क्या 'गो-मूत्र' पवित्र हैं? या वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गोमूत्र पवित्र हैं?
सनातन धर्म के अनुसार गो(गाय) को माता समान माना गया है। गौमाता शुचि (पवित्र) है। उनका मुख का भाग अपवित्र माना गया है किन्तु पीठ के
पीछे का भाग पवित्र हैं। गोमूत्र का सेवन करने से प्लीहा और यकृत के रोग
नष्ट हो जाते हैं। ऐसे प्रमाण मिले हैं कि गौमूत्र से कैंसर जैसे भयानक रोगों को भी ठीक करने में सहायक हैं। गौमूत्र वात, पित्त और कफ को समान रखता है. क्योंकि गौमूत्र में वे सारे तत्व मौजूद है जो हमारे शरीर को चाहिए। संक्रमण से उत्पन्न बीमारियाँ भी इसके सेवन से ठीक हो जाती हैं। इस तरह वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह पवित्र हैं।
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सनातन धर्म के अनुसार गो(गाय) को माता समान माना गया है। गौमाता शुचि (पवित्र) है। उनका मुख का भाग अपवित्र माना गया है किन्तु पीठ के
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नष्ट हो जाते हैं। ऐसे प्रमाण मिले हैं कि गौमूत्र से कैंसर जैसे भयानक रोगों को भी ठीक करने में सहायक हैं। गौमूत्र वात, पित्त और कफ को समान रखता है. क्योंकि गौमूत्र में वे सारे तत्व मौजूद है जो हमारे शरीर को चाहिए। संक्रमण से उत्पन्न बीमारियाँ भी इसके सेवन से ठीक हो जाती हैं। इस तरह वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह पवित्र हैं।
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ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ) pinned «क्या 'गो-मूत्र' पवित्र हैं? या वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गोमूत्र पवित्र हैं? सनातन धर्म के अनुसार गो(गाय) को माता समान माना गया है। गौमाता शुचि (पवित्र) है। उनका मुख का भाग अपवित्र माना गया है किन्तु पीठ के पीछे का भाग पवित्र हैं। गोमूत्र का सेवन करने से…»
गाय का दूध पवित्र है तो कैसे?
पौष्टिक एवम् सतोगुण प्रधान गाय का दूध देवताओं को चढ़ाया जाता हैं। धर्म शास्त्रों में गौ-दुग्ध को शुचि माना गया हैं। गाय के दूध के सेवन से संग्रहणी, शोध आदि रोग नष्ट हो जाते हैं। यह मोटापा और मेदा वृद्धि को भी दूर करता हैं। इसमें protin एवम् विटामिन उचित मात्रा में पाये जाते हैं जो लको के लिए अति उत्तम हैं। माँ के दूध के बाद डॉक्टर बच्चों को गाय का दूध पिलाने की सलाह देते हैं।
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ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ) pinned «गाय का दूध पवित्र है तो कैसे? पौष्टिक एवम् सतोगुण प्रधान गाय का दूध देवताओं को चढ़ाया जाता हैं। धर्म शास्त्रों में गौ-दुग्ध को शुचि माना गया हैं। गाय के दूध के सेवन से संग्रहणी, शोध आदि रोग नष्ट हो जाते हैं। यह मोटापा और मेदा वृद्धि को भी दूर करता हैं। इसमें…»
भारत वर्ष को गौर अंग्रेजो से आजादी दिलाने वाले अधिकतर क्रांतिकारी ब्रह्मचारी थे ।
ब्रह्मचर्य की शक्ति को पहचानो रे
नौजवानों तुम अपनी शक्ति को बचाओगे नहीं तो वह व्यर्थ चली जाएगी उसे अच्छे कार्यों में व्यय करो ।।
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आप जब तक स्वयं खोजकर्ता वैज्ञानिक नहीं बनेंगे दूसरो के उपाय आपको ज्यादा लाभ नहीं देंगे
अपना निरीक्षण करो खुद ही
अपने भीतर की खोज करो
अपने मन ओर शरीर का विज्ञान समझो
खोजो कोन हो तुम कोन हे मन
क्या करने आए हो यहां
स्वयं अनुसंधान करो
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Forwarded from स्वदेशी आंदोलन राजीव दीक्षित जी
स्वदेशी आंदोलन राजीव दीक्षित जी
@swadeshiandolanrajivdixit
पर वो ६०० रुपये किलो के बादाम और ४०० रुपये प्रति किलो गाय का घी खाने के बाद भी आपको कोई फरक नहीं पडता तो समझ जाइये आप ब्रम्हचर्य का पालन ना करने से अपना समय और (मा - बाप के पसीने के) पैसे दोनो बर्बाद कर रहे है । ⚠
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स्वदेशी आंदोलन राजीव दीक्षित जी
Photo
नहाने से पहले आप अपनी प्रातः विधि कर के ये कार्य कर सकते है लेट कर... 👍👍
सुंदर रूप देख कर आकर्षण नही होता और कुरूप रूप देखकर उससे घृणा नहीं आती है तो आप सही मार्ग पे हो🙏
बिना स्रान किये भोजन करना उचित है अथवा अनुचित?
शास्त्र कहते हैं कि बिना स्नान किये भोजन करना गंदगी खाने के समान होता हैं- "अस्स्रायी समलं भुक्ते" ।
वैज्ञानिक कारण- विज्ञान के अनुसार स्नान करने से शरीर के रोम कूपों का सिंचन हो जाता है अर्थात् शरीर से निकले पसीने से जो पानी की कमी हो चुकी होता है, स्नान करने से उसकी पूर्ति हो जाती है। शरीर में शीतलता और स्फूर्ति आ जाती है तथा भूख भी लग जाती है। यदि भूख पहले से लग रही है तो बढ़ जाती है तब भोजन करें। इस तरह भोजन का रस हमारे शरीर के लिए पुष्टिवर्द्धक सिद्ध होता हैं। बिना स्नान किये भोजन कर लें तो हमारी जठराग्नि उसे पचाने के कार्य में लग जाती है। उसके बाद स्रान करने पर शरीर शीतल पड़ जाता हैं और पाचन शक्ति मंद पड़ जाती हैं। जिसका परिणाम यह होता है कि भोजन पूर्ण रूप से नहीं पच पाता और कब्ज अथवा गैस की शिकायत उत्पन्न हो जाती हैं।
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