ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
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ब्रम्हचर्य पालन करने वालो के लिये विश्व का सर्वोत्तम टेलिग्राम चॅनल,
यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके |
इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है|
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यहाँ पर शेयर किया गया मटेरियल भारतीय शास्त्रों, ऋषि मुनियों , अखंड ब्रह्मचारियों के द्वारा बताए गए ज्ञान का अंश है।

इन आसान नियमो का पालन करके आप अपने जीवन को सफल और खुशहाल बना लेंगे। आपका जीवन ऐसा हमारा विश्वास है । हमसे जुड़ने के लिए धन्यवाद। 🙏💐
आप सभी इस चैनल के पुराने पोस्ट जरूर पढ़ लेवे।
समय निकालकर आप उन्हें जरूर पढ़ें।
भाइयो और बेहेनो आप इस चैनल का लिंक ( https://t.me/bramachrya01) ज्यादा से ज्यादा युवाओ के साथ शेयर करे । जिससे उनका भविष्य भी उज्जवल बन सके।ये आपके द्वारा की गई उनकी सच्ची सहायता होगी।

Films ki ,jokes ,वीडियोस की लिंक हम काफी शेयर करते है। ऐसी जीवन को नई दिशा देने वाली लिंक जरूर शेयर करे। अगर आप एक भी भटके युवा को सही रास्ते पर ले आये तो वो पूरी जिंदगी आपको दुआ देगा।
प्राणायाम क्या है? प्राणायाम से क्या कोई लाभ होता है?

प्राणायाम का अर्थ है श्वास का नियंत्रण इस क्रिया के तीन अंग होते हैं- 1. पूरक (पूरा श्वास भीतर खीचना) 2. कुमक (श्वास को भीतर रोकना) और 3. रेचक (नियमित विधि से श्वास छोड़ना) इन क्रियाओं का ज्ञान सिद्ध गुरु से ही प्राप्त करना चाहिए।
श्वास के व्यायाम से हृदय पुष्ट होता है और उसमें बल आता है। इसे चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार करता है। योग इस दिशा में और भी आगे बढ़ता है और चित्त एकाग्र-साधन के लिए प्राणायाम का निर्देश करता है, क्योंकि इस (प्राणायाम) के द्वारा शरीर और मन में दृढ़ता आती है जब तक श्वास की कृपा चलती है तब तक चित्त भी उसके साथ चंचल रहता है। जब श्वास वायु की गति स्थगित हो जाती है तब मन भी निस्पंद या स्थिर हो जाता है। इस तरह प्राणायाम् के अभ्यास से योगी बहुत देर तक अपनी श्वास रोक सकता है और समाधि की अवधि को बढ़ा सकता है।

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ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ) pinned «प्राणायाम क्या है? प्राणायाम से क्या कोई लाभ होता है? प्राणायाम का अर्थ है श्वास का नियंत्रण इस क्रिया के तीन अंग होते हैं- 1. पूरक (पूरा श्वास भीतर खीचना) 2. कुमक (श्वास को भीतर रोकना) और 3. रेचक (नियमित विधि से श्वास छोड़ना) इन क्रियाओं का ज्ञान सिद्ध गुरु…»
जिनका लक्ष्य बड़ा है उनके पास हस्तमैथुन पोर्न या अन्य तुच्छ कार्यों के लिए समय ही नहीं रहता
निठल्ले ही ये सब करते हैं



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ब्रह्मचारी बनने के लिए आपको कुछ नियमों का पालन करना होगा।


🔴दिनचर्या

▪️ सुबह ४ बजे उठकर व्यायाम प्राणायाम ध्यान करना

▪️थोड़ा टहलना

▪️स्नान

▪️ नाश्ता

▪️अपना कार्य

▪️ दोपहर १२-२ बजे की बीच भोजन

▪️अपना कार्य

▪️शाम को दलिया खाना

▪️रात को १० बजे सो जाना

🔴किन चीजों से दूर रहे

जिन चीजों से आपके ब्रम्हचर्य खंडित होने कि संभावना है उन सभी को त्याग दो.......

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पुस्तक:- चाणक्य नीति
दसवा अध्याय
श्लोक १०
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पुस्तक:- चाणक्य नीति
दसवा अध्याय
श्लोक ११
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#Chanakyaniti
भारतीय संस्कृति में भोजन के क्या नियम हैं?

भोजन करते समय सर्व प्रथम भोजन को प्रणाम करें तो तुम्हारी क्षुधा तृत्प करता है। भोजन की कभी निंदा न करें क्योंकि तुम्हें तो भोजन मिल रहा हैं। कितने ऐसे हैं जिन्हें दो-दो दिन तक भोजन ही नहीं मिलता। स्रान के पश्चात् भोजन करें।
बात करते हुए भोजन न करें अर्थात् भोजन करते समय चुप रहना चाहिए। कई लोगों के साथ बैठकर भोजन करते समय बहुत जल्दी भोजन करके उठना नहीं चाहिए। अन्य लोगों को भी खाने का अवसर दें। जूते, चप्पल आदि पहनकर भोजन न करें। कपड़े पर हाथ पर, पीपल के पत्तों पर, आक के पत्तों पर, बटपत्र पर भोजन न करें। भोजन में कमल दल के पत्ते, आम और केले के पत्ते. सोने और चाँदी के बर्तन ही शुद्ध माने गये हैं। सबको खिलाने के बाद सबसे अंत में स्वयं भोजन ग्रहण करें।

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जो अपने लक्ष्य पर केवल केंद्रित है उसका ब्रह्मचर्य अपने-आप हो जाएगा । आजकल ब्रह्मचर्य के लिए कुछ लोग पागल बन रहे पर अपने लक्ष्य के लिए नही तो उनका गिरना सुनिश्चित है।


☝️ध्यान रखे पहला लक्ष्य मोक्ष हे
फिर संसार के लक्ष्य हे !



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पुस्तक:- चाणक्य नीति
दसवा अध्याय
श्लोक १२
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पुस्तक:- चाणक्य नीति
दसवा अध्याय
श्लोक १३
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क्या 'गो-मूत्र' पवित्र हैं? या वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गोमूत्र पवित्र हैं?

सनातन धर्म के अनुसार गो(गाय) को माता समान माना गया है। गौमाता शुचि (पवित्र) है। उनका मुख का भाग अपवित्र माना गया है किन्तु पीठ के
पीछे का भाग पवित्र हैं। गोमूत्र का सेवन करने से प्लीहा और यकृत के रोग
नष्ट हो जाते हैं। ऐसे प्रमाण मिले हैं कि गौमूत्र से कैंसर जैसे भयानक रोगों को भी ठीक करने में सहायक हैं। गौमूत्र वात, पित्त और कफ को समान रखता है. क्योंकि गौमूत्र में वे सारे तत्व मौजूद है जो हमारे शरीर को चाहिए। संक्रमण से उत्पन्न बीमारियाँ भी इसके सेवन से ठीक हो जाती हैं। इस तरह वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह पवित्र हैं।

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