व्रत उपवास रखने का धार्मिक एवम् वैज्ञानिक कारण बताइये। व्रत-उपवास रखने से क्या होता है?
धार्मिक विचारधारा के अनुसार देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए व्रत उपवास रखना चाहिए। देवी-देवता प्रसन्न होने पर भक्त को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उपवास रखने का कारण यह है कि अन्न' में एक प्रकार का नशा होता है, मादकता होती है। भोजन करने के बाद आप स्वयं अनुभव करते होंगे कि 'आलस्य आता है। कभी-कभी पेट में गैस, या खट्टी डकार आने जैसे विकार भी उत्पन्न हो जाते हैं। शरीर के सौष्ठव को बनाये रखने और अन्न की मादकता को कम करने का एकमात्र साधन है उपवास आज के अत्याधुनिक फैशनपरस्त युग में लोग डायटिंग भी करते है। मोटापा कम करने के लिए भी उपवास व्रत रखते हैं। कैंसर एवं पथरी के रोगी 7 दिन में एक बार उपवास जरुर रखे।
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उपवास रखने का कारण यह है कि अन्न' में एक प्रकार का नशा होता है, मादकता होती है। भोजन करने के बाद आप स्वयं अनुभव करते होंगे कि 'आलस्य आता है। कभी-कभी पेट में गैस, या खट्टी डकार आने जैसे विकार भी उत्पन्न हो जाते हैं। शरीर के सौष्ठव को बनाये रखने और अन्न की मादकता को कम करने का एकमात्र साधन है उपवास आज के अत्याधुनिक फैशनपरस्त युग में लोग डायटिंग भी करते है। मोटापा कम करने के लिए भी उपवास व्रत रखते हैं। कैंसर एवं पथरी के रोगी 7 दिन में एक बार उपवास जरुर रखे।
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ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ) pinned «व्रत उपवास रखने का धार्मिक एवम् वैज्ञानिक कारण बताइये। व्रत-उपवास रखने से क्या होता है? धार्मिक विचारधारा के अनुसार देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए व्रत उपवास रखना चाहिए। देवी-देवता प्रसन्न होने पर भक्त को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण…»
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ब्रह्मचर्य का प्रचार करिए पूरे जगत में तभी मानव जाती सुखी हो सकती है
ग्रुप में जोड़ियों अधिक से अधिक लोगों को
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⭕⭕⭕⭕⭕⭕ ATTENTION ⭕⭕⭕⭕⭕⭕⭕
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हमारे ब्रम्हचारी युवा और युवती हम अपने ब्रम्हचर्य की जानकारी को जादा लोगो से साझा करने हेतू, उन तक पोहोचने के हेतू काम कर रहे हैं ऊसी दौरान हमको cross promotion करना पड रहा है......
आप सभी हम पर विश्वास कीजिये.......
हम सिर्फ ब्रम्हचर्य का प्रसार करने मैं जुटे हुए है और आगे भी पुरे भारतवर्ष मैं ब्रम्हचर्य का ही प्रसार करेंगे !
धन्यवाद🙏
@bramachrya01
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भोजन के उपरान्त घूमना, टहलना चाहिए अथवा बिस्तर पर लेटकर आराम करना चाहिए ?
भोजन ग्रहण करने के पश्चात् कम से कम सौ से पाँच सौ कदम चलना अति आवश्यक है। चलने से भोजन यदि आहारनाल में कही थोड़ा बहुत फंसा भी होता है तो वह आसानी से पेट में पहुँच जाता है। जबकि सोने से उसी स्थान पर रुका रह जाता है। भोजन करके आहार नाम में कभी-कभी समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। भोजन करके तुरन्त सोने से कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो सकते हैं और बैठे रहने से पेट बढ़ जाता है।
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भोजन ग्रहण करने के पश्चात् कम से कम सौ से पाँच सौ कदम चलना अति आवश्यक है। चलने से भोजन यदि आहारनाल में कही थोड़ा बहुत फंसा भी होता है तो वह आसानी से पेट में पहुँच जाता है। जबकि सोने से उसी स्थान पर रुका रह जाता है। भोजन करके आहार नाम में कभी-कभी समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। भोजन करके तुरन्त सोने से कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो सकते हैं और बैठे रहने से पेट बढ़ जाता है।
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🔰Note:-ब्रह्मचर्य क्या है??
क्यों जरूरी है?
1. सामान्य अर्थ में तो सर्वोत्तम आचरण,और दिव्य दिनचर्या का व्यवहार ही ब्रह्मचर्य है। ✅
2. लेकिन शास्त्रानुसार मन, वचन और कर्म l यानी व्यवहार से पूरी तरह वासना और अश्लीलता के चिंतन का त्याग ही ब्रह्मचर्य है। ✅
क्योंकि तभी आपकी जीवनी शक्ति , जो सन्तान के निर्माण में उपयोगी होती है। वह व्यर्थ होने से बचकर,आपको बहुत सुंदर, पवित्र और बलशाली बनाती है l✅
3. जिस सन्तान को हम ईश्वर का उपहार कहते है। भला उसे खेल-खेल में नष्ट करना कितना उचित है???🤔
4. जिस कार्य को करने के बाद मुर्दा लाश जैसे पड़े होकर, सिर्फ पश्चाताप करे??🤔
क्या वह कभी आपका भला कर सकता है??खुद विचार कीजिये।🤔
दुर्भाग्य है देश का। जिसमें 40 करोड़ युवा तो है। लेकिन बहुत बड़ी संख्या में अश्लील फिल्मों में डूबकर अपनी शक्ति को जाने अनजाने नाली में बहा रहे है।😌😌😌
खुद में थोड़ा अब झांकिए l✅
🔰महापुरुष कह गए है, कि अनुभवों से प्राप्त ज्ञान ही सच्चा ज्ञान है l👍
🔰सम्भव है आपके एक share से किसी को इन बुरी आदतों से बाहर निकलने के लिये सही ज्ञान मिल जाय l✅
क्यों जरूरी है?
1. सामान्य अर्थ में तो सर्वोत्तम आचरण,और दिव्य दिनचर्या का व्यवहार ही ब्रह्मचर्य है। ✅
2. लेकिन शास्त्रानुसार मन, वचन और कर्म l यानी व्यवहार से पूरी तरह वासना और अश्लीलता के चिंतन का त्याग ही ब्रह्मचर्य है। ✅
क्योंकि तभी आपकी जीवनी शक्ति , जो सन्तान के निर्माण में उपयोगी होती है। वह व्यर्थ होने से बचकर,आपको बहुत सुंदर, पवित्र और बलशाली बनाती है l✅
3. जिस सन्तान को हम ईश्वर का उपहार कहते है। भला उसे खेल-खेल में नष्ट करना कितना उचित है???🤔
4. जिस कार्य को करने के बाद मुर्दा लाश जैसे पड़े होकर, सिर्फ पश्चाताप करे??🤔
क्या वह कभी आपका भला कर सकता है??खुद विचार कीजिये।🤔
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ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ) pinned «भोजन के उपरान्त घूमना, टहलना चाहिए अथवा बिस्तर पर लेटकर आराम करना चाहिए ? भोजन ग्रहण करने के पश्चात् कम से कम सौ से पाँच सौ कदम चलना अति आवश्यक है। चलने से भोजन यदि आहारनाल में कही थोड़ा बहुत फंसा भी होता है तो वह आसानी से पेट में पहुँच जाता है। जबकि सोने…»
🙏🙏🙏🙏🙏
“अवसर “और “सूर्योदय “
जल्दी जागने वालो को ही
दिखाई पड़ती हैं
देर से जागने वाले अक्सर इसे
खो दिया करते हैं।
#meditation
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"हस्तमैथुन" तो पशु भी नही करते
क्या इंसान पशुओं से भी गिरा हुआ है
विचार करें ....
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भोजन के तुरन्त बाद पानी पीना चाहिए या नहीं?
भोजन के (30 मिनट) पहले पानी पीना अमृत समान है और भोजन के बाद पानी पीना विष के समान है, अतः भोजन करने के घंटे पश्चात् ही पानी पियें।
वैज्ञानिक कारण भोजन करने के पश्चात् शरीर में एक प्रकार की ऊष्णता (गर्मी) का अनुभव करते हैं। ऐसा क्यों? क्योंकि अन्न में गर्मी होती है और वह गर्मी पेट में भोजन के माध्यम से पहुँचती है। जठराग्नि उस भोजन को पचाने के कार्य में लग जाती है तथा अन्न की गर्मी से उत्पन्न गैस अपने मार्गों से बाहर निकलती है जबकि तुरन्त बाद पानी पीने से निकलने वाली ऊष्णता पानी की शीतलता से दब जाती है और बाद में अनेक प्रकार के विकार रोगों के रूप में उत्पन्न होते हैं।
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वैज्ञानिक कारण भोजन करने के पश्चात् शरीर में एक प्रकार की ऊष्णता (गर्मी) का अनुभव करते हैं। ऐसा क्यों? क्योंकि अन्न में गर्मी होती है और वह गर्मी पेट में भोजन के माध्यम से पहुँचती है। जठराग्नि उस भोजन को पचाने के कार्य में लग जाती है तथा अन्न की गर्मी से उत्पन्न गैस अपने मार्गों से बाहर निकलती है जबकि तुरन्त बाद पानी पीने से निकलने वाली ऊष्णता पानी की शीतलता से दब जाती है और बाद में अनेक प्रकार के विकार रोगों के रूप में उत्पन्न होते हैं।
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