हमारा उद्देश्य बस सिर्फ इतना है कि ज्यादा से ज्यादा लोग ब्रह्मचर्य को जाने और उसका पालन करें। क्योंकि जब युवा ब्रह्मचर्य पालन करेंगे तब ही भारतवर्ष विश्व गुरु के सिंहासन पर फिर से विराजमान होगा।
(जो भी युवा हस्तमैथुन करके अपने शरीर , को कमजोर कर रहा है । वह समझ जाये । कि यह एक संयंत्र चल रहा है । युवाओं का नैतिक पतन करने के लिए। जब आप वीर्य नाश करोगे । जो इसके गंभीर side effects वह आपको कोई नहीं बतायेगा । जिससे आप खुद की रक्षा तो दूर अपने परिवार की रक्षा भी नहीं कर सकते । तो आप कैसे देश की रक्षा कर सकोगे ।
वीर्य शरीर का सार है , वीर्य नाश से मनुष्य अपनी शक्ति, बुध्दि,शरीर चरित्र का संपूर्ण नाश कर देता है । और विनाश की ओर अग्रसर होता है
💪 वीर्य रक्षा करो, वीर्य को ऊर्ध्वरेता कर वीर, शक्तिशाली , बुद्धिमान आरोग्यवान, वीर्यवान , चरित्रवान, गुणवान बनो क्योंकि जब हिंदू ब्रह्मचर्य पालन करके तन और मन से मजबूत बनेगा तभी देश से भगत सिंह, महाराणा प्रताप, कुंती पुत्र अर्जुन , सुभाष चंद्र बोस, छत्रपति शिवाजी महाराज, भगत सिंह , स्वामी विवेकानंद , भीष्म पितामह , दयानंद सरस्वती🚩🚩जैसे महापुरुष बनेंगे जन्म लेंगे और
(जो भी युवा हस्तमैथुन करके अपने शरीर , को कमजोर कर रहा है । वह समझ जाये । कि यह एक संयंत्र चल रहा है । युवाओं का नैतिक पतन करने के लिए। जब आप वीर्य नाश करोगे । जो इसके गंभीर side effects वह आपको कोई नहीं बतायेगा । जिससे आप खुद की रक्षा तो दूर अपने परिवार की रक्षा भी नहीं कर सकते । तो आप कैसे देश की रक्षा कर सकोगे ।
वीर्य शरीर का सार है , वीर्य नाश से मनुष्य अपनी शक्ति, बुध्दि,शरीर चरित्र का संपूर्ण नाश कर देता है । और विनाश की ओर अग्रसर होता है
💪 वीर्य रक्षा करो, वीर्य को ऊर्ध्वरेता कर वीर, शक्तिशाली , बुद्धिमान आरोग्यवान, वीर्यवान , चरित्रवान, गुणवान बनो क्योंकि जब हिंदू ब्रह्मचर्य पालन करके तन और मन से मजबूत बनेगा तभी देश से भगत सिंह, महाराणा प्रताप, कुंती पुत्र अर्जुन , सुभाष चंद्र बोस, छत्रपति शिवाजी महाराज, भगत सिंह , स्वामी विवेकानंद , भीष्म पितामह , दयानंद सरस्वती🚩🚩जैसे महापुरुष बनेंगे जन्म लेंगे और
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वीर्य सम्पूर्ण शरीर में उसी तरह व्याप्त रहता है जैसे गन्ने में रस जिससे पूरा शरीर हृष्ट पुष्ट और सुडौल बनता है
और जब मन में वासना युक्त कामुक विचार उठते हैं तो जिस प्रकार दूध को मथने पर मक्खन निकल कर ऊपर आ जाता है वैसे ही मन्मथ अर्थात काम पूरे शरीर से वीर्य को खींच कर बाहर कर देता है...और शरीर निस्तेज हो जाता है...... बिल्कुल रस निकल जाने के बाद गन्ने की तरह जितना रस निकलता जाता है गन्ने का हाल उतना ही बुरा होता जाता है...बाकी सभी ब्रम्हचारी साधक समझदार हैं....
भूलकर भी उस खुशी से न खेलो।
जिसके पीछे हों गम की कतारें।।
और जब मन में वासना युक्त कामुक विचार उठते हैं तो जिस प्रकार दूध को मथने पर मक्खन निकल कर ऊपर आ जाता है वैसे ही मन्मथ अर्थात काम पूरे शरीर से वीर्य को खींच कर बाहर कर देता है...और शरीर निस्तेज हो जाता है...... बिल्कुल रस निकल जाने के बाद गन्ने की तरह जितना रस निकलता जाता है गन्ने का हाल उतना ही बुरा होता जाता है...बाकी सभी ब्रम्हचारी साधक समझदार हैं....
भूलकर भी उस खुशी से न खेलो।
जिसके पीछे हों गम की कतारें।।
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