12 वी सदी में एक विचारक की कही गई एक बड़ी हकीकत
"युवा पीढ़ी को अश्लीलता व गंदी फिल्मों में डूबो देना काफी है एक देश के विनाश के लिए , बिना हथियार तबाह हो जाएगी कई पीढ़ियां" 🤯
आज युवा पीढ़ी को कोई सही रास्ता दिखाने वाला नहीं है माता पिता ऐसे विषयों पर संकोच करते है अपने बच्चो से बात करने में।
युवा गलत संग में पड़कर गलत राह पर चल पड़ता है जब पता लगता है तो काफी देर हो चुकी होती है ।
अब सबको सही राह पर लाना है भारत को विश्व गुरु बनाना है।
संयम व सात्विकता की एक नई सरिता बहानी है।
खुद को बदलने का आज संकल्प लेवे। ना ऐसी चीजे पढेगे , ना देखेगे ना सुनेगे और ना ही फॉरवर्ड करेगे जिसमे गंदगी हो ,Lust हो (Low vibration ) हो ,
जिसको पढ़कर सुनकर देखकर हमारे मन में गलत विचार आते है उसको छोड़ देगे। खुद के मालिक बनेगे , इन कर्म इन्द्रियों के गुलाम नहीं।
आप में शक्ति है ,पहचानो अपनी शक्ति को
तभी सुंदर सुखमय समाज का निर्माण हो पाएगा ।
उम्मीद है आप समाज को बदलने में अपना सहयोग जरूर देगे और सभी को जागरूक करेगे
"युवा पीढ़ी को अश्लीलता व गंदी फिल्मों में डूबो देना काफी है एक देश के विनाश के लिए , बिना हथियार तबाह हो जाएगी कई पीढ़ियां" 🤯
आज युवा पीढ़ी को कोई सही रास्ता दिखाने वाला नहीं है माता पिता ऐसे विषयों पर संकोच करते है अपने बच्चो से बात करने में।
युवा गलत संग में पड़कर गलत राह पर चल पड़ता है जब पता लगता है तो काफी देर हो चुकी होती है ।
अब सबको सही राह पर लाना है भारत को विश्व गुरु बनाना है।
संयम व सात्विकता की एक नई सरिता बहानी है।
खुद को बदलने का आज संकल्प लेवे। ना ऐसी चीजे पढेगे , ना देखेगे ना सुनेगे और ना ही फॉरवर्ड करेगे जिसमे गंदगी हो ,Lust हो (Low vibration ) हो ,
जिसको पढ़कर सुनकर देखकर हमारे मन में गलत विचार आते है उसको छोड़ देगे। खुद के मालिक बनेगे , इन कर्म इन्द्रियों के गुलाम नहीं।
आप में शक्ति है ,पहचानो अपनी शक्ति को
तभी सुंदर सुखमय समाज का निर्माण हो पाएगा ।
उम्मीद है आप समाज को बदलने में अपना सहयोग जरूर देगे और सभी को जागरूक करेगे
आज छोटा सा मजा 🤯🤯, बाद में बहुत बड़ी सजा 😱😱
संभल जाओ नही तो सिर्फ पश्चाताप ही करना पड़ेगा ।।
संभल जाओ नही तो सिर्फ पश्चाताप ही करना पड़ेगा ।।
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ व्यायाम के प्रकार वा भेद
♦ कौनसा व्यायाम करे ?
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
#celibacybookssummary
पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ व्यायाम के प्रकार वा भेद
♦ कौनसा व्यायाम करे ?
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🙏
*"मन को एकाग्र करके यदि आप अपने अंदर ही ईश्वर से प्रार्थना करें। और व्यवहार में उस प्रार्थना के अनुकूल पूरा पुरुषार्थ करें। तो आपको बहुत कुछ मिल जाएगा।"*
किसी को धन चाहिए, किसी को पुत्र चाहिए, किसी को नौकरी चाहिए, किसी को कुछ चाहिए। *"इन सब चीजों की प्राप्ति के लिए लोग दूर-दूर प्रचलित तीर्थ स्थानों की, मंदिरों की यात्राएं कर रहे हैं। इतनी दूर भटकने की कोई आवश्यकता नहीं है।"* क्योंकि जो इन सब वस्तुओं का देने वाला है, वह ईश्वर है। वह आपके अंदर ही बैठा है। *"जब वह आपके इतना निकट है, तो फिर दूर दूर जाने की क्या आवश्यकता है?"*
दूसरी बात - *"लोग इन सब चीजों को मुफ्त में प्राप्त करना चाहते हैं, जबकि ये सब वस्तुएं मुफ्त में मिलती नहीं हैं।"* इनकी प्राप्ति के लिए बहुत पुरुषार्थ करना पड़ता है। वह पुरुषार्थ करना भी आपके आधीन है।
*"अब यदि आप अपने अंदर विद्यमान सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान न्यायकारी ईश्वर की स्तुति प्रार्थना उपासना करेंगे, और व्यवहार में पूरा पुरुषार्थ करेंगे, तो उसके अनुसार आप जिस जिस वस्तु धन बल विद्या पुत्र नौकरी आदि प्राप्त करने के अधिकारी बन पाएंगे, जितनी वस्तुएं प्राप्त करने के पात्र बन पाएंगे, वे सब वस्तुएं उतनी मात्रा में आपको ईश्वर दे देगा। आप के पुरुषार्थ को देखकर आप के माता-पिता और समाज के लोग भी आपका सहयोग करेंगे।"*
*"परंतु ये सब वस्तुएं उतनी मात्रा में नहीं मिलेंगी, जितनी मात्रा में आप चाहते हैं। ये सब वस्तुएं आपको उतने अनुपात में मिलेंगी, जितना आप पुरुषार्थ करेंगे।"* इसलिए आप ईश्वर पर यह आरोप नहीं लगा सकते, कि *"मैंने इतना पुरुषार्थ किया, फिर भी मुझे ईश्वर ने बहुत कम दिया। या देकर भी वापस छीन लिया। अब यदि आपको वे वस्तुएं नहीं मिल पाती अथवा कम मात्रा में मिलती हैं, तो इसका दोषी ईश्वर नहीं है।"* ईश्वर पर कभी भूल कर भी ऐसा दोष न लगाएं। क्योंकि वह ऐसा काम कभी नहीं करता। ऐसे कामों में मनुष्य का ही हाथ देखा जाता है। या कभी-कभी प्राकृतिक परिस्थितियां भी ऐसी बन जाती हैं, कि जैसा आपने पुरुषार्थ किया था, उस के अनुकूल फल वर्तमान में नहीं मिल पाया। *"तो ऐसी स्थिति में यदि किसी मनुष्य ने अन्याय करके आप का अधिकार संपत्ति आदि छीन ली हो, तो उसका दोषी मनुष्य है। और यदि कोई प्राकृतिक दुर्घटना से आंधी तूफान बाढ़ भूकंप आदि से आपको कोई संपत्ति आदि की हानियां हो गई हों, तो उसका दोषी भी ईश्वर नहीं है।" "ईश्वर ने कोई योजनाबद्ध आप की हानि नहीं की है। यह आंधी तूफान बाढ़ भूकंप आदि से जो दुख मिलते हैं, यह कोई आपका किसी कर्म का फल नहीं है। यह तो प्राकृतिक दुर्घटना मात्र है।"* संसार में प्राकृतिक दुर्घटनाएं होती रहती हैं, आगे भी होती रहेंगी। *"जैसे सड़क पर मानवकृत दुर्घटनाओं से बचना आपकी जिम्मेदारी है। इसी प्रकार से आंधी तूफान बाढ़ भूकंप आदि प्राकृतिक घटनाओं से बचना भी आपकी ही जिम्मेदारी है। इसमें ईश्वर दोषी नहीं है। इसलिए ईश्वर पर कभी भी ऐसा दोष न लगाएं।"* बल्कि उसका सदा हर परिस्थिति में धन्यवाद ही करें, कि *"हे ईश्वर! हम जितना भी संसार में सुख प्राप्त कर पा रहे हैं, यह सब आपकी कृपा का और न्याय दया आदि गुणों का ही फल है। आपकी कृपा ऐसे ही सदा बनी रहे। आप हमें इतनी विद्या बुद्धि बल शक्ति सामर्थ्य दीजिए, जिससे कि हम संसार की दुर्घटनाओं से बचते हुए अपने जीवन को सुरक्षित एवं सुखमय बना सकें।"*
हां, इन दुर्घटनाओं में जो आप की हानि हो जाती है। *"यदि आप पूरी सावधानी से जीवन जिएंगे, दुर्घटनाओं से बचने का पूरा प्रयत्न करेंगे, तो मानवकृत दुर्घटनाओं से अथवा प्राकृतिक दुर्घटनाओं से, जो भी आप की हानि होती है, समय आने पर ईश्वर उसकी पूर्ति आपको अवश्य कर देगा।" "शर्तें लागू।"* शर्त यह है कि *"आपको अपनी संपत्ति जीवन आदि की सुरक्षा का पूरा प्रयत्न स्वयं करना पड़ेगा. उसके बाद भी यदि कोई हानि होती है, तो फिर ईश्वर आपकी क्षतिपूर्ति करेगा। यदि आप अपनी संपत्तियों की सुरक्षा ठीक प्रकार से नहीं करते, आलस्य प्रमाद करते हैं, तो आप की हानि की पूर्ति ईश्वर नहीं करेगा।"*👍
आप जो भी प्राप्त करना चाहते हैं,
उसका मूल स्रोत ईश्वर है ।
और वह आपके अन्दर ही बैठा है ।
फिर कही दूर जाने की क्या आवश्यकता है ?आंख बंद करके अपने अंदर ही ईश्वर से प्रार्थना करें ।और व्यवहार में उस प्रार्थना के अनुकूल पूरा पुरुषार्थ करे ।आपको यह सब मिल जाएगा ,जिसके आप पात्र हैं। 👍
*"मन को एकाग्र करके यदि आप अपने अंदर ही ईश्वर से प्रार्थना करें। और व्यवहार में उस प्रार्थना के अनुकूल पूरा पुरुषार्थ करें। तो आपको बहुत कुछ मिल जाएगा।"*
किसी को धन चाहिए, किसी को पुत्र चाहिए, किसी को नौकरी चाहिए, किसी को कुछ चाहिए। *"इन सब चीजों की प्राप्ति के लिए लोग दूर-दूर प्रचलित तीर्थ स्थानों की, मंदिरों की यात्राएं कर रहे हैं। इतनी दूर भटकने की कोई आवश्यकता नहीं है।"* क्योंकि जो इन सब वस्तुओं का देने वाला है, वह ईश्वर है। वह आपके अंदर ही बैठा है। *"जब वह आपके इतना निकट है, तो फिर दूर दूर जाने की क्या आवश्यकता है?"*
दूसरी बात - *"लोग इन सब चीजों को मुफ्त में प्राप्त करना चाहते हैं, जबकि ये सब वस्तुएं मुफ्त में मिलती नहीं हैं।"* इनकी प्राप्ति के लिए बहुत पुरुषार्थ करना पड़ता है। वह पुरुषार्थ करना भी आपके आधीन है।
*"अब यदि आप अपने अंदर विद्यमान सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान न्यायकारी ईश्वर की स्तुति प्रार्थना उपासना करेंगे, और व्यवहार में पूरा पुरुषार्थ करेंगे, तो उसके अनुसार आप जिस जिस वस्तु धन बल विद्या पुत्र नौकरी आदि प्राप्त करने के अधिकारी बन पाएंगे, जितनी वस्तुएं प्राप्त करने के पात्र बन पाएंगे, वे सब वस्तुएं उतनी मात्रा में आपको ईश्वर दे देगा। आप के पुरुषार्थ को देखकर आप के माता-पिता और समाज के लोग भी आपका सहयोग करेंगे।"*
*"परंतु ये सब वस्तुएं उतनी मात्रा में नहीं मिलेंगी, जितनी मात्रा में आप चाहते हैं। ये सब वस्तुएं आपको उतने अनुपात में मिलेंगी, जितना आप पुरुषार्थ करेंगे।"* इसलिए आप ईश्वर पर यह आरोप नहीं लगा सकते, कि *"मैंने इतना पुरुषार्थ किया, फिर भी मुझे ईश्वर ने बहुत कम दिया। या देकर भी वापस छीन लिया। अब यदि आपको वे वस्तुएं नहीं मिल पाती अथवा कम मात्रा में मिलती हैं, तो इसका दोषी ईश्वर नहीं है।"* ईश्वर पर कभी भूल कर भी ऐसा दोष न लगाएं। क्योंकि वह ऐसा काम कभी नहीं करता। ऐसे कामों में मनुष्य का ही हाथ देखा जाता है। या कभी-कभी प्राकृतिक परिस्थितियां भी ऐसी बन जाती हैं, कि जैसा आपने पुरुषार्थ किया था, उस के अनुकूल फल वर्तमान में नहीं मिल पाया। *"तो ऐसी स्थिति में यदि किसी मनुष्य ने अन्याय करके आप का अधिकार संपत्ति आदि छीन ली हो, तो उसका दोषी मनुष्य है। और यदि कोई प्राकृतिक दुर्घटना से आंधी तूफान बाढ़ भूकंप आदि से आपको कोई संपत्ति आदि की हानियां हो गई हों, तो उसका दोषी भी ईश्वर नहीं है।" "ईश्वर ने कोई योजनाबद्ध आप की हानि नहीं की है। यह आंधी तूफान बाढ़ भूकंप आदि से जो दुख मिलते हैं, यह कोई आपका किसी कर्म का फल नहीं है। यह तो प्राकृतिक दुर्घटना मात्र है।"* संसार में प्राकृतिक दुर्घटनाएं होती रहती हैं, आगे भी होती रहेंगी। *"जैसे सड़क पर मानवकृत दुर्घटनाओं से बचना आपकी जिम्मेदारी है। इसी प्रकार से आंधी तूफान बाढ़ भूकंप आदि प्राकृतिक घटनाओं से बचना भी आपकी ही जिम्मेदारी है। इसमें ईश्वर दोषी नहीं है। इसलिए ईश्वर पर कभी भी ऐसा दोष न लगाएं।"* बल्कि उसका सदा हर परिस्थिति में धन्यवाद ही करें, कि *"हे ईश्वर! हम जितना भी संसार में सुख प्राप्त कर पा रहे हैं, यह सब आपकी कृपा का और न्याय दया आदि गुणों का ही फल है। आपकी कृपा ऐसे ही सदा बनी रहे। आप हमें इतनी विद्या बुद्धि बल शक्ति सामर्थ्य दीजिए, जिससे कि हम संसार की दुर्घटनाओं से बचते हुए अपने जीवन को सुरक्षित एवं सुखमय बना सकें।"*
हां, इन दुर्घटनाओं में जो आप की हानि हो जाती है। *"यदि आप पूरी सावधानी से जीवन जिएंगे, दुर्घटनाओं से बचने का पूरा प्रयत्न करेंगे, तो मानवकृत दुर्घटनाओं से अथवा प्राकृतिक दुर्घटनाओं से, जो भी आप की हानि होती है, समय आने पर ईश्वर उसकी पूर्ति आपको अवश्य कर देगा।" "शर्तें लागू।"* शर्त यह है कि *"आपको अपनी संपत्ति जीवन आदि की सुरक्षा का पूरा प्रयत्न स्वयं करना पड़ेगा. उसके बाद भी यदि कोई हानि होती है, तो फिर ईश्वर आपकी क्षतिपूर्ति करेगा। यदि आप अपनी संपत्तियों की सुरक्षा ठीक प्रकार से नहीं करते, आलस्य प्रमाद करते हैं, तो आप की हानि की पूर्ति ईश्वर नहीं करेगा।"*👍
आप जो भी प्राप्त करना चाहते हैं,
उसका मूल स्रोत ईश्वर है ।
और वह आपके अन्दर ही बैठा है ।
फिर कही दूर जाने की क्या आवश्यकता है ?आंख बंद करके अपने अंदर ही ईश्वर से प्रार्थना करें ।और व्यवहार में उस प्रार्थना के अनुकूल पूरा पुरुषार्थ करे ।आपको यह सब मिल जाएगा ,जिसके आप पात्र हैं। 👍
यहा मैने भौतिक सुख कहा है क्यू की सिर्फ व्यायाम/कसरत करने से आपको जो सुख प्राप्त होता है वो भौतिक सुख होता है ना की अध्यात्मिक ! और अध्यात्मिक सुख प्राप्त सिर्फ योगसाधना से हि मिल सकता है
अध्यमिक और भौतिक मै फरक जानो।
बेशक, मन आध्यात्मिक सुख के लिए उतना नहीं चाहता जितना वह भौतिक सुख के लिए करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आध्यात्मिक सुख से कोई लगाव नहीं है। अब और भी दिलचस्प बात यह है कि पसंदीदा चीजों और पसंदीदा लोगों का लाभ भौतिक सुख का आधार है।
अध्यमिक और भौतिक मै फरक जानो।
बेशक, मन आध्यात्मिक सुख के लिए उतना नहीं चाहता जितना वह भौतिक सुख के लिए करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आध्यात्मिक सुख से कोई लगाव नहीं है। अब और भी दिलचस्प बात यह है कि पसंदीदा चीजों और पसंदीदा लोगों का लाभ भौतिक सुख का आधार है।
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ व्यायाम और प्राणायाम
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ व्यायाम और प्राणायाम
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🙏🙏
*"जितना लोग अपनी स्कूटर कार की सेवा सुरक्षा पर ध्यान देते हैं, उतना अपने शरीर पर नहीं।"*
लोग अपनी स्कूटर कार आदि की बहुत सेवा करते हैं, सुरक्षा करते हैं। पेट्रोल डीजल की टंकी में कचरा नहीं जाने देते, बहुत सावधानी रखते हैं। उसकी ऑयलिंग ग्रीसिंग सर्विसिंग नियमित समय पर कराते हैं, तो उनकी स्कूटर कार उनकी भी अच्छी सेवा करती है। *"अब लोग अपनी स्कूटर कार की सेवा सुरक्षा जितनी करते हैं, उतनी अपने शरीर की नहीं करते। उसकी तुलना में बहुत कम ध्यान देते हैं।"*
*"लोगों के न कोई सोने का समय निर्धारित है, न कोई उठने जागने का समय निर्धारित है। न खाने का कुछ पता है। कार की टंकी में कचरा नहीं जाने देते और शरीर की टंकी में अर्थात पेट में कुछ भी डाल देंगे।"* जानकारी ही नहीं करते, कि क्या खाना है, और क्या नहीं खाना? कब खाना है और कितना खाना है? व्यायाम का तो पता ही नहीं, कि व्यायाम भी करना चाहिए। इतने आलसी प्रमादी लोग हैं। व्यायाम से बचने की बहुत कोशिश करते हैं। न नियमित रूप से शरीर की शुद्धि पर ध्यान देते। *"महीने में एक आध बार अच्छी प्रकार से शरीर का शोधन करना चाहिए। एक आध समय भोजन छोड़ देना चाहिए। उसकी तो कोई जानकारी ही नहीं है। न कोई खाने का समय निर्धारित है। जब मन में आया तभी खा लेते हैं। कुछ भी खा लेते हैं। कहीं भी खा लेते हैं। शाकाहारी मांसाहारी सब खा लेते हैं। बीड़ी सिगरेट गुटखा पान मसाला तंबाकू शराब अंडे मांस सब खा लेते हैं। अब बताइए यह शरीर बिगड़ेगा या नहीं? अवश्य बिगड़ेगा।"*
*"ब्रह्मचर्य का कोई पालन नहीं। मन और इंद्रियों पर कोई संयम नहीं। सब बुरे काम मन इंद्रियों शरीर आदि से करते हैं। ऐसी स्थिति में बताइए, शरीर कैसे स्वस्थ रहेगा? कैसे वह आत्मा की सेवा करेगा?"*
यदि इतनी लापरवाही आप अपनी स्कूटर कार के साथ करें, तो वह 10-15 दिन में बिगड़ जाएगी। *"ईश्वर की कृपा है, कि शरीर बहुत समय तक आप की असभ्यता दुर्व्यवहार अत्याचार को सहता रहता है। और बहुत लंबे समय के बाद रोगी होता है। यदि आपने और अधिक लंबे समय तक शरीर पर ऐसे ही अत्याचार किया, और इसकी सेवा सुरक्षा नहीं की, तो फिर वृद्धावस्था में आपको अपने बुरे कर्मों की पूरी कीमत चुकानी पड़ेगी, अर्थात तरह-तरह के रोगों से ग्रस्त हो कर दुख भोगने पड़ेंगे। घुटने कंधे कमर आदि अंगों में दर्द होगा। जीवन कठिन हो जाएगा। आप जीना नहीं चाहेंगे, परंतु जीना पड़ेगा। अपने बुरे कर्मों का दंड भोगना पड़ेगा।"*
इसलिए सावधान हो जाएं। *"शरीर को स्वस्थ बलवान एवं दीर्घायु बनाने के लिए आयुर्वेदिक वैद्यों से संपर्क करें। उनके निर्देश आदेश सुझाव का पालन करें। और शरीर की पूरी पूरी देखभाल रक्षा सुरक्षा करें। तभी बुढ़ापे में यह आपका शरीर आपकी सेवा करेगा, अन्यथा नहीं।"*
आपकी स्कूटर कार तो 10 12 15 20 वर्ष तक आपकी सेवा करती है। उसकी तो आप पूरी सुरक्षा और देखभाल करते हैं। *"जबकि शरीर 70 80 90 साल तक आपकी सेवा करता है, यही आपका सबसे पहला सच्चा मित्र है। यह जन्म से मृत्यु तक हर समय आपका साथ निभाता है। इस पर आप ध्यान नहीं देते। यह तो उचित व्यवहार नहीं है। इसलिए गंभीरता से आत्म निरीक्षण करें। अपना भला बुरा सोचें। यदि आपको अपना बुढ़ापा, भविष्य प्रिय हो, सुखदायक चाहते हों, तो शरीर की रक्षा सेवा अवश्य करें।"*
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*"जितना लोग अपनी स्कूटर कार की सेवा सुरक्षा पर ध्यान देते हैं, उतना अपने शरीर पर नहीं।"*
लोग अपनी स्कूटर कार आदि की बहुत सेवा करते हैं, सुरक्षा करते हैं। पेट्रोल डीजल की टंकी में कचरा नहीं जाने देते, बहुत सावधानी रखते हैं। उसकी ऑयलिंग ग्रीसिंग सर्विसिंग नियमित समय पर कराते हैं, तो उनकी स्कूटर कार उनकी भी अच्छी सेवा करती है। *"अब लोग अपनी स्कूटर कार की सेवा सुरक्षा जितनी करते हैं, उतनी अपने शरीर की नहीं करते। उसकी तुलना में बहुत कम ध्यान देते हैं।"*
*"लोगों के न कोई सोने का समय निर्धारित है, न कोई उठने जागने का समय निर्धारित है। न खाने का कुछ पता है। कार की टंकी में कचरा नहीं जाने देते और शरीर की टंकी में अर्थात पेट में कुछ भी डाल देंगे।"* जानकारी ही नहीं करते, कि क्या खाना है, और क्या नहीं खाना? कब खाना है और कितना खाना है? व्यायाम का तो पता ही नहीं, कि व्यायाम भी करना चाहिए। इतने आलसी प्रमादी लोग हैं। व्यायाम से बचने की बहुत कोशिश करते हैं। न नियमित रूप से शरीर की शुद्धि पर ध्यान देते। *"महीने में एक आध बार अच्छी प्रकार से शरीर का शोधन करना चाहिए। एक आध समय भोजन छोड़ देना चाहिए। उसकी तो कोई जानकारी ही नहीं है। न कोई खाने का समय निर्धारित है। जब मन में आया तभी खा लेते हैं। कुछ भी खा लेते हैं। कहीं भी खा लेते हैं। शाकाहारी मांसाहारी सब खा लेते हैं। बीड़ी सिगरेट गुटखा पान मसाला तंबाकू शराब अंडे मांस सब खा लेते हैं। अब बताइए यह शरीर बिगड़ेगा या नहीं? अवश्य बिगड़ेगा।"*
*"ब्रह्मचर्य का कोई पालन नहीं। मन और इंद्रियों पर कोई संयम नहीं। सब बुरे काम मन इंद्रियों शरीर आदि से करते हैं। ऐसी स्थिति में बताइए, शरीर कैसे स्वस्थ रहेगा? कैसे वह आत्मा की सेवा करेगा?"*
यदि इतनी लापरवाही आप अपनी स्कूटर कार के साथ करें, तो वह 10-15 दिन में बिगड़ जाएगी। *"ईश्वर की कृपा है, कि शरीर बहुत समय तक आप की असभ्यता दुर्व्यवहार अत्याचार को सहता रहता है। और बहुत लंबे समय के बाद रोगी होता है। यदि आपने और अधिक लंबे समय तक शरीर पर ऐसे ही अत्याचार किया, और इसकी सेवा सुरक्षा नहीं की, तो फिर वृद्धावस्था में आपको अपने बुरे कर्मों की पूरी कीमत चुकानी पड़ेगी, अर्थात तरह-तरह के रोगों से ग्रस्त हो कर दुख भोगने पड़ेंगे। घुटने कंधे कमर आदि अंगों में दर्द होगा। जीवन कठिन हो जाएगा। आप जीना नहीं चाहेंगे, परंतु जीना पड़ेगा। अपने बुरे कर्मों का दंड भोगना पड़ेगा।"*
इसलिए सावधान हो जाएं। *"शरीर को स्वस्थ बलवान एवं दीर्घायु बनाने के लिए आयुर्वेदिक वैद्यों से संपर्क करें। उनके निर्देश आदेश सुझाव का पालन करें। और शरीर की पूरी पूरी देखभाल रक्षा सुरक्षा करें। तभी बुढ़ापे में यह आपका शरीर आपकी सेवा करेगा, अन्यथा नहीं।"*
आपकी स्कूटर कार तो 10 12 15 20 वर्ष तक आपकी सेवा करती है। उसकी तो आप पूरी सुरक्षा और देखभाल करते हैं। *"जबकि शरीर 70 80 90 साल तक आपकी सेवा करता है, यही आपका सबसे पहला सच्चा मित्र है। यह जन्म से मृत्यु तक हर समय आपका साथ निभाता है। इस पर आप ध्यान नहीं देते। यह तो उचित व्यवहार नहीं है। इसलिए गंभीरता से आत्म निरीक्षण करें। अपना भला बुरा सोचें। यदि आपको अपना बुढ़ापा, भविष्य प्रिय हो, सुखदायक चाहते हों, तो शरीर की रक्षा सेवा अवश्य करें।"*
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