ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ) pinned «भोजन के तुरन्त बाद पानी पीना चाहिए या नहीं? भोजन के (30 मिनट) पहले पानी पीना अमृत समान है और भोजन के बाद पानी पीना विष के समान है, अतः भोजन करने के घंटे पश्चात् ही पानी पियें। वैज्ञानिक कारण भोजन करने के पश्चात् शरीर में एक प्रकार की ऊष्णता (गर्मी) का अनुभव…»
ब्राह्ममुहूर्त में उठने से होती है।
जो लोग ब्राह्ममुहूर्त में भी सोते रहते हैं और उम्रलायक लड़के (14 वर्ष से बड़े) यदि सावधान न रहे तो उनका जो वीर्य है वह स्खलित हो जाता है, ओज-तेज क्षीण हो जाता है। ब्राह्ममुहूर्त में उठने से वीर्यरक्षा होती है। जिस समय नक्षत्र दिखते हों, तारे दिखते हों उस समय नहा लेना चाहिए।
- पूज्य बापूजी
योग व उच्च संस्कार साहित्य से
ओज क्या होता है?
शरीर की सभी धातुएं जब पुष्ट होकर वीर्य में बदलती है तब वह वीर्य हमारे अंडकोष के आस पास रहता है अर्थात उसका प्रवाह नीचे की तरफ होता है। प्रतिदिन के व्यायाम, प्राणायाम से जब नाड़ियां शुद्ध होकर समस्त अंगों को प्राण पहुचाती है तब वीर्य खपना आरम्भ होता है।
तब वह उर्ध्वगामी होने लगता है और ऊपर मष्तिष्क की ओर चढ़ता है। फिर वीर्य तेज में बदल जाता है और सभी अङ्गों को दैदीप्यमान कर देता है।
प्राण वायु द्वारा नाड़ियों के शोधन और मस्तिष्क एकाग्र होने पर यह ओज में बदल जाता है।
ओज को अंग्रेजी में AURA भी बोलते है, हर भौतिक और अभौतिक वस्तु का अपना एक मैग्नेटिक फील्ड होता है।
ब्रह्मचारी के शरीर पर भी ऐसे aura के पॉजिटिव रेंज बढ़ जाते है जो हर किसी को उसकी तरफ आकर्षित करते हैं।
जिसका ओज जितना अधिक होगा वह उतना ही प्रभावशाली होगा।
#meditation
#bramhachryamotivation
#Celibacy
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जो लोग ब्राह्ममुहूर्त में भी सोते रहते हैं और उम्रलायक लड़के (14 वर्ष से बड़े) यदि सावधान न रहे तो उनका जो वीर्य है वह स्खलित हो जाता है, ओज-तेज क्षीण हो जाता है। ब्राह्ममुहूर्त में उठने से वीर्यरक्षा होती है। जिस समय नक्षत्र दिखते हों, तारे दिखते हों उस समय नहा लेना चाहिए।
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शरीर की सभी धातुएं जब पुष्ट होकर वीर्य में बदलती है तब वह वीर्य हमारे अंडकोष के आस पास रहता है अर्थात उसका प्रवाह नीचे की तरफ होता है। प्रतिदिन के व्यायाम, प्राणायाम से जब नाड़ियां शुद्ध होकर समस्त अंगों को प्राण पहुचाती है तब वीर्य खपना आरम्भ होता है।
तब वह उर्ध्वगामी होने लगता है और ऊपर मष्तिष्क की ओर चढ़ता है। फिर वीर्य तेज में बदल जाता है और सभी अङ्गों को दैदीप्यमान कर देता है।
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ब्रह्मचारी के शरीर पर भी ऐसे aura के पॉजिटिव रेंज बढ़ जाते है जो हर किसी को उसकी तरफ आकर्षित करते हैं।
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Forwarded from स्वदेशी आंदोलन राजीव दीक्षित जी
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यहाँ पर शेयर किया गया मटेरियल भारतीय शास्त्रों, ऋषि मुनियों , अखंड ब्रह्मचारियों के द्वारा बताए गए ज्ञान का अंश है।
इन आसान नियमो का पालन करके आप अपने जीवन को सफल और खुशहाल बना लेंगे। आपका जीवन ऐसा हमारा विश्वास है । हमसे जुड़ने के लिए धन्यवाद। 🙏💐
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भाइयो और बेहेनो आप इस चैनल का लिंक ( https://t.me/bramachrya01) ज्यादा से ज्यादा युवाओ के साथ शेयर करे । जिससे उनका भविष्य भी उज्जवल बन सके।ये आपके द्वारा की गई उनकी सच्ची सहायता होगी।
Films ki ,jokes ,वीडियोस की लिंक हम काफी शेयर करते है। ऐसी जीवन को नई दिशा देने वाली लिंक जरूर शेयर करे। अगर आप एक भी भटके युवा को सही रास्ते पर ले आये तो वो पूरी जिंदगी आपको दुआ देगा।
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ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
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यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके |
इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है|
#hastag
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प्राणायाम क्या है? प्राणायाम से क्या कोई लाभ होता है?
प्राणायाम का अर्थ है श्वास का नियंत्रण इस क्रिया के तीन अंग होते हैं- 1. पूरक (पूरा श्वास भीतर खीचना) 2. कुमक (श्वास को भीतर रोकना) और 3. रेचक (नियमित विधि से श्वास छोड़ना) इन क्रियाओं का ज्ञान सिद्ध गुरु से ही प्राप्त करना चाहिए।
श्वास के व्यायाम से हृदय पुष्ट होता है और उसमें बल आता है। इसे चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार करता है। योग इस दिशा में और भी आगे बढ़ता है और चित्त एकाग्र-साधन के लिए प्राणायाम का निर्देश करता है, क्योंकि इस (प्राणायाम) के द्वारा शरीर और मन में दृढ़ता आती है जब तक श्वास की कृपा चलती है तब तक चित्त भी उसके साथ चंचल रहता है। जब श्वास वायु की गति स्थगित हो जाती है तब मन भी निस्पंद या स्थिर हो जाता है। इस तरह प्राणायाम् के अभ्यास से योगी बहुत देर तक अपनी श्वास रोक सकता है और समाधि की अवधि को बढ़ा सकता है।
#sanatandharma
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श्वास के व्यायाम से हृदय पुष्ट होता है और उसमें बल आता है। इसे चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार करता है। योग इस दिशा में और भी आगे बढ़ता है और चित्त एकाग्र-साधन के लिए प्राणायाम का निर्देश करता है, क्योंकि इस (प्राणायाम) के द्वारा शरीर और मन में दृढ़ता आती है जब तक श्वास की कृपा चलती है तब तक चित्त भी उसके साथ चंचल रहता है। जब श्वास वायु की गति स्थगित हो जाती है तब मन भी निस्पंद या स्थिर हो जाता है। इस तरह प्राणायाम् के अभ्यास से योगी बहुत देर तक अपनी श्वास रोक सकता है और समाधि की अवधि को बढ़ा सकता है।
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