआ हो।

🌻जो लोग अकाल मृत्यु से मरते हैं व मोक्ष के अधिकारी नहीं हाते हैं। अकाल मृत्यु से बचने के लिये ब्रह्मचर्य पालन आवश्यक है।

🌹मनुष्य बिना ब्रह््मचर्य धारण किये हुए कदापि पूर्ण आये वाले नहीं हो सकते - ऋग्वेद

💠ब्रह्मचर्य का पालन ब्रह्मपद का मूल है, जो अक्षय-पुण्य को पाना चाहता है, वह निष्ठा से जीवन व्यतीत करे - देवर्षि नारद

🏹ब्रह््मचर्य से ही ब्रह्मस्वरूप के दर्शन होते हैं। है प्रभो, निष्कामता ही प्रदान कर दास को कृतार्थ करें। - मुनिवर्य भारद्वाज

🧘‍♂ब्रह्मचर्य से मनुष्य दिव्यता को प्राप्त होता है। शरीर के त्यागने पर सद्गति मिलती है- मुनीन्द्र गर्ग
🏋ब्रह्मचर्य के संरक्षण से ही मनुष्य को सब लोको में सुख देने वाली सिद्धियां प्राप्त होती है- मुनिराज अत्रि

🎯ब्रह्मचर्य से ही ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने की योग्यता प्राप्त होती है। - पिप्पलाद

💎ब्रह्मचर्य और अहिंसा शारीरिक तप है - योगिराज कृष्ण

🔱ब्रह्मचर्य के पालन से आत्मबल प्राप्त होता है - पतंजलि

⚜ब्रह्मचर्य व्रत धारण करने वालों को मोक्ष मिलता है- सनत्सुजातमुनि

🌐जो मनुष्य ब्रह्मचारी नहीं उसको कभी सिद्धि नहीं होती । वह जन्ममरणादि क्लेशों को बार-बार भोगता रहता है - अमृतसिद्ध



🔰ब्रह्मचर्य  वर्णाश्रम का पहला आश्रम भी है, जिसके अनुसार ये 0-25 वर्ष तक की आयु का होता है और जिस आश्रम का पालन करते हुए विद्यार्थियों को भावी जीवन के लिये शिक्षा ग्रहण करनी होती है। जैसा कि ऊपर बताया गया है कि ब्रहम का अर्थ ज्ञान भी है, अतः ब्रह्मचारी को  ब्रह्मचर्य , अर्थात ज्ञान प्राप्ति के लिए जीवन बिताना चाहिये।

✅विद्यार्थी के लिये ज्ञान ही ब्रह्म तुल्य है, पूर्ण तन्मयता से ज्ञान की प्राप्ति करना ही उसका मुख्य उद्देश्य होता है। उसे ब्रह्म चिंतन के साथ पूर्ण लगन से अपने ज्ञान का अर्जन करना होता है। ब्रह्मचर्य का पालन करने से उसकी बुद्धि तीव्र होती है, उसकी स्मरण शक्ति तीव्र होती है, चहेरे पर ओज, तेज होता है। जैसा कि विवेकानन्द जी ने कहा है कि केवल 12 वर्ष तक अखण्ड ब्रह्मचर्य से अद्भूत शक्ति प्राप्त होती है।

🥬🥭🍑🥦ब्रह्मचर्य का अर्थ अपने खान-पान पर भी नियंत्रण करना भी है। ब्रह्मचारी माँस से, अत्यधिक खट्टे या नमकीन भोजन से और बहुत मसालेदार भोजन से भी संयम रखते हैं। गांधीजी, जो की एक जाने माने ब्रह्मचारी भी थे, ने अपने पूरे जीवनभर सादा ही भोजन किया ।

💐ब्रह्मचर्य विषय पर स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा है कि ईश्वर को पाने के एकमात्र लक्ष्य के साथ, मैंने स्वयं बारह वर्ष तक अखण्ड ब्रह्मचर्य का पालन किया है।  उससे मानो कि एक पर्दा सा मेरे मस्तिष्क से हट गया है। इसलिए मुझे अब दर्शन जैसे सूक्ष्म विषय पर भाषण देने के लिए भी ज्यादा तैयारी  करना या सोचना नहीं पड़ता। मान लो कि मुझे कल व्याख्यान देना है, जो भी मुझे बोलना होगा वह मेरी आँखों के सामने कई चित्रों की तरह आज रात को गुजर जाता है और अगले दिन मैं वही सब, जो मैंने देखा था, शब्दों में व्यक्त कर देता हूँ। जो कोई भी बारह वर्ष के लिए अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करेगा, वह निश्चित रूप से इस शक्ति को पायेगा।
यदि यज्ञ वेदों के कर्मकाण्ड का आधार है ता निश्चित रूप से ब्रह्मचर्य, ज्ञानकाण्ड का आधार है।
संस्कृत का शब्द ब्रह्मचारी है जो कि कामजित् शब्द का पर्याय है (वह जिसका उसके कामवेग पर पूरा नियन्त्रण है)

जीवन का हमारा लक्ष्य मोक्ष है वह ब्रह्मचर्य या पूर्ण संयम के बिना कैसे पाया जा सकता है?
एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका का सैट देखकर उनके शिष्य ने कहा, इन सारी किताबों को एक जीवन में पढ़ना लगभग असंभव है।
स्वामीजी पहले ही दस खण्ड समाप्त कर चुके थे, अतः स्वामीजी ने कहा इन दस खण्डों में से जो चाहो पूछ लो, और मैं तुम्हें सबका उत्तर दूँगा।


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पुस्तक:- चाणक्य नीति
आठवा अध्याय
श्लोक १७
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पुस्तक:- चाणक्य नीति
आठवा अध्याय
श्लोक १८
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