ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
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ब्रम्हचर्य पालन करने वालो के लिये विश्व का सर्वोत्तम टेलिग्राम चॅनल,
यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके |
इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है|
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( तृतीय भाग)
दंत रक्षा
♦ मंजन
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पुस्तक:- चाणक्य नीति
तेरहवां अध्याय
श्लोक ४
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पुस्तक:- चाणक्य नीति
तेरहवां अध्याय
श्लोक ५
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( तृतीय भाग)
दंत रक्षा
♦ इरीमेदादी तेल
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पुस्तक:- चाणक्य नीति
तेरहवां अध्याय
श्लोक ६
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पुस्तक:- चाणक्य नीति
तेरहवां अध्याय
श्लोक ७
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश

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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
प्राक्कथन
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पुस्तक:- चाणक्य नीति
तेरहवां अध्याय
श्लोक ८
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पुस्तक:- चाणक्य नीति
तेरहवां अध्याय
श्लोक ९
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तुम्हारे भीतर सौ खामियाँ हों,
तुम्हें एक-सौ-एक पता होनी चाहिए

पर उन खामियों से दबकर ,
हारकर, अपने-आपको
गिरा हुआ नहीं मान लेना है।
बिल्कुल भी नहीं !

साफ़ देखना है कि
तुम कितने गिरे हुए हो,
और फिर मुट्ठी भींच कर,
हँस कर कहना है,

"पतन मैंने जी लिया
परमात्मा मेरा बाकी है।
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अब वो दिन दूर नहीं जब हम सभी ब्रम्हचर्य के चैनल भारत के हर युवा तक पोहोचाएंगे और भारत के हर युवा को नयी जिंदगी जिने की उम्मीद जगायेंगे 💪💪🔥

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व्यायाम किये बिना वीर्य रक्षा असम्भव है । व्यायाम से वीर्य शरीर का अङ्ग बन जाता है । स्वप्नदोषादि विकार बहुत कुछ व्यायाम से ही दूर हो जाते हैं । व्यायाम में शीर्षासन तो स्वप्रदोष तथा प्रमेह की अचूक औषध है । शीर्षासन दस सैकिंड से आरम्भ करके शनैः शनैः प्रतिदिन बढ़ायें । बढ़ाते समय अपनी शक्ति और भोजन का ध्यान रखें । यह अनुभवसिद्ध है जब शीर्षासन का १० वा १५ मिनट तक अभ्यास होजाता है तो स्वप्रदोष तथा वीर्यसम्बन्धी सभी रोग दूर भाग जाते हैं । स्वास्थ्य आदर्श तथा मुख तेजस्वी होजाता है । बुद्धि और मस्तिष्क की शक्ति की वृद्धि होती है । शीर्षासन सब व्यायामों से पूर्व करो तथा दोनों समय ( शौच से पीछे ) शिर के नीचे कपड़े की गद्दी रखकर करो । इसकी पूरी विधि किसी पुस्तक में देखलो | यह लेख संक्षेप से लिखा है , तदर्थ सचेत रहें । किन्तु जो साधन स्वप्नदोष को दूर करने के लिये लिखे हैं वे सुने - सुनाये नहीं अपितु अनेक रोगियों पर अनुभव किये गये हैं । आप स्वयं परीक्षण करके देखोगे तो सारी आयु ऋषियों के गुण गाते - गाते नहीं थकोगे । यदि कुछ भी विद्यार्थियों वा युवकों ने इस लेख से लाभ उठाया तो मैं अपने को कृतार्थ समझुंगा ।

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