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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( पंचम भाग)
स्नान
🔴 संध्या शब्द का अर्थ
🔴 संध्या का समय
🔴 संध्या मैं मन कैसे लगाए ?
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#celibacybookssummary
पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( पंचम भाग)
स्नान
🔴 संध्या शब्द का अर्थ
🔴 संध्या का समय
🔴 संध्या मैं मन कैसे लगाए ?
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वीर्य के बारे में सारा संदेह मिटाना हो। तो अपने अनुभव पे चिंता करो। आज तक वीर्य नाश से तुम्हारा शरीर खराब हुआ या अच्छा। जवाब तुम्हे
खुद अंदर से मिल जायेगा।। बाहर तुम्हे किसी से और कही से जानने की जरूरत नहीं है। हर तरफ से गुमराह ही होगे। भगवान कि रची इस दुनिया में अनुभव से बड़ा ना कोई शिक्षक है और ना ही कोई
तथ्य।।
खुद अंदर से मिल जायेगा।। बाहर तुम्हे किसी से और कही से जानने की जरूरत नहीं है। हर तरफ से गुमराह ही होगे। भगवान कि रची इस दुनिया में अनुभव से बड़ा ना कोई शिक्षक है और ना ही कोई
तथ्य।।
नेत्रों से अंधा तो मात्र आंखों से देख नहीं पाता । परन्तु कामवासना में अंधा तो बुद्धि , मन और इंद्रियों से विकलांग होता है ।
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( पंचम भाग)
स्नान
🔴 ब्रम्हाचारी को ईश्वरभक्ति की क्यों आवश्यकता है ?
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( पंचम भाग)
स्नान
🔴 ब्रम्हाचारी को ईश्वरभक्ति की क्यों आवश्यकता है ?
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जब भी कामवासना की तलब उठे । स्वयं से ये बोलना कि इस दो मिनट के स्वाद के लिए मैं अपने अनमोल शरीर का सत्यानाश नहीं करूँगा । सर्वनाश नहीं करूंगा । चाहे कुछ भी हो जाए ।