ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
1.87K subscribers
1.47K photos
62 videos
13 files
271 links
ब्रम्हचर्य पालन करने वालो के लिये विश्व का सर्वोत्तम टेलिग्राम चॅनल,
यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके |
इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है|
#hastag
Download Telegram
मन की चाल बड़ी ही अटपटी है इसलिए गाफिल न रहिएगा ।इस पर कभी विश्वास न करें । विषय-विकार में इसे गर्क न होने दें । चाहे जैसे तर्क लड़ाकर मन आपको दगा दे सकता है । अवश और अशुद्ध मन बंधन के जाल में फँसाता है | वश किया हुआ शुद्ध मन मोक्ष के मार्ग पर ले जाता है । शुद्ध और शांत मन से ही ईश्वर के दर्शन होते हैं, आत्मज्ञान की बातें समझ में आती हैं, तत्त्वज्ञान होता है |

मन की आँटी अटपटी, झटपट लखे न कोय | मन की खटपट जो मिटे, चटपट दर्शन होय ||
❤3👍2
अपने जीवन में हजार-हजार विघ्न आयें, हजार बाधाएँ आ जायें लेकिन एक उत्तम लक्ष्य बनाकर चलते जाओ। देर सवेर तुम्हारे लक्ष्य की सिद्धि होकर ही रहेगी। विघ्न और बाधाएँ तुम्हारी सुषुप्त चेतना को, सुषुप्त शक्तियों को जागृत करने के शुभ अवसर हैं।
कभी भी अपने आप को कोसो मत। हमेशा सफलता के विचार करो, प्रसन्नता के विचार करो, आरोग्यता के विचार करो। दृढ़ एवं पुरुषार्थी बनो और भारत के श्रेष्ठ नागरिक बनकर भारत की शान बढ़ाओ। ईश्वर एवं ईश्वरप्राप्त महापुरुषों के आशीर्वाद तुम्हारे साथ हैं...
👍6
यदि आप किसी देश या सभ्यता को बिना युद्ध किये जड़ से उखाड़ना चाहते हो। तो
वहा के युवा पीढ़ी को अश्लीलता और व्यभिचार में डुबो दो।
क्योंकि चरित्र से गिरी कोई भी सभ्यता ज़्यादा दिन नही टिक सकती✅
👍4
हे भारत के नौजवानो ! याद करो उस अंगद की वीरता को कि जिसने रावण जैसे राक्षस को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। धर्म तथा नीति पर चलकर अपने प्रभु की सेवा में अपना तन-मन अर्पण करने वाला वह अंगद इसी भूमि पर पैदा हुआ था। तुम भी उसी भारतभूमि की संतानें हो, जहाँ अंगद जैसे वीर रत्न पैदा हुए। भारत की आज की युवा पीढ़ी चाहे तो बहुत कुछ
सीख सकती है अंगद के चरित्र से।
👍4🔥1
ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
Photo
हे नारी! तू स्वयं को पहचान, तू शेरनी हैं, तू शत्रु रूप मृगों का मर्दन करनेवाली हैं, देवजनों के हितार्थ अपने अन्दर सामर्थ्य उत्पन्न कर.

हे नारी ! तू अविद्या आदि दोषों पर शेरनी की तरह टूटने वाली हैं, तू दिव्य गुणों के प्रचारार्थ स्वयं को शुद्ध कर!

हे नारी ! तू दुष्कर्म एवं दुर्व्यसनों को शेरनी के समान विश्वंस्त करनेवाली हैं, धार्मिक जनों के हितार्थ स्वयं को दिव्य गुणों से अलंकृत कर।

~ यजुर्वेद ५/१०
👍2
✳️ऋषि याज्ञवल्क्य के अनुसार ब्रह्मचर्य निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है

⚡ शारीरिक ब्रह्मचर्य- आलिगंन, चुम्बन, हाव, भाव एवं उपस्थेन्द्रिय
के संचालन से प्रथक रहना।

⚡मानसिक ब्रह्मचर्य- वासना विषय का चिन्तन व सम्भोग आदि
भावनाओं को पूर्णतयः त्याग देना।

⚡वाचिक ब्रह्मचर्य- प्रेम सम्बन्धी चर्चा, वासना उत्पन्न करने वाले दृश्य, इण्टरनेट पर वासनायुक्त तशवीरें एवं टी. बी. पर प्रेम सम्बन्धी सीरियल देखना एवं इसी प्रकृति के नावल, पुस्तकें आदि पढ़ना - इन सबका बिल्कुल त्याग कर देना।

🌟अधिकतर पुरूष एवं स्त्रियां वेदानुसार शारीरिक ब्रह्मचर्य का पालन
करने में भी असमर्थ होते हैं। यदि कायिक ब्रह्मचर्य का पालन कर भी लें तो भी मानसिक एवं वाचिक ब्रह्मचर्य के उल्लंघन को पाप नहीं समझते। फलस्वरूप ऐसे व्यक्ति कुछ ही समय में शारीरिक ब्रह्मचर्य का भी पालन करना छोड़ देते हैं। वास्तव में मानसिक एवं वाचिक रूप में ब्रह्मचर्य का उल्लंघन करने पर शारीरिक ब्रह्मचर्य का पालन करना भी असंभव है क्योंकि मन, वचन एवं कर्म का आपस में गहरा सम्बन्ध है। अतः मन, वचन और कर्म के द्वारा ब्रह्मचर्य का एक साथ पालन करना ही सम्पूर्ण ब्रह्मचर्य कहलाता है।

✳️ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले पुरुष एवं स्त्रियाँ दो प्रकार के होते हैं

⚡नैण्ठिक ब्रह्मचारी:- ये जन्म से मृत्यु तक ब्रह्मचर्य का पालन करते
हैं। उदाहरण के लिए महावीर हनुमान, भीष्म पितामाह आदि।

⚡ उपकुर्वाणक ब्रह्मचारी:-ये विवाह करते हैं, सन्तान उत्पन्न करते
हैं। इनके सम्भोग का उद्देश्य कामवासना न होकर संस्कारित व
शक्तिशाली सन्तान उत्पन्न करना है। ये ऋतुकालगामी होते हैं। अपने
विवाहित जीवन के उद्देश्य से सन्तुष्ठ रहते हैं। पर स्त्री-पुरुष में भूल
कर भी राग नहीं रखते। हमारे प्राचीन ग्रन्थ उपकुर्वाणक ब्रह्मचारियों के
उदाहरणों से भरे पड़े हैं।
👍3
| "हे विद्यार्थी ! अपने जीवन में संयम का पाठ याद रख। महान बनने की यही शर्त है।
संयम और सदाचार। हजार बार असफल होने पर भी फिर से पुरुषार्थ कर, अवश्य सफलता मिलेगी। | हिम्मत न हार। छोटा-छोटा नियम, छोटा-छोटा संयम का व्रत जीवन में लाते हुए आगे बढ़ और महान हो जा।"
👍2
👍6👏1
वास्तवमें हमारे वैदिक कालमें आर्योंने ब्रह्मचर्यका प्रचार किया था। यह प्रथा पौराणिक कालतक मर्यादित रही, और यहीसे उसकी अवनति होने लगी तथा आज इस दशाको पहुँच गयी । ब्रह्मचर्यका थोड़ा-बहुत वर्णन चारों वेदोंमें पाया जाता है। हमारे सब धार्मिक ग्रन्थ ब्रह्मचर्यके कायल हैं और यह कहते हैं कि सांसारिक और पारमार्थिक उन्नतिकी जड़ ब्रह्मचर्य ही है।
👍2❤1
जैसे जैसे आपका ब्रम्हचर्य परिपक्व होता जाएगा,वैसे वैसे आपको आनंद का आभास होगा।लेकिन ध्यान रहे एक गलत विचार आपको बर्बाद कर सकता है।
👍10
ब्रह्मचर्य से मौत दुःख नहीं देती। इसकी रक्षा से रोगों का नाश हो जाता है,,
बुढ़ापा नहीं सताता, सब औषधियों में श्रेष्ठ ब्रह्मचर्य ही अमृत है।
👍6