वीर्य सम्पूर्ण शरीर में उसी तरह व्याप्त रहता है जैसे गन्ने में रस जिससे पूरा शरीर हृष्ट पुष्ट और सुडौल बनता है
और जब मन में वासना युक्त कामुक विचार उठते हैं तो जिस प्रकार दूध को मथने पर मक्खन निकल कर ऊपर आ जाता है वैसे ही मन्मथ अर्थात काम पूरे शरीर से वीर्य को खींच कर बाहर कर देता है...और शरीर निस्तेज हो जाता है...... बिल्कुल रस निकल जाने के बाद गन्ने की तरह जितना रस निकलता जाता है गन्ने का हाल उतना ही बुरा होता जाता है...बाकी सभी ब्रम्हचारी साधक समझदार हैं....
भूलकर भी उस खुशी से न खेलो।
जिसके पीछे हों गम की कतारें।।
और जब मन में वासना युक्त कामुक विचार उठते हैं तो जिस प्रकार दूध को मथने पर मक्खन निकल कर ऊपर आ जाता है वैसे ही मन्मथ अर्थात काम पूरे शरीर से वीर्य को खींच कर बाहर कर देता है...और शरीर निस्तेज हो जाता है...... बिल्कुल रस निकल जाने के बाद गन्ने की तरह जितना रस निकलता जाता है गन्ने का हाल उतना ही बुरा होता जाता है...बाकी सभी ब्रम्हचारी साधक समझदार हैं....
भूलकर भी उस खुशी से न खेलो।
जिसके पीछे हों गम की कतारें।।
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ये बात सुनने के बाद अगर कोई सनातनीओ के देशभक्ति पर सवाल उठा रहा हो तो सुनो मित्रो.... हम धर्म से हि सीखे है की "🇮🇳 ️जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरियसी 🚩"
सनातनी होने के नाते भगवा 🚩 हमारी जान है और भारतीय होने के नाते तिरंगा 🇮🇳 हमारी शान है ।
सनातनी होने के नाते भगवा 🚩 हमारी जान है और भारतीय होने के नाते तिरंगा 🇮🇳 हमारी शान है ।
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